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#✒ शायरी
✒ शायरी - "शेर" तेरी ज़मी की ख़ाक में मिलकर चले गए जाने यहां से कितने सिकन्दर चले गए सोचा था हमने साथ : गुजारेगें जिन्दगी तुम तो हमारी सोच बदल कर चले गए सुशील मेहता "शेर" तेरी ज़मी की ख़ाक में मिलकर चले गए जाने यहां से कितने सिकन्दर चले गए सोचा था हमने साथ : गुजारेगें जिन्दगी तुम तो हमारी सोच बदल कर चले गए सुशील मेहता - ShareChat