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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - जिन केचोले रतड़े पिआरेकतु तिना कै पासिगाधूड़ि तिनाँ कीजे मिलै 6 ಸಗಈಕ್ರ মানব্ধব্ধী ঔমমি] > अर्थः यहाँचोले का तात्पर्य बाहरी पहनावे से नहीं, बल्कि आत्मा मीठा और अंतर्मन के स्वरूप से है। रतड़े का अर्थ है ॰ उस परम पिता के प्रेम के गहरे रंग में सराबोर हो जाना। हे अति अंजान जिंदे! जिनका हृदय प्रभु की भक्ति के रंग में रंग जाता है, वे केवल ईश्वर को याद लगे ही नहीं करते , बल्कि उस परमात्मा को हर पल अपने अंग ्संग जैसे एक' महसूस करते हैं। ' सुहागिन अपने प्रिय के प्रेम में रची बसी रहती है, वैसे ही वे जिज्ञासु भक्त भी प्रभु की उपस्थिति के आनंद में तेरा मगन रहते हैं। गुरु साहिब बड़ी निम्रता के साथ अरदास करते हैं कि हे प्रभु! मुझे उन भक्तों की चरण धूल मिल जाए, जो सच्चे तुझसे जुड़े हुए हैं तो मेरा जीवन सफल हो जाए।परमात्मा की प्राप्ति बाहरी कर्मकांडों या दिखावे के वेश से नहीं, बल्कि मन को प्रेम की भाणा भट्टी में तपाकर उसे नाम के रंग में रंगने से होती है। ऐसे ही रूहानी भक्तों की संगत हमें भी उस परम सत्य के मार्ग पर ले जा सकती గే जिन केचोले रतड़े पिआरेकतु तिना कै पासिगाधूड़ि तिनाँ कीजे मिलै 6 ಸಗಈಕ್ರ মানব্ধব্ধী ঔমমি] > अर्थः यहाँचोले का तात्पर्य बाहरी पहनावे से नहीं, बल्कि आत्मा मीठा और अंतर्मन के स्वरूप से है। रतड़े का अर्थ है ॰ उस परम पिता के प्रेम के गहरे रंग में सराबोर हो जाना। हे अति अंजान जिंदे! जिनका हृदय प्रभु की भक्ति के रंग में रंग जाता है, वे केवल ईश्वर को याद लगे ही नहीं करते , बल्कि उस परमात्मा को हर पल अपने अंग ्संग जैसे एक' महसूस करते हैं। ' सुहागिन अपने प्रिय के प्रेम में रची बसी रहती है, वैसे ही वे जिज्ञासु भक्त भी प्रभु की उपस्थिति के आनंद में तेरा मगन रहते हैं। गुरु साहिब बड़ी निम्रता के साथ अरदास करते हैं कि हे प्रभु! मुझे उन भक्तों की चरण धूल मिल जाए, जो सच्चे तुझसे जुड़े हुए हैं तो मेरा जीवन सफल हो जाए।परमात्मा की प्राप्ति बाहरी कर्मकांडों या दिखावे के वेश से नहीं, बल्कि मन को प्रेम की भाणा भट्टी में तपाकर उसे नाम के रंग में रंगने से होती है। ऐसे ही रूहानी भक्तों की संगत हमें भी उस परम सत्य के मार्ग पर ले जा सकती - ShareChat