*📡 “A Timeless Message in the Age of Science”*
*📡 “विज्ञान के युग में एक कालातीत #Qur'an and We #*આપણે વિચારીશું ખરા?* #सोचने वाली बात #*let us understand our religion #points to ponder संदेश”*
10/5/26
*📡 “A Timeless Message in the Age of Science”*
*📡 “विज्ञान के युग में एक कालातीत संदेश”*
10/5/26 #points to ponder #सोचने वाली बात #*let us understand our religion #*આપણે વિચારીશું ખરા?* #Qur'an and We
*“Sometimes what we think is not what really is—and that’s where misunderstandings begin. So, understand carefully before you conclude.”*
*“कभी-कभी हम समझते क्या हैं और होता क्या है।” और यहां से ही गैर समज की शुरुआत होती है, इसलिए बराबर सोच समझ कर बात समझे।*
9/5/26
*हज़रत आयशा से रिवायत है कि पैगंबर (सल्ललाहु अलयही वसल्लम)की पत्नियों ने उनसे पूछा, "हममें से सबसे पहले आपकी मृत्यु के बाद आपसे कौन मिलेगा?" उन्होंने कहा, *"वह, जिसके हाथ सबसे लंबे हैं।"*
*पत्नियों ने लकड़ी से अपने हाथ नापने शुरू किए और सौदा का हाथ सबसे लंबा निकला। लेकिन जब ज़ैनब का इंतकाल सबसे पहले हुआ, तब हमें समझ आया कि "लंबे हाथ" का मतलब *दान-पुण्य (Charity) करना'*था।* *ज़ैनब दान करने में सबसे आगे थीं।*
*(संदर्भ: सहीह बुखारी 1420)*
**व्याख्या (Short Note)**
*यह हदीस सिखाती है कि हर बात का मतलब शारीरिक या बाहरी नहीं होता।*
* **गलतफहमी:** पत्नियों ने इसे शरीर की बनावट (Physical length) समझा।
* **सच्चाई:"लंबे हाथ" एक मुहावरा था, जिसका अर्थ *'उदारता और दान'** था।*
**सबक:*
*किसी नतीजे पर पहुँचने से पहले गहराई से सोचना ज़रूरी है, क्योंकि सच्चाई अक्सर हमारी सोच से अलग होती है।*
९/५/२६(२) #*let us understand our religion #*આપણે વિચારીશું ખરા?* #ऐसा भी होता है #सोचने वाली बात #points to ponder
*“Sometimes what we think is not what really is—and that’s where misunderstandings begin. So, understand carefully before you conclude.”*
*“कभी-कभी हम समझते क्या हैं और होता क्या है।” और यहां से ही गैर समज की शुरुआत होती है, इसलिए बराबर सोच समझ कर बात समझे।*
9/5/26
*हज़रत आयशा से रिवायत है कि पैगंबर (सल्ललाहु अलयही वसल्लम)की पत्नियों ने उनसे पूछा, "हममें से सबसे पहले आपकी मृत्यु के बाद आपसे कौन मिलेगा?" उन्होंने कहा, *"वह, जिसके हाथ सबसे लंबे हैं।"*
*पत्नियों ने लकड़ी से अपने हाथ नापने शुरू किए और सौदा का हाथ सबसे लंबा निकला। लेकिन जब ज़ैनब का इंतकाल सबसे पहले हुआ, तब हमें समझ आया कि "लंबे हाथ" का मतलब *दान-पुण्य (Charity) करना'*था।* *ज़ैनब दान करने में सबसे आगे थीं।*
*(संदर्भ: सहीह बुखारी 1420)*
**व्याख्या (Short Note)**
*यह हदीस सिखाती है कि हर बात का मतलब शारीरिक या बाहरी नहीं होता।*
* **गलतफहमी:** पत्नियों ने इसे शरीर की बनावट (Physical length) समझा।
* **सच्चाई:"लंबे हाथ" एक मुहावरा था, जिसका अर्थ *'उदारता और दान'** था।*
**सबक:*
*किसी नतीजे पर पहुँचने से पहले गहराई से सोचना ज़रूरी है, क्योंकि सच्चाई अक्सर हमारी सोच से अलग होती है।*
९/५/२६(१) #points to ponder #सोचने वाली बात #ऐसा भी होता है #*આપણે વિચારીશું ખરા?* #*let us understand our religion
https://www.facebook.com/share/v/18mBGxZUPW/ #*આપણે વિચારીશું ખરા?* #सोचने वाली बात #points to ponder #પોઝિટિવ વિચાર... #positive thinking
https://youtube.com/shorts/aHwYjObF8JY?si=EJ93Fvhu9O77P5nB #*let us understand our religion #*આપણે વિચારીશું ખરા?* #सोचने वाली बात #points to ponder #ऐसा भी होता है
*અત્યારના સમયમાં ધર્મના ભેદભાવ વિના કોઈ કામ કર્યું તે ખરેખર બહુ જ હિંમત નું કામ છે. આવા માણસો જ ખરેખર આપણા દેશના મહાન માણસો કહેવાય. આપણે મુસલમાનો પણ ક્યારેક આવું કરીશું ખરા? થોડું તો થોડું કાંઈક તો કરો મારા વહાલા ઓ.* #points to ponder #सोचने वाली बात #*આપણે વિચારીશું ખરા?* #*let us understand our religion
https://youtube.com/watch?v=RJ2PhepAf1s&si=S6kb_HdZ3CPQJz_d*अगर ऐसा भजन हो तो किस मूर्ख को अच्छा नहीं लगे?* #સંત કબીર અમૃત વાણી #કબીર વાણી #सोचने वाली बात #points to ponder
https://youtube.com/watch?v=RJ2PhepAf1s&lc=UgziUY8kfPUoo-wK0X14AaABAg&si=PgWVNJT1Z9Dl9pOo #*આપણે વિચારીશું ખરા?* #points to ponder #सोचने वाली बात #સંત કબીર અમૃત વાણી #કબીર વાણી
#*let us understand our religion #*આપણે વિચારીશું ખરા?* #सोचने वाली बात #points to ponder




![Qur'an and We - जुड़ा ह। इसम आपका समस्याआ कां हल, आपके अख़लाक़ (Ethics) और आपकी सफलता का रास्ता बताया गया है।* २. **सम्मान और प्रतिष्ठाः*्इसका एक अर्थ यह भी है कि.इस किताब तुमेंलदुगनियामिेस दुनिया में पर अमल करने से इज़्ज़त और शोहरत गमनामी अरब के लोग नैऱथ् लेरूकक लुरग पहला गुमकेाबाद 467 उनका ज़िक्र पूँरी #೯ TTI guT X आत्म-चिंतन * *46 (Self-Reflection):| आयत ಔ೯೫] 5] पराई चीज़ है कि कुरआन अपने बल्कि यह इंसान वजूद , उसके मकसदू और उसकी भलाई की बात करती है। यह आपकी अपनी ' मैनुअल * *Manual) की तरह है।* अक्ल का इस्तेमालः*आयत * ** के अंत में पूछा गया है, *"क्या तुम अक्ल नहीं रेखते?"*| *्यह एक तरह की चेतावनी और प्रोत्साहन है कि एक* *समझदार इंसान को यह + चाहिए ক্ি তী বীড় +पहचानना उसकी अपनी बेहतरी के आई है, 4 वह उससे दर क्यों भाग रहा 0 Silent Broadcast 0 जुड़ा ह। इसम आपका समस्याआ कां हल, आपके अख़लाक़ (Ethics) और आपकी सफलता का रास्ता बताया गया है।* २. **सम्मान और प्रतिष्ठाः*्इसका एक अर्थ यह भी है कि.इस किताब तुमेंलदुगनियामिेस दुनिया में पर अमल करने से इज़्ज़त और शोहरत गमनामी अरब के लोग नैऱथ् लेरूकक लुरग पहला गुमकेाबाद 467 उनका ज़िक्र पूँरी #೯ TTI guT X आत्म-चिंतन * *46 (Self-Reflection):| आयत ಔ೯೫] 5] पराई चीज़ है कि कुरआन अपने बल्कि यह इंसान वजूद , उसके मकसदू और उसकी भलाई की बात करती है। यह आपकी अपनी ' मैनुअल * *Manual) की तरह है।* अक्ल का इस्तेमालः*आयत * ** के अंत में पूछा गया है, *"क्या तुम अक्ल नहीं रेखते?"*| *्यह एक तरह की चेतावनी और प्रोत्साहन है कि एक* *समझदार इंसान को यह + चाहिए ক্ি তী বীড় +पहचानना उसकी अपनी बेहतरी के आई है, 4 वह उससे दर क्यों भाग रहा 0 Silent Broadcast 0 - ShareChat Qur'an and We - जुड़ा ह। इसम आपका समस्याआ कां हल, आपके अख़लाक़ (Ethics) और आपकी सफलता का रास्ता बताया गया है।* २. **सम्मान और प्रतिष्ठाः*्इसका एक अर्थ यह भी है कि.इस किताब तुमेंलदुगनियामिेस दुनिया में पर अमल करने से इज़्ज़त और शोहरत गमनामी अरब के लोग नैऱथ् लेरूकक लुरग पहला गुमकेाबाद 467 उनका ज़िक्र पूँरी #೯ TTI guT X आत्म-चिंतन * *46 (Self-Reflection):| आयत ಔ೯೫] 5] पराई चीज़ है कि कुरआन अपने बल्कि यह इंसान वजूद , उसके मकसदू और उसकी भलाई की बात करती है। यह आपकी अपनी ' मैनुअल * *Manual) की तरह है।* अक्ल का इस्तेमालः*आयत * ** के अंत में पूछा गया है, *"क्या तुम अक्ल नहीं रेखते?"*| *्यह एक तरह की चेतावनी और प्रोत्साहन है कि एक* *समझदार इंसान को यह + चाहिए ক্ি তী বীড় +पहचानना उसकी अपनी बेहतरी के आई है, 4 वह उससे दर क्यों भाग रहा 0 Silent Broadcast 0 जुड़ा ह। इसम आपका समस्याआ कां हल, आपके अख़लाक़ (Ethics) और आपकी सफलता का रास्ता बताया गया है।* २. **सम्मान और प्रतिष्ठाः*्इसका एक अर्थ यह भी है कि.इस किताब तुमेंलदुगनियामिेस दुनिया में पर अमल करने से इज़्ज़त और शोहरत गमनामी अरब के लोग नैऱथ् लेरूकक लुरग पहला गुमकेाबाद 467 उनका ज़िक्र पूँरी #೯ TTI guT X आत्म-चिंतन * *46 (Self-Reflection):| आयत ಔ೯೫] 5] पराई चीज़ है कि कुरआन अपने बल्कि यह इंसान वजूद , उसके मकसदू और उसकी भलाई की बात करती है। यह आपकी अपनी ' मैनुअल * *Manual) की तरह है।* अक्ल का इस्तेमालः*आयत * ** के अंत में पूछा गया है, *"क्या तुम अक्ल नहीं रेखते?"*| *्यह एक तरह की चेतावनी और प्रोत्साहन है कि एक* *समझदार इंसान को यह + चाहिए ক্ি তী বীড় +पहचानना उसकी अपनी बेहतरी के आई है, 4 वह उससे दर क्यों भाग रहा 0 Silent Broadcast 0 - ShareChat](https://cdn4.sharechat.com/bd5223f_s1w/compressed_gm_40_img_700583_206ebbcc_1778390697353_sc.jpg?tenant=sc&referrer=user-profile-service%2FrequestType50&f=353_sc.jpg)






