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व्यस्त रहें, मस्त रहें
#मेरे विचार #❤️जीवन की सीख #🙏गीता ज्ञान🛕 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏 प्रेरणादायक विचार
मेरे विचार - रहना है तो, दुःखी 2 सब मे कमी खोजो और प्रसन्न रहना है, तो सब में गुण खोजो। विचारों को पढ़कर बदलाव नही आता है विचारों पर चलकर ही बदलाव आता है। MN रहना है तो, दुःखी 2 सब मे कमी खोजो और प्रसन्न रहना है, तो सब में गुण खोजो। विचारों को पढ़कर बदलाव नही आता है विचारों पर चलकर ही बदलाव आता है। MN - ShareChat
#📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 #मेरे विचार
📖जीवन का लक्ष्य🤔 - चतुर्दशोउध्यायः अथ श्रीभगवानुवाच परं भूयः प्रवक्ष्यामि ज्ञानानां ज्ञानमुत्तमम्। यज्ज्ञात्वा मुनयः सर्वे परां सिद्धिमितो गताः II श्रीभगवान् वोले- ज्ञानोंमें भी अति उत्तम उसा ज्ञानको मैं फिर कहूँगा , जिसको जानकर सवो परम मुनिजन इस संसारसे मुक्त होकर परम सिद्धिको प्राप्त हाे गये हैं Il१Il इदं   ज्ञानमुपाश्रित्य साधर्म्यमागताः | मम सर्गेउपि नोपजायन्ते प्रलये न व्यथन्ति च।। इस ज्ञानको आश्रय करके अर्थात् धारण करके मैरे स्वरूपको प्राप्त हुए पुरुप  आदिमें पुनः उत्पन्न सृष्टिके नहीं होते और प्रलयकालमें भी व्याकुल नहीं होते II २ II  योनिर्महद्ब्रह्म तस्मिन्गर्भं दधाम्यहम्। मम सम्भवः सर्वभूतानां ततो भवति भारत I। हे अर्जुन! मेरी महत्-व्रह्मरूप मूल प्रकृति योनि है अर्थात गर्भाधानका स्थान ஈர भूतोंको है और मैँ उस योनिमें चेतन समुदायरूप गर्भको हूँ |उस जड-चेतनके संयोगसे सव থণন কনো उत्पत्ति होती हैIl ३ Il भूतोंको श्रीमद्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार चतुर्दशोउध्यायः अथ श्रीभगवानुवाच परं भूयः प्रवक्ष्यामि ज्ञानानां ज्ञानमुत्तमम्। यज्ज्ञात्वा मुनयः सर्वे परां सिद्धिमितो गताः II श्रीभगवान् वोले- ज्ञानोंमें भी अति उत्तम उसा ज्ञानको मैं फिर कहूँगा , जिसको जानकर सवो परम मुनिजन इस संसारसे मुक्त होकर परम सिद्धिको प्राप्त हाे गये हैं Il१Il इदं   ज्ञानमुपाश्रित्य साधर्म्यमागताः | मम सर्गेउपि नोपजायन्ते प्रलये न व्यथन्ति च।। इस ज्ञानको आश्रय करके अर्थात् धारण करके मैरे स्वरूपको प्राप्त हुए पुरुप  आदिमें पुनः उत्पन्न सृष्टिके नहीं होते और प्रलयकालमें भी व्याकुल नहीं होते II २ II  योनिर्महद्ब्रह्म तस्मिन्गर्भं दधाम्यहम्। मम सम्भवः सर्वभूतानां ततो भवति भारत I। हे अर्जुन! मेरी महत्-व्रह्मरूप मूल प्रकृति योनि है अर्थात गर्भाधानका स्थान ஈர भूतोंको है और मैँ उस योनिमें चेतन समुदायरूप गर्भको हूँ |उस जड-चेतनके संयोगसे सव থণন কনো उत्पत्ति होती हैIl ३ Il भूतोंको श्रीमद्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat
#मेरे विचार #🙏 प्रेरणादायक विचार #❤️जीवन की सीख #🙏गीता ज्ञान🛕 #📖जीवन का लक्ष्य🤔
मेरे विचार - 02 ఓకే सज्जनों के साथ नर्क में रहना अच्छा के साथ स्वर्ग दुर्जनों पर में रहना अच्छा नही क्योंकि सज्जन लोग अपने पुनीत कर्तव्यों से नर्क को भी स्वर्ग बना लेते है और लोग दुर्जन ನಾ್ಹ ಭ ಹಾಹ ತಳ नर्क बना डालेंगे। ٨٨ 02 ఓకే सज्जनों के साथ नर्क में रहना अच्छा के साथ स्वर्ग दुर्जनों पर में रहना अच्छा नही क्योंकि सज्जन लोग अपने पुनीत कर्तव्यों से नर्क को भी स्वर्ग बना लेते है और लोग दुर्जन ನಾ್ಹ ಭ ಹಾಹ ತಳ नर्क बना डालेंगे। ٨٨ - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏 प्रेरणादायक विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख #मेरे विचार
🙏गीता ज्ञान🛕 - है तो, 21 दुःखी 6I सब मे कमी खोजो और प्रसन्न रहना 8 तो सब में गुण खोजो। विचारों को पढ़कर बदलाव नही आता है विचारों पर चलकर ही बदलाव आता है। MN है तो, 21 दुःखी 6I सब मे कमी खोजो और प्रसन्न रहना 8 तो सब में गुण खोजो। विचारों को पढ़कर बदलाव नही आता है विचारों पर चलकर ही बदलाव आता है। MN - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #मेरे विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏गीता ज्ञान🛕
❤️जीवन की सीख - 02 ఓకే सज्जनों के साथ नर्क में रहना अच्छा के साथ स्वर्ग दुर्जनों पर में रहना अच्छा नही क्योंकि सज्जन लोग अपने पुनीत कर्तव्यों से नर्कको भी स्वर्ग बना लेते है और लोग दुर्जन ನfಹ 1= ಹಾಹ ತಳ नर्क बना डालेंगे। MN 02 ఓకే सज्जनों के साथ नर्क में रहना अच्छा के साथ स्वर्ग दुर्जनों पर में रहना अच्छा नही क्योंकि सज्जन लोग अपने पुनीत कर्तव्यों से नर्कको भी स्वर्ग बना लेते है और लोग दुर्जन ನfಹ 1= ಹಾಹ ತಳ नर्क बना डालेंगे। MN - ShareChat
#मेरे विचार #🙏 प्रेरणादायक विचार #❤️जीवन की सीख #कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए जीते हैं #स्वार्थ
मेरे विचार - कुछ लोग इतने स्वार्थी होते हैं कि दूसरे का २५% चार्जिंग वाला mobile हटाकर अपना ८०% चार्जिंग वाला मोबाइल लगा देते है.. कुछ लोग इतने स्वार्थी होते हैं कि दूसरे का २५% चार्जिंग वाला mobile हटाकर अपना ८०% चार्जिंग वाला मोबाइल लगा देते है.. - ShareChat
#📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏 प्रेरणादायक विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 #❤️जीवन की सीख #मेरे विचार
📖जीवन का लक्ष्य🤔 - खुद से बहस करोगे तो सारे सवालों के जवाब मिल जाएंगे ! से करोगे तो दुसरो अगर और नये सवाल खड़े हो जायेंगे !! जब मनुष्य अपनी ग़लती का वकील और की गलतियों का जज बन जाता है दूसरों तो फैसले नही फासले हो जाते है। MN खुद से बहस करोगे तो सारे सवालों के जवाब मिल जाएंगे ! से करोगे तो दुसरो अगर और नये सवाल खड़े हो जायेंगे !! जब मनुष्य अपनी ग़लती का वकील और की गलतियों का जज बन जाता है दूसरों तो फैसले नही फासले हो जाते है। MN - ShareChat
#मेरे विचार #❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 #📖जीवन का लक्ष्य🤔
मेरे विचार - यथा प्रकाशयत्येकः कृत्स्नं लोकमिमं रविः | क्षेत्रं क्षेत्रीं तथा कृत्स्नं प्रकाशयति भारत I। हे अर्जुन ! जिस प्रकार एक हो सूर्य इस सम्पूर्ण ग्रह्माण्डको प्रकाशित करता हैं॰ उसी प्रकार एक ही आत्मा सम्पूर्ण क्षेत्रको प्रकाशित करता है II ३३ II क्षेत्रक्षेत्रज्ञयोरेवमन्तरं ज्ञानचक्षुपा | भूतप्रकृतिमोक्षं च ये विदुर्यान्ति ते परम्।I इस प्रकार क्षेत्र और क्षेत्रज्ञके भेदको * तथा मुक्त होनेको जो पुरुप ज्ञान- कार्यसहित সক্ৃনিম नेत्रोंद्वारा तत्त्वसे जानते हैँ, वे परम महात्माजन ग्रह्म परमात्माको प्राप्त होते हैँ II ३४ Il ३ँ तत्सदिति श्रीमद्भगवद्नीतासूपनिपत्सु ग्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभाग- योगो नाम त्रयोदशोषध्यायः II १३ Il 0 क्षेत्रको जड विकारो, क्षणिक और नाशवान् तथा क्षेत्रज्ञको चेतन अविकारो और अविनाशो जानना हो ' उनके भेदको नित्य जानना ' है। श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय १३ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार यथा प्रकाशयत्येकः कृत्स्नं लोकमिमं रविः | क्षेत्रं क्षेत्रीं तथा कृत्स्नं प्रकाशयति भारत I। हे अर्जुन ! जिस प्रकार एक हो सूर्य इस सम्पूर्ण ग्रह्माण्डको प्रकाशित करता हैं॰ उसी प्रकार एक ही आत्मा सम्पूर्ण क्षेत्रको प्रकाशित करता है II ३३ II क्षेत्रक्षेत्रज्ञयोरेवमन्तरं ज्ञानचक्षुपा | भूतप्रकृतिमोक्षं च ये विदुर्यान्ति ते परम्।I इस प्रकार क्षेत्र और क्षेत्रज्ञके भेदको * तथा मुक्त होनेको जो पुरुप ज्ञान- कार्यसहित সক্ৃনিম नेत्रोंद्वारा तत्त्वसे जानते हैँ, वे परम महात्माजन ग्रह्म परमात्माको प्राप्त होते हैँ II ३४ Il ३ँ तत्सदिति श्रीमद्भगवद्नीतासूपनिपत्सु ग्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभाग- योगो नाम त्रयोदशोषध्यायः II १३ Il 0 क्षेत्रको जड विकारो, क्षणिक और नाशवान् तथा क्षेत्रज्ञको चेतन अविकारो और अविनाशो जानना हो ' उनके भेदको नित्य जानना ' है। श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय १३ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏 प्रेरणादायक विचार #मेरे विचार
❤️जीवन की सीख - (0 ఓకే 4321| ٥٢ 5٩٢ 880 # ea 81 @@ &6] அனசவ் बयलद्यना औल दैलट्यना ह्ै। डिल्् थना कौँं लदुा (ತರೊ [ರತನೇ ರ] ಠಸರ} ೫ ಠೆ GJGJ ٤٨؟٥ @लन[ UUN (0 ఓకే 4321| ٥٢ 5٩٢ 880 # ea 81 @@ &6] அனசவ் बयलद्यना औल दैलट्यना ह्ै। डिल्् थना कौँं लदुा (ತರೊ [ರತನೇ ರ] ಠಸರ} ೫ ಠೆ GJGJ ٤٨؟٥ @लन[ UUN - ShareChat
#मेरे विचार #🙏 प्रेरणादायक विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏गीता ज्ञान🛕 #❤️जीवन की सीख
मेरे विचार - 1 मई खुद से बहस करोगे तो सारे सवालों के जवाब मिल जाएंगे ! से करोगे तो दुसरो अगर और नये सवाल खड़े हो जायेंगे !! जब मनुष्य अपनी ग़लती का वकील और की गलतियों का जज बन जाता है दूसरों तो फैसले नही फासले हो जाते हैं। MN 1 मई खुद से बहस करोगे तो सारे सवालों के जवाब मिल जाएंगे ! से करोगे तो दुसरो अगर और नये सवाल खड़े हो जायेंगे !! जब मनुष्य अपनी ग़लती का वकील और की गलतियों का जज बन जाता है दूसरों तो फैसले नही फासले हो जाते हैं। MN - ShareChat