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💥 कबीर, हरी के नाम बिन, राजा ऋषभ होय । मिट्टी लदे कुम्हार के, घास न नीरै कोए । #sat saheb ji
sat saheb ji - कबीर हरी के नाम बिन, राजा ऋषभ होय। मिट्टी लदे कुम्हार के, घास न नीरै कोए। भावार्थ भगवान के नाम (भक्ति) के बिना मनुष्य का जीवन व्यर्थ है चाहे वह कितना भी बॅड़ा राजा ही क्यों न हो; वह अगले जन्म में गधा बनता है जो कुम्हार के यहाँ मिट्टी ढोता है और घास स्वयं जंगल में खा कर आता है | FOLLOW US ON : SAMUNDKADELHI SADELHIMUNDKA SATLOK ASHRAM MUNDKA OFFICIAL     कबीर हरी के नाम बिन, राजा ऋषभ होय। मिट्टी लदे कुम्हार के, घास न नीरै कोए। भावार्थ भगवान के नाम (भक्ति) के बिना मनुष्य का जीवन व्यर्थ है चाहे वह कितना भी बॅड़ा राजा ही क्यों न हो; वह अगले जन्म में गधा बनता है जो कुम्हार के यहाँ मिट्टी ढोता है और घास स्वयं जंगल में खा कर आता है | FOLLOW US ON : SAMUNDKADELHI SADELHIMUNDKA SATLOK ASHRAM MUNDKA OFFICIAL - ShareChat