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#❤️जीवन की सीख एक बार एक सन्त के पास एक युवक सत्संग सुनने के लिए आया। सन्त ने उससे हाल-चाल पूछा, तो उसने स्वयं को अत्यन्त सुखी बताया। वह बोला–‘मुझे अपने परिवार के सभी सदस्यों पर बड़ा गर्व है। मैं उनके व्यवहार से सन्तुष्ट हूँ।’ सन्त बोले–‘तुम्हें अपने परिवार के बारे में ऐसी धारणा नहीं बनानी चाहिए। इस दुनिया में अपना कोई नहीं होता। जहाँ तक माता-पिता की सेवा और पत्नी-बच्चों के पालन-पोषण का सम्बन्ध है, उसे तो कर्तव्य समझकर ही करना चाहिए। उनके प्रति मोह या आसक्ति रखना उचित नहीं।’ युवक को सन्त की बात ठीक नहीं लगी। उसने कहा–‘आपको विश्वास नहीं कि मेरे परिवार के लोग मुझसे अत्यधिक स्नेह करते हैं। यदि मैं एक दिन घर न जाऊं, तो उनकी भूख-प्यास, नींद सब उड़ जाती है और पत्नी तो मेरे बिना जीवित भी नहीं रह सकती है।’ ‘श्रीजी की चरण सेवा’ की सभी धार्मिक, आध्यात्मिक एवं धारावाहिक पोस्टों के लिये हमारे फेसबुक पेज श्रीजी की चरण सेवा को फॉलो करें तथा अपने मित्रों को भी आमंत्रित करें। सन्त बोले, "तुम्हें प्राणायाम तो आता ही है। कल सुबह उठने के बजाए प्राणवायु मस्तक में खींचकर निश्चेत पड़े रहना। मैं आकर सब कुछ देख लूँगा।’ दूसरे दिन युवक ने जैसा सन्त ने बताया था वैसा ही किया। युवक को मृत जानकर उसके सभी घर के लोग विलाप करने लगे। तभी सन्त वहाँ पहुँचे। घर के सभी सदस्य सन्त के चरणों में गिर गए। सन्त बोले–‘आप चिन्ता मत करें मैं मन्त्र से प्रयत्न कर इसे जिन्दा कर देता हूँ। लेकिन कटोरी भर पानी परिवार के किसी अन्य सदस्य को पीना पड़ेगा। उस पानी में ऐसी शक्ति है कि यह तो जीवित हो उठेंगे, लेकिन उस पानी को पीने वाला मर जाएगा।’ यह सुनने के बाद घर के सभी सदस्य एक दूसरे का मुँह देखने लगे। किसी को भी पानी पीने के लिए तैयार होता न देखकर सन्त ने कहा कि ‘मैं ही इस पानी को पी लेता हूँ।’ इस पर घर के सभी सदस्य बोले कि–‘आप धन्य हैं। आप जैसे परोपकारी लोग बहुत कम पैदा होते हैं।’ युवक इस पूरे घटनाक्रम को चुपचाप सुन रहा था। उसे सन्त की बातों पर विश्वास हो गया। प्राणायाम कर वह उठ गया। यह देखकर घर के सभी सदस्य चौंक गए। युवक सन्त से बोला–‘आपने मुझे नया जीवन दिया है। इस नश्वर संसार में कोई भी अपना नहीं है। अब मैं हरि भजन करूँगा। संसार में आसक्ति नहीं रखूँगा, अपना कर्तव्य समझकर माता-पिता, पत्नी और बच्चों का पालन करूँगा।’ ----------:::×:::---------- "जय जय श्री राधे" ***************************************
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