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#जय माँ गायत्री जय गुरुवर
जय माँ गायत्री जय गुरुवर - असत्य की ओर नहीं , सत्य की ओर सत्य ! सत्य !! सत्य !!! अहा, कितना सुंदर शब्द है। को शांति मिलती है, विचार करते ही er उच्चारण करते ही मस्तिष्क शीतल हो जाता है, हृदयंगम करने से कलेजा ठंडक अनुभव करता है। झूठ के मायावी प्रपंचों में उलझ कर ईश्वर का राजकुमार- मनुष्य मानवता से पतित होकर पशु बन गया सत्य की अवहेलना करने का अभिशाप वह भुगत रहा है। है ईश्वर सत्य है, आत्मा सत्य है, प्रभु की त्रिगुणमयी लीला सर्वत्र सत्य ही सत्य व्याप्त हो रहा है। जीवन के सत्य है हमारा जीवन इसलिए कण-्कण की एक ही प्यास है - सत्य ' है कि अखिल सत्य तत्त्व में विचरण करते हुए अमृत का पान करें | प्रभु ने कृपा करके हमें अपने संसार की सत्यरूपी वाटिका लिए में भ्रमण करके आनंद लाभ करने के भेजा है , परंतु हाय, हम तो अपने को बिलकुल ही भूले जा रहे हैं| वास्तव में दुनियाँ कुछ नहीं है। अपनी छाया ही संसार के दर्पण में और प्रतिबिंबित होे रही है। सत्य ' मनुष्यों को प्रेरणा देता है अंतर में दृष्टि डालो, अपना दृष्टिकोण बदलो, अपना दुनियाँ का स्वरूप समझो, अपने को अच्छा बना डालो बस सारी दुनियाँ अच्छी बन जाएगी| तुम सत्यनिष्ठ লিং तुम्हारे बनो, दुनियाँ तुम्हारे साथ सत्य का आचरण करेगी। श्रुति कहती है असतो मा सद्गमय ' असत्य की ओर नहीं, सत्य ओर गमन कीजिए। आपका में कल्याण है। इसी ५४ -अखण्ड ज्योति जनवरी १९४२ पृष्ठ १ असत्य की ओर नहीं , सत्य की ओर सत्य ! सत्य !! सत्य !!! अहा, कितना सुंदर शब्द है। को शांति मिलती है, विचार करते ही er उच्चारण करते ही मस्तिष्क शीतल हो जाता है, हृदयंगम करने से कलेजा ठंडक अनुभव करता है। झूठ के मायावी प्रपंचों में उलझ कर ईश्वर का राजकुमार- मनुष्य मानवता से पतित होकर पशु बन गया सत्य की अवहेलना करने का अभिशाप वह भुगत रहा है। है ईश्वर सत्य है, आत्मा सत्य है, प्रभु की त्रिगुणमयी लीला सर्वत्र सत्य ही सत्य व्याप्त हो रहा है। जीवन के सत्य है हमारा जीवन इसलिए कण-्कण की एक ही प्यास है - सत्य ' है कि अखिल सत्य तत्त्व में विचरण करते हुए अमृत का पान करें | प्रभु ने कृपा करके हमें अपने संसार की सत्यरूपी वाटिका लिए में भ्रमण करके आनंद लाभ करने के भेजा है , परंतु हाय, हम तो अपने को बिलकुल ही भूले जा रहे हैं| वास्तव में दुनियाँ कुछ नहीं है। अपनी छाया ही संसार के दर्पण में और प्रतिबिंबित होे रही है। सत्य ' मनुष्यों को प्रेरणा देता है अंतर में दृष्टि डालो, अपना दृष्टिकोण बदलो, अपना दुनियाँ का स्वरूप समझो, अपने को अच्छा बना डालो बस सारी दुनियाँ अच्छी बन जाएगी| तुम सत्यनिष्ठ লিং तुम्हारे बनो, दुनियाँ तुम्हारे साथ सत्य का आचरण करेगी। श्रुति कहती है असतो मा सद्गमय ' असत्य की ओर नहीं, सत्य ओर गमन कीजिए। आपका में कल्याण है। इसी ५४ -अखण्ड ज्योति जनवरी १९४२ पृष्ठ १ - ShareChat