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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - { ৭য ، ٦١٩٩ ٥ सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त कर प्रम कि इस यज्ञ में राम अष्टोत्तर के नामों का उच्चारण किया जाएगा। धार्मिक स्थलों , विद्यालयों और घरों में ऐसे आयोजन लगातार  हा रहे १६ वर्षीय दक्ष अग्रवाल की स्किल पासबुक ' पहल से मजदूरों को मिली नई पहचान  भरकरखचास अनुभव और हुनर को मिला दस्तावेज प्रमाण, ११० श्रमिक जुड़े; बेहतर नौकरी , वेतन और 2 लाख तक बीमा का लाभ भरोसेमंद कार्यबल मिल रहा इंश्योरेंस भी साथ हा उसका 2 लाख तक का भास्कर न्यूज जयपुर किया जा रहा है। शहर के कारखानों और औद्योगिक इकाइयों अब तक ११० से अधिक मजदूर इस दक्ष ने बताया कि 'स्किल पासबुक UE पहल से जुड़ चुके हैं। उद्योगों को भी हुनरमंद म साला ऐसा दस्तावेज है जिसमें मजदूरों ক্ষয চ চতাব काम काम तकनीकी   कर्मियों के सामने इससे कुशल और भरोसेमंद कार्यबल मशीन चलाने को क्षमता और বক্ধ   নভা अनुभव रहा है, जिससे काम की  समस्या थी। उनके पास काम का अनुभव  तकनीकी कौशल को दर्ज किया जाता है। अब मिल  Tuarr ಕ था, लेकिन उसे साबित करने के लिए कोई सुधार हो रहा है। दक्ष अग्रवाल का कहना पासबुक हुनरमंद व तकनीकी कर्मी के लिए दस्तावेज नहीं था। इसी वजह से उन्हें बेहतर है कि देश में ऐसे लाखों श्रमिक हैं॰ जिनके एक पहचान पत्र की तरह काम कर रही है। इससे नोकरी और अच्छा वेतन नहीं मिल पाता था। पास हुनर तो है, लेकिन पहचान नहीं। कंपनियों को भी यह समझने में आसानी हो रही है कि कौनन्सा श्रमिक किस काम में दक्ष है। स्किल पासबुक ' के जरिए इस कमी को  स्कूल स्ट्रूडट १६ वर्षाय दक्ष अग्रवाल को यह मजदूरों के जीवन में बदलाव  आइडिया अपने पिता की फैक्ट्री में जाने पर दूर करने की कोशिश की जा रही है। आने इस पहल क बाद आया। वहां उसने मजदूरों से बात को कि वह केवल  देखन कोमिल रहा है। अबव वाल समय में इस पहल को और ज्यादा जानते है। कई ऐसे थे जिन्होंने उद्योगों से जोडने की योजना है। यह पहल नहीं, बल्कि प्रशिक्षित और प्रमाणित कार्यकर्ता ஏ-5IH दीवार पर रंग रोगन करने से शुरुआत की, के रूप में पहचाने जा रहे है। इससे उन्हें बेहतर दिखाती है कि मेहनत और अनुभव को बाद मॅ वे बढ़ई का काम भी सीख गए और भी उतनी ही अहमियत मिलनी चाहिए रोजगार के अवसर और ননন সিলন jellql अव इलेक्ट्रिशियन के रूप में काम कर रहे हैं। उनका आत्मविश्वास और जितनी किसी डिग्री को दी जाती है। लगा हे। साथ हा स्किल पासबुक ' में निशुल्क जोड़ा जा रहा है सामाजिक सम्मान भी बढा है। { ৭য ، ٦١٩٩ ٥ सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त कर प्रम कि इस यज्ञ में राम अष्टोत्तर के नामों का उच्चारण किया जाएगा। धार्मिक स्थलों , विद्यालयों और घरों में ऐसे आयोजन लगातार  हा रहे १६ वर्षीय दक्ष अग्रवाल की स्किल पासबुक ' पहल से मजदूरों को मिली नई पहचान  भरकरखचास अनुभव और हुनर को मिला दस्तावेज प्रमाण, ११० श्रमिक जुड़े; बेहतर नौकरी , वेतन और 2 लाख तक बीमा का लाभ भरोसेमंद कार्यबल मिल रहा इंश्योरेंस भी साथ हा उसका 2 लाख तक का भास्कर न्यूज जयपुर किया जा रहा है। शहर के कारखानों और औद्योगिक इकाइयों अब तक ११० से अधिक मजदूर इस दक्ष ने बताया कि 'स्किल पासबुक UE पहल से जुड़ चुके हैं। उद्योगों को भी हुनरमंद म साला ऐसा दस्तावेज है जिसमें मजदूरों ক্ষয চ চতাব काम काम तकनीकी   कर्मियों के सामने इससे कुशल और भरोसेमंद कार्यबल मशीन चलाने को क्षमता और বক্ধ   নভা अनुभव रहा है, जिससे काम की  समस्या थी। उनके पास काम का अनुभव  तकनीकी कौशल को दर्ज किया जाता है। अब मिल  Tuarr ಕ था, लेकिन उसे साबित करने के लिए कोई सुधार हो रहा है। दक्ष अग्रवाल का कहना पासबुक हुनरमंद व तकनीकी कर्मी के लिए दस्तावेज नहीं था। इसी वजह से उन्हें बेहतर है कि देश में ऐसे लाखों श्रमिक हैं॰ जिनके एक पहचान पत्र की तरह काम कर रही है। इससे नोकरी और अच्छा वेतन नहीं मिल पाता था। पास हुनर तो है, लेकिन पहचान नहीं। कंपनियों को भी यह समझने में आसानी हो रही है कि कौनन्सा श्रमिक किस काम में दक्ष है। स्किल पासबुक ' के जरिए इस कमी को  स्कूल स्ट्रूडट १६ वर्षाय दक्ष अग्रवाल को यह मजदूरों के जीवन में बदलाव  आइडिया अपने पिता की फैक्ट्री में जाने पर दूर करने की कोशिश की जा रही है। आने इस पहल क बाद आया। वहां उसने मजदूरों से बात को कि वह केवल  देखन कोमिल रहा है। अबव वाल समय में इस पहल को और ज्यादा जानते है। कई ऐसे थे जिन्होंने उद्योगों से जोडने की योजना है। यह पहल नहीं, बल्कि प्रशिक्षित और प्रमाणित कार्यकर्ता ஏ-5IH दीवार पर रंग रोगन करने से शुरुआत की, के रूप में पहचाने जा रहे है। इससे उन्हें बेहतर दिखाती है कि मेहनत और अनुभव को बाद मॅ वे बढ़ई का काम भी सीख गए और भी उतनी ही अहमियत मिलनी चाहिए रोजगार के अवसर और ননন সিলন jellql अव इलेक्ट्रिशियन के रूप में काम कर रहे हैं। उनका आत्मविश्वास और जितनी किसी डिग्री को दी जाती है। लगा हे। साथ हा स्किल पासबुक ' में निशुल्क जोड़ा जा रहा है सामाजिक सम्मान भी बढा है। - ShareChat