ShareChat
click to see wallet page
search
गज़ल #✒ शायरी
✒ शायरी - 19q हादिसे मोहब्बतों के, मुक़द्दर से होते हैं, कोई टकरा के, कोई ठुकरा के चला गया।। किसको बीनाई मिली है, किसको तन्हाई मिली, कोई हँसता रह गया, कोई रोता चला गया।। इज़्ज़त ओ आबरु की अब किसको फिक्र है यहाँ, कोई नज़रे फेरकर, कोई बचता चला गया।। रहग़ुज़र में हर कोई, अपना ही किस्सा कह गया, कोई दिल को जीतकर, कोई हारता चला गया।। मजीद "इस कारवाँ में , सब मुसाफ़िर ही तो थे, कोई याद बन कर, कोई लुभाता चला गया।। बीनाई /आँख की रौशनी माजिद की ग़ज़ल Motivational Videos App Want 19q हादिसे मोहब्बतों के, मुक़द्दर से होते हैं, कोई टकरा के, कोई ठुकरा के चला गया।। किसको बीनाई मिली है, किसको तन्हाई मिली, कोई हँसता रह गया, कोई रोता चला गया।। इज़्ज़त ओ आबरु की अब किसको फिक्र है यहाँ, कोई नज़रे फेरकर, कोई बचता चला गया।। रहग़ुज़र में हर कोई, अपना ही किस्सा कह गया, कोई दिल को जीतकर, कोई हारता चला गया।। मजीद "इस कारवाँ में , सब मुसाफ़िर ही तो थे, कोई याद बन कर, कोई लुभाता चला गया।। बीनाई /आँख की रौशनी माजिद की ग़ज़ल Motivational Videos App Want - ShareChat