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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - 2001 V1*1 911* 1೧೧ ' ( पचवटा कालनसमदिर पहुंची। नसियां मे मोती डूंगरी गणेशजी का पंचामृत अभिषेक, च्यवनप्राश अर्पित भक्तों में वितरित ಹ೯; मोती डूंगरी गणेश मंदिर में नहर कै गणेश मंदिर; ब्रह्मपुरी माउंट रोड स्थित সযত্ত্া शनिवार को पुष्य नक्षत्र पर प्रथम पूज्य श्री नहर के गणेश मंदिर मेँ महंत पं॰ जय शर्मा के qad अभिषेक किया का गया। २५१ किलो दूध २१ किलो दही, सान्निध्य में प्रभु गजानंद 5 ক্িলী মী जी २१ किलो बूरा व शहद का   मंदिर परिवार से अभिषेक किया गया। भगवान श्री दूर्वा মাজন  से द्वारा দনামূন गणपति सहस्त्रनाम से १००१ मोदक अभिषेक किया পিন किए गया। इसके बाद नवीन गए। पूजन के बाद रक्षा पोशाक सूत्र एवं स्वास्थ्य के लिए हल्दी का धारण   करवाई। प्रसाद वितरण किया गया। मंदिर महंत सायंकालीन २५१ दीपकों कैलाश शर्मा ने बताया कि शाम को महाआरती की गई। रमंदिर चांदपौल परकोटा गणेश  भगवान श्री गणेशजी महाराज   फूल १०१ किलो दूधव पंचामृत से अभिषेक किया  बंगले में विराजमान साथ ही गया। इसके महत पंडित अमित हुए। शर्मा के सान्निध्य में गणेश जी को सिंदूर का चोला  मंदिर में ४२ परंपरा को फिर সাল पुरानी चढ़ाकर नवीन पोशाक धारण कराई गई। गणेश जी से शुरू हुई। गणेश जी को च्यवनप्राश महाराज को गणपति अथर्वशीर्ष व गणपति अष्टोत्तर  का भोग लगाने के बाद इसे श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप भी दिया गया। किए नामावली से मोदक अर्पण  गए। 2001 V1*1 911* 1೧೧ ' ( पचवटा कालनसमदिर पहुंची। नसियां मे मोती डूंगरी गणेशजी का पंचामृत अभिषेक, च्यवनप्राश अर्पित भक्तों में वितरित ಹ೯; मोती डूंगरी गणेश मंदिर में नहर कै गणेश मंदिर; ब्रह्मपुरी माउंट रोड स्थित সযত্ত্া शनिवार को पुष्य नक्षत्र पर प्रथम पूज्य श्री नहर के गणेश मंदिर मेँ महंत पं॰ जय शर्मा के qad अभिषेक किया का गया। २५१ किलो दूध २१ किलो दही, सान्निध्य में प्रभु गजानंद 5 ক্িলী মী जी २१ किलो बूरा व शहद का   मंदिर परिवार से अभिषेक किया गया। भगवान श्री दूर्वा মাজন  से द्वारा দনামূন गणपति सहस्त्रनाम से १००१ मोदक अभिषेक किया পিন किए गया। इसके बाद नवीन गए। पूजन के बाद रक्षा पोशाक सूत्र एवं स्वास्थ्य के लिए हल्दी का धारण   करवाई। प्रसाद वितरण किया गया। मंदिर महंत सायंकालीन २५१ दीपकों कैलाश शर्मा ने बताया कि शाम को महाआरती की गई। रमंदिर चांदपौल परकोटा गणेश  भगवान श्री गणेशजी महाराज   फूल १०१ किलो दूधव पंचामृत से अभिषेक किया  बंगले में विराजमान साथ ही गया। इसके महत पंडित अमित हुए। शर्मा के सान्निध्य में गणेश जी को सिंदूर का चोला  मंदिर में ४२ परंपरा को फिर সাল पुरानी चढ़ाकर नवीन पोशाक धारण कराई गई। गणेश जी से शुरू हुई। गणेश जी को च्यवनप्राश महाराज को गणपति अथर्वशीर्ष व गणपति अष्टोत्तर  का भोग लगाने के बाद इसे श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप भी दिया गया। किए नामावली से मोदक अर्पण  गए। - ShareChat