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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - सभि रस भोगण बादि हहि सभि सीगार विकार।।जब लगनु सबदि भेदीऐ किउ सोहै गुरदुआरिए न नानक धनु सुहागणी जिन सहु नालि पिआरु[ lrnleis ম নযা हे भाई! संसार के सभी स्वाद भोगनविलास व्यर्थ या फीके हैं, और ईश्वर की भक्ति के बिना शरीर के भिखारी तमाम बाहूरी श्रृंगार बुराइयों के समान हैं। ये सब क्षणभंगुर हैं और मन को शांति न्हीं देते। जब तकू जिओ शब्द' गुरु के उपदेश या नाम में लीन मनृष्य का मन नहों होता तब तक वहॅ गुरु के दरबार में या परमात्मा की उपस्थिति में शोभा नॅहीं पा सकता। असली पहाडा चमक बाहरी सजावट से नहीं, बल्कि शब्द के वाले अभ्यास से आती है। बाबा नानक देव जी कहते हैं वे जीवात्मा रूपी स्त्रियां धन्य हैं, 4 'सुहागणी' जिनका अपने ' सह' पति परमेश्वर के साथ सच्चा प्रेम बाबा है। वही जीवन सफल है जो परमात्मा के प्रेम में रंगा की तुलना जी सुंदरता और भौतिक 81 T बाहरी सुखों मन की पवित्रता और नाम सिमरन अधिक शब्द के माध्यम से ही अहंकार महत्वपूर्ण है। 1 & मिटता है और ईश्वर से मिलन संभव होता है। सभि रस भोगण बादि हहि सभि सीगार विकार।।जब लगनु सबदि भेदीऐ किउ सोहै गुरदुआरिए न नानक धनु सुहागणी जिन सहु नालि पिआरु[ lrnleis ম নযা हे भाई! संसार के सभी स्वाद भोगनविलास व्यर्थ या फीके हैं, और ईश्वर की भक्ति के बिना शरीर के भिखारी तमाम बाहूरी श्रृंगार बुराइयों के समान हैं। ये सब क्षणभंगुर हैं और मन को शांति न्हीं देते। जब तकू जिओ शब्द' गुरु के उपदेश या नाम में लीन मनृष्य का मन नहों होता तब तक वहॅ गुरु के दरबार में या परमात्मा की उपस्थिति में शोभा नॅहीं पा सकता। असली पहाडा चमक बाहरी सजावट से नहीं, बल्कि शब्द के वाले अभ्यास से आती है। बाबा नानक देव जी कहते हैं वे जीवात्मा रूपी स्त्रियां धन्य हैं, 4 'सुहागणी' जिनका अपने ' सह' पति परमेश्वर के साथ सच्चा प्रेम बाबा है। वही जीवन सफल है जो परमात्मा के प्रेम में रंगा की तुलना जी सुंदरता और भौतिक 81 T बाहरी सुखों मन की पवित्रता और नाम सिमरन अधिक शब्द के माध्यम से ही अहंकार महत्वपूर्ण है। 1 & मिटता है और ईश्वर से मिलन संभव होता है। - ShareChat