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15/3/26(2) #points to ponder #Islamic prayer #islam guide us in every field of life #*let us understand our religion #सोचने वाली बात
points to ponder - हू जिसस तर बन्द ओर तर नबा न पनाह माँगी है। ऐ अल्लाह! मैं तुझसे जन्नत माँगता हूँ और हर उस बात और काम की भी तौफ़ीक़ माँगता हूँ जो जन्नत के क़रीब कर दे। और मैं तुझसे जहन्नम से पनाह माँगता हूँ और हर उस बात और काम से भी जो जहन्नम के क़रीब कर दे। और मैं तुझसे यह भी माँगता हूँ कि तू मेरे बारे में जो भी फैसला करे, लिए भलाई ही बना दे।॰ उसे मेरे %: Sunan Ibn Majah 3846 हुक्मः सहीह (Darussalam) 6.45 am Sunan Ibn Majah 3846.. It was narrated sunnah Co | 6 हू जिसस तर बन्द ओर तर नबा न पनाह माँगी है। ऐ अल्लाह! मैं तुझसे जन्नत माँगता हूँ और हर उस बात और काम की भी तौफ़ीक़ माँगता हूँ जो जन्नत के क़रीब कर दे। और मैं तुझसे जहन्नम से पनाह माँगता हूँ और हर उस बात और काम से भी जो जहन्नम के क़रीब कर दे। और मैं तुझसे यह भी माँगता हूँ कि तू मेरे बारे में जो भी फैसला करे, लिए भलाई ही बना दे।॰ उसे मेरे %: Sunan Ibn Majah 3846 हुक्मः सहीह (Darussalam) 6.45 am Sunan Ibn Majah 3846.. It was narrated sunnah Co | 6 - ShareChat