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#शुभ मुहूर्त #पूजन विधि
शुभ मुहूर्त - 26-01-26 भीष्म अष्टमी सोमवार की शुक्ल ' पक्ष की अष्टमी तिथि को प्रतिवर्ष भीष्म अष्टमी के माघ माह रूप में मनाया जाता है। इसी दिन भीष्म पितामह जी ने अपने शरीर को छोडा़ था, यह दिन उनका निर्वाण दिवस है। भीष्म अष्टमी के दिन पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए और बिना सिले वस्त्र धारण करने की मान्यता है। माघ माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को प्रतिवर्ष भीष्म अष्टमी के रूप में मनाया जाता है, इसी दिन भीष्म पितामह जी ने अपने शरीर को छोडा़ था। महाभारत में वर्णित है कि भीष्म पितामह को अपने पिता शांतनु से इच्छा मृत्यु का वरदान मिला था, बाणों की शैय्या पर असहाय कष्ट के बाद भी भीष्म पितामह ने अपने प्राण लिए  सूर्य उत्तरायण की प्रतीक्षा की। त्यागने के इस दिन जहां एक ओर व्रत रखने का महत्व है वहीं दूसरी ओर इस दिन भीष्म पितामह जी की आत्मा की शांति के लिए तिल के जल से तर्पण भी किया जाता है। इस दिन व्रत करने से व्यक्ति को पितृ दोष से मुक्ति मिल सकती है, एवं पितरों को शांति मिलती है। 26-01-26 भीष्म अष्टमी सोमवार की शुक्ल ' पक्ष की अष्टमी तिथि को प्रतिवर्ष भीष्म अष्टमी के माघ माह रूप में मनाया जाता है। इसी दिन भीष्म पितामह जी ने अपने शरीर को छोडा़ था, यह दिन उनका निर्वाण दिवस है। भीष्म अष्टमी के दिन पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए और बिना सिले वस्त्र धारण करने की मान्यता है। माघ माह की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को प्रतिवर्ष भीष्म अष्टमी के रूप में मनाया जाता है, इसी दिन भीष्म पितामह जी ने अपने शरीर को छोडा़ था। महाभारत में वर्णित है कि भीष्म पितामह को अपने पिता शांतनु से इच्छा मृत्यु का वरदान मिला था, बाणों की शैय्या पर असहाय कष्ट के बाद भी भीष्म पितामह ने अपने प्राण लिए  सूर्य उत्तरायण की प्रतीक्षा की। त्यागने के इस दिन जहां एक ओर व्रत रखने का महत्व है वहीं दूसरी ओर इस दिन भीष्म पितामह जी की आत्मा की शांति के लिए तिल के जल से तर्पण भी किया जाता है। इस दिन व्रत करने से व्यक्ति को पितृ दोष से मुक्ति मिल सकती है, एवं पितरों को शांति मिलती है। - ShareChat