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#श्रीमद्भगवद् गीता #🙏गीता ज्ञान🛕 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख #मेरे विचार
श्रीमद्भगवद् गीता - वर्षं   निगृह्णाम्युत्सृजामि तपाम्यहमहं च। चैव অমূন सदसच्चाहमर्जुन।। मृत्युश्च मैँ ही सूर्यरूपसे तपता हूँ॰ वर्षाका आकर्षण  हूँ और उसे बरसाता हूँ। हे अर्जुन! मैँ কনো ही अमृत और मृत्यु हूँ और सत्-असत् भी मैं ही हूँ II १९।I त्रैविद्या मां सोमपाः पूतपापा - स्वर्गतिं प्रार्थयन्ते | यज्ञैरिष्रा ते   पुण्यमासाद्य   सुरेन्द्रलोक- मश्नन्ति दिव्यान्दिवि देवभोगान्।।  तीनों वेदोंमें विधान किये सकामकर्मोंको हुए करनेवाले, सोमरसको पीनेवाले, पापरहित पुरुष " यज्ञोंके द्वारा पूजकर स्वर्गको प्राप्ति चाहते मुझको हैँ; वे पुरुष अपने फलरूप स्वर्गलोकको पुण्योंके होकर स्वर्गमें दिव्य देवताओंके भोगोंको प्राप्त भोगते हैँ II २० Il यहाँ स्वर्गप्राप्तिके प्रतिबन्धक देवऋणरूप पापसे पवित्र होना समझना   चाहिये। श्रीमदभगवदगीता अध्याय 9 प्रेस , गोरखपुर से साभार गीता वर्षं   निगृह्णाम्युत्सृजामि तपाम्यहमहं च। चैव অমূন सदसच्चाहमर्जुन।। मृत्युश्च मैँ ही सूर्यरूपसे तपता हूँ॰ वर्षाका आकर्षण  हूँ और उसे बरसाता हूँ। हे अर्जुन! मैँ কনো ही अमृत और मृत्यु हूँ और सत्-असत् भी मैं ही हूँ II १९।I त्रैविद्या मां सोमपाः पूतपापा - स्वर्गतिं प्रार्थयन्ते | यज्ञैरिष्रा ते   पुण्यमासाद्य   सुरेन्द्रलोक- मश्नन्ति दिव्यान्दिवि देवभोगान्।।  तीनों वेदोंमें विधान किये सकामकर्मोंको हुए करनेवाले, सोमरसको पीनेवाले, पापरहित पुरुष " यज्ञोंके द्वारा पूजकर स्वर्गको प्राप्ति चाहते मुझको हैँ; वे पुरुष अपने फलरूप स्वर्गलोकको पुण्योंके होकर स्वर्गमें दिव्य देवताओंके भोगोंको प्राप्त भोगते हैँ II २० Il यहाँ स्वर्गप्राप्तिके प्रतिबन्धक देवऋणरूप पापसे पवित्र होना समझना   चाहिये। श्रीमदभगवदगीता अध्याय 9 प्रेस , गोरखपुर से साभार गीता - ShareChat