कबीर दास (साहेब)
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@kabir13980
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कबीर दास (साहेब)
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KABIR IS SUPREME GOD.
#🗣कबीर अमृतवाणी📢
🗣कबीर अमृतवाणी📢 - खाना, सोना, बच्चे पैदा करना, और मर जाना। ஔ तो जानवर के भी है मनुष्य जीवन भक्ति के लिए मिला है। भक्ति हम किसी जन्म में नहीं कर सकते केवल मनुष्ये जन्ममें করয সক্কন ঔ.!! खाना, सोना, बच्चे पैदा करना, और मर जाना। ஔ तो जानवर के भी है मनुष्य जीवन भक्ति के लिए मिला है। भक्ति हम किसी जन्म में नहीं कर सकते केवल मनुष्ये जन्ममें করয সক্কন ঔ.!! - ShareChat
#🗣कबीर अमृतवाणी📢
🗣कबीर अमृतवाणी📢 - ~adau कबीर , यह मन नीच मूल है , बीज ही कर्म सुहाय | अमृत मान छोड़ कर , 9 विषहिं प्रीति करि खाय।। भावार्थ :- परमेश्वर कबीर जी कहते हैं कि मनष्य का मन तो विषय-वासना एवं मोह ममता में फंसा हुआ है, इसलिए इसे नीच कर्म यानी काम, क्रोध, मोह, लोभ और अहंकार आदि ಕೆಗಾ TTಾ ೯l 31ಾ-TT # प्राप्त हुआ अमृत (सत्संग भक्ति) को तो त्यागता है और अधम विषयों का सेवन बड़ा ही प्रेम से करता है। SINBANEIVST SANEWSI SANETSIN BANEIVB IN SANE;SL ~adau कबीर , यह मन नीच मूल है , बीज ही कर्म सुहाय | अमृत मान छोड़ कर , 9 विषहिं प्रीति करि खाय।। भावार्थ :- परमेश्वर कबीर जी कहते हैं कि मनष्य का मन तो विषय-वासना एवं मोह ममता में फंसा हुआ है, इसलिए इसे नीच कर्म यानी काम, क्रोध, मोह, लोभ और अहंकार आदि ಕೆಗಾ TTಾ ೯l 31ಾ-TT # प्राप्त हुआ अमृत (सत्संग भक्ति) को तो त्यागता है और अधम विषयों का सेवन बड़ा ही प्रेम से करता है। SINBANEIVST SANEWSI SANETSIN BANEIVB IN SANE;SL - ShareChat
#🗣कबीर अमृतवाणी📢
🗣कबीर अमृतवाणी📢 - मुझे जिससे इश्क़ है वो सबसे जुदा है, वो कोई और नही ज़नाब वो मेरा खुदा है ४! मुझे जिससे इश्क़ है वो सबसे जुदा है, वो कोई और नही ज़नाब वो मेरा खुदा है ४! - ShareChat
#🗣कबीर अमृतवाणी📢
🗣कबीर अमृतवाणी📢 - माया मुई न मन मुवा , मरि-मरि गया सरीर। त्रिष्णाँ नाँ मुई, यौं कहै दास कबीर II आसा माया मुई न मन मुवा , मरि-मरि गया सरीर। त्रिष्णाँ नाँ मुई, यौं कहै दास कबीर II आसा - ShareChat
#🗣कबीर अमृतवाणी📢
🗣कबीर अमृतवाणी📢 - कबीर वाणी कबीर मात पिता सो शत्रु है, बाल पढ़ार्वै नाहिा  हंसन में बगुला यथा, तथा अनपढ़ सो पंडित माहीं ।l সানাথ जो माता पिता अपने बच्चा को पढ़ाते नहीं, वे अपने बच्चों के शत्रु ह। अशिशित व्यक्ति शिशित व्यक्तिरयों मे  पक्षियों ्ें बगुला। " ऐसा होता ह जेसे हंस  यहा पढाने का नान्पर्य धार्मिफ " ज्ञान कराने से ६ सुनने से ह।"  सत्सग आदि कबीर वाणी कबीर मात पिता सो शत्रु है, बाल पढ़ार्वै नाहिा  हंसन में बगुला यथा, तथा अनपढ़ सो पंडित माहीं ।l সানাথ जो माता पिता अपने बच्चा को पढ़ाते नहीं, वे अपने बच्चों के शत्रु ह। अशिशित व्यक्ति शिशित व्यक्तिरयों मे  पक्षियों ्ें बगुला। " ऐसा होता ह जेसे हंस  यहा पढाने का नान्पर्य धार्मिफ " ज्ञान कराने से ६ सुनने से ह।"  सत्सग आदि - ShareChat
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#🗣कबीर अमृतवाणी📢
🗣कबीर अमृतवाणी📢 - sanewsjharkhand SA [5 "परमात्मा से जब भी माँगो तो रब को ही माँगो क्योंकि जब परमात्मा तुम्हारा होगा तो सब तुम्हारा होगा [[ SANEWS.in' SANews Channel Folonus on: SANOWSJharkhand sanewsjharkhand SA [5 "परमात्मा से जब भी माँगो तो रब को ही माँगो क्योंकि जब परमात्मा तुम्हारा होगा तो सब तुम्हारा होगा [[ SANEWS.in' SANews Channel Folonus on: SANOWSJharkhand - ShareChat
#🗣कबीर अमृतवाणी📢
🗣कबीर अमृतवाणी📢 - पाखान गढि कै मूरति कीन्ही, ২ ৯ তানী পাও Il जे एह मूरति साची है, गड्हणहारे खाउ 3 Teachings of Satguru Kabir पाखान गढि कै मूरति कीन्ही, ২ ৯ তানী পাও Il जे एह मूरति साची है, गड्हणहारे खाउ 3 Teachings of Satguru Kabir - ShareChat
#🗣कबीर अमृतवाणी📢
🗣कबीर अमृतवाणी📢 - कबीर दास जी बकरी पालते थे। बकरी कभी पड़ोस के मंदिर घुस जाती थी, तो कभी मस्जिद में और भगवान का मंदिर तथा अल्लाह की मस्जिद गंदा कर देती थी। और मौलवी शशिकायत पुजारी बकरी कबीर साहब तुम्हारी घुस जाती है।' मंदिर मस्जिद कबीर दास जी बोले- "महाराज, माफ कीजिए जानवर ' तभी घुस जाती है॰॰. मैं कभी घुसा क्या ? (तब तक पढ़ें जब तक समझ न जाएं?) कबीर दास जी बकरी पालते थे। बकरी कभी पड़ोस के मंदिर घुस जाती थी, तो कभी मस्जिद में और भगवान का मंदिर तथा अल्लाह की मस्जिद गंदा कर देती थी। और मौलवी शशिकायत पुजारी बकरी कबीर साहब तुम्हारी घुस जाती है।' मंदिर मस्जिद कबीर दास जी बोले- "महाराज, माफ कीजिए जानवर ' तभी घुस जाती है॰॰. मैं कभी घुसा क्या ? (तब तक पढ़ें जब तक समझ न जाएं?) - ShareChat
#🗣कबीर अमृतवाणी📢
🗣कबीर अमृतवाणी📢 - कवीर गाणाा Sd&, भक्ति बीज बिनसै नहीं , आ पडै.स झोल | जै कंचन बिष्टा पडै , ঘট ন নাকা মীল | l भावार्थः कबीर परमेश्वर जी ने भक्त के लक्ष्यण तथा महिमा बताई है। कहा है कि जो भक्ति बीज अर्थात् सच्चा भक्त होगा, उसका नाश नहीं होता। वह भक्ति नहीं छोड़ता चाहे सैकड़ों आपत्तियाँ आ पडै। चाहे संसार के लोग उसे कितना ही बदनाम करें॰ चाहे कितना ही अपमानित करें। परमात्मा के दरबार में उसकी महिमा कम नहीं होती। जैसे स्वर्ण यदि बिष्टे (गोबर ) में गिर जाए तो भी उसकी कीमत कम नहीं होती। a ~ ~ ~ n कवीर गाणाा Sd&, भक्ति बीज बिनसै नहीं , आ पडै.स झोल | जै कंचन बिष्टा पडै , ঘট ন নাকা মীল | l भावार्थः कबीर परमेश्वर जी ने भक्त के लक्ष्यण तथा महिमा बताई है। कहा है कि जो भक्ति बीज अर्थात् सच्चा भक्त होगा, उसका नाश नहीं होता। वह भक्ति नहीं छोड़ता चाहे सैकड़ों आपत्तियाँ आ पडै। चाहे संसार के लोग उसे कितना ही बदनाम करें॰ चाहे कितना ही अपमानित करें। परमात्मा के दरबार में उसकी महिमा कम नहीं होती। जैसे स्वर्ण यदि बिष्टे (गोबर ) में गिर जाए तो भी उसकी कीमत कम नहीं होती। a ~ ~ ~ n - ShareChat