#❤️जीवन की सीख
🌟 || प्रसन्नता की कुंजी || 🌟
संसार की अस्थिरता एवं नश्वरता का ज्ञान ही जीवन की प्रसन्नता का आधार है। ज्ञानी बनना ही पर्याप्त नहीं अपितु ज्ञान का आचरण में उतरना भी आवश्यक है। जो ज्ञान आचरण में नहीं उतर पाता वह कंजूस के उस धन के समान ही है, जो तिजोरी में तो पड़ा है, लेकिन आवश्यकताओं की पूर्ति में कभी भी सहायक नहीं हो पाता है। मूढ़ता में नहीं ज्ञान में जियो ताकि आप प्रत्येक स्थिति में प्रसन्न रहकर आनंदमय जीवन जी सको।
ज्ञानी इसलिए प्रत्येक स्थिति में प्रसन्न रहता है क्योंकि वह जानता है कि जो मुझे मिला, वो कभी मेरा था ही नहीं और जो कुछ मुझसे छूट रहा है, वह भी मेरा नहीं है। परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है, ये बात ज्ञानी व्यक्ति मन से स्वीकार कर लेता है। संसारी इसलिए रोता है क्योंकि उसकी मान्यताओं में जो कुछ उसे मिला है वो सदा उसी का है। जो कुछ छूट रहा है, उस पर अपना अधिकार समझना ही अज्ञानी मनुष्य के अशांत रहने का कारण भी है। ज्ञान ही प्रसन्नता के द्वार की कुंजी है।🖋️
जय श्री राधे कृष्ण
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