ShareChat
click to see wallet page
search
#❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान #👉 लोगों के लिए सीख👈
❤️जीवन की सीख - सदगुरुदेवाय नमः" "श्री आज इंसान की ईश्वर के प्रति सोच- लोग इतना भर जानते हैं कि ईश्वर किसी अन्य लोक में रहने वाले ऐसे देवता का नाम है जो पूजा - अर्चना का भूखा और स्तुति - प्रार्थना का प्यासा रहता है। जो कोई उसे यह  चीज दे दे उसे निहाल कर देता है। उसे पापों का दंड नहीं देता और जो पूजा-प्रार्थना नहीं करता उससे वह रुष्ट रहता है और कष्ट पर कष्ट देता है। यदि यही सोच सही है तो फिर न्याय की प्रस्तुति पर ऐसा ईश्वर सर्वथा ओछा और खोटा सिद्ध होगा। तब उसकी व्यवस्था में किसी सिद्धांत आदर्श नियम या व्यवस्था की आशा कैसे की जाएगी और उसके प्रति किसी विवेकवान व्यक्ति के मन में श्रद्धा क्यों उत्पन्न होगी ?हमको इस सोच को बदलकर अंतःकरण को विकसित करना होगा तभी हम अपना उद्धार कर सकते हैं। जीवन पशुओं से भी बद्तर है। अन्यथा हमारा ` बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः" "श्री आज इंसान की ईश्वर के प्रति सोच- लोग इतना भर जानते हैं कि ईश्वर किसी अन्य लोक में रहने वाले ऐसे देवता का नाम है जो पूजा - अर्चना का भूखा और स्तुति - प्रार्थना का प्यासा रहता है। जो कोई उसे यह  चीज दे दे उसे निहाल कर देता है। उसे पापों का दंड नहीं देता और जो पूजा-प्रार्थना नहीं करता उससे वह रुष्ट रहता है और कष्ट पर कष्ट देता है। यदि यही सोच सही है तो फिर न्याय की प्रस्तुति पर ऐसा ईश्वर सर्वथा ओछा और खोटा सिद्ध होगा। तब उसकी व्यवस्था में किसी सिद्धांत आदर्श नियम या व्यवस्था की आशा कैसे की जाएगी और उसके प्रति किसी विवेकवान व्यक्ति के मन में श्रद्धा क्यों उत्पन्न होगी ?हमको इस सोच को बदलकर अंतःकरण को विकसित करना होगा तभी हम अपना उद्धार कर सकते हैं। जीवन पशुओं से भी बद्तर है। अन्यथा हमारा ` बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat