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गज़ल #✒ शायरी
✒ शायरी - veer ki kalam गज़ल www vccranshcom जो दिल नहीं समझे वो ज़ुबान नहीं समझेंगे , फैसला करने बैठे मुंसिफ़, ईमान नहीं समझेंगे। अपनी खुदगर्ज़ी में इतने मशरूफ हैं साहेब , अपने अलावा और को परेशान नहीं समझेंगे। तुम भले ही निकाल रख दो जान हथेली पर, तो कुरबान नहीं समझेंगे। जब कद्र-ए॰वफ़ा नहीं हमारा सच तो मोहब्बत के सिवा कुछ नहीं , 'वीर' हम जैसे गीता और कुरान नहीं समझेंगे। Appl Motivational Videos veerkikalam Want वीर veer ki kalam गज़ल www vccranshcom जो दिल नहीं समझे वो ज़ुबान नहीं समझेंगे , फैसला करने बैठे मुंसिफ़, ईमान नहीं समझेंगे। अपनी खुदगर्ज़ी में इतने मशरूफ हैं साहेब , अपने अलावा और को परेशान नहीं समझेंगे। तुम भले ही निकाल रख दो जान हथेली पर, तो कुरबान नहीं समझेंगे। जब कद्र-ए॰वफ़ा नहीं हमारा सच तो मोहब्बत के सिवा कुछ नहीं , 'वीर' हम जैसे गीता और कुरान नहीं समझेंगे। Appl Motivational Videos veerkikalam Want वीर - ShareChat