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#जय माँ गायत्री जय गुरुवर
जय माँ गायत्री जय गुरुवर - से हर्बल गुलाल बनवाकर १० महिलाओं को रोजगार से जोड़ा  आत्मनिर्भर मंदिरों में अर्पित ಣmf- वंदना की पहल से खिले रोजगार के फूल रसोई निकला महिला सशक्तीकरण का मंत्र माई सिटी रिपोर्टर लखनऊ। मंदिरों में अर्पित फूल अब केवल श्रद्धा का प्रतीक नहीं बल्कि स्वावलंबन ओर हरित भविष्य की सुगंध भी बिखेर रहे हे। राजधानी के चिनहट की ४६  वर्षीय बंदना सिंह मंदिरों में अर्पित फूलों से धूप और  अगरबत्तियां  बनवाकर   महिलाओं ா = কা अब वही फूल हर्वल जोड़ा।  गुलाल के रूप में नई पहचान पा रक्ति समूह की संस्थापक रेनु अग्रवाल (साडी में) के साथ महिला सदस्य। स्वय  51 १० महिलाओं को इससे लखनऊ। खानपान मे स्वाद के साथ ही घर जैसी शुद्धता और पौष्टिकता  नियमित रोजगार मिल रहा है। मे एक भी मिले तो यह आज के समय मे सोने पर सुहागा हे। विकासनगर  वंदना के समूह की महिलाएं समूह इसी शुद्धता को न सिर्फ घर॰घर पहुंचाने का काम कर रहा है बल्कि  हर मंगलवार और शनिवार को घरेलू. कम शिक्षित ओर आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को रोजगार " TFi 7 आठ प्रमुख शहर चंदना सिंह। गुहया कराकर उन्हे स्वावलंबन की राह भी दिखा रहा हे। खास बात यह हे प्रतिदिन लगभग १० क्विंटल को आय काएक बड़ा हिस्सा गरीब बच्चों को पढाई और नेत्र ক্ি সুনাব্ गेंदा, गुलाब ओर अन्य फूल एकत्र करती हें। इन्हे  रोगियों के इलाज पर भी खचं किया जाता ह। सुखाकर और प्राकृतिक विधि से संसाधित कर शुद्ध विकासनगर मे रेनु अग्रवाल ने करीव आठ साल पहले शकित समृह को हर्बल गुलाल तैयार किया जाता है। हर्बल गुलाल के स्थापना को थो। यहां सभी प्रकार को नमकीन से लेकर गुझियाः मेवा लडड मंदिरों पर अर्पित फूलों से बना लिए बंदना ने नाबार्ड से १५ दिनःका प्रशिक्षण लिया। अलसी के लडड अचार, पापड़, मसाले आटा ओर बेसन को तेयार किया रही हर्बल गुलाला  सोत : स्यय बाद इस कार्य को संगठित रूप दिया। है। रेनु ने बताया कि समूह में करीव २० ऐसी महिलाओं को रोजगार  इसके  जाता दिया गया जो आर्थिक रूप से कमजोर रथीं। होली और दीपावली पर बहुत सो  5 वाराणसी और अयोध्या में भारी मांग बंदना बताती ह होली पर लखनऊ  महिलाएं हमारे समूह से जुड़कर काम करती है क्योकि इतनी ज्यादा मांग को  वाराणसी और अयोध्या जैसे बड़े शहरों के लिए लगभग २० किवंटल हर्बल गुलाल तैयार  पूरा कर पाना २० २५ महिलाओं के बस की बात नहीं है। प्रति माह कल्याण  किया जा रहा है।यह गुलाल पूरी तरह प्राकृतिक है॰ जिससे न केवल त्वचा सुरक्षित रहती है  करोति संस्था के माध्यम सेएक नेत्र रोगी के ऑपरेशन का खर्च भी हमारे बल्कि रासायनिक रंगों से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान से॰भी बचाव होता ह। समूह की ओर से वहन किया जाता हे। ( माई सिटी रिपोर्टर ) से हर्बल गुलाल बनवाकर १० महिलाओं को रोजगार से जोड़ा  आत्मनिर्भर मंदिरों में अर्पित ಣmf- वंदना की पहल से खिले रोजगार के फूल रसोई निकला महिला सशक्तीकरण का मंत्र माई सिटी रिपोर्टर लखनऊ। मंदिरों में अर्पित फूल अब केवल श्रद्धा का प्रतीक नहीं बल्कि स्वावलंबन ओर हरित भविष्य की सुगंध भी बिखेर रहे हे। राजधानी के चिनहट की ४६  वर्षीय बंदना सिंह मंदिरों में अर्पित फूलों से धूप और  अगरबत्तियां  बनवाकर   महिलाओं ா = কা अब वही फूल हर्वल जोड़ा।  गुलाल के रूप में नई पहचान पा रक्ति समूह की संस्थापक रेनु अग्रवाल (साडी में) के साथ महिला सदस्य। स्वय  51 १० महिलाओं को इससे लखनऊ। खानपान मे स्वाद के साथ ही घर जैसी शुद्धता और पौष्टिकता  नियमित रोजगार मिल रहा है। मे एक भी मिले तो यह आज के समय मे सोने पर सुहागा हे। विकासनगर  वंदना के समूह की महिलाएं समूह इसी शुद्धता को न सिर्फ घर॰घर पहुंचाने का काम कर रहा है बल्कि  हर मंगलवार और शनिवार को घरेलू. कम शिक्षित ओर आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को रोजगार " TFi 7 आठ प्रमुख शहर चंदना सिंह। गुहया कराकर उन्हे स्वावलंबन की राह भी दिखा रहा हे। खास बात यह हे प्रतिदिन लगभग १० क्विंटल को आय काएक बड़ा हिस्सा गरीब बच्चों को पढाई और नेत्र ক্ি সুনাব্ गेंदा, गुलाब ओर अन्य फूल एकत्र करती हें। इन्हे  रोगियों के इलाज पर भी खचं किया जाता ह। सुखाकर और प्राकृतिक विधि से संसाधित कर शुद्ध विकासनगर मे रेनु अग्रवाल ने करीव आठ साल पहले शकित समृह को हर्बल गुलाल तैयार किया जाता है। हर्बल गुलाल के स्थापना को थो। यहां सभी प्रकार को नमकीन से लेकर गुझियाः मेवा लडड मंदिरों पर अर्पित फूलों से बना लिए बंदना ने नाबार्ड से १५ दिनःका प्रशिक्षण लिया। अलसी के लडड अचार, पापड़, मसाले आटा ओर बेसन को तेयार किया रही हर्बल गुलाला  सोत : स्यय बाद इस कार्य को संगठित रूप दिया। है। रेनु ने बताया कि समूह में करीव २० ऐसी महिलाओं को रोजगार  इसके  जाता दिया गया जो आर्थिक रूप से कमजोर रथीं। होली और दीपावली पर बहुत सो  5 वाराणसी और अयोध्या में भारी मांग बंदना बताती ह होली पर लखनऊ  महिलाएं हमारे समूह से जुड़कर काम करती है क्योकि इतनी ज्यादा मांग को  वाराणसी और अयोध्या जैसे बड़े शहरों के लिए लगभग २० किवंटल हर्बल गुलाल तैयार  पूरा कर पाना २० २५ महिलाओं के बस की बात नहीं है। प्रति माह कल्याण  किया जा रहा है।यह गुलाल पूरी तरह प्राकृतिक है॰ जिससे न केवल त्वचा सुरक्षित रहती है  करोति संस्था के माध्यम सेएक नेत्र रोगी के ऑपरेशन का खर्च भी हमारे बल्कि रासायनिक रंगों से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान से॰भी बचाव होता ह। समूह की ओर से वहन किया जाता हे। ( माई सिटी रिपोर्टर ) - ShareChat