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#मेरे विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार
मेरे विचार - ये जरूरी नहीं कि, 5 ) के लिए शरीर ही, पुनर्जन्म त्यागा जाए, कईं बार विचारों में परिवर्तन से भी पुनर्जन्म हो जाता है. MN ये जरूरी नहीं कि, 5 ) के लिए शरीर ही, पुनर्जन्म त्यागा जाए, कईं बार विचारों में परिवर्तन से भी पुनर्जन्म हो जाता है. MN - ShareChat
#📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏 प्रेरणादायक विचार #❤️जीवन की सीख #मेरे विचार
📖जीवन का लक्ष्य🤔 - 05 मई चुप रहना एक कला ही नही वाकप्रवीणता 4 81 N 05 मई चुप रहना एक कला ही नही वाकप्रवीणता 4 81 N - ShareChat
#मेरे विचार #🙏 प्रेरणादायक विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔
मेरे विचार - रजस्तमश्चाभिभूय भवति মন भारत | रजः सत्त्वं तमश्चैव तमः सत्त्वं रजस्तथा II रजोगुण  37 mಗಾ ಕಾಾ್ ೯ 3ತ್೯! सत्त्वगुण, सत्त्वगुण और तमोगुणको दवाकर रजोगुण और  वैसे ही सत्त्वगुण रजोगुणको दवाकर तमोगुण होता हैं अर्थात् वढ़ता हैंIl १० Il Hdangூ देहेउस्मिन्प्रकाश ತಂೆಾಗ / ज्ञानं यदा तदा विद्याद्विवृद्धं सत्त्वमित्युत I। जिस समय इस देहमें तथा अन्तःकरण और इन्द्रियोंमें चेतनता और विवेकशक्ति उत्पन्न होती हैं, उस समय ऐसा जानना चाहिये कि सत्त्वगुण बढ़ा है Il ११ II लोभः प्रवृत्तिरारम्भः कर्मणामशमः स्पृहा। रजस्येतानि जायन्ते   विवृद्धे भरतर्पभ ।। हे अर्जुन! रजोगुणके वढ़नेपर लोभ॰ प्रवृत्ति, स्वार्थवुद्धिसे सकामभावसे कर्मोंका आरम्भ, अशान्ति और विपयभोगोंको लालसाये ٦٩ उत्पन्न होते हैँं Il  १२ Il श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार रजस्तमश्चाभिभूय भवति মন भारत | रजः सत्त्वं तमश्चैव तमः सत्त्वं रजस्तथा II रजोगुण  37 mಗಾ ಕಾಾ್ ೯ 3ತ್೯! सत्त्वगुण, सत्त्वगुण और तमोगुणको दवाकर रजोगुण और  वैसे ही सत्त्वगुण रजोगुणको दवाकर तमोगुण होता हैं अर्थात् वढ़ता हैंIl १० Il Hdangூ देहेउस्मिन्प्रकाश ತಂೆಾಗ / ज्ञानं यदा तदा विद्याद्विवृद्धं सत्त्वमित्युत I। जिस समय इस देहमें तथा अन्तःकरण और इन्द्रियोंमें चेतनता और विवेकशक्ति उत्पन्न होती हैं, उस समय ऐसा जानना चाहिये कि सत्त्वगुण बढ़ा है Il ११ II लोभः प्रवृत्तिरारम्भः कर्मणामशमः स्पृहा। रजस्येतानि जायन्ते   विवृद्धे भरतर्पभ ।। हे अर्जुन! रजोगुणके वढ़नेपर लोभ॰ प्रवृत्ति, स्वार्थवुद्धिसे सकामभावसे कर्मोंका आरम्भ, अशान्ति और विपयभोगोंको लालसाये ٦٩ उत्पन्न होते हैँं Il  १२ Il श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏गीता ज्ञान🛕 #मेरे विचार
❤️जीवन की सीख - 5 45 ये जरूरी नहीं कि, के लिए शरीर ही , पुनर्जन्म त्यागा जाए, ক$ ব্রয বিব্রাহী ম এ্তিবরনন पुनर्जन्म हो जाता है. . भी  eনননরনবনবন  যনেমনমনবনবি বেনেনববেনুননিতে Fafaare =8; Fa गबवताई 7 Gt a 147 7a711161 মেমলশনমনলনবননমনাবাননj ববন  ভোলন্নলামহা  সবমনানণনমাল৭: সীভসনলুনাবননিমবে MN চর্ননদশোনন    5 গনুমননম 551 चसला 5 45 ये जरूरी नहीं कि, के लिए शरीर ही , पुनर्जन्म त्यागा जाए, ক$ ব্রয বিব্রাহী ম এ্তিবরনন पुनर्जन्म हो जाता है. . भी  eনননরনবনবন  যনেমনমনবনবি বেনেনববেনুননিতে Fafaare =8; Fa गबवताई 7 Gt a 147 7a711161 মেমলশনমনলনবননমনাবাননj ববন  ভোলন্নলামহা  সবমনানণনমাল৭: সীভসনলুনাবননিমবে MN চর্ননদশোনন    5 গনুমননম 551 चसला - ShareChat
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मेरे विचार - 5 45 ये जरूरी नहीं कि, के लिए शरीर ही , पुनर्जन्म त्यागा जाए, ক$ ব্রয বিব্রাহী ম এ্তিবরনন पुनर्जन्म हो जाता है. . भी  eনননরনবনবন  যনেমনমনবনবি বেনেনববেনুননিতে Fafaare =8; Fa गबवताई 7 Gt a 147 7a711161 মেমলশনমনলনবননমনাবাননj ববন  ভোলন্নলামহা  সবমনানণনমাল৭: সীভসনলুনাবননিমবে MN চর্ননদশোনন    5 গনুমননম 551 चसला 5 45 ये जरूरी नहीं कि, के लिए शरीर ही , पुनर्जन्म त्यागा जाए, ক$ ব্রয বিব্রাহী ম এ্তিবরনন पुनर्जन्म हो जाता है. . भी  eনননরনবনবন  যনেমনমনবনবি বেনেনববেনুননিতে Fafaare =8; Fa गबवताई 7 Gt a 147 7a711161 মেমলশনমনলনবননমনাবাননj ববন  ভোলন্নলামহা  সবমনানণনমাল৭: সীভসনলুনাবননিমবে MN চর্ননদশোনন    5 গনুমননম 551 चसला - ShareChat
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मेरे विचार - 05 मई चुप रहना एक कला ही नहीं, वाक्प्रवीणता 9f-8 48 MN 05 मई चुप रहना एक कला ही नहीं, वाक्प्रवीणता 9f-8 48 MN - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏 प्रेरणादायक विचार #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #मेरे विचार
🙏गीता ज्ञान🛕 - रजो रागात्मकं विद्धि तृष्णासङ्गसमुद्भवम्। तन्निबध्नाति कौन्तेय कर्मसङ्गेन देहिनम्।। हे अर्जुन! रागरूप रजोगुणको कामना और आसक्तिसे उत्पन्न जान | वह इस जीवात्माको कर्मोंके 377 ತಗ ಊ೯ಫ ಗಸ ೫೪m ೯ Il ಅ Il तमस्त्वज्ञानजं विद्धि मोहनं सर्वदेहिनाम्। प्रमादालस्यनिद्राभिस्तन्निबध्नाति থানে Il हे अर्जून ! सव देहाभिमानियौंको मोहित करनेवाले तमोगुणको तो अज्ञानसे उत्पन्न जान। वह इस जीवात्माको प्रमाद१ और निद्राके द्वारा आलस्य चाँधता हैं II ८ II सत्त्वं सुखे सञ्जयति रजः कर्मणि भारत। तमः प्रमादे   सञ्जयत्युत Il तु সানমান लगाता हैं और हे अर्जुन! सत्त्वगुण सुखमें रजोगुण कर्ममें तथा तमोगुण तो ज्ञानको ढककर সমানম সা লপানা ইঁ II ? Il इन्द्रियों और अन्तःकरणको व्यर्थ चेष्टाओंका नाम ' प्रमाद ' है। ?. २. कर्तव्य-क्मंमें अप्रवृत्तिरूप निरुद्यमताका नाम ' आलस्य ' हैं। श्रीमद्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार रजो रागात्मकं विद्धि तृष्णासङ्गसमुद्भवम्। तन्निबध्नाति कौन्तेय कर्मसङ्गेन देहिनम्।। हे अर्जुन! रागरूप रजोगुणको कामना और आसक्तिसे उत्पन्न जान | वह इस जीवात्माको कर्मोंके 377 ತಗ ಊ೯ಫ ಗಸ ೫೪m ೯ Il ಅ Il तमस्त्वज्ञानजं विद्धि मोहनं सर्वदेहिनाम्। प्रमादालस्यनिद्राभिस्तन्निबध्नाति থানে Il हे अर्जून ! सव देहाभिमानियौंको मोहित करनेवाले तमोगुणको तो अज्ञानसे उत्पन्न जान। वह इस जीवात्माको प्रमाद१ और निद्राके द्वारा आलस्य चाँधता हैं II ८ II सत्त्वं सुखे सञ्जयति रजः कर्मणि भारत। तमः प्रमादे   सञ्जयत्युत Il तु সানমান लगाता हैं और हे अर्जुन! सत्त्वगुण सुखमें रजोगुण कर्ममें तथा तमोगुण तो ज्ञानको ढककर সমানম সা লপানা ইঁ II ? Il इन्द्रियों और अन्तःकरणको व्यर्थ चेष्टाओंका नाम ' प्रमाद ' है। ?. २. कर्तव्य-क्मंमें अप्रवृत्तिरूप निरुद्यमताका नाम ' आलस्य ' हैं। श्रीमद्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat
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मेरे विचार - 04 मई   यदि मनुष्य ao सीखना নী ভঙকী प्रत्येक भूल उसे कुछ न कुछ सीखा देती है। [N 04 मई   यदि मनुष्य ao सीखना নী ভঙকী प्रत्येक भूल उसे कुछ न कुछ सीखा देती है। [N - ShareChat
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मेरे विचार - यदि मनुष्य 0 &S सीखना चाहे, तो उसकी प्रत्येक भूल उसे कुछ न कुछ सीखा देती है। ٥٨ मई मनमुटाव और नदी का उदगम बहुत छोटा होता है.. க जैसे -्जैसे ये आगे बढ़ते हैं. . विशाल  रूप धारण कर लेते हैं . MN यदि मनुष्य 0 &S सीखना चाहे, तो उसकी प्रत्येक भूल उसे कुछ न कुछ सीखा देती है। ٥٨ मई मनमुटाव और नदी का उदगम बहुत छोटा होता है.. க जैसे -्जैसे ये आगे बढ़ते हैं. . विशाल  रूप धारण कर लेते हैं . MN - ShareChat
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❤️जीवन की सीख - सर्वयोनिपु कौन्तेय मूर्तयः सम्भवन्ति याः | तासां ब्रह्म महद्योनिरहं बीजप्रदः पिता II हे अर्जुन ! नाना प्रकारको सव योनियोंमें जितनी अर्थात् शरीरधारी प्राणी उत्पन्न होते हैेँ, मूर्तियाँ प्रकृति तो उन सवकी गर्भ धारण करनेवाली माता है और मैँ चीजको स्थापन करनेवाला पिता हूँ II ४ I१ सत्त्वं रजस्तम इति गुणाः प्रकृतिसम्भवाः 1 निबध्नन्ति महाबाहो देहे देहिनमव्ययम् | हे अर्जुन ! सत्त्वगुण, रजोगुण और तमोगुण-ये उत्पन्न तीनों गुण अविनाशी जीवात्माको प्रकृतिसे शरीरमें चाँधते हैं Il ५ Il तत्र सत्त्वं निर्मलत्वात्प्रकाशकमनामयम् | सुखसङ्गेन बध्नाति   ज्ञानसङ्गेन चानघ ।। सत्त्वगुण तो তন   নীনী हे   निप्पाप ! गुणोंमें निर्मल होनेके कारण प्रकाश करनेवाला और विकाररहित , 46 सम्चन्धसे और ज्ञानके सम्चन्धसे सुखके अर्थात् उसके अभिमानसे चाँधता है Il ६ Il श्रीमद्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार सर्वयोनिपु कौन्तेय मूर्तयः सम्भवन्ति याः | तासां ब्रह्म महद्योनिरहं बीजप्रदः पिता II हे अर्जुन ! नाना प्रकारको सव योनियोंमें जितनी अर्थात् शरीरधारी प्राणी उत्पन्न होते हैेँ, मूर्तियाँ प्रकृति तो उन सवकी गर्भ धारण करनेवाली माता है और मैँ चीजको स्थापन करनेवाला पिता हूँ II ४ I१ सत्त्वं रजस्तम इति गुणाः प्रकृतिसम्भवाः 1 निबध्नन्ति महाबाहो देहे देहिनमव्ययम् | हे अर्जुन ! सत्त्वगुण, रजोगुण और तमोगुण-ये उत्पन्न तीनों गुण अविनाशी जीवात्माको प्रकृतिसे शरीरमें चाँधते हैं Il ५ Il तत्र सत्त्वं निर्मलत्वात्प्रकाशकमनामयम् | सुखसङ्गेन बध्नाति   ज्ञानसङ्गेन चानघ ।। सत्त्वगुण तो তন   নীনী हे   निप्पाप ! गुणोंमें निर्मल होनेके कारण प्रकाश करनेवाला और विकाररहित , 46 सम्चन्धसे और ज्ञानके सम्चन्धसे सुखके अर्थात् उसके अभिमानसे चाँधता है Il ६ Il श्रीमद्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat