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#*આપણે વિચારીશું ખરા?* #सोचने वाली बात #Qur'an and We #points to ponder #*let us understand our religion
*આપણે વિચારીશું ખરા?* - *कुरआन के सूरा अल-अनाम (Surah AI-An'am) ক্রী আামন बुनियादी और १६२* इस्लाम की सबसे ख़ूबसूरत आयतों में से एक है। यह इंसान की पूरी ज़िंदगी का मक़सद बयान करती है। ## हिन्दी अनुवाद (Translation) **"कह दो कि निश्चित ही मेरी नमाज़, (और इबादत के तरीक़े) , # क़ुर्बानी मेरा जीना और मेरा मरना, सब कुछ अल्लाह ही के लिए है, जो सारे जहान (मालिक) है।"** का रब ## तफ़्सीर और व्याख्या (Explanation) इस आयत में अल्लाह तआला ने पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के ज़रिए पूरी इंसानियत को यह सिखाया है कि एक मोमिन (आस्था वाले) का नज़रिया अपनी ज़िंदगी रखने को लेकर कैसा होना चाहिए। इसे हम चार अहम हिस्सों में समझ सकते हैंः *্মীযী নমাড়া (Insalati):* যঙ্াঁ * *कुरआन के सूरा अल-अनाम (Surah AI-An'am) ক্রী আামন बुनियादी और १६२* इस्लाम की सबसे ख़ूबसूरत आयतों में से एक है। यह इंसान की पूरी ज़िंदगी का मक़सद बयान करती है। ## हिन्दी अनुवाद (Translation) **"कह दो कि निश्चित ही मेरी नमाज़, (और इबादत के तरीक़े) , # क़ुर्बानी मेरा जीना और मेरा मरना, सब कुछ अल्लाह ही के लिए है, जो सारे जहान (मालिक) है।"** का रब ## तफ़्सीर और व्याख्या (Explanation) इस आयत में अल्लाह तआला ने पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के ज़रिए पूरी इंसानियत को यह सिखाया है कि एक मोमिन (आस्था वाले) का नज़रिया अपनी ज़िंदगी रखने को लेकर कैसा होना चाहिए। इसे हम चार अहम हिस्सों में समझ सकते हैंः *্মীযী নমাড়া (Insalati):* যঙ্াঁ * - ShareChat