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दोहा संग्रह कबीर साहेब #संतो की रचनायें
संतो की रचनायें - "दोहा" साधू भूखा भाव का, धन का भूखा नाहिं धन का भूखा जी फिरै, सो तो साधू नाहिं। भावार्थः कबीरदास जी कहते हैं कि साधू हमेशा करुना और प्रेम का भूखा होता और कभी भी धन का भूखा नहीं होता। और जो धन का भूखा होता है वह साधू नहीं हो सकता। (संत कबीर) Motivational Videos App Want . "दोहा" साधू भूखा भाव का, धन का भूखा नाहिं धन का भूखा जी फिरै, सो तो साधू नाहिं। भावार्थः कबीरदास जी कहते हैं कि साधू हमेशा करुना और प्रेम का भूखा होता और कभी भी धन का भूखा नहीं होता। और जो धन का भूखा होता है वह साधू नहीं हो सकता। (संत कबीर) Motivational Videos App Want . - ShareChat