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#🇮🇳CISF sthapana divas 🇮🇳 #CISF स्थापना दिवस #l CISF स्थापना दिनाच्या हार्दिक शुभेच्छा⚔️🙏⚔️ #CISF DAY #CISF(Central
🇮🇳CISF sthapana divas 🇮🇳 - १० मार्च CISF {a स्थापना केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल का दिवस। स्थापना M٨ १० मार्च CISF {a स्थापना केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल का दिवस। स्थापना M٨ - ShareChat
#📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #मेरे विचार #🙏गीता ज्ञान🛕
📖जीवन का लक्ष्य🤔 - {0 জl৫] परोपकरणं येषाँ जागर्ति हदये सताम् | नश्यन्ति विपदस्तैषाँ सम्पदः स्यु पदै पदे जिसके हदय में सदा परोपकार की भावना है॰ उसको रहता विपदाय नष्ट हा जाता है थर पर्ग=्प्ग पर उसे सम्पत्तियाँ ( सहयोग ) ষ্ীরনী ঔ ! Tcc MN {0 জl৫] परोपकरणं येषाँ जागर्ति हदये सताम् | नश्यन्ति विपदस्तैषाँ सम्पदः स्यु पदै पदे जिसके हदय में सदा परोपकार की भावना है॰ उसको रहता विपदाय नष्ट हा जाता है थर पर्ग=्प्ग पर उसे सम्पत्तियाँ ( सहयोग ) ষ্ীরনী ঔ ! Tcc MN - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #श्रीमद्भगवद् गीता #❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔
🙏गीता ज्ञान🛕 - स्वधाहमहमौषधम्। क्रतुरहं अहं 45: मन्त्रो ्हमहमेवाज्यमहमग्निरहं g7{II क्रतु मैं हूँ॰ यज्ञ मैँ हूँ स्वधा मैँ हूँ॰ ओपधि मैँ हूँ॰ मन्त्र मैं हूँ॰ घृत मैँ हूँ, अग्नि मैँ हूँ और हवनरूप क्रिया भी मैँ ही हूँ Il १६ Il पिताहमस्य जगतो माता धाता पितामहः | पवित्रमोङ्कार ऋक्साम  यजुरेव নহ च।। इस सम्पूर्ण जगत्का धाता अर्थात् धारण करनेवाला एवं कर्मोंके फलको देनेवाला, পিনা, माता, पितामह, जाननेयोग्य " पवित्र ओंकार तथा ऋग्वेद, सामवेद 8 भी मैँ हो हूँ Il १७ Il और यजुर्वेद गतिर्भर्ता प्रभुः साक्षी निवासः शरणं सुहृत्। प्रभवः प्रलयः स्थानं निधानं बीजमव्ययम् I। होनेयोग्य परम धाम , भरण- पोपण करनेवाला, प्राप्त सबका स्वामो, शुभाशुभका देखनेवाला सबका वासस्थान, शरण लेनेयोग्य, प्रत्युपकार न चाहकर हित करनेवाला, सबकी उत्पत्ति-प्रलयका हेतु स्थितिका आधार, निधान२ और अविनाशी कारण भी मैँ ही हूँ Il १८ II गोता अध्याय १३ श्लोक १२ से १७ तकमें देखना चाहिये। भूत सूक्ष्मरूपसे जिसमें लय होते हैँ २. प्रलयकालमें ٦g9| নাপ 'নিখান' ; | उसक श्रीमदभगवदगीता अध्याय 9 प्रेस , गोरखपुर से साभार যীলা स्वधाहमहमौषधम्। क्रतुरहं अहं 45: मन्त्रो ्हमहमेवाज्यमहमग्निरहं g7{II क्रतु मैं हूँ॰ यज्ञ मैँ हूँ स्वधा मैँ हूँ॰ ओपधि मैँ हूँ॰ मन्त्र मैं हूँ॰ घृत मैँ हूँ, अग्नि मैँ हूँ और हवनरूप क्रिया भी मैँ ही हूँ Il १६ Il पिताहमस्य जगतो माता धाता पितामहः | पवित्रमोङ्कार ऋक्साम  यजुरेव নহ च।। इस सम्पूर्ण जगत्का धाता अर्थात् धारण करनेवाला एवं कर्मोंके फलको देनेवाला, পিনা, माता, पितामह, जाननेयोग्य " पवित्र ओंकार तथा ऋग्वेद, सामवेद 8 भी मैँ हो हूँ Il १७ Il और यजुर्वेद गतिर्भर्ता प्रभुः साक्षी निवासः शरणं सुहृत्। प्रभवः प्रलयः स्थानं निधानं बीजमव्ययम् I। होनेयोग्य परम धाम , भरण- पोपण करनेवाला, प्राप्त सबका स्वामो, शुभाशुभका देखनेवाला सबका वासस्थान, शरण लेनेयोग्य, प्रत्युपकार न चाहकर हित करनेवाला, सबकी उत्पत्ति-प्रलयका हेतु स्थितिका आधार, निधान२ और अविनाशी कारण भी मैँ ही हूँ Il १८ II गोता अध्याय १३ श्लोक १२ से १७ तकमें देखना चाहिये। भूत सूक्ष्मरूपसे जिसमें लय होते हैँ २. प्रलयकालमें ٦g9| নাপ 'নিখান' ; | उसक श्रीमदभगवदगीता अध्याय 9 प्रेस , गोरखपुर से साभार যীলা - ShareChat
#📖जीवन का लक्ष्य🤔 #मेरे विचार #❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #🙏गीता ज्ञान🛕
📖जीवन का लक्ष्य🤔 - ட ತ] ಪೂ Cc[ ्च चुवावल्था तक भी सीख्वना नह्वी चाहृना , डिसका भविष्य अंधकारमच ह्वौना तय ह्ै। MM ட ತ] ಪೂ Cc[ ्च चुवावल्था तक भी सीख्वना नह्वी चाहृना , डिसका भविष्य अंधकारमच ह्वौना तय ह्ै। MM - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏गीता ज्ञान🛕 #श्रीमद्भगवद् गीता
❤️जीवन की सीख - 09 ಟiರೂ परोपकार से रहित मनुष्यों का जीवन धिक्कारजे योग्य है ॰ क्योकि पशु कहलाने वाले प्राणियों का रभी বর্ম মন্ুত্ কা उपकार कर देता है। MN 09 ಟiರೂ परोपकार से रहित मनुष्यों का जीवन धिक्कारजे योग्य है ॰ क्योकि पशु कहलाने वाले प्राणियों का रभी বর্ম মন্ুত্ কা उपकार कर देता है। MN - ShareChat
#श्रीमद्भगवद् गीता #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏 प्रेरणादायक विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख
श्रीमद्भगवद् गीता - महात्मानस्तु मां पार्थ दैवीं प्रकृतिमाश्रिताः 1 भजन्त्यनन्यमनसो ज्ञात्वा भूतादिमव्ययम् ।। परन्तु हे कुन्तीपुत्र! दैवी आश्रित সক্কৃনিকং எளத মল मुझको महात्माजन মনানন कारण और नाशरहित अक्षरस्वरूप जानकर अनन्य मनसे युक्त होकर निरन्तर भजते हैँ Il १३ II सततं   कीर्तयन्तो ٦ यतन्तश्च বৃন্তল্ননা: ! नमस्यन्तश्च मां भक्त्या नित्ययूक्ता उपासते ।। भक्तजन निरन्तर मेरे नाम वे दृढ़ निश्चयवाले और गुणोंका कीर्तन करते हुए तथा मेरी प्राप्तिके লিব যল ক্ষনে और క్లౌ M-ಾT T मुझको <7 அர होकर हेर अनन्य ಶ सदा प्रेमसे उपासना करते हैँ Il १४ Il मामुपासते  ज्ञानयज्ञेन यजन्तो चाप्यन्ये [ एकत्वेन पृथक्त्वेन बहुधा विश्वतोमुखम् ।। दूसरे ज्ञानयोगी मुझ निर्गुण-निराकार ब्रह्मका ज्ञानयज्ञके द्वारा अभिन्रभावसे पूजन करते हुए भी ೫ಗ करते हैं और दूसरे बहुत मनुष्य ওপামনা प्रकारसे स्थित मुझ विराट्स्वरूप परमेश्वरकी पृथक् পানম তপামনা কষনে ৮ঁ Il ?4 Il जिसको आमुरे सप्पदाक नापसे िस्तारपकंक भगवानने गोता अध्याय १६ स्लोक ४ तपा स्लाक ७ से २१ तकर्मे कठा र। एसका   विस्तारपूबंक वणंन  गौता  ೫2n { {16 २ से 3 तकर्मे देम्ाना चारिये। श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 9 प्रेस , गोरखपुर से साभार गीता महात्मानस्तु मां पार्थ दैवीं प्रकृतिमाश्रिताः 1 भजन्त्यनन्यमनसो ज्ञात्वा भूतादिमव्ययम् ।। परन्तु हे कुन्तीपुत्र! दैवी आश्रित সক্কৃনিকং எளத মল मुझको महात्माजन মনানন कारण और नाशरहित अक्षरस्वरूप जानकर अनन्य मनसे युक्त होकर निरन्तर भजते हैँ Il १३ II सततं   कीर्तयन्तो ٦ यतन्तश्च বৃন্তল্ননা: ! नमस्यन्तश्च मां भक्त्या नित्ययूक्ता उपासते ।। भक्तजन निरन्तर मेरे नाम वे दृढ़ निश्चयवाले और गुणोंका कीर्तन करते हुए तथा मेरी प्राप्तिके লিব যল ক্ষনে और క్లౌ M-ಾT T मुझको <7 அர होकर हेर अनन्य ಶ सदा प्रेमसे उपासना करते हैँ Il १४ Il मामुपासते  ज्ञानयज्ञेन यजन्तो चाप्यन्ये [ एकत्वेन पृथक्त्वेन बहुधा विश्वतोमुखम् ।। दूसरे ज्ञानयोगी मुझ निर्गुण-निराकार ब्रह्मका ज्ञानयज्ञके द्वारा अभिन्रभावसे पूजन करते हुए भी ೫ಗ करते हैं और दूसरे बहुत मनुष्य ওপামনা प्रकारसे स्थित मुझ विराट्स्वरूप परमेश्वरकी पृथक् পানম তপামনা কষনে ৮ঁ Il ?4 Il जिसको आमुरे सप्पदाक नापसे िस्तारपकंक भगवानने गोता अध्याय १६ स्लोक ४ तपा स्लाक ७ से २१ तकर्मे कठा र। एसका   विस्तारपूबंक वणंन  गौता  ೫2n { {16 २ से 3 तकर्मे देम्ाना चारिये। श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 9 प्रेस , गोरखपुर से साभार गीता - ShareChat
#🙏 प्रेरणादायक विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख #मेरे विचार
🙏 प्रेरणादायक विचार - 09 ्च[ भविष्य इस बात पर निर्थर करता हरै कि आज 3 8! (TCT(గౌ MM 09 ्च[ भविष्य इस बात पर निर्थर करता हरै कि आज 3 8! (TCT(గౌ MM - ShareChat
#श्रीमद्भगवद् गीता #🙏गीता ज्ञान🛕 #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏 प्रेरणादायक विचार
श्रीमद्भगवद् गीता - मयाध्यक्षेण   प्रकृतिः মুমন सचराचरम्| जगद्विपरिवर्तते I। हेतुनानेन  कौन्तेय अधिष्ठाताके सकाशसे प्रकृति ৮ সতুন! सुद्न जगव्क्काोता रचसीकहशस र्रकृत चराचरसहित हेतुसे ही यह संसारचक्र घूम रहा है Il १० Il अवजानन्ति मां मूढा मानुषीं तनुमाश्रितम्। परं भूतमहेश्वरम् II भावमजानन्तो मम मेरे परमभावको २ न जाननेवाले मूढ़लोग मनुष्यका शरीर धारण करनेवाले मुझ सम्पूर्ण भूतोंके সঙ্কান ईश्वरको तुच्छ समझते हैेँ अर्थात् अपनी योगमायासे संसारके उद्धारके लिये मनुष्यरूपमें विचरते हुए मुझ परमेश्वरको साधारण मनुष्य मानते हैँ II ११ II मोघाशा मोघकर्माणो मोघज्ञाना विचेतसः | राक्षसीमासुरीं चैव प्रकृतिं मोहिनीं श्रिताः II वे व्यर्थ आशा, व्यर्थ कर्म और व्यर्थ ज्ञानवाले विक्षिप्तचित्त अज्ञानीजन राक्षसी , आसुरी और मोहिनी हो धारण किये रहते हैं Il १२Il प्रकृतिको१ २४ में देखना चाहिये। २. गोता अध्याय ७ श्लोक श्रीमदभगवदगीता अध्याय 9 प्रेस , गोरखपुर से साभार যীলা मयाध्यक्षेण   प्रकृतिः মুমন सचराचरम्| जगद्विपरिवर्तते I। हेतुनानेन  कौन्तेय अधिष्ठाताके सकाशसे प्रकृति ৮ সতুন! सुद्न जगव्क्काोता रचसीकहशस र्रकृत चराचरसहित हेतुसे ही यह संसारचक्र घूम रहा है Il १० Il अवजानन्ति मां मूढा मानुषीं तनुमाश्रितम्। परं भूतमहेश्वरम् II भावमजानन्तो मम मेरे परमभावको २ न जाननेवाले मूढ़लोग मनुष्यका शरीर धारण करनेवाले मुझ सम्पूर्ण भूतोंके সঙ্কান ईश्वरको तुच्छ समझते हैेँ अर्थात् अपनी योगमायासे संसारके उद्धारके लिये मनुष्यरूपमें विचरते हुए मुझ परमेश्वरको साधारण मनुष्य मानते हैँ II ११ II मोघाशा मोघकर्माणो मोघज्ञाना विचेतसः | राक्षसीमासुरीं चैव प्रकृतिं मोहिनीं श्रिताः II वे व्यर्थ आशा, व्यर्थ कर्म और व्यर्थ ज्ञानवाले विक्षिप्तचित्त अज्ञानीजन राक्षसी , आसुरी और मोहिनी हो धारण किये रहते हैं Il १२Il प्रकृतिको१ २४ में देखना चाहिये। २. गोता अध्याय ७ श्लोक श्रीमदभगवदगीता अध्याय 9 प्रेस , गोरखपुर से साभार যীলা - ShareChat
#🙏 प्रेरणादायक विचार #मेरे विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख #🙏कर्म क्या है❓
🙏 प्रेरणादायक विचार - 08 जौ भववान नै दियाा ह्ै ५र्च वर्ह्वी अमूल्य है॰ किसी से होना f CIGII g मूर्ख़ता ह्रै। MM 08 जौ भववान नै दियाा ह्ै ५र्च वर्ह्वी अमूल्य है॰ किसी से होना f CIGII g मूर्ख़ता ह्रै। MM - ShareChat
#📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख #मेरे विचार #🙏 प्रेरणादायक विचार #🙏कर्म क्या है❓
📖जीवन का लक्ष्य🤔 - 08 4؟ जिनके पास अच्छे विचारों 2 का Jण्Gर वे कभा निर्घ्ान एकाकी तथ रहते எ MN 08 4؟ जिनके पास अच्छे विचारों 2 का Jण्Gर वे कभा निर्घ्ान एकाकी तथ रहते எ MN - ShareChat