MUKESH Nagar
ShareChat
click to see wallet page
@mukeshkhujner
mukeshkhujner
MUKESH Nagar
@mukeshkhujner
व्यस्त रहें, मस्त रहें
#📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏 प्रेरणादायक विचार #मेरे विचार #❤️जीवन की सीख
📖जीवन का लक्ष्य🤔 - 7 W பரிசசி মীs 31& कभी हिम्मत् मेत हारना , क्योंकि तुम्हारी हिम्मत ही तुम्हें हर कठिनाई से बाहर निकालेगी MN 7 W பரிசசி মীs 31& कभी हिम्मत् मेत हारना , क्योंकि तुम्हारी हिम्मत ही तुम्हें हर कठिनाई से बाहर निकालेगी MN - ShareChat
#📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏गीता ज्ञान🛕 #❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #मेरे विचार
📖जीवन का लक्ष्य🤔 - 07 दुनिया के பS भाग्य को रेक ಹಾ Fಡಹಗೆ নালে নী ৪} ಡಿಂ काएण पहला अभिमान ढूसला घृणा| MN 07 दुनिया के பS भाग्य को रेक ಹಾ Fಡಹಗೆ নালে নী ৪} ಡಿಂ काएण पहला अभिमान ढूसला घृणा| MN - ShareChat
#मेरे विचार #❤️जीवन की सीख #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏 प्रेरणादायक विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔
मेरे विचार - कर्मणः सुकृतस्याहुः सात्त्विकं निर्मलं फलम्। रजसस्तु फलं दुःखमज्ञानं तमसः फलम् II श्रेष्ठ कर्मका तो सात्त्विक अर्थांत् सुख, ज्ञान और वैराग्यादि निर्मल फल कहा हैं; राजस कर्मका फल दुःख एवं तामस कर्मका फल अज्ञान कहा हैं II १६ II सत्त्वात्सञ्जायते ज्ञानं रजसो लोभ एव च। प्रमादमोहौ   तमसो   भवतोउ्ज्ञानमेव च।। सत्त्वगुणसे ज्ञान उत्पन्न होता हैं और रजोगुणसे  निस्सन्देह लोभ तथा तमोगुणसे प्रमाद * और मोह २ उत्पन्न होते हैॅं और अज्ञान भौ होता है Il १७ ।l ऊर्ध्वं गच्छन्ति सत्त्वस्था मध्ये तिष्ठन्ति राजसाः | जघन्यगुणवृत्तिस्था अधो गच्छन्ति तामसाः II  सत्त्वगुणमें स्थित पुरुप स्वर्गांदि उच्च लोकोंको  जाते हैं॰ रजोगुणमें स्थित राजस   पुरुप   मध्यमें अर्थांत् मनूष्यलोकमें होे रहते हैं और तमोगूणके प्रमाद और आलस्यादिमें स्थित AAl, कार्यरूप तामस पुरुप अधोगतिको अर्थात् कोट, पशु आदि नीच योनियोंको तथा नरकोंको प्राप्त होते हैं II १८ १I १-२. इसो अध्यायके श्लोक १३ में देखना चाहिये। श्रीमद्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार कर्मणः सुकृतस्याहुः सात्त्विकं निर्मलं फलम्। रजसस्तु फलं दुःखमज्ञानं तमसः फलम् II श्रेष्ठ कर्मका तो सात्त्विक अर्थांत् सुख, ज्ञान और वैराग्यादि निर्मल फल कहा हैं; राजस कर्मका फल दुःख एवं तामस कर्मका फल अज्ञान कहा हैं II १६ II सत्त्वात्सञ्जायते ज्ञानं रजसो लोभ एव च। प्रमादमोहौ   तमसो   भवतोउ्ज्ञानमेव च।। सत्त्वगुणसे ज्ञान उत्पन्न होता हैं और रजोगुणसे  निस्सन्देह लोभ तथा तमोगुणसे प्रमाद * और मोह २ उत्पन्न होते हैॅं और अज्ञान भौ होता है Il १७ ।l ऊर्ध्वं गच्छन्ति सत्त्वस्था मध्ये तिष्ठन्ति राजसाः | जघन्यगुणवृत्तिस्था अधो गच्छन्ति तामसाः II  सत्त्वगुणमें स्थित पुरुप स्वर्गांदि उच्च लोकोंको  जाते हैं॰ रजोगुणमें स्थित राजस   पुरुप   मध्यमें अर्थांत् मनूष्यलोकमें होे रहते हैं और तमोगूणके प्रमाद और आलस्यादिमें स्थित AAl, कार्यरूप तामस पुरुप अधोगतिको अर्थात् कोट, पशु आदि नीच योनियोंको तथा नरकोंको प्राप्त होते हैं II १८ १I १-२. इसो अध्यायके श्लोक १३ में देखना चाहिये। श्रीमद्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏 प्रेरणादायक विचार #मेरे विचार
🙏गीता ज्ञान🛕 - अप्रकाशोउप्रवृत्तिश्च प्रमादो मोह एव च। तमस्येतानि जायन्ते विवृद्धे   कुरुनन्दन ।। हे अर्जुन ! तमोगुणके वढ़नेपर अन्तःकरण और इन्द्रियोंमें अप्रकाश, कर्तव्य-कर्मोंमें अप्रवृत्ति और प्रमाद अर्थात् व्यर्थ चेष्टा और निद्रादि अन्तःकरणकी मोहिनी वृत्तियाँ ~ये सव ही उत्पन्न होते हैं II १३ II यदा सत्त्वे प्रवृद्धे तु प्रलयं याति देहभृत्। तदोत्तमविदां लोकानमलान्प्रतिपद्यते ।। यह मनुप्य सत्त्वगुणको वृद्धिमें मृत्युको Jq तव तो उत्तम कर्म करनेवालौंके प्राप्त होता हैं, निर्मल दिव्य स्वर्गादि लोकौंको प्राप्त होता हैं Il १४ II रजसि  प्रलयं गत्वा कर्मसङ्गिपु  जायते। प्रलीनस्तमसि   मूढयोनिपु ತTಾಗ Il तथा रजोगुणके वढ़नेपर मृत्युको प्राप्त होकर कर्मोंको आसक्तिवाले   मनुप्योंमें 8; কানা उत्पत्न तथा तमोगुणके चढ़नेपर मरा हुआ मनुप्य कीट, पशु आदि  मूढ़योनियोंमें होता   है Il १५ II उत्पन्न श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार अप्रकाशोउप्रवृत्तिश्च प्रमादो मोह एव च। तमस्येतानि जायन्ते विवृद्धे   कुरुनन्दन ।। हे अर्जुन ! तमोगुणके वढ़नेपर अन्तःकरण और इन्द्रियोंमें अप्रकाश, कर्तव्य-कर्मोंमें अप्रवृत्ति और प्रमाद अर्थात् व्यर्थ चेष्टा और निद्रादि अन्तःकरणकी मोहिनी वृत्तियाँ ~ये सव ही उत्पन्न होते हैं II १३ II यदा सत्त्वे प्रवृद्धे तु प्रलयं याति देहभृत्। तदोत्तमविदां लोकानमलान्प्रतिपद्यते ।। यह मनुप्य सत्त्वगुणको वृद्धिमें मृत्युको Jq तव तो उत्तम कर्म करनेवालौंके प्राप्त होता हैं, निर्मल दिव्य स्वर्गादि लोकौंको प्राप्त होता हैं Il १४ II रजसि  प्रलयं गत्वा कर्मसङ्गिपु  जायते। प्रलीनस्तमसि   मूढयोनिपु ತTಾಗ Il तथा रजोगुणके वढ़नेपर मृत्युको प्राप्त होकर कर्मोंको आसक्तिवाले   मनुप्योंमें 8; কানা उत्पत्न तथा तमोगुणके चढ़नेपर मरा हुआ मनुप्य कीट, पशु आदि  मूढ़योनियोंमें होता   है Il १५ II उत्पन्न श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat
#मेरे विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #🙏गीता ज्ञान🛕
मेरे विचार - 06 भई 3 दूसरों सहायता और सेवा करना बड़ी उत्तम बात है॰ पर यह तभी हो सकता है॰ जब तुम र्वयं सच्चे और पवित्र बनने का प्रयास करों। Mn 06 भई 3 दूसरों सहायता और सेवा करना बड़ी उत्तम बात है॰ पर यह तभी हो सकता है॰ जब तुम र्वयं सच्चे और पवित्र बनने का प्रयास करों। Mn - ShareChat
#🙏 प्रेरणादायक विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏गीता ज्ञान🛕 #❤️जीवन की सीख #मेरे विचार
🙏 प्रेरणादायक विचार - शब्दों में जिम्मेदारी झलकनी चाहिए 6 मई क्योंकि आपको बहुत से लोग पढ़ते व हैं और उसी का अनुपालन सुनते किया करतें हैं. . लेकिन अपने अन्दर का बचपना हमेशा जिंदा रखें क्योंकि ज्यादा समझदारी , जीवन को उबाऊ बना देती है। MN शब्दों में जिम्मेदारी झलकनी चाहिए 6 मई क्योंकि आपको बहुत से लोग पढ़ते व हैं और उसी का अनुपालन सुनते किया करतें हैं. . लेकिन अपने अन्दर का बचपना हमेशा जिंदा रखें क्योंकि ज्यादा समझदारी , जीवन को उबाऊ बना देती है। MN - ShareChat
#मेरे विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार
मेरे विचार - ये जरूरी नहीं कि, 5 ) के लिए शरीर ही, पुनर्जन्म त्यागा जाए, कईं बार विचारों में परिवर्तन से भी पुनर्जन्म हो जाता है. MN ये जरूरी नहीं कि, 5 ) के लिए शरीर ही, पुनर्जन्म त्यागा जाए, कईं बार विचारों में परिवर्तन से भी पुनर्जन्म हो जाता है. MN - ShareChat
#📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏 प्रेरणादायक विचार #❤️जीवन की सीख #मेरे विचार
📖जीवन का लक्ष्य🤔 - 05 मई चुप रहना एक कला ही नही वाकप्रवीणता 4 81 N 05 मई चुप रहना एक कला ही नही वाकप्रवीणता 4 81 N - ShareChat
#मेरे विचार #🙏 प्रेरणादायक विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔
मेरे विचार - रजस्तमश्चाभिभूय भवति মন भारत | रजः सत्त्वं तमश्चैव तमः सत्त्वं रजस्तथा II रजोगुण  37 mಗಾ ಕಾಾ್ ೯ 3ತ್೯! सत्त्वगुण, सत्त्वगुण और तमोगुणको दवाकर रजोगुण और  वैसे ही सत्त्वगुण रजोगुणको दवाकर तमोगुण होता हैं अर्थात् वढ़ता हैंIl १० Il Hdangூ देहेउस्मिन्प्रकाश ತಂೆಾಗ / ज्ञानं यदा तदा विद्याद्विवृद्धं सत्त्वमित्युत I। जिस समय इस देहमें तथा अन्तःकरण और इन्द्रियोंमें चेतनता और विवेकशक्ति उत्पन्न होती हैं, उस समय ऐसा जानना चाहिये कि सत्त्वगुण बढ़ा है Il ११ II लोभः प्रवृत्तिरारम्भः कर्मणामशमः स्पृहा। रजस्येतानि जायन्ते   विवृद्धे भरतर्पभ ।। हे अर्जुन! रजोगुणके वढ़नेपर लोभ॰ प्रवृत्ति, स्वार्थवुद्धिसे सकामभावसे कर्मोंका आरम्भ, अशान्ति और विपयभोगोंको लालसाये ٦٩ उत्पन्न होते हैँं Il  १२ Il श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार रजस्तमश्चाभिभूय भवति মন भारत | रजः सत्त्वं तमश्चैव तमः सत्त्वं रजस्तथा II रजोगुण  37 mಗಾ ಕಾಾ್ ೯ 3ತ್೯! सत्त्वगुण, सत्त्वगुण और तमोगुणको दवाकर रजोगुण और  वैसे ही सत्त्वगुण रजोगुणको दवाकर तमोगुण होता हैं अर्थात् वढ़ता हैंIl १० Il Hdangூ देहेउस्मिन्प्रकाश ತಂೆಾಗ / ज्ञानं यदा तदा विद्याद्विवृद्धं सत्त्वमित्युत I। जिस समय इस देहमें तथा अन्तःकरण और इन्द्रियोंमें चेतनता और विवेकशक्ति उत्पन्न होती हैं, उस समय ऐसा जानना चाहिये कि सत्त्वगुण बढ़ा है Il ११ II लोभः प्रवृत्तिरारम्भः कर्मणामशमः स्पृहा। रजस्येतानि जायन्ते   विवृद्धे भरतर्पभ ।। हे अर्जुन! रजोगुणके वढ़नेपर लोभ॰ प्रवृत्ति, स्वार्थवुद्धिसे सकामभावसे कर्मोंका आरम्भ, अशान्ति और विपयभोगोंको लालसाये ٦٩ उत्पन्न होते हैँं Il  १२ Il श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏गीता ज्ञान🛕 #मेरे विचार
❤️जीवन की सीख - 5 45 ये जरूरी नहीं कि, के लिए शरीर ही , पुनर्जन्म त्यागा जाए, ক$ ব্রয বিব্রাহী ম এ্তিবরনন पुनर्जन्म हो जाता है. . भी  eনননরনবনবন  যনেমনমনবনবি বেনেনববেনুননিতে Fafaare =8; Fa गबवताई 7 Gt a 147 7a711161 মেমলশনমনলনবননমনাবাননj ববন  ভোলন্নলামহা  সবমনানণনমাল৭: সীভসনলুনাবননিমবে MN চর্ননদশোনন    5 গনুমননম 551 चसला 5 45 ये जरूरी नहीं कि, के लिए शरीर ही , पुनर्जन्म त्यागा जाए, ক$ ব্রয বিব্রাহী ম এ্তিবরনন पुनर्जन्म हो जाता है. . भी  eনননরনবনবন  যনেমনমনবনবি বেনেনববেনুননিতে Fafaare =8; Fa गबवताई 7 Gt a 147 7a711161 মেমলশনমনলনবননমনাবাননj ববন  ভোলন্নলামহা  সবমনানণনমাল৭: সীভসনলুনাবননিমবে MN চর্ননদশোনন    5 গনুমননম 551 चसला - ShareChat