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#मेरे विचार #❤️जीवन की सीख #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏 प्रेरणादायक विचार #📖जीवन का लक्ष्य🤔
मेरे विचार - कर्मणः सुकृतस्याहुः सात्त्विकं निर्मलं फलम्। रजसस्तु फलं दुःखमज्ञानं तमसः फलम् II श्रेष्ठ कर्मका तो सात्त्विक अर्थांत् सुख, ज्ञान और वैराग्यादि निर्मल फल कहा हैं; राजस कर्मका फल दुःख एवं तामस कर्मका फल अज्ञान कहा हैं II १६ II सत्त्वात्सञ्जायते ज्ञानं रजसो लोभ एव च। प्रमादमोहौ   तमसो   भवतोउ्ज्ञानमेव च।। सत्त्वगुणसे ज्ञान उत्पन्न होता हैं और रजोगुणसे  निस्सन्देह लोभ तथा तमोगुणसे प्रमाद * और मोह २ उत्पन्न होते हैॅं और अज्ञान भौ होता है Il १७ ।l ऊर्ध्वं गच्छन्ति सत्त्वस्था मध्ये तिष्ठन्ति राजसाः | जघन्यगुणवृत्तिस्था अधो गच्छन्ति तामसाः II  सत्त्वगुणमें स्थित पुरुप स्वर्गांदि उच्च लोकोंको  जाते हैं॰ रजोगुणमें स्थित राजस   पुरुप   मध्यमें अर्थांत् मनूष्यलोकमें होे रहते हैं और तमोगूणके प्रमाद और आलस्यादिमें स्थित AAl, कार्यरूप तामस पुरुप अधोगतिको अर्थात् कोट, पशु आदि नीच योनियोंको तथा नरकोंको प्राप्त होते हैं II १८ १I १-२. इसो अध्यायके श्लोक १३ में देखना चाहिये। श्रीमद्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार कर्मणः सुकृतस्याहुः सात्त्विकं निर्मलं फलम्। रजसस्तु फलं दुःखमज्ञानं तमसः फलम् II श्रेष्ठ कर्मका तो सात्त्विक अर्थांत् सुख, ज्ञान और वैराग्यादि निर्मल फल कहा हैं; राजस कर्मका फल दुःख एवं तामस कर्मका फल अज्ञान कहा हैं II १६ II सत्त्वात्सञ्जायते ज्ञानं रजसो लोभ एव च। प्रमादमोहौ   तमसो   भवतोउ्ज्ञानमेव च।। सत्त्वगुणसे ज्ञान उत्पन्न होता हैं और रजोगुणसे  निस्सन्देह लोभ तथा तमोगुणसे प्रमाद * और मोह २ उत्पन्न होते हैॅं और अज्ञान भौ होता है Il १७ ।l ऊर्ध्वं गच्छन्ति सत्त्वस्था मध्ये तिष्ठन्ति राजसाः | जघन्यगुणवृत्तिस्था अधो गच्छन्ति तामसाः II  सत्त्वगुणमें स्थित पुरुप स्वर्गांदि उच्च लोकोंको  जाते हैं॰ रजोगुणमें स्थित राजस   पुरुप   मध्यमें अर्थांत् मनूष्यलोकमें होे रहते हैं और तमोगूणके प्रमाद और आलस्यादिमें स्थित AAl, कार्यरूप तामस पुरुप अधोगतिको अर्थात् कोट, पशु आदि नीच योनियोंको तथा नरकोंको प्राप्त होते हैं II १८ १I १-२. इसो अध्यायके श्लोक १३ में देखना चाहिये। श्रीमद्भगवढ्गीता अध्याय १४ गीता प्रेस, गोरखपुर से साभार - ShareChat