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#🗣कबीर अमृतवाणी📢
🗣कबीर अमृतवाणी📢 - जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि है मैं नाहिं।। प्रेम गली अति सांकरी, तामें दो न समाहिं | कबार कबार जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि है मैं नाहिं।। प्रेम गली अति सांकरी, तामें दो न समाहिं | कबार कबार - ShareChat