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#🙏 प्रेरणादायक विचार #❤️जीवन की सीख ##भगवद गीता🙏🕉️ #🙏गीता ज्ञान🛕 #मेरे विचार
🙏 प्रेरणादायक विचार - तत्रैकाग्रं मनः कृत्वा यतचित्तेन्द्रियक्रियः | उपविश्यासने   युञ्ज्याद्योगमात्मविशुद्धये ।। चित्त और इन्द्रियोंको बैठकर 37 आसनपर क्रियाओंको वशमें रखते मनको एकाग्र हुए अन्तःकरणकी   शुद्धिके f4 करके योगका 3ಳಗ ೫ Il ? Il समं  कायशिरोग्रीवं धारयन्नचलं स्थिरः | सम्प्रेक्ष्य नासिकाग्रं स्वं दिशश्चानवलोकयन् ।।  सिर और गलेको समान एवं अचल काया धारण करके और स्थिर होकर, अपनी नासिकाके अन्य   दिशाओँको अग्रभागपर   दृष्टि जमाकर 7 देखता हुआ - Il १३ II विगतभीर्ब्रह्मचारिव्रते स्थितः | प्रशान्तात्मा मनः संयम्य मच्चित्तो युक्त आसीत मत्परः I।  ब्रह्मचारीके व्रतमें स्थितः भयरहित तथा भलीभाँति योगी मनको अन्तःकरणवाला सावधान शान्त चित्तवाला और मैरे परायण होकर रोककर मुझमें f೫7 ೯a Il ಳ Il श्रीमद्भगवद् गीता अध्याय 6 92, गोरखपुर से सामार गीता तत्रैकाग्रं मनः कृत्वा यतचित्तेन्द्रियक्रियः | उपविश्यासने   युञ्ज्याद्योगमात्मविशुद्धये ।। चित्त और इन्द्रियोंको बैठकर 37 आसनपर क्रियाओंको वशमें रखते मनको एकाग्र हुए अन्तःकरणकी   शुद्धिके f4 करके योगका 3ಳಗ ೫ Il ? Il समं  कायशिरोग्रीवं धारयन्नचलं स्थिरः | सम्प्रेक्ष्य नासिकाग्रं स्वं दिशश्चानवलोकयन् ।।  सिर और गलेको समान एवं अचल काया धारण करके और स्थिर होकर, अपनी नासिकाके अन्य   दिशाओँको अग्रभागपर   दृष्टि जमाकर 7 देखता हुआ - Il १३ II विगतभीर्ब्रह्मचारिव्रते स्थितः | प्रशान्तात्मा मनः संयम्य मच्चित्तो युक्त आसीत मत्परः I।  ब्रह्मचारीके व्रतमें स्थितः भयरहित तथा भलीभाँति योगी मनको अन्तःकरणवाला सावधान शान्त चित्तवाला और मैरे परायण होकर रोककर मुझमें f೫7 ೯a Il ಳ Il श्रीमद्भगवद् गीता अध्याय 6 92, गोरखपुर से सामार गीता - ShareChat
#आज का विचार #❤️जीवन की सीख #मेरे विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏 प्रेरणादायक विचार
आज का विचार - 31 जववरी   अच्छे सुविचार कठिन परिस्थितियों में व्यक्ति के मार्गदर्शन का कार्य करते हैं॰ हर व्यक्ति को पॉजिटिव सुविचार जरूर पढ़ने चाहिए ताकि जब जीवन में कठिन समय आये तो हमें पता हो कि का सामना कैसोे करना है॰ सुविचार, मन चुनौती को बल देते हैं॰ आगे बढ़ने का साहस देते हैं॰ और समाज की कड़वी सच्चाई से पहचान कराते हैं। MN 31 जववरी   अच्छे सुविचार कठिन परिस्थितियों में व्यक्ति के मार्गदर्शन का कार्य करते हैं॰ हर व्यक्ति को पॉजिटिव सुविचार जरूर पढ़ने चाहिए ताकि जब जीवन में कठिन समय आये तो हमें पता हो कि का सामना कैसोे करना है॰ सुविचार, मन चुनौती को बल देते हैं॰ आगे बढ़ने का साहस देते हैं॰ और समाज की कड़वी सच्चाई से पहचान कराते हैं। MN - ShareChat
#🙏 प्रेरणादायक विचार #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #मेरे विचार #आज का विचार
🙏 प्रेरणादायक विचार - १ जनवरी fabe & जीवन में कोई 7al eree है ये एक वहम है। INV १ जनवरी fabe & जीवन में कोई 7al eree है ये एक वहम है। INV - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 ##भगवद गीता🙏🕉️ #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏 प्रेरणादायक विचार
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - सुहृन्मित्रार्युदासीनमध्यस्थद्वेष्यबन्धुषु  समबुद्धिर्विशिष्यते  पापेषु साधुष्वपि च I 647, वैरी, उदासीन२, मध्यस्थर, द्वेप्य सुहृद१ और बन्धुगणोंमें, धर्मात्माओंमें और पापियोंमें भी समानभाव रखनेवाला अत्यन्त श्रेष्ठ है Il ९ Il योगी युञ्जीत सततमात्मानं रहसि स्थितः | एकाकी   यतचित्तात्मा   निराशीरपरिग्रहः II मन और इन्द्रियोंसहित शरीरको वशमें रखनेवाला, आशारहित और संग्रहरहित योगी अकेला ही एकान्त स्थानमें स्थित होकर आत्माको निरन्तर परमात्मामें লগান Il ?০ Il १० स्वार्थरहत सवका हित करनेवाला | पक्षपातरहित | 3 ३. दौनों ओरको भलाई चाहनेवाला| शुचौ देशे प्रतिष्ठाप्य स्थिरमासनमात्मनः | नात्युच्छ्रितं नातिनीचं चैलाजिनकुशोत्तरम् I।  जिसके ऊपर क्रमशः कुशा, मृगछाला ؟٩٩ शुद्ध और वस्त्र बिछे हैँ, जो न बहुत ऊँचा है और न बहुत नीचा, ऐसे अपने आसनको स्थिर स्थापन কন্ধে- Il ?? Il श्रीमद्भगवद् गीता अध्याय 6 गोरखपूर से साभार प्रेस , गीता सुहृन्मित्रार्युदासीनमध्यस्थद्वेष्यबन्धुषु  समबुद्धिर्विशिष्यते  पापेषु साधुष्वपि च I 647, वैरी, उदासीन२, मध्यस्थर, द्वेप्य सुहृद१ और बन्धुगणोंमें, धर्मात्माओंमें और पापियोंमें भी समानभाव रखनेवाला अत्यन्त श्रेष्ठ है Il ९ Il योगी युञ्जीत सततमात्मानं रहसि स्थितः | एकाकी   यतचित्तात्मा   निराशीरपरिग्रहः II मन और इन्द्रियोंसहित शरीरको वशमें रखनेवाला, आशारहित और संग्रहरहित योगी अकेला ही एकान्त स्थानमें स्थित होकर आत्माको निरन्तर परमात्मामें লগান Il ?০ Il १० स्वार्थरहत सवका हित करनेवाला | पक्षपातरहित | 3 ३. दौनों ओरको भलाई चाहनेवाला| शुचौ देशे प्रतिष्ठाप्य स्थिरमासनमात्मनः | नात्युच्छ्रितं नातिनीचं चैलाजिनकुशोत्तरम् I।  जिसके ऊपर क्रमशः कुशा, मृगछाला ؟٩٩ शुद्ध और वस्त्र बिछे हैँ, जो न बहुत ऊँचा है और न बहुत नीचा, ऐसे अपने आसनको स्थिर स्थापन কন্ধে- Il ?? Il श्रीमद्भगवद् गीता अध्याय 6 गोरखपूर से साभार प्रेस , गीता - ShareChat
#🙏 प्रेरणादायक विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏गीता ज्ञान🛕 ##भगवद गीता🙏🕉️ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏 प्रेरणादायक विचार - Gajeri| 90 अपनी जिंदगी से कभी नाराज মন মীনা, आपके 0 06 তীর্মী িনতী लोगों का নুসই ai ee MNy Gajeri| 90 अपनी जिंदगी से कभी नाराज মন মীনা, आपके 0 06 তীর্মী িনতী लोगों का নুসই ai ee MNy - ShareChat
##भगवद गीता🙏🕉️ #🙏गीता ज्ञान🛕 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏 प्रेरणादायक विचार #🙏गुरु महिमा😇
#भगवद गीता🙏🕉️ - 30 जववरी व्यक्ति विचारों से निर्मित प्राणी है॰ व्यक्ति के द्वारा किया जाने वाला हर कार्य किसी न किसी विचार की ही प्रतिक्रिया होती है॰ विचारों से बनता है 'व्यवहार , और व्यवहार से बनता है *चरित्र , और चरित्र से बनती है इंसान की * पहचान "। MN 30 जववरी व्यक्ति विचारों से निर्मित प्राणी है॰ व्यक्ति के द्वारा किया जाने वाला हर कार्य किसी न किसी विचार की ही प्रतिक्रिया होती है॰ विचारों से बनता है 'व्यवहार , और व्यवहार से बनता है *चरित्र , और चरित्र से बनती है इंसान की * पहचान "। MN - ShareChat
#🤗जया किशोरी जी🕉️ #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏 प्रेरणादायक विचार ##भगवद गीता🙏🕉️
🤗जया किशोरी जी🕉️ - घन्धुरात्मात्मनस्तस्य येनात्मैवात्मना जितः | সনানসনমু হান্তুল নননালন' হান্তুনন II जिस जीवात्माद्वारा मन औंर इन्द्रियोंसहित शरौर ஈ= हुआ है, उस जीवात्माका तो वह आप ही और जिसके द्वारा मन तथा इन्द्रियौंसहित शरीर नहीं जीता गया है, उसके लिये वह आप हो शत्रुके सदृश নননা ;Il & Il शत्रुतामें जितात्मनः प्रशान्तस्य परमात्मा समाहितः | शीतोप्णसुखदुःखेपु तथा मानापमानयो: II মবৌ-যর্দৌ সাঁ মুন্ত্র-ব্ুরুঃস্তাবি নথা थ्ृत्ियाँ और अपमानमें जिसके अन्तःकरणको भलीभाँति शान्त हेँ॰ ऐसे स्वाधीन आत्मावाले  पुरुपके ज्ञानमें सच्चिदानन्दघन परमात्मा सम्यक् प्रकारसे स्थित है अर्थांतू उसके ज्ञानमेँ परमात्माके सिवा कुछ है हो नहीं II ७ ।l जान्ना कृज्चा नँतृष्ती त्महों कूटस्था विजितन्द्रियः  योगी समलोष्टाश्मकाञ्चनः I। युक्त इत्युच्यते  जिसका अन्तःकरण ज्ञान-विज्ञानसे तृप्त है, जिसको स्थिति विकाररहित हैं॰ जिसको इन्द्रियाँ भलीभाँति जीती हुई हैं औंर जिसके लिये मिट्टी, समान हेँ, वह योगी युक्त अर्थांतू पत्थर और सुवर्ण भगवत्प्राप्त है, ऐसे कहा जाता है Il ८ Il श्रीमद्भगवद् गीता अध्याय 6 गीता प्रेस , गोरखपुर से साभार घन्धुरात्मात्मनस्तस्य येनात्मैवात्मना जितः | সনানসনমু হান্তুল নননালন' হান্তুনন II जिस जीवात्माद्वारा मन औंर इन्द्रियोंसहित शरौर ஈ= हुआ है, उस जीवात्माका तो वह आप ही और जिसके द्वारा मन तथा इन्द्रियौंसहित शरीर नहीं जीता गया है, उसके लिये वह आप हो शत्रुके सदृश নননা ;Il & Il शत्रुतामें जितात्मनः प्रशान्तस्य परमात्मा समाहितः | शीतोप्णसुखदुःखेपु तथा मानापमानयो: II মবৌ-যর্দৌ সাঁ মুন্ত্র-ব্ুরুঃস্তাবি নথা थ्ृत्ियाँ और अपमानमें जिसके अन्तःकरणको भलीभाँति शान्त हेँ॰ ऐसे स्वाधीन आत्मावाले  पुरुपके ज्ञानमें सच्चिदानन्दघन परमात्मा सम्यक् प्रकारसे स्थित है अर्थांतू उसके ज्ञानमेँ परमात्माके सिवा कुछ है हो नहीं II ७ ।l जान्ना कृज्चा नँतृष्ती त्महों कूटस्था विजितन्द्रियः  योगी समलोष्टाश्मकाञ्चनः I। युक्त इत्युच्यते  जिसका अन्तःकरण ज्ञान-विज्ञानसे तृप्त है, जिसको स्थिति विकाररहित हैं॰ जिसको इन्द्रियाँ भलीभाँति जीती हुई हैं औंर जिसके लिये मिट्टी, समान हेँ, वह योगी युक्त अर्थांतू पत्थर और सुवर्ण भगवत्प्राप्त है, ऐसे कहा जाता है Il ८ Il श्रीमद्भगवद् गीता अध्याय 6 गीता प्रेस , गोरखपुर से साभार - ShareChat
##भगवद गीता🙏🕉️ #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏 प्रेरणादायक विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 #🤗जया किशोरी जी🕉️
#भगवद गीता🙏🕉️ - 09 जनवरी   जिरूरी नही कि दोष हमेशा अंधेरे का हो , अधिक उजाला भी कभी -कभी इंसान को अंधा बना देती है MN 09 जनवरी   जिरूरी नही कि दोष हमेशा अंधेरे का हो , अधिक उजाला भी कभी -कभी इंसान को अंधा बना देती है MN - ShareChat
#🙏 प्रेरणादायक विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏गीता ज्ञान🛕 ##भगवद गीता🙏🕉️
🙏 प्रेरणादायक विचार - 28 घववी भरोसा रखें हृम जब कही किसी का अच्छा कर रहे होते हैं॰ तब हमारे लिए भी कही कुछ अच्छा हो रहा होता है MN 28 घववी भरोसा रखें हृम जब कही किसी का अच्छा कर रहे होते हैं॰ तब हमारे लिए भी कही कुछ अच्छा हो रहा होता है MN - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 ##भगवद गीता🙏🕉️ #🙏 प्रेरणादायक विचार #🙏गुरु महिमा😇
🙏गीता ज्ञान🛕 - आरुरुक्षोमुंनेयोंगं कारणमुच्यते । Cd योगारूढस्य तस्यैव शमः कारणमुच्यते ।। योगमें आरूढ़ होनेको इच्छावाले मननशील लिये योगकी प्राप्तिमें निष्कामभावसे कर्म पुरुपके करना ही हेतु कहा जाता है और योगारूढ़ हो जानेपर उस योगारूढ़ पुरुपका जो सर्वसंकल्पोंका अभाव है, वही कल्याणमें हेतु कहा जाता है II ३ II नेन्द्रियार्थेषु न कर्मस्वनुपज्चते। ಶಾ f೯ योगारूढस्तदोच्यते ।। सर्वसङ्कल्पसन्न्यासी जिस कालमें न तो इन्द्रियोंके भोगोंमें और न कर्मोंमें हो आसक्त होता है, उस कालमें सर्वसंकल्पोंका त्यागी पुरुप योगारूढ़ कहा जाता है Il ४।l नात्मानमवसादयेत्। उद्धरेदात्मनात्मानं आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः I। संसार समुद्रसे उद्धार करे अपने द्वारा अपना और अपनेको अधोगतिमें न डाले; क्योंकि यह मनुष्य आप ही तो अपना मित्र है और आप ही अपना शत्रु है Il५ II श्रीमद्भगवद् गीता अध्याय 6 गीता प्रेस , गोरखपुर से साभार आरुरुक्षोमुंनेयोंगं कारणमुच्यते । Cd योगारूढस्य तस्यैव शमः कारणमुच्यते ।। योगमें आरूढ़ होनेको इच्छावाले मननशील लिये योगकी प्राप्तिमें निष्कामभावसे कर्म पुरुपके करना ही हेतु कहा जाता है और योगारूढ़ हो जानेपर उस योगारूढ़ पुरुपका जो सर्वसंकल्पोंका अभाव है, वही कल्याणमें हेतु कहा जाता है II ३ II नेन्द्रियार्थेषु न कर्मस्वनुपज्चते। ಶಾ f೯ योगारूढस्तदोच्यते ।। सर्वसङ्कल्पसन्न्यासी जिस कालमें न तो इन्द्रियोंके भोगोंमें और न कर्मोंमें हो आसक्त होता है, उस कालमें सर्वसंकल्पोंका त्यागी पुरुप योगारूढ़ कहा जाता है Il ४।l नात्मानमवसादयेत्। उद्धरेदात्मनात्मानं आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः I। संसार समुद्रसे उद्धार करे अपने द्वारा अपना और अपनेको अधोगतिमें न डाले; क्योंकि यह मनुष्य आप ही तो अपना मित्र है और आप ही अपना शत्रु है Il५ II श्रीमद्भगवद् गीता अध्याय 6 गीता प्रेस , गोरखपुर से साभार - ShareChat