मां ललिता जयंती
हिंदू पंचांग के अनुसार मां ललिता जयंती का पावन पर्व माघ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया जाता हैं। इस दिन माँ ललिता की आराधना की जाती हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार जो भी भक्त माँ ललिता की इस दिन सच्चे मन से आराधना करते हैं उन्हें जन्म-मरण के काल चक्र से मुक्ति मिलती है. और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। आज के इस पावन दिन में माता ललिता के साथ साथ माता स्कंदमाता और देवो के देव महादेव भगवान शंकर की पूजा आराधना की जाती है माँ ललिता को दस महाविद्याओं में से एक तीसरी महाविद्या माना गया हैं. माता को कई नामों से जाना जाता हैं. माँ ललिता साक्षात् माता पार्वती का ही एक रूप है। ललिता जयंती पर माँ की पूजा करना सबसे शुभ माना जाता हैं. सभी प्रकार की सिद्धियों की प्राप्ति होती हैं। पौराणिक मान्यतानुसार इस दिन देवी ललिता भांडा नामक राक्षस को मारने के लिए अवतार लेती हैं. राक्षस भांडा कामदेव के शरीर के राख से उत्पन्न होता है. इस दिन भक्तगण षोडषोपचार विधि से मां ललिता का पूजन करते है. इस दिन मां ललिता के साथ साथ स्कंदमाता और शिव शंकर की भी शास्त्रानुसार पूजा की जाती है। कहा जाता है कि माता ललिता की पूजा करने से व्यक्ति को सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं। मां ललिता को राजेश्वरी, षोडशी, त्रिपुर सुंदरी आदि नामों से भी जाना जाता है। कथा अनुसार ललिता देवी का प्रादुर्भाव तब होता है जब ब्रह्मा जी द्वारा छोड़े गए चक्र से पाताल समाप्त होने लगा। इस स्थिति से विचलित होकर ऋषि-मुनि भी घबरा जाते हैं, और संपूर्ण पृथ्वी धीरे-धीरे जलमग्न होने लगती है। तब सभी ऋषि माता ललिता देवी की उपासना करने लगते हैं। प्रार्थना से प्रसन्न होकर देवी जी प्रकट होती हैं तथा इस विनाशकारी चक्र को थाम लेती हैं। सृष्टि पुन: नवजीवन को पाती है। #शुभ कामनाएँ 🙏


