MUKESH Nagar
ShareChat
click to see wallet page
@mukeshkhujner
mukeshkhujner
MUKESH Nagar
@mukeshkhujner
व्यस्त रहें, मस्त रहें
#🙏गीता ज्ञान🛕 #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏 प्रेरणादायक विचार #मेरे विचार
🙏गीता ज्ञान🛕 - अप्रकाशोउप्रवृत्तिश्च प्रमादो मोह एव च। तमस्येतानि जायन्ते विवृद्धे   कुरुनन्दन ।। हे अर्जुन ! तमोगुणके वढ़नेपर अन्तःकरण और इन्द्रियोंमें अप्रकाश, कर्तव्य-कर्मोंमें अप्रवृत्ति और प्रमाद अर्थात् व्यर्थ चेष्टा और निद्रादि अन्तःकरणकी मोहिनी वृत्तियाँ ~ये सव ही उत्पन्न होते हैं II १३ II यदा सत्त्वे प्रवृद्धे तु प्रलयं याति देहभृत्। तदोत्तमविदां लोकानमलान्प्रतिपद्यते ।। यह मनुप्य सत्त्वगुणको वृद्धिमें मृत्युको Jq तव तो उत्तम कर्म करनेवालौंके प्राप्त होता हैं, निर्मल दिव्य स्वर्गादि लोकौंको प्राप्त होता हैं Il १४ II रजसि  प्रलयं गत्वा कर्मसङ्गिपु  जायते। प्रलीनस्तमसि   मूढयोनिपु ತTಾಗ Il तथा रजोगुणके वढ़नेपर मृत्युको प्राप्त होकर कर्मोंको आसक्तिवाले   मनुप्योंमें 8; কানা उत्पत्न तथा तमोगुणके चढ़नेपर मरा हुआ मनुप्य कीट, पशु आदि  मूढ़योनियोंमें होता   है Il १५ II उत्पन्न श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार अप्रकाशोउप्रवृत्तिश्च प्रमादो मोह एव च। तमस्येतानि जायन्ते विवृद्धे   कुरुनन्दन ।। हे अर्जुन ! तमोगुणके वढ़नेपर अन्तःकरण और इन्द्रियोंमें अप्रकाश, कर्तव्य-कर्मोंमें अप्रवृत्ति और प्रमाद अर्थात् व्यर्थ चेष्टा और निद्रादि अन्तःकरणकी मोहिनी वृत्तियाँ ~ये सव ही उत्पन्न होते हैं II १३ II यदा सत्त्वे प्रवृद्धे तु प्रलयं याति देहभृत्। तदोत्तमविदां लोकानमलान्प्रतिपद्यते ।। यह मनुप्य सत्त्वगुणको वृद्धिमें मृत्युको Jq तव तो उत्तम कर्म करनेवालौंके प्राप्त होता हैं, निर्मल दिव्य स्वर्गादि लोकौंको प्राप्त होता हैं Il १४ II रजसि  प्रलयं गत्वा कर्मसङ्गिपु  जायते। प्रलीनस्तमसि   मूढयोनिपु ತTಾಗ Il तथा रजोगुणके वढ़नेपर मृत्युको प्राप्त होकर कर्मोंको आसक्तिवाले   मनुप्योंमें 8; কানা उत्पत्न तथा तमोगुणके चढ़नेपर मरा हुआ मनुप्य कीट, पशु आदि  मूढ़योनियोंमें होता   है Il १५ II उत्पन्न श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat
#मेरे विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #🙏गीता ज्ञान🛕
मेरे विचार - 06 भई 3 दूसरों सहायता और सेवा करना बड़ी उत्तम बात है॰ पर यह तभी हो सकता है॰ जब तुम र्वयं सच्चे और पवित्र बनने का प्रयास करों। Mn 06 भई 3 दूसरों सहायता और सेवा करना बड़ी उत्तम बात है॰ पर यह तभी हो सकता है॰ जब तुम र्वयं सच्चे और पवित्र बनने का प्रयास करों। Mn - ShareChat
#🙏 प्रेरणादायक विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏गीता ज्ञान🛕 #❤️जीवन की सीख #मेरे विचार
🙏 प्रेरणादायक विचार - शब्दों में जिम्मेदारी झलकनी चाहिए 6 मई क्योंकि आपको बहुत से लोग पढ़ते व हैं और उसी का अनुपालन सुनते किया करतें हैं. . लेकिन अपने अन्दर का बचपना हमेशा जिंदा रखें क्योंकि ज्यादा समझदारी , जीवन को उबाऊ बना देती है। MN शब्दों में जिम्मेदारी झलकनी चाहिए 6 मई क्योंकि आपको बहुत से लोग पढ़ते व हैं और उसी का अनुपालन सुनते किया करतें हैं. . लेकिन अपने अन्दर का बचपना हमेशा जिंदा रखें क्योंकि ज्यादा समझदारी , जीवन को उबाऊ बना देती है। MN - ShareChat
#मेरे विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार
मेरे विचार - ये जरूरी नहीं कि, 5 ) के लिए शरीर ही, पुनर्जन्म त्यागा जाए, कईं बार विचारों में परिवर्तन से भी पुनर्जन्म हो जाता है. MN ये जरूरी नहीं कि, 5 ) के लिए शरीर ही, पुनर्जन्म त्यागा जाए, कईं बार विचारों में परिवर्तन से भी पुनर्जन्म हो जाता है. MN - ShareChat
#📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏 प्रेरणादायक विचार #❤️जीवन की सीख #मेरे विचार
📖जीवन का लक्ष्य🤔 - 05 मई चुप रहना एक कला ही नही वाकप्रवीणता 4 81 N 05 मई चुप रहना एक कला ही नही वाकप्रवीणता 4 81 N - ShareChat
#मेरे विचार #🙏 प्रेरणादायक विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔
मेरे विचार - रजस्तमश्चाभिभूय भवति মন भारत | रजः सत्त्वं तमश्चैव तमः सत्त्वं रजस्तथा II रजोगुण  37 mಗಾ ಕಾಾ್ ೯ 3ತ್೯! सत्त्वगुण, सत्त्वगुण और तमोगुणको दवाकर रजोगुण और  वैसे ही सत्त्वगुण रजोगुणको दवाकर तमोगुण होता हैं अर्थात् वढ़ता हैंIl १० Il Hdangூ देहेउस्मिन्प्रकाश ತಂೆಾಗ / ज्ञानं यदा तदा विद्याद्विवृद्धं सत्त्वमित्युत I। जिस समय इस देहमें तथा अन्तःकरण और इन्द्रियोंमें चेतनता और विवेकशक्ति उत्पन्न होती हैं, उस समय ऐसा जानना चाहिये कि सत्त्वगुण बढ़ा है Il ११ II लोभः प्रवृत्तिरारम्भः कर्मणामशमः स्पृहा। रजस्येतानि जायन्ते   विवृद्धे भरतर्पभ ।। हे अर्जुन! रजोगुणके वढ़नेपर लोभ॰ प्रवृत्ति, स्वार्थवुद्धिसे सकामभावसे कर्मोंका आरम्भ, अशान्ति और विपयभोगोंको लालसाये ٦٩ उत्पन्न होते हैँं Il  १२ Il श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार रजस्तमश्चाभिभूय भवति মন भारत | रजः सत्त्वं तमश्चैव तमः सत्त्वं रजस्तथा II रजोगुण  37 mಗಾ ಕಾಾ್ ೯ 3ತ್೯! सत्त्वगुण, सत्त्वगुण और तमोगुणको दवाकर रजोगुण और  वैसे ही सत्त्वगुण रजोगुणको दवाकर तमोगुण होता हैं अर्थात् वढ़ता हैंIl १० Il Hdangூ देहेउस्मिन्प्रकाश ತಂೆಾಗ / ज्ञानं यदा तदा विद्याद्विवृद्धं सत्त्वमित्युत I। जिस समय इस देहमें तथा अन्तःकरण और इन्द्रियोंमें चेतनता और विवेकशक्ति उत्पन्न होती हैं, उस समय ऐसा जानना चाहिये कि सत्त्वगुण बढ़ा है Il ११ II लोभः प्रवृत्तिरारम्भः कर्मणामशमः स्पृहा। रजस्येतानि जायन्ते   विवृद्धे भरतर्पभ ।। हे अर्जुन! रजोगुणके वढ़नेपर लोभ॰ प्रवृत्ति, स्वार्थवुद्धिसे सकामभावसे कर्मोंका आरम्भ, अशान्ति और विपयभोगोंको लालसाये ٦٩ उत्पन्न होते हैँं Il  १२ Il श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏गीता ज्ञान🛕 #मेरे विचार
❤️जीवन की सीख - 5 45 ये जरूरी नहीं कि, के लिए शरीर ही , पुनर्जन्म त्यागा जाए, ক$ ব্রয বিব্রাহী ম এ্তিবরনন पुनर्जन्म हो जाता है. . भी  eনননরনবনবন  যনেমনমনবনবি বেনেনববেনুননিতে Fafaare =8; Fa गबवताई 7 Gt a 147 7a711161 মেমলশনমনলনবননমনাবাননj ববন  ভোলন্নলামহা  সবমনানণনমাল৭: সীভসনলুনাবননিমবে MN চর্ননদশোনন    5 গনুমননম 551 चसला 5 45 ये जरूरी नहीं कि, के लिए शरीर ही , पुनर्जन्म त्यागा जाए, ক$ ব্রয বিব্রাহী ম এ্তিবরনন पुनर्जन्म हो जाता है. . भी  eনননরনবনবন  যনেমনমনবনবি বেনেনববেনুননিতে Fafaare =8; Fa गबवताई 7 Gt a 147 7a711161 মেমলশনমনলনবননমনাবাননj ববন  ভোলন্নলামহা  সবমনানণনমাল৭: সীভসনলুনাবননিমবে MN চর্ননদশোনন    5 গনুমননম 551 चसला - ShareChat
#मेरे विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏 प्रेरणादायक विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 #❤️जीवन की सीख
मेरे विचार - 5 45 ये जरूरी नहीं कि, के लिए शरीर ही , पुनर्जन्म त्यागा जाए, ক$ ব্রয বিব্রাহী ম এ্তিবরনন पुनर्जन्म हो जाता है. . भी  eনননরনবনবন  যনেমনমনবনবি বেনেনববেনুননিতে Fafaare =8; Fa गबवताई 7 Gt a 147 7a711161 মেমলশনমনলনবননমনাবাননj ববন  ভোলন্নলামহা  সবমনানণনমাল৭: সীভসনলুনাবননিমবে MN চর্ননদশোনন    5 গনুমননম 551 चसला 5 45 ये जरूरी नहीं कि, के लिए शरीर ही , पुनर्जन्म त्यागा जाए, ক$ ব্রয বিব্রাহী ম এ্তিবরনন पुनर्जन्म हो जाता है. . भी  eনননরনবনবন  যনেমনমনবনবি বেনেনববেনুননিতে Fafaare =8; Fa गबवताई 7 Gt a 147 7a711161 মেমলশনমনলনবননমনাবাননj ববন  ভোলন্নলামহা  সবমনানণনমাল৭: সীভসনলুনাবননিমবে MN চর্ননদশোনন    5 গনুমননম 551 चसला - ShareChat
#मेरे विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏 प्रेरणादायक विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 #❤️जीवन की सीख
मेरे विचार - 05 मई चुप रहना एक कला ही नहीं, वाक्प्रवीणता 9f-8 48 MN 05 मई चुप रहना एक कला ही नहीं, वाक्प्रवीणता 9f-8 48 MN - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏 प्रेरणादायक विचार #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #मेरे विचार
🙏गीता ज्ञान🛕 - रजो रागात्मकं विद्धि तृष्णासङ्गसमुद्भवम्। तन्निबध्नाति कौन्तेय कर्मसङ्गेन देहिनम्।। हे अर्जुन! रागरूप रजोगुणको कामना और आसक्तिसे उत्पन्न जान | वह इस जीवात्माको कर्मोंके 377 ತಗ ಊ೯ಫ ಗಸ ೫೪m ೯ Il ಅ Il तमस्त्वज्ञानजं विद्धि मोहनं सर्वदेहिनाम्। प्रमादालस्यनिद्राभिस्तन्निबध्नाति থানে Il हे अर्जून ! सव देहाभिमानियौंको मोहित करनेवाले तमोगुणको तो अज्ञानसे उत्पन्न जान। वह इस जीवात्माको प्रमाद१ और निद्राके द्वारा आलस्य चाँधता हैं II ८ II सत्त्वं सुखे सञ्जयति रजः कर्मणि भारत। तमः प्रमादे   सञ्जयत्युत Il तु সানমান लगाता हैं और हे अर्जुन! सत्त्वगुण सुखमें रजोगुण कर्ममें तथा तमोगुण तो ज्ञानको ढककर সমানম সা লপানা ইঁ II ? Il इन्द्रियों और अन्तःकरणको व्यर्थ चेष्टाओंका नाम ' प्रमाद ' है। ?. २. कर्तव्य-क्मंमें अप्रवृत्तिरूप निरुद्यमताका नाम ' आलस्य ' हैं। श्रीमद्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार रजो रागात्मकं विद्धि तृष्णासङ्गसमुद्भवम्। तन्निबध्नाति कौन्तेय कर्मसङ्गेन देहिनम्।। हे अर्जुन! रागरूप रजोगुणको कामना और आसक्तिसे उत्पन्न जान | वह इस जीवात्माको कर्मोंके 377 ತಗ ಊ೯ಫ ಗಸ ೫೪m ೯ Il ಅ Il तमस्त्वज्ञानजं विद्धि मोहनं सर्वदेहिनाम्। प्रमादालस्यनिद्राभिस्तन्निबध्नाति থানে Il हे अर्जून ! सव देहाभिमानियौंको मोहित करनेवाले तमोगुणको तो अज्ञानसे उत्पन्न जान। वह इस जीवात्माको प्रमाद१ और निद्राके द्वारा आलस्य चाँधता हैं II ८ II सत्त्वं सुखे सञ्जयति रजः कर्मणि भारत। तमः प्रमादे   सञ्जयत्युत Il तु সানমান लगाता हैं और हे अर्जुन! सत्त्वगुण सुखमें रजोगुण कर्ममें तथा तमोगुण तो ज्ञानको ढककर সমানম সা লপানা ইঁ II ? Il इन्द्रियों और अन्तःकरणको व्यर्थ चेष्टाओंका नाम ' प्रमाद ' है। ?. २. कर्तव्य-क्मंमें अप्रवृत्तिरूप निरुद्यमताका नाम ' आलस्य ' हैं। श्रीमद्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat