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व्यस्त रहें, मस्त रहें
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏 प्रेरणादायक विचार #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #मेरे विचार
🙏गीता ज्ञान🛕 - 10 औैल हवाओं कै भरौसे मत ऐड़ो॰ ೫ತೆ तूफानौं का भी रुख चहानै दैती हैँ॰ कुष्ठ तौ अपनै पँखौँ पर भी भरौसा रखौँ , हवाधँं कै (ೆ4 भरौसै तौ पतजै उड्ना करती 10 औैल हवाओं कै भरौसे मत ऐड़ो॰ ೫ತೆ तूफानौं का भी रुख चहानै दैती हैँ॰ कुष्ठ तौ अपनै पँखौँ पर भी भरौसा रखौँ , हवाधँं कै (ೆ4 भरौसै तौ पतजै उड्ना करती - ShareChat
#मेरे विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏 प्रेरणादायक विचार #❤️जीवन की सीख #🙏गीता ज्ञान🛕
मेरे विचार - 70 eNad UCaIG दुख कै அHeic a ज्यादा आनंद दैना है जैस्नै ध्ूव सनै जले दृक्ष कौ हुए कौ शशीनलनI शशाति ढैती है MN 70 eNad UCaIG दुख कै அHeic a ज्यादा आनंद दैना है जैस्नै ध्ूव सनै जले दृक्ष कौ हुए कौ शशीनलनI शशाति ढैती है MN - ShareChat
#मेरे विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏 प्रेरणादायक विचार #❤️जीवन की सीख #🙏गीता ज्ञान🛕
मेरे विचार - श्रोभगवानुवाच तवार्जुनेदं- সমন্নন मया दर्शितमात्मयौगात् | रूपं परं तेजोमयं নিম্বদনলমাহ- त्वदन्येन दृष्टपूर्वम् ११  यन्मे 7 श्रौभगवान् बोले= है अर्जुन ! अनुग्रहपूर्वक मॅँने अपनी यगशक्तिके प्रभावसे यह मेरा परम तेजोमय fa सवका आदि और सोमारहित ೯೯ तुझको दिखलाया हैं॰ जिसे तैरे अतिरिक्त दूसरे किसीने পঙ্কল   নন্কী' বত্রা M II 49 Il वैदयज्ञाध्ययनैर्न दानै- 7 च क्रियाभिर्न तपोभिरुग्रैः [ एवरूपः शक्य अहं नलोके कुरुप्रवौर It 7g त्वदन्येन हे अर्जुन ! मनुष्यलोकमें इस प्रकार विश्वरूपवाल मैं न वैद और यज्ञौोंके अध्ययनसे न दानसे, न क्रियाओंसे और न उग्र तपौंसै ही तैरे अतिरिक्त द्वारा देखा जा सकता हूँ Il ४८ Il दूसरेके मा ते व्यथा मा च विमूढभावो - घोरमीदूडमेदम् | रूपं ؟٤٢ व्यपेतभीः प्रीतमनाः पुनस्त्वं- तदेव रूपमिदं স प्रपश्य ।l मैरे इस प्रकारके इस विकराल रूपको देखकर व्याकूलता नहीं होनी चाहिये और मूढ़भाव तझको भौ नहीं होना चाहिये। तू भयरहित और प्रौतियुक्त मनवाला हौकर उसी मैरै इस शंख- चक्र-गदा- पद्मयुक्त चतुर्भुंज रूपको फिर देख Il ४९ II श्रीमद्भगवढ्गीता अध्याय ११ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार श्रोभगवानुवाच तवार्जुनेदं- সমন্নন मया दर्शितमात्मयौगात् | रूपं परं तेजोमयं নিম্বদনলমাহ- त्वदन्येन दृष्टपूर्वम् ११  यन्मे 7 श्रौभगवान् बोले= है अर्जुन ! अनुग्रहपूर्वक मॅँने अपनी यगशक्तिके प्रभावसे यह मेरा परम तेजोमय fa सवका आदि और सोमारहित ೯೯ तुझको दिखलाया हैं॰ जिसे तैरे अतिरिक्त दूसरे किसीने পঙ্কল   নন্কী' বত্রা M II 49 Il वैदयज्ञाध्ययनैर्न दानै- 7 च क्रियाभिर्न तपोभिरुग्रैः [ एवरूपः शक्य अहं नलोके कुरुप्रवौर It 7g त्वदन्येन हे अर्जुन ! मनुष्यलोकमें इस प्रकार विश्वरूपवाल मैं न वैद और यज्ञौोंके अध्ययनसे न दानसे, न क्रियाओंसे और न उग्र तपौंसै ही तैरे अतिरिक्त द्वारा देखा जा सकता हूँ Il ४८ Il दूसरेके मा ते व्यथा मा च विमूढभावो - घोरमीदूडमेदम् | रूपं ؟٤٢ व्यपेतभीः प्रीतमनाः पुनस्त्वं- तदेव रूपमिदं স प्रपश्य ।l मैरे इस प्रकारके इस विकराल रूपको देखकर व्याकूलता नहीं होनी चाहिये और मूढ़भाव तझको भौ नहीं होना चाहिये। तू भयरहित और प्रौतियुक्त मनवाला हौकर उसी मैरै इस शंख- चक्र-गदा- पद्मयुक्त चतुर्भुंज रूपको फिर देख Il ४९ II श्रीमद्भगवढ्गीता अध्याय ११ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏 प्रेरणादायक विचार #मेरे विचार
❤️जीवन की सीख - 09 औपैल जीवन आप जौ सौचते हैँ॰ डसका प्रतिबिब है अबर आपकै नकारात्मक हैँ॰ विचार तौ जौ दुनिया आप दैख् रहै हैँ॰ वह वैसी ह्री हौची। MN 09 औपैल जीवन आप जौ सौचते हैँ॰ डसका प्रतिबिब है अबर आपकै नकारात्मक हैँ॰ विचार तौ जौ दुनिया आप दैख् रहै हैँ॰ वह वैसी ह्री हौची। MN - ShareChat
#मेरे विचार #🙏 प्रेरणादायक विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏गीता ज्ञान🛕 #❤️जीवन की सीख
मेरे विचार - 09 Ea विद्षवान हौ दुर्षन तौ` थी त्यााय दैन्ाा चाहिएए क्यौकि अलंकृत ٤٩١٢٤٤ सप्ार्प भी ज्जहरौलाा মীনl ট [ MN 09 Ea विद्षवान हौ दुर्षन तौ` थी त्यााय दैन्ाा चाहिएए क्यौकि अलंकृत ٤٩١٢٤٤ सप्ार्प भी ज्जहरौलाा মীনl ট [ MN - ShareChat
#📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏 प्रेरणादायक विचार #मेरे विचार
📖जीवन का लक्ष्य🤔 - तस्मात्प्रणम्य र्प्राणधाय कायं- त्वामहमोशमीड्यम् | प्रसादये এিনন सखेव : पुत्रस्य স্িম্রঃ সিমরাম্রান্টমি নন মীন্ত্রসূ Il अतएव हे प्रभो ! भैं शरौरको भलोभाँति चरणोंमें निवेदित कर, प्रणाम करके, स्तुति करनेयोग्य आप 1=! ईश्वरको प्रसत्र होनेके लिये प्रार्थना करता हूँ । हे पिता जैसै पुत्रके, सखा जैसै सखाके और पति 74484860 मेरीकेप प्रियतमा परधकाधस हहनककयग्यँ ছুঁ Il 8 8 अदृष्टपूर्व శfగTౌగంా ؟؟١ प्रव्यथितं   मनो भयेन च ?f4 লনন য देवरूपं- देवेश সমীন ٦٠١٢٩٢٩ ١١ मै पहले न देखे हुए आपके इस् आश्चर्यमय रूपको देखकर हर्पित हा रहा हूँ और मेरा मन भयसे अति व्याकुल भौ हौ रहा है॰ इसलिये आप उस अपने चतुर्भुंज विण्णुरूपको ही मुझे दिखलाइये ! है देवेश! हे जगत्रिवास ! प्रसन्न होइये Il ४५ Il किरोटिनं যরিন चक्रहस्त- द्रष्टुमहं   तथैव ! मिच्छामि त्वां चतुर्भुजेन तेनैव रूपेण विश्वमूर्ते I। सहस्रबाहो भव मैँ वैसे हो आपको मुकुट धारण किये हुए तथा गदा और चक्र हाथमें लिये हुए देखना चाहता हूँ इसलिये हे विश्वस्वरूप ! हे सहस्रवाहो ! आप उसो चतुर्भुजरूपसे प्रकट होइये Il ४६ Il श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय ११ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार तस्मात्प्रणम्य र्प्राणधाय कायं- त्वामहमोशमीड्यम् | प्रसादये এিনন सखेव : पुत्रस्य স্িম্রঃ সিমরাম্রান্টমি নন মীন্ত্রসূ Il अतएव हे प्रभो ! भैं शरौरको भलोभाँति चरणोंमें निवेदित कर, प्रणाम करके, स्तुति करनेयोग्य आप 1=! ईश्वरको प्रसत्र होनेके लिये प्रार्थना करता हूँ । हे पिता जैसै पुत्रके, सखा जैसै सखाके और पति 74484860 मेरीकेप प्रियतमा परधकाधस हहनककयग्यँ ছুঁ Il 8 8 अदृष्टपूर्व శfగTౌగంా ؟؟١ प्रव्यथितं   मनो भयेन च ?f4 লনন য देवरूपं- देवेश সমীন ٦٠١٢٩٢٩ ١١ मै पहले न देखे हुए आपके इस् आश्चर्यमय रूपको देखकर हर्पित हा रहा हूँ और मेरा मन भयसे अति व्याकुल भौ हौ रहा है॰ इसलिये आप उस अपने चतुर्भुंज विण्णुरूपको ही मुझे दिखलाइये ! है देवेश! हे जगत्रिवास ! प्रसन्न होइये Il ४५ Il किरोटिनं যরিন चक्रहस्त- द्रष्टुमहं   तथैव ! मिच्छामि त्वां चतुर्भुजेन तेनैव रूपेण विश्वमूर्ते I। सहस्रबाहो भव मैँ वैसे हो आपको मुकुट धारण किये हुए तथा गदा और चक्र हाथमें लिये हुए देखना चाहता हूँ इसलिये हे विश्वस्वरूप ! हे सहस्रवाहो ! आप उसो चतुर्भुजरूपसे प्रकट होइये Il ४६ Il श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय ११ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat
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मेरे विचार - 09 ಉ೯ ईश्वर का नियम है कि वह आवश्यकताएँ पूरी करता है, वासनाएँ नरहीं। MN 09 ಉ೯ ईश्वर का नियम है कि वह आवश्यकताएँ पूरी करता है, वासनाएँ नरहीं। MN - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #मेरे विचार
🙏गीता ज्ञान🛕 - सखेति मत्वा प्रसभं यदुक्तं- हे कृष्ण है यादव है सखेति। तवेदं- महिमानं अजानता प्रमादात्प्रणयेन af Il मया यच्चावहासार्थमसत्कृतोउसि विहारशय्यासनभोजनेषु एकोड्थवाप्यच्युत तत्समक्षं- त्वामहमप्रमेयम् ।। तत्क्षामये । न जानते हुए, आप मेरे सखा आपके इस प्रभावको " भी मॅने ' हे कृष्ण !  हॅ ऐसा मानकर प्रेमसे अथवा प्रमादसे हे यादव ! ' हे सखे !  इस प्रकार जो कुछ विना सोचे- स्मझे हठात् कहा है और है अच्युत ! आप जो मेरे द्वार  विनोदके लिये विहार, शय्या, आसन और भोजनादिमें अकेले अथवा उन सखाओके सामने भौ अपमानित किये गये हैँट्वह सव अपराध अप्रमेयस्वरूप अर्थात्अचिन्त्य प्रभाववाले आपसे मैँ क्षमा करवाता हूँ Il ४१-४२ II पितासि   लोकस्य चराचरस्य पूज्यश्च   गुरुर्गरीयान्। त्वमस्य न त्वत्समोउस्त्यभ्यधिकः कुतोउन्यो - लोकत्रयेउ्प्यप्रतिमप्रभाव आप इस चराचर जगत्के पिता और सवसे बड़े हेँ, हे अनुपम प्रभाववाले ! गुरु एवं अति पूजनीय  तीनों लोकोंमें आपके समान भी दूसरा कोई नहीं है, फिर अधिक तो कैंसे हो सकता है Il ४३ Il श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय ११ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार सखेति मत्वा प्रसभं यदुक्तं- हे कृष्ण है यादव है सखेति। तवेदं- महिमानं अजानता प्रमादात्प्रणयेन af Il मया यच्चावहासार्थमसत्कृतोउसि विहारशय्यासनभोजनेषु एकोड्थवाप्यच्युत तत्समक्षं- त्वामहमप्रमेयम् ।। तत्क्षामये । न जानते हुए, आप मेरे सखा आपके इस प्रभावको " भी मॅने ' हे कृष्ण !  हॅ ऐसा मानकर प्रेमसे अथवा प्रमादसे हे यादव ! ' हे सखे !  इस प्रकार जो कुछ विना सोचे- स्मझे हठात् कहा है और है अच्युत ! आप जो मेरे द्वार  विनोदके लिये विहार, शय्या, आसन और भोजनादिमें अकेले अथवा उन सखाओके सामने भौ अपमानित किये गये हैँट्वह सव अपराध अप्रमेयस्वरूप अर्थात्अचिन्त्य प्रभाववाले आपसे मैँ क्षमा करवाता हूँ Il ४१-४२ II पितासि   लोकस्य चराचरस्य पूज्यश्च   गुरुर्गरीयान्। त्वमस्य न त्वत्समोउस्त्यभ्यधिकः कुतोउन्यो - लोकत्रयेउ्प्यप्रतिमप्रभाव आप इस चराचर जगत्के पिता और सवसे बड़े हेँ, हे अनुपम प्रभाववाले ! गुरु एवं अति पूजनीय  तीनों लोकोंमें आपके समान भी दूसरा कोई नहीं है, फिर अधिक तो कैंसे हो सकता है Il ४३ Il श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय ११ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #मेरे विचार
❤️जीवन की सीख - 08 औपैल   ऐसत व्यक्तित्व हौ की ভত্িখনি তা এনা ন ঘলৌ अजुपस्थिति का परतु अहसास अवश्य हौ। MN 08 औपैल   ऐसत व्यक्तित्व हौ की ভত্িখনি তা এনা ন ঘলৌ अजुपस्थिति का परतु अहसास अवश्य हौ। MN - ShareChat
#श्रीमद् भागवत गीता #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #श्रीमद्भागवत गीता #🎤📢श्रीमद्भागवत गीता श्लोक #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta
श्रीमद् भागवत गीता - त्वमादिदेवः पुराण- पुरुषः स्त्वमस्य विश्वस्य परं निधानम्। am ೩ೆ೯೯೩ 8ಗ विश्वमनन्तरूप I।  7 aI आप आदिदेव और सनातन पुरुप हैं आप इस जगतके परम आश्रय और जाननेवाले तथा जाननेयोग्य और परम धाम हैं। हे अनन्तरूप ! आपसे यह सव जगत् व्याप्त अर्थात् परिपूर्णं है Il ३८ II वायुर्यमोउग्निर्वरुणः शशाङ्कः प्रजापतिस्त्वं प्रपितामहश्च | नमो   नमस्तेषस्तु   सहस्रकृत्वः पुनश्च भूयोषपि नमो   नमस्ते ।I आप वायु यमराज, अग्नि, वरुण, चन्द्रमा, प्रजाके स्वामौ त्रह्या और ब्रह्माके भौ पिता हॅं। आपके लियै हजारों वार नमस्कार ! नमस्कार हो!! आपके लिये फिर भी वार-्चार नमस्कार ! नमस्कार ! ! I१ ३९ I। पृष्ठतस्ते नमः पुरस्तादथ नमोउस्तु ते सर्वंत एव सर्वं अनन्तवीर्यमितविक्रमस्त्वं- सर्वं समाजोषि ततोउसि सर्वः Il हे अनन्त सामर्थ्यवाले ! आपके लिये आगेसे और पीछेसै भी नमस्कार! है सर्वांत्मन् ! आपके लिये सव औरसे हीो नमस्कार हा। क्योंकि अनन्त पराक्रमशालो आप समस्त संसारको व्याप्त कियै हुए हैॅ॰ इससे आप ही सर्वरूप हैं Il ४० Il श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय ११ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार त्वमादिदेवः पुराण- पुरुषः स्त्वमस्य विश्वस्य परं निधानम्। am ೩ೆ೯೯೩ 8ಗ विश्वमनन्तरूप I।  7 aI आप आदिदेव और सनातन पुरुप हैं आप इस जगतके परम आश्रय और जाननेवाले तथा जाननेयोग्य और परम धाम हैं। हे अनन्तरूप ! आपसे यह सव जगत् व्याप्त अर्थात् परिपूर्णं है Il ३८ II वायुर्यमोउग्निर्वरुणः शशाङ्कः प्रजापतिस्त्वं प्रपितामहश्च | नमो   नमस्तेषस्तु   सहस्रकृत्वः पुनश्च भूयोषपि नमो   नमस्ते ।I आप वायु यमराज, अग्नि, वरुण, चन्द्रमा, प्रजाके स्वामौ त्रह्या और ब्रह्माके भौ पिता हॅं। आपके लियै हजारों वार नमस्कार ! नमस्कार हो!! आपके लिये फिर भी वार-्चार नमस्कार ! नमस्कार ! ! I१ ३९ I। पृष्ठतस्ते नमः पुरस्तादथ नमोउस्तु ते सर्वंत एव सर्वं अनन्तवीर्यमितविक्रमस्त्वं- सर्वं समाजोषि ततोउसि सर्वः Il हे अनन्त सामर्थ्यवाले ! आपके लिये आगेसे और पीछेसै भी नमस्कार! है सर्वांत्मन् ! आपके लिये सव औरसे हीो नमस्कार हा। क्योंकि अनन्त पराक्रमशालो आप समस्त संसारको व्याप्त कियै हुए हैॅ॰ इससे आप ही सर्वरूप हैं Il ४० Il श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय ११ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat