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#🙏गीता ज#📖जीवन का लक्#मेरे विचार
🙏गीता ज्ञान🛕 - २६ एक छौटै पौधै कै जून K qஎ அிகக उसकी रक्षा करनी पड़ती है कि कहीं उसे पशु न चर जाय 9 f- जब वह बड़ा हो जाता है, तो उसके नीचे अनेक पशु विश्राम करते रहते हैं। इसलिये में बुरी संगत से बचना आरम्भ किन्तु  चाहिये॰ जब आत्ा महानू हरौ जावे तो दुर्जनों से [೫; ಠrfಿ[ মানি कुछ रामकृष्ण परभहस డా MN २६ एक छौटै पौधै कै जून K qஎ அிகக उसकी रक्षा करनी पड़ती है कि कहीं उसे पशु न चर जाय 9 f- जब वह बड़ा हो जाता है, तो उसके नीचे अनेक पशु विश्राम करते रहते हैं। इसलिये में बुरी संगत से बचना आरम्भ किन्तु  चाहिये॰ जब आत्ा महानू हरौ जावे तो दुर्जनों से [೫; ಠrfಿ[ মানি कुछ रामकृष्ण परभहस డా MN - ShareChat
#गीता #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏 प्रेरणादायक विचार #🙏गीता ज्ञान🛕
गीता - ShareChat
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📖जीवन का लक्ष्य🤔 - 26 जून शब्दों का भी अपना तापमान है=प्यार का एक शब्द भी आपको वर्षो तक ऊर्जावान बनाये रखता है। M 26 जून शब्दों का भी अपना तापमान है=प्यार का एक शब्द भी आपको वर्षो तक ऊर्जावान बनाये रखता है। M - ShareChat
#🙏 प्रेरणादायक विचार #❤️जीवन की सीख #🙏गीता ज्ञान🛕 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #गीता
🙏 प्रेरणादायक विचार - चेतसा सर्वकर्माणि मयि सन्न्यस्य मत्परः | बुद्धियोगमुपाश्रित्य मच्चित्तः सततं भव अर्पण करके* तथा सब कर्मोंको मनसे 484 समबुद्धिरूप योगको अवलम्बन करके मेरे परायण और निरन्तर मुझमें चित्तवाला हो Il ५७ ।l  मच्चित्तः सर्वदुर्गाणि मत्प्रसादात्तरिप्यसि| चेत्त्वमहङ्कारान्न श्रोष्यसि विनङ्क्ष्यसि अथ चित्तवाला होकर तू मेरी उपर्युक्त प्रकारसे gಳಗೆ समस्त संकटोंको अनायास ही पार कर कृपासे जायगा और यदि अहंकारके कारण मेरे वचनौंको सुनेगा तो नष्ट हाे जायगा अर्थात् परमार्थंसे भ्रष्ट 7 हा जायगा II ५८ II यदहङ्कारमाश्रित्य न योत्स्य इति मन्यसे। मिथ्यैप व्यवसायस्ते प्रकृतिस्त्वां नियोक्ष्यति II স্রী নু अहंकारका आश्रय लेकर यह मान रहा है कि मैँ युद्ध नहीं करूँगा ' तो तेरा यह निश्चय मिथ्या है; क्योंकि लगा देगा II५९ II  तेरा स्वभाव तुझे जबर्दस्ती  युद्धमें गोता अ॰ ९ श्लोक २७ में जिसको विधि कहो है। श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय १८ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार चेतसा सर्वकर्माणि मयि सन्न्यस्य मत्परः | बुद्धियोगमुपाश्रित्य मच्चित्तः सततं भव अर्पण करके* तथा सब कर्मोंको मनसे 484 समबुद्धिरूप योगको अवलम्बन करके मेरे परायण और निरन्तर मुझमें चित्तवाला हो Il ५७ ।l  मच्चित्तः सर्वदुर्गाणि मत्प्रसादात्तरिप्यसि| चेत्त्वमहङ्कारान्न श्रोष्यसि विनङ्क्ष्यसि अथ चित्तवाला होकर तू मेरी उपर्युक्त प्रकारसे gಳಗೆ समस्त संकटोंको अनायास ही पार कर कृपासे जायगा और यदि अहंकारके कारण मेरे वचनौंको सुनेगा तो नष्ट हाे जायगा अर्थात् परमार्थंसे भ्रष्ट 7 हा जायगा II ५८ II यदहङ्कारमाश्रित्य न योत्स्य इति मन्यसे। मिथ्यैप व्यवसायस्ते प्रकृतिस्त्वां नियोक्ष्यति II স্রী নু अहंकारका आश्रय लेकर यह मान रहा है कि मैँ युद्ध नहीं करूँगा ' तो तेरा यह निश्चय मिथ्या है; क्योंकि लगा देगा II५९ II  तेरा स्वभाव तुझे जबर्दस्ती  युद्धमें गोता अ॰ ९ श्लोक २७ में जिसको विधि कहो है। श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय १८ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat
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📖जीवन का लक्ष्य🤔 - 25 जून तुरन्त का पैदा हुआ बछड़ा पहले बार-्बार फिसलता है और उठते ही गिर पड़ता है , उसी प्रकार धर्म मार्ग में कई बार 8lai} 8 असफलता এবন্ত্ু খীই-খীই ভূঢনা आ जाती है। -रामकृष्ण परमहुस ٨٨ 25 जून तुरन्त का पैदा हुआ बछड़ा पहले बार-्बार फिसलता है और उठते ही गिर पड़ता है , उसी प्रकार धर्म मार्ग में कई बार 8lai} 8 असफलता এবন্ত্ু খীই-খীই ভূঢনা आ जाती है। -रामकृष्ण परमहुस ٨٨ - ShareChat
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मेरे विचार - ShareChat
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#📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 #मेरे विचार
📖जीवन का लक्ष्य🤔 - 24 जून जब नक सम्ुद्र का पाानी  हिलढ्ाा रहना है तब तक उसा्में सूर्य का प्रतिबिम्ब दिखाई नहीं पड़ता उसी प्रकार जब तक भन र्थें वाासनाओं की अस्थिरता है तब तक उसमें ईश्वार का प्रतिबिम्ब ద(ే? 93 Cकता ] सायकृष्ण परमहस 0 ٨٨ 24 जून जब नक सम्ुद्र का पाानी  हिलढ्ाा रहना है तब तक उसा्में सूर्य का प्रतिबिम्ब दिखाई नहीं पड़ता उसी प्रकार जब तक भन र्थें वाासनाओं की अस्थिरता है तब तक उसमें ईश्वार का प्रतिबिम्ब ద(ే? 93 Cकता ] सायकृष्ण परमहस 0 ٨٨ - ShareChat
#🙏 प्रेरणादायक विचार #❤️जीवन की सीख #🙏गीता ज्ञान🛕 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #गीता
🙏 प्रेरणादायक विचार - च्रह्मभूतः प्रसन्नात्मा न शोचति न काङ्क्षति | सर्वेपु ఖగేర్తా লঞ্ন এযামূIl Wగగగౌ समः फिर वह सच्चिदानन्दघन ब्रह्ममें   एकीभावसे स्थित, प्रसन्न मनवाला योगी न तो किसौके लिये शोक करता है और न किसोको आकांक्षा हो करता है। ऐसा समस्त प्राणियोंमें समभाववाला९ यौगी मैरी पराभक्तिको २ प्राप्त हौ जाता है Il ५४ Il भक्त्या मामभिजानाति यावान्यश्चास्मि तत्त्वतः | ततो मां तत्त्वतो ज्ञात्वा विशते तदनन्तरम् 4 उस पराभक्तिके द्वारा वह मुझ परमात्माको, जो हूँ और जितना हूँ॰ ठीक वैसा-का-वैसा तत्त्वसे तत्त्वसे जानकर जान लेता है; तथा उस भक्तिसे ் प्रविष्ट हो जाता है Il ५५ Il तत्काल हा मुझमें सर्वकर्माण्यपि सदा कुर्वाणो  मदव्यपाश्रयः | मत्प्रसादादवाप्नोति शाश्वतं   पदमव्ययम् I। मेरे परायण हुआ कर्मयोगी तो सम्पूर्ण कर्मोंको सदा करता हुआ भी मेरी कृपासे सनातन अविनाशी परमपदको प्राप्त हा जाता है Il ५६ Il १० गौता अ॰ ६ श्लोक २९ मैं दैखना चाहिये। २० जो तत्त्वज्ञानको पराकाष्ठा है तथा जिसको प्राप्त होकर और कुछ जानना चाको नर्हों रहता, वहो यर्हाँ ' पराभक्ति  ज्ञानको परानिष्ठा ', 'परम   नैप्कर्म्यसिद्धि ' इत्यादि और  ' परमसिद्ि नामोंसे कहो गयो है। श्रीमद्भगवढ्गीता अध्याय १८ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार च्रह्मभूतः प्रसन्नात्मा न शोचति न काङ्क्षति | सर्वेपु ఖగేర్తా লঞ্ন এযামূIl Wగగగౌ समः फिर वह सच्चिदानन्दघन ब्रह्ममें   एकीभावसे स्थित, प्रसन्न मनवाला योगी न तो किसौके लिये शोक करता है और न किसोको आकांक्षा हो करता है। ऐसा समस्त प्राणियोंमें समभाववाला९ यौगी मैरी पराभक्तिको २ प्राप्त हौ जाता है Il ५४ Il भक्त्या मामभिजानाति यावान्यश्चास्मि तत्त्वतः | ततो मां तत्त्वतो ज्ञात्वा विशते तदनन्तरम् 4 उस पराभक्तिके द्वारा वह मुझ परमात्माको, जो हूँ और जितना हूँ॰ ठीक वैसा-का-वैसा तत्त्वसे तत्त्वसे जानकर जान लेता है; तथा उस भक्तिसे ் प्रविष्ट हो जाता है Il ५५ Il तत्काल हा मुझमें सर्वकर्माण्यपि सदा कुर्वाणो  मदव्यपाश्रयः | मत्प्रसादादवाप्नोति शाश्वतं   पदमव्ययम् I। मेरे परायण हुआ कर्मयोगी तो सम्पूर्ण कर्मोंको सदा करता हुआ भी मेरी कृपासे सनातन अविनाशी परमपदको प्राप्त हा जाता है Il ५६ Il १० गौता अ॰ ६ श्लोक २९ मैं दैखना चाहिये। २० जो तत्त्वज्ञानको पराकाष्ठा है तथा जिसको प्राप्त होकर और कुछ जानना चाको नर्हों रहता, वहो यर्हाँ ' पराभक्ति  ज्ञानको परानिष्ठा ', 'परम   नैप्कर्म्यसिद्धि ' इत्यादि और  ' परमसिद्ि नामोंसे कहो गयो है। श्रीमद्भगवढ्गीता अध्याय १८ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat
#अंतरराष्ट्रीय परी दिवस
अंतरराष्ट्रीय परी दिवस - 24 5 अंतर्राष्ट्रीय परी दिवस MN 24 5 अंतर्राष्ट्रीय परी दिवस MN - ShareChat
#📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏गीता ज्ञान🛕 #❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #मेरे विचार
📖जीवन का लक्ष्य🤔 - 84 छूनु  प्रशंसा अगर हो रही हो, तो प्रसन्न नहीं , सावधान रहने की जरूरत है। Mn 84 छूनु  प्रशंसा अगर हो रही हो, तो प्रसन्न नहीं , सावधान रहने की जरूरत है। Mn - ShareChat