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गज़ल #✒ शायरी
✒ शायरी - गज़ल निगाह में मंज़िल तो जुस्तुजू ही सही आरज़ू ही सही विसाल मयस्सर तो न तन में ख़ून फ़राहम न अश्क आँखों में नमाज़ एनशौक़ तो वाजिब है बे-वुज़ू ही सही ক্িমী নফক্ক নী তমী নড়ম ময-ব্ূন নালী हावऱहू ही सही नहीं जो बादा-ओ साग़र तो फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ इंतिज़ार कठिन है तो जब तलक ऐ दिल गर गुफ़्तुगू ही सही किसी के वादा ए॰फ़र्दा की दयार ए ग़ैर में महरम अगर नहीं कोई గెt '{hu' fTTad7tVi -Ewగే కAoo गज़ल निगाह में मंज़िल तो जुस्तुजू ही सही आरज़ू ही सही विसाल मयस्सर तो न तन में ख़ून फ़राहम न अश्क आँखों में नमाज़ एनशौक़ तो वाजिब है बे-वुज़ू ही सही ক্িমী নফক্ক নী তমী নড়ম ময-ব্ূন নালী हावऱहू ही सही नहीं जो बादा-ओ साग़र तो फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ इंतिज़ार कठिन है तो जब तलक ऐ दिल गर गुफ़्तुगू ही सही किसी के वादा ए॰फ़र्दा की दयार ए ग़ैर में महरम अगर नहीं कोई గెt '{hu' fTTad7tVi -Ewగే కAoo - ShareChat