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#🗣कबीर अमृतवाणी📢
🗣कबीर अमृतवाणी📢 - पाथर पूजे हरि मिले, तो मैं पूजूँ पहाड़ घर की चाकी कोई न पूजै, जाको पीस खाये संसार संत कबीरदास [೧ k nInq, nn[ pnn काना च्त " पाथर पूजे हरि मिले, तो मैं पूजूँ पहाड़ घर की चाकी कोई न पूजै, जाको पीस खाये संसार संत कबीरदास [೧ k nInq, nn[ pnn काना च्त " - ShareChat