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#❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #मेरे विचार #🙏 प्रेरणादायक विचार
❤️जीवन की सीख - 57 Uకే बुरे प्रभावों से बचना[, उदका प्रतिकार करना, डुसी क॒ नाम सयम స్ే ఠ1 ణ్న్ైవ్యణిః थौग्यता पैढुा कर शेग्यता योग्यता डसै प्रभावशाली बनाता है। MN MN 57 Uకే बुरे प्रभावों से बचना[, उदका प्रतिकार करना, डुसी क॒ नाम सयम స్ే ఠ1 ణ్న్ైవ్యణిః थौग्यता पैढुा कर शेग्यता योग्यता डसै प्रभावशाली बनाता है। MN MN - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #मेरे विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏 प्रेरणादायक विचार #❤️जीवन की सीख
🙏गीता ज्ञान🛕 - 3் अथ पञ्चदशोउध्यायः श्रीभगवानुवाच ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम्| छन्दांसि यस्य पर्णांनि यस्तं वेद स वेदवित्।।  श्रीभगवान् वोले  आदिपुरुप परमेश्वररूप मूलवाले१ शाखावाले ` जिस संसाररूप  और ग्रह्मारूप मुख्य पीपलके वृक्षको अविनाशी ै कहते हैँ तथा वेद T್ತಗಾ आदिपुरुप  नित्य वासुदेवभगवान् हा नारायण ?. अनन्त तथा सवके आधार होनेके 477 37 नित्यधाममें सगुणरूपसे वास करनेके कारण ऊर्ध्वं नामसे कहे गये हैं और वे मायापति, सवंशक्तिमान् परमेश्वर हा इस संसाररूप कारण हैॅ॰ इसलिये इस संसार-वृक्षको ' ऊध्वंमूलवाला  वृक्षके कहते है। आदिपुरुप परमेश्वरसे उत्पत्तिवाला होनेके कारण तथा २. उस नित्यधामसे नोचे ग्रह्मलोकमें वास करनेके कारण, हिरण्यगर्भरूप त्रह्माको परमेश्वरको अपेक्षा ' अधः ' कहा ह और वहो इस संसारका विस्तार करनेवाला होनेसे इसको मुख्य शाखा हैं॰ इसलिये इस अधःशाखावाला ' कहते हॅ। संसारवृक्षको  परमात्मा अविनाशी है तथा इस   वृक्षका  मूल 3 कारण अनादिकालसे   इसको   परम्परा चलो आतौ हॅ॰ इसलिये   इस अविनाशो ' कहते हॅ। संसारवृक्षको  श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय १५ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार 3் अथ पञ्चदशोउध्यायः श्रीभगवानुवाच ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम्| छन्दांसि यस्य पर्णांनि यस्तं वेद स वेदवित्।।  श्रीभगवान् वोले  आदिपुरुप परमेश्वररूप मूलवाले१ शाखावाले ` जिस संसाररूप  और ग्रह्मारूप मुख्य पीपलके वृक्षको अविनाशी ै कहते हैँ तथा वेद T್ತಗಾ आदिपुरुप  नित्य वासुदेवभगवान् हा नारायण ?. अनन्त तथा सवके आधार होनेके 477 37 नित्यधाममें सगुणरूपसे वास करनेके कारण ऊर्ध्वं नामसे कहे गये हैं और वे मायापति, सवंशक्तिमान् परमेश्वर हा इस संसाररूप कारण हैॅ॰ इसलिये इस संसार-वृक्षको ' ऊध्वंमूलवाला  वृक्षके कहते है। आदिपुरुप परमेश्वरसे उत्पत्तिवाला होनेके कारण तथा २. उस नित्यधामसे नोचे ग्रह्मलोकमें वास करनेके कारण, हिरण्यगर्भरूप त्रह्माको परमेश्वरको अपेक्षा ' अधः ' कहा ह और वहो इस संसारका विस्तार करनेवाला होनेसे इसको मुख्य शाखा हैं॰ इसलिये इस अधःशाखावाला ' कहते हॅ। संसारवृक्षको  परमात्मा अविनाशी है तथा इस   वृक्षका  मूल 3 कारण अनादिकालसे   इसको   परम्परा चलो आतौ हॅ॰ इसलिये   इस अविनाशो ' कहते हॅ। संसारवृक्षको  श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय १५ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat
#transfer #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #मेरे विचार #🙏 प्रेरणादायक विचार
transfer - 2026 इस वर्ष होने वाले स्थानांतरण में यह जरूरी नहीं है कि जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों के स्थानांतरण नहीं करें। इसकी बजाय आदेश में लिखा जाना चाहिए कि जो लोकसेवक जनगणना कार्य में संलग्ग्न है, उन्हें अपने नवीन स्थल प भी द्वितीय चरण जनगणना कार्य करना अनिवार्य होगा। MN 2026 इस वर्ष होने वाले स्थानांतरण में यह जरूरी नहीं है कि जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों के स्थानांतरण नहीं करें। इसकी बजाय आदेश में लिखा जाना चाहिए कि जो लोकसेवक जनगणना कार्य में संलग्ग्न है, उन्हें अपने नवीन स्थल प भी द्वितीय चरण जनगणना कार्य करना अनिवार्य होगा। MN - ShareChat
#मेरे विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏 प्रेरणादायक विचार #❤️जीवन की सीख #transfer
मेरे विचार - 026 इस वर्ष होने वाले स्थानांतरण में यह जरूरी नहीं है कि जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों के स्थानांतरण नहीं करें। इसकी बजाय आदेश में लिखा जाना चाहिए कि जो लोकसेवक जनगणना कार्य में संलग्न है, उन्हें अपने नवीन स्थलपरभी द्वितीय चरण जनगणना कार्य करना अनिवार्य होगा। 026 इस वर्ष होने वाले स्थानांतरण में यह जरूरी नहीं है कि जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों के स्थानांतरण नहीं करें। इसकी बजाय आदेश में लिखा जाना चाहिए कि जो लोकसेवक जनगणना कार्य में संलग्न है, उन्हें अपने नवीन स्थलपरभी द्वितीय चरण जनगणना कार्य करना अनिवार्य होगा। - ShareChat
#🙏 प्रेरणादायक विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #मेरे विचार
🙏 प्रेरणादायक विचार - 11 भरोसा सब 5 कीजिए पर लेकिन सावधानी से क्योंकि कभी-कभी खुद के दांत भी जीभ को काट लेते हैं। MN 11 भरोसा सब 5 कीजिए पर लेकिन सावधानी से क्योंकि कभी-कभी खुद के दांत भी जीभ को काट लेते हैं। MN - ShareChat
#मेरे विचार #❤️जीवन की सीख #🙏गीता ज्ञान🛕 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏 प्रेरणादायक विचार
मेरे विचार - 11 मई   बुरे प्रभावों से बचना , उनका प्रतिकार करना , नाम संयम ಹ इसी ঔ, জী मनुष्य में योग्यता पैदा कर उसे प्रभावशाली बनाता है। MN 11 मई   बुरे प्रभावों से बचना , उनका प्रतिकार करना , नाम संयम ಹ इसी ঔ, জী मनुष्य में योग्यता पैदा कर उसे प्रभावशाली बनाता है। MN - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #मेरे विचार
🙏गीता ज्ञान🛕 - मां च योउव्यभिचारेण भक्तियोगेन सेवते। गुणान्समतीत्यैतान्व्रह्मभूयाय कल्पते ।। स और जो पुरुप अव्यभिचारी भक्तियोगके  द्वानों নঙ্ক   9ী   বূন  भजता   है॰ निरन्तर मुझको भलीभाँति लाँघकर सच्चिदानन्दघन ग्रह्मको गुणोंको प्राप्त होनेके लिये योग्य चन जाता है Il २६ Il ब्रह्मणो हि प्रतिष्ठाहममृतस्याव्ययस्य च। सुखस्यैकान्तिकस्य च।। शाश्वतस्य च धर्मस्य और क्योंकि उस अविनाशी परव्रह्मका अमृतका  तथा नित्यधर्मका और अखण्ड एकरस आनन्दका आश्रय मैं हूँ Il २७ Il श्रीमद्भगवद्नीतासूपनिपत्सु ग्रह्मविद्यायां ் எfsf योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे गुणत्रयविभागयोगो  चतुर्दशोषध्यायः नाम II ?& Il ~0~ केवल एक सर्वंशक्तिमान् परमेश्वर वासुदेवभगवानूको हो अपना स्वामो मानता हुआ, स्वार्थ और अभिमानको त्यागकर, श्रद्धा और भावके सहित परम प्रेमसे निरन्तर चिन्तन करनेको अव्यभिचारो   भक्तियोग ' कहते हॅ। श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार मां च योउव्यभिचारेण भक्तियोगेन सेवते। गुणान्समतीत्यैतान्व्रह्मभूयाय कल्पते ।। स और जो पुरुप अव्यभिचारी भक्तियोगके  द्वानों নঙ্ক   9ী   বূন  भजता   है॰ निरन्तर मुझको भलीभाँति लाँघकर सच्चिदानन्दघन ग्रह्मको गुणोंको प्राप्त होनेके लिये योग्य चन जाता है Il २६ Il ब्रह्मणो हि प्रतिष्ठाहममृतस्याव्ययस्य च। सुखस्यैकान्तिकस्य च।। शाश्वतस्य च धर्मस्य और क्योंकि उस अविनाशी परव्रह्मका अमृतका  तथा नित्यधर्मका और अखण्ड एकरस आनन्दका आश्रय मैं हूँ Il २७ Il श्रीमद्भगवद्नीतासूपनिपत्सु ग्रह्मविद्यायां ் எfsf योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे गुणत्रयविभागयोगो  चतुर्दशोषध्यायः नाम II ?& Il ~0~ केवल एक सर्वंशक्तिमान् परमेश्वर वासुदेवभगवानूको हो अपना स्वामो मानता हुआ, स्वार्थ और अभिमानको त्यागकर, श्रद्धा और भावके सहित परम प्रेमसे निरन्तर चिन्तन करनेको अव्यभिचारो   भक्तियोग ' कहते हॅ। श्रीमढ्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat
#🙏 प्रेरणादायक विचार #मेरे विचार #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏 प्रेरणादायक विचार - न विचाल्यते। उदासीनवदासीनो गुणैर्यों गुणा वर्तन्त इत्येव योउ्वतिष्ठति नेङ्गते ।। जो साक्षौके सदृश स्थित हुआ ಫ್ಞಾ gis নিনলিন নন্কী' ক্িমা सकता और गुण जा गुणोंमें   वरतते * 8~9# हुआ समझता सच्चिदानन्दघन परमात्मामें एकोभावसे स्थित रहता हैं एवं उस स्थितिसे कभी विचलित नहीं होता II २३ II समदुःखसुखः स्वस्थः समलोप्टाश्मकाञ्चनः | तुल्यप्रियाप्रियो धीरस्तुल्यनिन्दात्मसंस्तुतिः I।  जो निरन्तर आत्मभावमें स्थित, दुःख-सुखको  पत्थर और स्वर्णमें समान समझनेवाला, मिट्टी, समान भाववाला, ज्ञानौ, प्रिय तथा अप्रियको एक- सा  माननेवाला और अपनी   निन्दा-स्तुतिमें भौ समान भाववाला हैII २४Il मानापमानयोस्तुल्यस्तुल्यो मित्रारिपक्षयोः {( सर्वारम्भपरित्यागी गूणातीतः स उच्यते ।। जो मान और अपमानमें सम है, मित्र और वैरीके पक्षमें भी सम हैं एवं सम्पूर्ण आरम्भोंमें कर्तापनके अभिमानसे रहित हैं, वह पुरुप गुणातीत कहा जाता है II २५ II  त्रिगुणमयो मायासे उत्पन्न हुए अन्तःकरणके सहित इन्द्रियोंका अपने- अपने विपयोंमें विचरना हा ' गृणोंका गुणोंमें वरतना ' हॅं। श्रीमद्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार न विचाल्यते। उदासीनवदासीनो गुणैर्यों गुणा वर्तन्त इत्येव योउ्वतिष्ठति नेङ्गते ।। जो साक्षौके सदृश स्थित हुआ ಫ್ಞಾ gis নিনলিন নন্কী' ক্িমা सकता और गुण जा गुणोंमें   वरतते * 8~9# हुआ समझता सच्चिदानन्दघन परमात्मामें एकोभावसे स्थित रहता हैं एवं उस स्थितिसे कभी विचलित नहीं होता II २३ II समदुःखसुखः स्वस्थः समलोप्टाश्मकाञ्चनः | तुल्यप्रियाप्रियो धीरस्तुल्यनिन्दात्मसंस्तुतिः I।  जो निरन्तर आत्मभावमें स्थित, दुःख-सुखको  पत्थर और स्वर्णमें समान समझनेवाला, मिट्टी, समान भाववाला, ज्ञानौ, प्रिय तथा अप्रियको एक- सा  माननेवाला और अपनी   निन्दा-स्तुतिमें भौ समान भाववाला हैII २४Il मानापमानयोस्तुल्यस्तुल्यो मित्रारिपक्षयोः {( सर्वारम्भपरित्यागी गूणातीतः स उच्यते ।। जो मान और अपमानमें सम है, मित्र और वैरीके पक्षमें भी सम हैं एवं सम्पूर्ण आरम्भोंमें कर्तापनके अभिमानसे रहित हैं, वह पुरुप गुणातीत कहा जाता है II २५ II  त्रिगुणमयो मायासे उत्पन्न हुए अन्तःकरणके सहित इन्द्रियोंका अपने- अपने विपयोंमें विचरना हा ' गृणोंका गुणोंमें वरतना ' हॅं। श्रीमद्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat
#📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏 प्रेरणादायक विचार #🙏गीता ज्ञान🛕 #❤️जीवन की सीख #मेरे विचार
📖जीवन का लक्ष्य🤔 - 0 थई दानी होने से विचारवान पहले होना आवश्यक 8 frfaR दान देना धन दुरूपयोग @ करना है। Mn 0 थई दानी होने से विचारवान पहले होना आवश्यक 8 frfaR दान देना धन दुरूपयोग @ करना है। Mn - ShareChat
#🙏 प्रेरणादायक विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🙏गीता ज्ञान🛕 #❤️जीवन की सीख #मेरे विचार
🙏 प्रेरणादायक विचार - 10 पूरे ब्रम्हाण्ड में 5 जुबान हीं एक चीज ऐसी 8, Gfal ঔঞ্ 9 जहा पर जहर और अमृत एक साथ रहतें है ।l MN 10 पूरे ब्रम्हाण्ड में 5 जुबान हीं एक चीज ऐसी 8, Gfal ঔঞ্ 9 जहा पर जहर और अमृत एक साथ रहतें है ।l MN - ShareChat