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#☝आज का ज्ञान वरुणी — जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं” सनातन धर्म की विशेषता यह है कि वह जीवन के किसी भी पक्ष से आँखें नहीं मूँदता। समुद्र मंथन — Samudra Manthan — के समय जब अनेक रत्न प्रकट हुए, तब वरुणी देवी भी प्रकट हुईं। यह घटना यह नहीं सिखाती कि मदिरा का उत्सव मनाया जाए। यह सिखाती है कि मनुष्य को हर शक्ति का सम्मान करना चाहिए — और उससे दूर रहकर संयम रखना चाहिए। Varuni कौन हैं? वरुणी हिंदू धर्म में मदिरा (सुरा) से जुड़ी देवी मानी जाती हैं। उनका प्राकट्य समुद्र मंथन — Samudra Manthan — के समय हुआ था। जब देवता और असुर अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र का मंथन कर रहे थे, तब अनेक दिव्य रत्नों के साथ वरुणी भी प्रकट हुईं। 🔹 उनका संबंध किससे है? • उन्हें जल के देवता Varuna की पुत्री (कुछ कथाओं में पत्नी) माना जाता है। • “वारुणी” शब्द का अर्थ ही है — वरुण से संबंधित। 🔹 वे क्या प्रतीक करती हैं? वरुणी केवल मदिरा की देवी के रूप में नहीं, बल्कि मोह और आसक्ति की परीक्षा के रूप में भी देखी जाती हैं। समुद्र मंथन में जहाँ अमृत निकला, वहीं विष भी निकला। यह संदेश देता है कि संसार की हर वस्तु में द्वंद्व है — उपयोग और दुरुपयोग। ⸻ 🕉️ सनातन दृष्टि सनातन धर्म ने वरुणी के अस्तित्व को स्वीकार किया, पर नशे का महिमामंडन नहीं किया। शास्त्रों ने सिखाया: • संयम सर्वोपरि है। • जो वस्तु विवेक को कमजोर करे, उससे दूरी ही श्रेष्ठ है। • नशा मनुष्य की परीक्षा लेता है, इसलिए उससे सावधान रहना चाहिए। इस प्रकार, वरुणी की कथा हमें यह नहीं सिखाती कि मदिरा का उत्सव मनाया जाए, बल्कि यह सिखाती है कि धर्म, मर्यादा और आत्म-नियंत्रण जीवन का आधार हैं। Varuni – एक सीख, न कि उत्सव सनातन धर्म की विशेषता यह है कि वह जीवन के किसी भी पक्ष से आँखें नहीं मूँदता। समुद्र मंथन — Samudra Manthan — के समय जब अनेक रत्न प्रकट हुए, तब वरुणी देवी भी प्रकट हुईं। यह घटना यह नहीं सिखाती कि मदिरा का उत्सव मनाया जाए। यह सिखाती है कि मनुष्य को हर शक्ति का सम्मान करना चाहिए — और उससे दूर रहकर संयम रखना चाहिए। ⸻ 🕉️ सनातन की शिक्षा – संयम हिंदू परंपरा ने कभी भी नशे को महान या आवश्यक नहीं बताया। बल्कि यह स्पष्ट किया कि: • नशा मन को विचलित करता है। • विवेक को कमज़ोर करता है। • और व्यक्ति के वास्तविक संस्कारों को उजागर कर देता है। इसलिए हमारे शास्त्रों और आचार्यों ने संयम (आत्म-नियंत्रण) को सर्वोच्च गुण माना। ⸻ ⚖️ सम्मान का अर्थ क्या है? सम्मान का अर्थ यह नहीं कि उसका सेवन किया जाए। सम्मान का अर्थ है — उसकी शक्ति को समझना और उससे सावधान रहना। जैसे अग्नि का सम्मान किया जाता है, पर उससे खेला नहीं जाता। वैसे ही नशे की वस्तुओं से दूरी रखना ही बुद्धिमानी मानी गई। सनातन यह सिखाता है: • अपने आचरण को कभी गिरने न दो। • नशे को बहाना बनाकर अधर्म मत करो। • यदि कोई वस्तु आपके विवेक को कमजोर करे, तो उससे दूर रहना ही श्रेष्ठ है। ⸻ 🌿 हिंदू समाज ने क्या सीखा? हमारे ऋषियों ने समझा कि मनुष्य का पतन धीरे-धीरे होता है। पहले आकर्षण, फिर आदत, फिर निर्भरता। इसलिए परिवार और समाज में हमेशा यही कहा गया: “संयम ही रक्षा है।” नशा क्षणिक सुख दे सकता है, पर स्थायी शांति केवल सदाचार से मिलती है। ⸻ 🔥 अंतिम भाव वरुणी की कथा हमें यह याद दिलाती है कि जीवन में हर चीज़ का सम्मान करो — पर अपने चरित्र, विवेक और धर्म की रक्षा सबसे पहले करो। सनातन धर्म हमें भोग नहीं, योग और संयम का मार्ग सिखाता है।
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