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#श्रीमद्भगवद् गीता #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏 प्रेरणादायक विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख
श्रीमद्भगवद् गीता - महात्मानस्तु मां पार्थ दैवीं प्रकृतिमाश्रिताः 1 भजन्त्यनन्यमनसो ज्ञात्वा भूतादिमव्ययम् ।। परन्तु हे कुन्तीपुत्र! दैवी आश्रित সক্কৃনিকং எளத মল मुझको महात्माजन মনানন कारण और नाशरहित अक्षरस्वरूप जानकर अनन्य मनसे युक्त होकर निरन्तर भजते हैँ Il १३ II सततं   कीर्तयन्तो ٦ यतन्तश्च বৃন্তল্ননা: ! नमस्यन्तश्च मां भक्त्या नित्ययूक्ता उपासते ।। भक्तजन निरन्तर मेरे नाम वे दृढ़ निश्चयवाले और गुणोंका कीर्तन करते हुए तथा मेरी प्राप्तिके লিব যল ক্ষনে और క్లౌ M-ಾT T मुझको <7 அர होकर हेर अनन्य ಶ सदा प्रेमसे उपासना करते हैँ Il १४ Il मामुपासते  ज्ञानयज्ञेन यजन्तो चाप्यन्ये [ एकत्वेन पृथक्त्वेन बहुधा विश्वतोमुखम् ।। दूसरे ज्ञानयोगी मुझ निर्गुण-निराकार ब्रह्मका ज्ञानयज्ञके द्वारा अभिन्रभावसे पूजन करते हुए भी ೫ಗ करते हैं और दूसरे बहुत मनुष्य ওপামনা प्रकारसे स्थित मुझ विराट्स्वरूप परमेश्वरकी पृथक् পানম তপামনা কষনে ৮ঁ Il ?4 Il जिसको आमुरे सप्पदाक नापसे िस्तारपकंक भगवानने गोता अध्याय १६ स्लोक ४ तपा स्लाक ७ से २१ तकर्मे कठा र। एसका   विस्तारपूबंक वणंन  गौता  ೫2n { {16 २ से 3 तकर्मे देम्ाना चारिये। श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 9 प्रेस , गोरखपुर से साभार गीता महात्मानस्तु मां पार्थ दैवीं प्रकृतिमाश्रिताः 1 भजन्त्यनन्यमनसो ज्ञात्वा भूतादिमव्ययम् ।। परन्तु हे कुन्तीपुत्र! दैवी आश्रित সক্কৃনিকং எளத মল मुझको महात्माजन মনানন कारण और नाशरहित अक्षरस्वरूप जानकर अनन्य मनसे युक्त होकर निरन्तर भजते हैँ Il १३ II सततं   कीर्तयन्तो ٦ यतन्तश्च বৃন্তল্ননা: ! नमस्यन्तश्च मां भक्त्या नित्ययूक्ता उपासते ।। भक्तजन निरन्तर मेरे नाम वे दृढ़ निश्चयवाले और गुणोंका कीर्तन करते हुए तथा मेरी प्राप्तिके লিব যল ক্ষনে और క్లౌ M-ಾT T मुझको <7 அர होकर हेर अनन्य ಶ सदा प्रेमसे उपासना करते हैँ Il १४ Il मामुपासते  ज्ञानयज्ञेन यजन्तो चाप्यन्ये [ एकत्वेन पृथक्त्वेन बहुधा विश्वतोमुखम् ।। दूसरे ज्ञानयोगी मुझ निर्गुण-निराकार ब्रह्मका ज्ञानयज्ञके द्वारा अभिन्रभावसे पूजन करते हुए भी ೫ಗ करते हैं और दूसरे बहुत मनुष्य ওপামনা प्रकारसे स्थित मुझ विराट्स्वरूप परमेश्वरकी पृथक् পানম তপামনা কষনে ৮ঁ Il ?4 Il जिसको आमुरे सप्पदाक नापसे िस्तारपकंक भगवानने गोता अध्याय १६ स्लोक ४ तपा स्लाक ७ से २१ तकर्मे कठा र। एसका   विस्तारपूबंक वणंन  गौता  ೫2n { {16 २ से 3 तकर्मे देम्ाना चारिये। श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 9 प्रेस , गोरखपुर से साभार गीता - ShareChat