कबीर दास (साहेब)
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@kabir13980
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कबीर दास (साहेब)
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KABIR IS SUPREME GOD.
#🗣कबीर अमृतवाणी📢
🗣कबीर अमृतवाणी📢 - "साधु भूखा भाव का, ঘন কা মুষা নাহি) भूखा जो फिरऐ, धन का सो तो साधू नाहि , संत कबीरदास "साधु भूखा भाव का, ঘন কা মুষা নাহি) भूखा जो फिरऐ, धन का सो तो साधू नाहि , संत कबीरदास - ShareChat
#🗣कबीर अमृतवाणी📢
🗣कबीर अमृतवाणी📢 - NEWS झारखंड कबीर, साहेबसै संबाहोत है, बंदे से कछु नांहि। राई से पर्वत करे, पर्वत से फिर राई ।। SA News Channel SANEWS.in Folow us on: SANews Jharkhand NEWS झारखंड कबीर, साहेबसै संबाहोत है, बंदे से कछु नांहि। राई से पर्वत करे, पर्वत से फिर राई ।। SA News Channel SANEWS.in Folow us on: SANews Jharkhand - ShareChat
#🗣कबीर अमृतवाणी📢
🗣कबीर अमृतवाणी📢 - कबीर ऐसी होली खेलिए, साँचा शब्द की मार। काम क्रोध मद लोभ को, डारो हृदय निकार।। कबीर कबीर ऐसी होली खेलिए, साँचा शब्द की मार। काम क्रोध मद लोभ को, डारो हृदय निकार।। कबीर - ShareChat
#🗣कबीर अमृतवाणी📢
🗣कबीर अमृतवाणी📢 - राम राम सब कोई कहे, ठग ठाकुर और चोर | जिस राम से ध्रुव, प्रह्लाद मीरा तरे, वह राम कोई और कबीर दास जी राम राम सब कोई कहे, ठग ठाकुर और चोर | जिस राम से ध्रुव, प्रह्लाद मीरा तरे, वह राम कोई और कबीर दास जी - ShareChat
#🗣कबीर अमृतवाणी📢
🗣कबीर अमृतवाणी📢 - "ज्ञानी के हम गुरु हैं॰ मूरख के हम दास उसने उठाया डंडा, 5lತ हमने लिएं हाथ।।"  "ज्ञानी के हम गुरु हैं॰ मूरख के हम दास उसने उठाया डंडा, 5lತ हमने लिएं हाथ।।" - ShareChat
#🗣कबीर अमृतवाणी📢
🗣कबीर अमृतवाणी📢 - लोहा की चोरी करै, करै सुई की दान | उॅचे चढ़ि कर देखता, केतिक दूर बिमान।।  अर्थ- लोग लोहे की चोरी करते हैं और सूई का दान करते हैं। तब उँचे चढ़कर देखते हैं कि विमान कितनी दूर है। लोहा की चोरी करै, करै सुई की दान | उॅचे चढ़ि कर देखता, केतिक दूर बिमान।।  अर्थ- लोग लोहे की चोरी करते हैं और सूई का दान करते हैं। तब उँचे चढ़कर देखते हैं कि विमान कितनी दूर है। - ShareChat
#🗣कबीर अमृतवाणी📢
🗣कबीर अमृतवाणी📢 - जाति सिर्फ दो ही हे, स्त्री और पुरुष और धर्म सिर्फ एक ही है, इन्सानियत बाकी, सब पाखंड और धंधा है संत कबीर जी న जाति सिर्फ दो ही हे, स्त्री और पुरुष और धर्म सिर्फ एक ही है, इन्सानियत बाकी, सब पाखंड और धंधा है संत कबीर जी న - ShareChat
#🗣कबीर अमृतवाणी📢
🗣कबीर अमृतवाणी📢 - बेटा जाए क्या हुआ , कहा बजावै थाल। आवन जावन ह्वै रहा , ज्यौं कीड़ी का नालII कबीरदास अभ्युदय साहित्य बेटा पैदा होने पर हे प्राणी थाली इतनी प्रसन्नता क्यों प्रकट बजाकर करते हो? जीव तो चौरासी लाख योनियों में वैसे ही आता जाता रहता है जैसे जल से युक्त नाले में कीड़े आते-्जाते रहते हैं। बेटा जाए क्या हुआ , कहा बजावै थाल। आवन जावन ह्वै रहा , ज्यौं कीड़ी का नालII कबीरदास अभ्युदय साहित्य बेटा पैदा होने पर हे प्राणी थाली इतनी प्रसन्नता क्यों प्रकट बजाकर करते हो? जीव तो चौरासी लाख योनियों में वैसे ही आता जाता रहता है जैसे जल से युक्त नाले में कीड़े आते-्जाते रहते हैं। - ShareChat