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#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏 प्रेरणादायक विचार #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #मेरे विचार
🙏गीता ज्ञान🛕 - रजो रागात्मकं विद्धि तृष्णासङ्गसमुद्भवम्। तन्निबध्नाति कौन्तेय कर्मसङ्गेन देहिनम्।। हे अर्जुन! रागरूप रजोगुणको कामना और आसक्तिसे उत्पन्न जान | वह इस जीवात्माको कर्मोंके 377 ತಗ ಊ೯ಫ ಗಸ ೫೪m ೯ Il ಅ Il तमस्त्वज्ञानजं विद्धि मोहनं सर्वदेहिनाम्। प्रमादालस्यनिद्राभिस्तन्निबध्नाति থানে Il हे अर्जून ! सव देहाभिमानियौंको मोहित करनेवाले तमोगुणको तो अज्ञानसे उत्पन्न जान। वह इस जीवात्माको प्रमाद१ और निद्राके द्वारा आलस्य चाँधता हैं II ८ II सत्त्वं सुखे सञ्जयति रजः कर्मणि भारत। तमः प्रमादे   सञ्जयत्युत Il तु সানমান लगाता हैं और हे अर्जुन! सत्त्वगुण सुखमें रजोगुण कर्ममें तथा तमोगुण तो ज्ञानको ढककर সমানম সা লপানা ইঁ II ? Il इन्द्रियों और अन्तःकरणको व्यर्थ चेष्टाओंका नाम ' प्रमाद ' है। ?. २. कर्तव्य-क्मंमें अप्रवृत्तिरूप निरुद्यमताका नाम ' आलस्य ' हैं। श्रीमद्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार रजो रागात्मकं विद्धि तृष्णासङ्गसमुद्भवम्। तन्निबध्नाति कौन्तेय कर्मसङ्गेन देहिनम्।। हे अर्जुन! रागरूप रजोगुणको कामना और आसक्तिसे उत्पन्न जान | वह इस जीवात्माको कर्मोंके 377 ತಗ ಊ೯ಫ ಗಸ ೫೪m ೯ Il ಅ Il तमस्त्वज्ञानजं विद्धि मोहनं सर्वदेहिनाम्। प्रमादालस्यनिद्राभिस्तन्निबध्नाति থানে Il हे अर्जून ! सव देहाभिमानियौंको मोहित करनेवाले तमोगुणको तो अज्ञानसे उत्पन्न जान। वह इस जीवात्माको प्रमाद१ और निद्राके द्वारा आलस्य चाँधता हैं II ८ II सत्त्वं सुखे सञ्जयति रजः कर्मणि भारत। तमः प्रमादे   सञ्जयत्युत Il तु সানমান लगाता हैं और हे अर्जुन! सत्त्वगुण सुखमें रजोगुण कर्ममें तथा तमोगुण तो ज्ञानको ढककर সমানম সা লপানা ইঁ II ? Il इन्द्रियों और अन्तःकरणको व्यर्थ चेष्टाओंका नाम ' प्रमाद ' है। ?. २. कर्तव्य-क्मंमें अप्रवृत्तिरूप निरुद्यमताका नाम ' आलस्य ' हैं। श्रीमद्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat
#मेरे विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏 प्रेरणादायक विचार #❤️जीवन की सीख #🙏गीता ज्ञान🛕
मेरे विचार - 04 मई   यदि मनुष्य ao सीखना নী ভঙকী प्रत्येक भूल उसे कुछ न कुछ सीखा देती है। [N 04 मई   यदि मनुष्य ao सीखना নী ভঙকী प्रत्येक भूल उसे कुछ न कुछ सीखा देती है। [N - ShareChat
#मेरे विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏 प्रेरणादायक विचार #❤️जीवन की सीख #🙏गीता ज्ञान🛕
मेरे विचार - यदि मनुष्य 0 &S सीखना चाहे, तो उसकी प्रत्येक भूल उसे कुछ न कुछ सीखा देती है। ٥٨ मई मनमुटाव और नदी का उदगम बहुत छोटा होता है.. க जैसे -्जैसे ये आगे बढ़ते हैं. . विशाल  रूप धारण कर लेते हैं . MN यदि मनुष्य 0 &S सीखना चाहे, तो उसकी प्रत्येक भूल उसे कुछ न कुछ सीखा देती है। ٥٨ मई मनमुटाव और नदी का उदगम बहुत छोटा होता है.. க जैसे -्जैसे ये आगे बढ़ते हैं. . विशाल  रूप धारण कर लेते हैं . MN - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏 प्रेरणादायक विचार #मेरे विचार
❤️जीवन की सीख - सर्वयोनिपु कौन्तेय मूर्तयः सम्भवन्ति याः | तासां ब्रह्म महद्योनिरहं बीजप्रदः पिता II हे अर्जुन ! नाना प्रकारको सव योनियोंमें जितनी अर्थात् शरीरधारी प्राणी उत्पन्न होते हैेँ, मूर्तियाँ प्रकृति तो उन सवकी गर्भ धारण करनेवाली माता है और मैँ चीजको स्थापन करनेवाला पिता हूँ II ४ I१ सत्त्वं रजस्तम इति गुणाः प्रकृतिसम्भवाः 1 निबध्नन्ति महाबाहो देहे देहिनमव्ययम् | हे अर्जुन ! सत्त्वगुण, रजोगुण और तमोगुण-ये उत्पन्न तीनों गुण अविनाशी जीवात्माको प्रकृतिसे शरीरमें चाँधते हैं Il ५ Il तत्र सत्त्वं निर्मलत्वात्प्रकाशकमनामयम् | सुखसङ्गेन बध्नाति   ज्ञानसङ्गेन चानघ ।। सत्त्वगुण तो তন   নীনী हे   निप्पाप ! गुणोंमें निर्मल होनेके कारण प्रकाश करनेवाला और विकाररहित , 46 सम्चन्धसे और ज्ञानके सम्चन्धसे सुखके अर्थात् उसके अभिमानसे चाँधता है Il ६ Il श्रीमद्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार सर्वयोनिपु कौन्तेय मूर्तयः सम्भवन्ति याः | तासां ब्रह्म महद्योनिरहं बीजप्रदः पिता II हे अर्जुन ! नाना प्रकारको सव योनियोंमें जितनी अर्थात् शरीरधारी प्राणी उत्पन्न होते हैेँ, मूर्तियाँ प्रकृति तो उन सवकी गर्भ धारण करनेवाली माता है और मैँ चीजको स्थापन करनेवाला पिता हूँ II ४ I१ सत्त्वं रजस्तम इति गुणाः प्रकृतिसम्भवाः 1 निबध्नन्ति महाबाहो देहे देहिनमव्ययम् | हे अर्जुन ! सत्त्वगुण, रजोगुण और तमोगुण-ये उत्पन्न तीनों गुण अविनाशी जीवात्माको प्रकृतिसे शरीरमें चाँधते हैं Il ५ Il तत्र सत्त्वं निर्मलत्वात्प्रकाशकमनामयम् | सुखसङ्गेन बध्नाति   ज्ञानसङ्गेन चानघ ।। सत्त्वगुण तो তন   নীনী हे   निप्पाप ! गुणोंमें निर्मल होनेके कारण प्रकाश करनेवाला और विकाररहित , 46 सम्चन्धसे और ज्ञानके सम्चन्धसे सुखके अर्थात् उसके अभिमानसे चाँधता है Il ६ Il श्रीमद्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat
#मेरे विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏 प्रेरणादायक विचार #❤️जीवन की सीख
मेरे विचार - 5iqa@ @16 @ 3 5 இபுஞ் 9ச3 அலி அடஅவிர নত্রী ঝত্ ঞ্জঝএবী গঞ্জবে] জ্তরে জজাঙজঞ্খী অঙ্খী} ঞজান अगार कुख्कुराहृुढ कै @ि९ இஅபp ಊಟ೯ @@ @[ ತಡ@@್ @[@? নীী ঞ্তভ্রী ঞ্ী ঞ্জাতু ঞ্তজুঞ্জখী ঐ্ী ডিতু श्िढायत् कैखी ` MN 5iqa@ @16 @ 3 5 இபுஞ் 9ச3 அலி அடஅவிர নত্রী ঝত্ ঞ্জঝএবী গঞ্জবে] জ্তরে জজাঙজঞ্খী অঙ্খী} ঞজান अगार कुख्कुराहृुढ कै @ि९ இஅபp ಊಟ೯ @@ @[ ತಡ@@್ @[@? নীী ঞ্তভ্রী ঞ্ী ঞ্জাতু ঞ্তজুঞ্জখী ঐ্ী ডিতু श्िढायत् कैखी ` MN - ShareChat
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🙏 प्रेरणादायक विचार - 03 भई बड़ों का आदर करना , छोटों को सलाह देना , बुद्धि मानों रे सलाह লনা , सेन ؟ उलझना। ये चार बातें नही चाहिये भूलनी MN 03 भई बड़ों का आदर करना , छोटों को सलाह देना , बुद्धि मानों रे सलाह লনা , सेन ؟ उलझना। ये चार बातें नही चाहिये भूलनी MN - ShareChat
#मेरे विचार #❤️जीवन की सीख #🙏गीता ज्ञान🛕 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏 प्रेरणादायक विचार
मेरे विचार - रहना है तो, दुःखी 2 सब मे कमी खोजो और प्रसन्न रहना है, तो सब में गुण खोजो। विचारों को पढ़कर बदलाव नही आता है विचारों पर चलकर ही बदलाव आता है। MN रहना है तो, दुःखी 2 सब मे कमी खोजो और प्रसन्न रहना है, तो सब में गुण खोजो। विचारों को पढ़कर बदलाव नही आता है विचारों पर चलकर ही बदलाव आता है। MN - ShareChat
#📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 #मेरे विचार
📖जीवन का लक्ष्य🤔 - चतुर्दशोउध्यायः अथ श्रीभगवानुवाच परं भूयः प्रवक्ष्यामि ज्ञानानां ज्ञानमुत्तमम्। यज्ज्ञात्वा मुनयः सर्वे परां सिद्धिमितो गताः II श्रीभगवान् वोले- ज्ञानोंमें भी अति उत्तम उसा ज्ञानको मैं फिर कहूँगा , जिसको जानकर सवो परम मुनिजन इस संसारसे मुक्त होकर परम सिद्धिको प्राप्त हाे गये हैं Il१Il इदं   ज्ञानमुपाश्रित्य साधर्म्यमागताः | मम सर्गेउपि नोपजायन्ते प्रलये न व्यथन्ति च।। इस ज्ञानको आश्रय करके अर्थात् धारण करके मैरे स्वरूपको प्राप्त हुए पुरुप  आदिमें पुनः उत्पन्न सृष्टिके नहीं होते और प्रलयकालमें भी व्याकुल नहीं होते II २ II  योनिर्महद्ब्रह्म तस्मिन्गर्भं दधाम्यहम्। मम सम्भवः सर्वभूतानां ततो भवति भारत I। हे अर्जुन! मेरी महत्-व्रह्मरूप मूल प्रकृति योनि है अर्थात गर्भाधानका स्थान ஈர भूतोंको है और मैँ उस योनिमें चेतन समुदायरूप गर्भको हूँ |उस जड-चेतनके संयोगसे सव থণন কনো उत्पत्ति होती हैIl ३ Il भूतोंको श्रीमद्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार चतुर्दशोउध्यायः अथ श्रीभगवानुवाच परं भूयः प्रवक्ष्यामि ज्ञानानां ज्ञानमुत्तमम्। यज्ज्ञात्वा मुनयः सर्वे परां सिद्धिमितो गताः II श्रीभगवान् वोले- ज्ञानोंमें भी अति उत्तम उसा ज्ञानको मैं फिर कहूँगा , जिसको जानकर सवो परम मुनिजन इस संसारसे मुक्त होकर परम सिद्धिको प्राप्त हाे गये हैं Il१Il इदं   ज्ञानमुपाश्रित्य साधर्म्यमागताः | मम सर्गेउपि नोपजायन्ते प्रलये न व्यथन्ति च।। इस ज्ञानको आश्रय करके अर्थात् धारण करके मैरे स्वरूपको प्राप्त हुए पुरुप  आदिमें पुनः उत्पन्न सृष्टिके नहीं होते और प्रलयकालमें भी व्याकुल नहीं होते II २ II  योनिर्महद्ब्रह्म तस्मिन्गर्भं दधाम्यहम्। मम सम्भवः सर्वभूतानां ततो भवति भारत I। हे अर्जुन! मेरी महत्-व्रह्मरूप मूल प्रकृति योनि है अर्थात गर्भाधानका स्थान ஈர भूतोंको है और मैँ उस योनिमें चेतन समुदायरूप गर्भको हूँ |उस जड-चेतनके संयोगसे सव থণন কনো उत्पत्ति होती हैIl ३ Il भूतोंको श्रीमद्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat
#मेरे विचार #🙏 प्रेरणादायक विचार #❤️जीवन की सीख #🙏गीता ज्ञान🛕 #📖जीवन का लक्ष्य🤔
मेरे विचार - 02 ఓకే सज्जनों के साथ नर्क में रहना अच्छा के साथ स्वर्ग दुर्जनों पर में रहना अच्छा नही क्योंकि सज्जन लोग अपने पुनीत कर्तव्यों से नर्क को भी स्वर्ग बना लेते है और लोग दुर्जन ನಾ್ಹ ಭ ಹಾಹ ತಳ नर्क बना डालेंगे। ٨٨ 02 ఓకే सज्जनों के साथ नर्क में रहना अच्छा के साथ स्वर्ग दुर्जनों पर में रहना अच्छा नही क्योंकि सज्जन लोग अपने पुनीत कर्तव्यों से नर्क को भी स्वर्ग बना लेते है और लोग दुर्जन ನಾ್ಹ ಭ ಹಾಹ ತಳ नर्क बना डालेंगे। ٨٨ - ShareChat
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🙏गीता ज्ञान🛕 - है तो, 21 दुःखी 6I सब मे कमी खोजो और प्रसन्न रहना 8 तो सब में गुण खोजो। विचारों को पढ़कर बदलाव नही आता है विचारों पर चलकर ही बदलाव आता है। MN है तो, 21 दुःखी 6I सब मे कमी खोजो और प्रसन्न रहना 8 तो सब में गुण खोजो। विचारों को पढ़कर बदलाव नही आता है विचारों पर चलकर ही बदलाव आता है। MN - ShareChat