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indoriatimes - इन्दौरिया समाचार जगत Editorial मंडावा की आत्मा विरासत है तो उसका विस्तार पर्यटन सभी देशवासियों को नव वर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई के उपरांत आज हम बात करेंगे शेखावाटी अंचल क्या आप जानते हैं के हवेलियों के शहर मंडावा की সভানা ন্ধী মনম নভী পম্নান ওমন্ধী समृद्ध विरासत है।यही विरासत मंडावा की आत्मा है और इसी ने उसे देश ही नहीं  बल्कि अंतरराष्टीय पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट स्थान दिलाया है। शेखावाटी अंचल के हृदय में बसा मंडावा अपने डॉ. राकेश থম ऐतिहासिक किले, हवेलियों, भित्ति भव्य चित्रों और पारंपरिक लोक संस्कृति के कारण एक जीवंत विरासत नगर के रूप में जाना जाता है । पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि केवल সভানা ক্িলা इतिहास, शौर्य और स्थापत्य कला का जीवंत उदाहरण है। वहीं , शहर की हवेलियाँ अपने  भित्ति चित्रों के कारण ؟0791 मंडावा को ओपन आर्ट गैलरी का दर्जा दिलाती हैं। यह विरासत केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान की पहचान और भविष्य की संभावनाओं की नींव है। इसी विरासत के विस्तार का नाम पर्यटन है। देशररविदेश से आने वाले सैलानी मंडावा की ऐतिहासिक धरोहर, लोक संगीत, पारंपरिक खानपान और सांस्कृतिक आयोजनों से जुड़कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे हैं हेरिटेज होटल, फेस्टिवल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने को रोजगार के नए अवसर भी दिए हैं । 397317 हालांकि, यह भी आवश्यक है कि पर्यटन विकास के साथरसाथ विरासत संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। अनियंत्रित निर्माण, उपेक्षा और व्यावसायिक दोहन से विरासत को खतरा हो सकता है। सरकार , प्रशासन, स्थानीय समुदाय और पर्यटन उद्योग- सभी को मिलकर संतुलित और सतत विकास का मॉडल अपनाना होगा मुझे चूंकि मंडावा में काफी समय बिताने का मौका मिला तभी मैं कह सकता हूं कि मंडावा की आत्मा उसकी विरासत में बसती है और पर्यटन उसका स्वाभाविक विस्तार है।यदि इस विरासत को संवेदनशीलता और के दूरदर्शिता " साथ संरक्षित किया गया, तो मंडावा आने वाली पीढ़ियों के लिए भी संस्कृति, इतिहास और समृद्ध पर्यटन का उज्च्वल प्रतीक बना रहेगा | इन्दौरिया समाचार जगत Editorial मंडावा की आत्मा विरासत है तो उसका विस्तार पर्यटन सभी देशवासियों को नव वर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई के उपरांत आज हम बात करेंगे शेखावाटी अंचल क्या आप जानते हैं के हवेलियों के शहर मंडावा की সভানা ন্ধী মনম নভী পম্নান ওমন্ধী समृद्ध विरासत है।यही विरासत मंडावा की आत्मा है और इसी ने उसे देश ही नहीं  बल्कि अंतरराष्टीय पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट स्थान दिलाया है। शेखावाटी अंचल के हृदय में बसा मंडावा अपने डॉ. राकेश থম ऐतिहासिक किले, हवेलियों, भित्ति भव्य चित्रों और पारंपरिक लोक संस्कृति के कारण एक जीवंत विरासत नगर के रूप में जाना जाता है । पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि केवल সভানা ক্িলা इतिहास, शौर्य और स्थापत्य कला का जीवंत उदाहरण है। वहीं , शहर की हवेलियाँ अपने  भित्ति चित्रों के कारण ؟0791 मंडावा को ओपन आर्ट गैलरी का दर्जा दिलाती हैं। यह विरासत केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान की पहचान और भविष्य की संभावनाओं की नींव है। इसी विरासत के विस्तार का नाम पर्यटन है। देशररविदेश से आने वाले सैलानी मंडावा की ऐतिहासिक धरोहर, लोक संगीत, पारंपरिक खानपान और सांस्कृतिक आयोजनों से जुड़कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे हैं हेरिटेज होटल, फेस्टिवल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने को रोजगार के नए अवसर भी दिए हैं । 397317 हालांकि, यह भी आवश्यक है कि पर्यटन विकास के साथरसाथ विरासत संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। अनियंत्रित निर्माण, उपेक्षा और व्यावसायिक दोहन से विरासत को खतरा हो सकता है। सरकार , प्रशासन, स्थानीय समुदाय और पर्यटन उद्योग- सभी को मिलकर संतुलित और सतत विकास का मॉडल अपनाना होगा मुझे चूंकि मंडावा में काफी समय बिताने का मौका मिला तभी मैं कह सकता हूं कि मंडावा की आत्मा उसकी विरासत में बसती है और पर्यटन उसका स्वाभाविक विस्तार है।यदि इस विरासत को संवेदनशीलता और के दूरदर्शिता " साथ संरक्षित किया गया, तो मंडावा आने वाली पीढ़ियों के लिए भी संस्कृति, इतिहास और समृद्ध पर्यटन का उज्च्वल प्रतीक बना रहेगा | - ShareChat