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#ज्यों डूबे जहाज़ का पंछी
ज्यों डूबे जहाज़ का पंछी - यों तेरी यादों के बादल मन पर घिर आए ज्यों डूबे जहाज़ का पंछी जल पर मण्डराए एक॰स्मृति में सौनसौ छवियों का मेला शान्त झील में जैसे कोई फेंक गया ढेला इन्द्रधनुष के रंग न जाने कैसे तिर आए। भरी रात में जैसे कुहरे सूर्य -किरण चमके गूँज उठे सन्नाटे में शहनाई थमन्थम के बार-बार मन यों देख रहा मन सपने मननभाए! यों तेरी यादों के बादल मन पर घिर आए ज्यों डूबे जहाज़ का पंछी जल पर मण्डराए एक॰स्मृति में सौनसौ छवियों का मेला शान्त झील में जैसे कोई फेंक गया ढेला इन्द्रधनुष के रंग न जाने कैसे तिर आए। भरी रात में जैसे कुहरे सूर्य -किरण चमके गूँज उठे सन्नाटे में शहनाई थमन्थम के बार-बार मन यों देख रहा मन सपने मननभाए! - ShareChat