ડો અબ્દુલ ગની મહેસાણીયા
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ડો અબ્દુલ ગની મહેસાણીયા
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હું શેરચેટ ને પ્રેમ કરું છુ.
*📡 “A Timeless Message in the Age of Science”* *📡 “विज्ञान के युग में एक कालातीत #Qur'an and We #*આપણે વિચારીશું ખરા?* #सोचने वाली बात #*let us understand our religion #points to ponder संदेश”* 10/5/26
Qur'an and We - जुड़ा ह। इसम आपका समस्याआ कां हल, आपके अख़लाक़ (Ethics) और आपकी सफलता का रास्ता बताया गया है।* २. **सम्मान और प्रतिष्ठाः*्इसका एक अर्थ यह भी है कि.इस किताब तुमेंलदुगनियामिेस दुनिया में पर अमल करने से इज़्ज़त और शोहरत गमनामी अरब के लोग नैऱथ् लेरूकक लुरग पहला गुमकेाबाद 467 उनका ज़िक्र पूँरी #೯ TTI guT X आत्म-चिंतन * *46 (Self-Reflection):| आयत ಔ೯೫] 5] पराई चीज़ है कि कुरआन अपने बल्कि यह इंसान वजूद , उसके मकसदू और उसकी भलाई की बात करती है। यह आपकी अपनी ' मैनुअल * *Manual) की तरह है।* अक्ल का इस्तेमालः*आयत * ** के अंत में पूछा गया है, *"क्या तुम अक्ल नहीं रेखते?"*| *्यह एक तरह की चेतावनी और प्रोत्साहन है कि एक* *समझदार इंसान को यह + चाहिए ক্ি তী বীড় +पहचानना उसकी अपनी बेहतरी के आई है, 4 वह उससे दर क्यों भाग रहा 0 Silent Broadcast 0 जुड़ा ह। इसम आपका समस्याआ कां हल, आपके अख़लाक़ (Ethics) और आपकी सफलता का रास्ता बताया गया है।* २. **सम्मान और प्रतिष्ठाः*्इसका एक अर्थ यह भी है कि.इस किताब तुमेंलदुगनियामिेस दुनिया में पर अमल करने से इज़्ज़त और शोहरत गमनामी अरब के लोग नैऱथ् लेरूकक लुरग पहला गुमकेाबाद 467 उनका ज़िक्र पूँरी #೯ TTI guT X आत्म-चिंतन * *46 (Self-Reflection):| आयत ಔ೯೫] 5] पराई चीज़ है कि कुरआन अपने बल्कि यह इंसान वजूद , उसके मकसदू और उसकी भलाई की बात करती है। यह आपकी अपनी ' मैनुअल * *Manual) की तरह है।* अक्ल का इस्तेमालः*आयत * ** के अंत में पूछा गया है, *"क्या तुम अक्ल नहीं रेखते?"*| *्यह एक तरह की चेतावनी और प्रोत्साहन है कि एक* *समझदार इंसान को यह + चाहिए ক্ি তী বীড় +पहचानना उसकी अपनी बेहतरी के आई है, 4 वह उससे दर क्यों भाग रहा 0 Silent Broadcast 0 - ShareChat
*📡 “A Timeless Message in the Age of Science”* *📡 “विज्ञान के युग में एक कालातीत संदेश”* 10/5/26 #points to ponder #सोचने वाली बात #*let us understand our religion #*આપણે વિચારીશું ખરા?* #Qur'an and We
points to ponder - *Qur'an 21/10* ओर ऐसी किताब *"কমন নুদ্কাঠী > ತ@ಞಗಣಹಗಗಳೆಕನ್ು ಕ್ವಪಾ ওলাঠী ৯ তিমন নুদ্কায কী अक्ल से काम नहीं विस्तृत *आयत की व्याख्या* (Explanation): *इस छोटी सी आयत में अल्लाह ने पूरी इंसानियत को एक मुख्ड्य बिैंदु संदेश दिया है, जिसके निम्नलिखित हैंः* *"किताब ज़िसमें तुम्हारा ज़िक्र X है":** *विद्वानों ने इसॅके दो मुख्य अर्थ बताए हैंः* 3z3 १. **नसीहत और ক্িনান में उन बातों का ज़िक्र है सीधे इंसानी स्वभाव (Nature) हैं। इसमें आपकी समस्याओं जुड़ी का हल, आपके अख़लाक़ (Ethics) और आपकी सफलता का रास्ता बताया गया है।* २. **सम्मान और प्रतिष्ठाः*इसका एक अर्थ यह भी है कि.इस किताब तुम्मेंलदुॅगनियामेंस दुनिया में पर अमल करने से इज़्ज़त और शोहूरत  TTHTTHT अरब के लोग ؟ पहले থ, লক্কিন आने के बाद फूर दुनिय में होने लगा। दुनिया उनका ज़िक्र *Qur'an 21/10* ओर ऐसी किताब *"কমন নুদ্কাঠী > ತ@ಞಗಣಹಗಗಳೆಕನ್ು ಕ್ವಪಾ ওলাঠী ৯ তিমন নুদ্কায কী अक्ल से काम नहीं विस्तृत *आयत की व्याख्या* (Explanation): *इस छोटी सी आयत में अल्लाह ने पूरी इंसानियत को एक मुख्ड्य बिैंदु संदेश दिया है, जिसके निम्नलिखित हैंः* *"किताब ज़िसमें तुम्हारा ज़िक्र X है":** *विद्वानों ने इसॅके दो मुख्य अर्थ बताए हैंः* 3z3 १. **नसीहत और ক্িনান में उन बातों का ज़िक्र है सीधे इंसानी स्वभाव (Nature) हैं। इसमें आपकी समस्याओं जुड़ी का हल, आपके अख़लाक़ (Ethics) और आपकी सफलता का रास्ता बताया गया है।* २. **सम्मान और प्रतिष्ठाः*इसका एक अर्थ यह भी है कि.इस किताब तुम्मेंलदुॅगनियामेंस दुनिया में पर अमल करने से इज़्ज़त और शोहूरत  TTHTTHT अरब के लोग ؟ पहले থ, লক্কিন आने के बाद फूर दुनिय में होने लगा। दुनिया उनका ज़िक्र - ShareChat
*“Sometimes what we think is not what really is—and that’s where misunderstandings begin. So, understand carefully before you conclude.”* *“कभी-कभी हम समझते क्या हैं और होता क्या है।” और यहां से ही गैर समज की शुरुआत होती है, इसलिए बराबर सोच समझ कर बात समझे।* 9/5/26 *हज़रत आयशा से रिवायत है कि पैगंबर (सल्ललाहु अलयही वसल्लम)की पत्नियों ने उनसे पूछा, "हममें से सबसे पहले आपकी मृत्यु के बाद आपसे कौन मिलेगा?" उन्होंने कहा, *"वह, जिसके हाथ सबसे लंबे हैं।"* *पत्नियों ने लकड़ी से अपने हाथ नापने शुरू किए और सौदा का हाथ सबसे लंबा निकला। लेकिन जब ज़ैनब का इंतकाल सबसे पहले हुआ, तब हमें समझ आया कि "लंबे हाथ" का मतलब *दान-पुण्य (Charity) करना'*था।* *ज़ैनब दान करने में सबसे आगे थीं।* *(संदर्भ: सहीह बुखारी 1420)* **व्याख्या (Short Note)** *यह हदीस सिखाती है कि हर बात का मतलब शारीरिक या बाहरी नहीं होता।* * **गलतफहमी:** पत्नियों ने इसे शरीर की बनावट (Physical length) समझा। * **सच्चाई:"लंबे हाथ" एक मुहावरा था, जिसका अर्थ *'उदारता और दान'** था।* **सबक:* *किसी नतीजे पर पहुँचने से पहले गहराई से सोचना ज़रूरी है, क्योंकि सच्चाई अक्सर हमारी सोच से अलग होती है।* ९/५/२६(२) #*let us understand our religion #*આપણે વિચારીશું ખરા?* #ऐसा भी होता है #सोचने वाली बात #points to ponder
*let us understand our religion - Wessage Youisem हाथ सबसे लंबा निकला। लेकिन जब ज़ैनबका इंतकाल सबसे पहले हुआ, तब हर्में समझ आया कि "लंबे हाथ" का मतलब *दान-पुण्य (Charity) करना *्था| ज़ैनब दान करने में सबसे आगे थीं। (संदर्भः सहीह 1420) बुखारी *areI (Short Note) * यह हदीस सिखाती है कि हर बात का मतलब शारीरिक या नहीं बाहरी होता। *गलतफहमीः* पत्नियों ने इसे * शरीर की बनावट (Physical length) समझा। *सच्चाईः"लंबे हाथ" एक मुहावरा * था, जिसका अर्थ * उदारता और दान * था।* *सबकः किसी नतीजे पर पहुँचने से पहले गहराई से सोचना ज़रूरी है, क्योंकि सच्चाई अक्सर हमारी सोच से अलग होती है। ९/५/२६ 12:09 pm Wessage Youisem हाथ सबसे लंबा निकला। लेकिन जब ज़ैनबका इंतकाल सबसे पहले हुआ, तब हर्में समझ आया कि "लंबे हाथ" का मतलब *दान-पुण्य (Charity) करना *्था| ज़ैनब दान करने में सबसे आगे थीं। (संदर्भः सहीह 1420) बुखारी *areI (Short Note) * यह हदीस सिखाती है कि हर बात का मतलब शारीरिक या नहीं बाहरी होता। *गलतफहमीः* पत्नियों ने इसे * शरीर की बनावट (Physical length) समझा। *सच्चाईः"लंबे हाथ" एक मुहावरा * था, जिसका अर्थ * उदारता और दान * था।* *सबकः किसी नतीजे पर पहुँचने से पहले गहराई से सोचना ज़रूरी है, क्योंकि सच्चाई अक्सर हमारी सोच से अलग होती है। ९/५/२६ 12:09 pm - ShareChat
*“Sometimes what we think is not what really is—and that’s where misunderstandings begin. So, understand carefully before you conclude.”* *“कभी-कभी हम समझते क्या हैं और होता क्या है।” और यहां से ही गैर समज की शुरुआत होती है, इसलिए बराबर सोच समझ कर बात समझे।* 9/5/26 *हज़रत आयशा से रिवायत है कि पैगंबर (सल्ललाहु अलयही वसल्लम)की पत्नियों ने उनसे पूछा, "हममें से सबसे पहले आपकी मृत्यु के बाद आपसे कौन मिलेगा?" उन्होंने कहा, *"वह, जिसके हाथ सबसे लंबे हैं।"* *पत्नियों ने लकड़ी से अपने हाथ नापने शुरू किए और सौदा का हाथ सबसे लंबा निकला। लेकिन जब ज़ैनब का इंतकाल सबसे पहले हुआ, तब हमें समझ आया कि "लंबे हाथ" का मतलब *दान-पुण्य (Charity) करना'*था।* *ज़ैनब दान करने में सबसे आगे थीं।* *(संदर्भ: सहीह बुखारी 1420)* **व्याख्या (Short Note)** *यह हदीस सिखाती है कि हर बात का मतलब शारीरिक या बाहरी नहीं होता।* * **गलतफहमी:** पत्नियों ने इसे शरीर की बनावट (Physical length) समझा। * **सच्चाई:"लंबे हाथ" एक मुहावरा था, जिसका अर्थ *'उदारता और दान'** था।* **सबक:* *किसी नतीजे पर पहुँचने से पहले गहराई से सोचना ज़रूरी है, क्योंकि सच्चाई अक्सर हमारी सोच से अलग होती है।* ९/५/२६(१) #points to ponder #सोचने वाली बात #ऐसा भी होता है #*આપણે વિચારીશું ખરા?* #*let us understand our religion
points to ponder - sSometimes what we think is not what really is-and that's where misunderstandings  begin So, understand carefully before you conclude: 99 "कभी कभी हम समझते क्या हैं और होता क्या है।॰ और यहां से ही गैर समज की शुरुआत होती है, इसलिए बराबर सोच समझ कर बात समझे। 9/5/26 हज़रत आयशा   से रिवायत है कि पैगंबर (सल्ललाहु अलयही वसल्लम)की पत्नियों ने उनसे पूछा, "हमर्में से सबसे पहले आपकी मृत्यु के बाद आपसे कौन मिलेगा?" उन्होंने कहा, जिसके हाथ *"a6' सबसे लंबे हैं।" पत्निरयों ने लकड़ी से अपने हाथ किए और सौदा का नापने शुरू हाथ सबसे लंबा निकला। लेकिन जब ज़ैनबका इंतकाल सबसे पह॰ sSometimes what we think is not what really is-and that's where misunderstandings  begin So, understand carefully before you conclude: 99 "कभी कभी हम समझते क्या हैं और होता क्या है।॰ और यहां से ही गैर समज की शुरुआत होती है, इसलिए बराबर सोच समझ कर बात समझे। 9/5/26 हज़रत आयशा   से रिवायत है कि पैगंबर (सल्ललाहु अलयही वसल्लम)की पत्नियों ने उनसे पूछा, "हमर्में से सबसे पहले आपकी मृत्यु के बाद आपसे कौन मिलेगा?" उन्होंने कहा, जिसके हाथ *"a6' सबसे लंबे हैं।" पत्निरयों ने लकड़ी से अपने हाथ किए और सौदा का नापने शुरू हाथ सबसे लंबा निकला। लेकिन जब ज़ैनबका इंतकाल सबसे पह॰ - ShareChat
*અત્યારના સમયમાં ધર્મના ભેદભાવ વિના કોઈ કામ કર્યું તે ખરેખર બહુ જ હિંમત નું કામ છે. આવા માણસો જ ખરેખર આપણા દેશના મહાન માણસો કહેવાય. આપણે મુસલમાનો પણ ક્યારેક આવું કરીશું ખરા? થોડું તો થોડું કાંઈક તો કરો મારા વહાલા ઓ.* #points to ponder #सोचने वाली बात #*આપણે વિચારીશું ખરા?* #*let us understand our religion
points to ponder - ShareChat
01:32
https://youtube.com/watch?v=RJ2PhepAf1s&si=S6kb_HdZ3CPQJz_d*अगर ऐसा भजन हो तो किस मूर्ख को अच्छा नहीं लगे?* #સંત કબીર અમૃત વાણી #કબીર વાણી #सोचने वाली बात #points to ponder
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https://youtube.com/watch?v=RJ2PhepAf1s&lc=UgziUY8kfPUoo-wK0X14AaABAg&si=PgWVNJT1Z9Dl9pOo #*આપણે વિચારીશું ખરા?* #points to ponder #सोचने वाली बात #સંત કબીર અમૃત વાણી #કબીર વાણી
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#*let us understand our religion #*આપણે વિચારીશું ખરા?* #सोचने वाली बात #points to ponder
*let us understand our religion - e (Qur'an 39/2 Indeed, We have sent down to you this Book in truth, so worship Allah, being sincere to Him in religion) (९) कुरान 39:3* "्याद रखो! शुद्ध भक्ति और निष्ठा केवल अल्लाह ही के लिए है। और जिन लोगों ने उसके सिवा दूसरों को अपना संरक्षक (वली) बना रखा है और कहते हैं किः 'हम तो उनकी इबादत सिर्फ इसलिए करते हैं ताकि वे हमें अल्लाह के करीब पहुँचा दें।' निश्चित रूप से, अल्लाह उनके बीच उस बात का फैसला कर देगा जिसमें वे मतभेद कर रहे हैं। बेशक, अल्लाह उसे रास्ता नहीं दिखाता जो झूठा और बड़ा कृतघ्न (अहसान फरामोश) हो।"  Unqu'entionably; sincere devotion is due to Allah alone As for those who take others as guardians e (Qur'an 39/2 Indeed, We have sent down to you this Book in truth, so worship Allah, being sincere to Him in religion) (९) कुरान 39:3* "्याद रखो! शुद्ध भक्ति और निष्ठा केवल अल्लाह ही के लिए है। और जिन लोगों ने उसके सिवा दूसरों को अपना संरक्षक (वली) बना रखा है और कहते हैं किः 'हम तो उनकी इबादत सिर्फ इसलिए करते हैं ताकि वे हमें अल्लाह के करीब पहुँचा दें।' निश्चित रूप से, अल्लाह उनके बीच उस बात का फैसला कर देगा जिसमें वे मतभेद कर रहे हैं। बेशक, अल्लाह उसे रास्ता नहीं दिखाता जो झूठा और बड़ा कृतघ्न (अहसान फरामोश) हो।"  Unqu'entionably; sincere devotion is due to Allah alone As for those who take others as guardians - ShareChat