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#GodMorningSaturday दया समान धर्म नहीं कबीर, क्षमा समान न तप, सुख नहीं संतोष समान। तृष्णा समान नहीं ब्याधी कोई, धर्म न दया समान।। भावार्थ:-परमेश्वर कबीर जी ने कहा है कि क्षमा करना बहुत बड़ा तप है। इसके समान तप नहीं है। संतोष के तुल्य कोई सुख नहीं है। #santrampaljimaharaj
santrampaljimaharaj - दया समान ೪ धर्म नर्ही Nv & कबीर, क्षमा समान न तप, सुख नर्ही संतोष समान। तृष्णॉ समान नर्ही ब्याधी कोई, } धर्म न दया समान। | भावार्थ- परमेश्वर कबीर जी ने कहा है कि क्षमा करना बहुत बड़ा तप है। इसके समान तप नर्ही है। संतोष के तुल्य कोई सुख नर्ही है। किसी वस्तु की प्राप्ति की इच्छा के समान कोई आपदा नर्ही है और दया के समान धर्म नर्ही है। SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Jl @SAINTRAMPAUIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL Jl MAHARAJ दया समान ೪ धर्म नर्ही Nv & कबीर, क्षमा समान न तप, सुख नर्ही संतोष समान। तृष्णॉ समान नर्ही ब्याधी कोई, } धर्म न दया समान। | भावार्थ- परमेश्वर कबीर जी ने कहा है कि क्षमा करना बहुत बड़ा तप है। इसके समान तप नर्ही है। संतोष के तुल्य कोई सुख नर्ही है। किसी वस्तु की प्राप्ति की इच्छा के समान कोई आपदा नर्ही है और दया के समान धर्म नर्ही है। SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Jl @SAINTRAMPAUIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL Jl MAHARAJ - ShareChat