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#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #सोना की जिंदगी कुछ इस तरह
✍️ साहित्य एवं शायरी - मा कांप गई उस दिन जिस दिन माँ ने पास बैठाकर, मेरे बालों में उंगलियाँ फेरते हुए कहा-मैं पूरी ज़िंदगी तेरे साथ नहीं रह पाऊँगी बेटा... उसकी आवाज़ कांप रही थी, और मेरी साँसें थम सी गई थीं। वो बोलीअपना ध्यान रखना सीख ले, दुनिया माँ हर 4$7 4<6# 8, वक्त ढाल बनकर खडी नहीं रह पाती... बार समझ आया, माँ की उस दिन பள ममता सिर्फ़ प्यार नहीं, आने वाले अकेलेपन की खामोश तैयारी भी होती है।"* Osona_creationa3 मा कांप गई उस दिन जिस दिन माँ ने पास बैठाकर, मेरे बालों में उंगलियाँ फेरते हुए कहा-मैं पूरी ज़िंदगी तेरे साथ नहीं रह पाऊँगी बेटा... उसकी आवाज़ कांप रही थी, और मेरी साँसें थम सी गई थीं। वो बोलीअपना ध्यान रखना सीख ले, दुनिया माँ हर 4$7 4<6# 8, वक्त ढाल बनकर खडी नहीं रह पाती... बार समझ आया, माँ की उस दिन பள ममता सिर्फ़ प्यार नहीं, आने वाले अकेलेपन की खामोश तैयारी भी होती है।"* Osona_creationa3 - ShareChat