Babulal Babulal
ShareChat
click to see wallet page
@babulal8948
babulal8948
Babulal Babulal
@babulal8948
मुझे ShareChat परफॉलो करें!
#👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान #👉 लोगों के लिए सीख👈 #❤️जीवन की सीख
👌 अच्छी सोच👍 - सदगुरुदेवाय नमः " "9t सुंदर देह में मक्खियों के काटने से फुंसियां प्रकट हो जाती हैं वैसे ही दुष्ट पुरुष बहुत अच्छे काम में भी दोष लगाया करता है। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः " "9t सुंदर देह में मक्खियों के काटने से फुंसियां प्रकट हो जाती हैं वैसे ही दुष्ट पुरुष बहुत अच्छे काम में भी दोष लगाया करता है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈 #🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान #👌 अच्छी सोच👍
❤️जीवन की सीख - सदगुरूदेवाय नमः " "श्री आज चहुं ओर जो विषमताएं चल रही हैं उनमें कृतज्ञता एकरूपता ही मुख्य कारण है। माना मजदूर से सात -्आठ घंटे काम लेने का अधिकार है लेकिन उसकी सुख-्सुविधा का ध्यान रखना भी हमारा कर्तव्य है। हम कर्तव्य को जब भूल जाते हैं तब विद्रोह की भावना पैदा होती है। इसी प्रकार हमारी पत्नी ऐसा करे आदर्श व्यवहार करे उसका ऐसा आचरण उद्देश्य हमारा अधिकार है तो हमें भी याद रखना चाहिए कि उसे संतुष्ट करना संरक्षण देना उसकी देखभाल करना हमारा परम कर्तव्य है लेकिन हम भूल जाते हैं। तो क्या इससे हमारा दांपत्य-् जीवन सुखी बन सकता है? इंसान कर्तव्य को भूलकर कलह की रचना करता है और अपने तथा लिए अशांति के बीज बोता है। इसलिए इंसान को जीवन में हर क्षेत्र में aete कर्तव्यनिष्ठ बनना चाहिए। নানুললে ননুললে . सदगुरूदेवाय नमः " "श्री आज चहुं ओर जो विषमताएं चल रही हैं उनमें कृतज्ञता एकरूपता ही मुख्य कारण है। माना मजदूर से सात -्आठ घंटे काम लेने का अधिकार है लेकिन उसकी सुख-्सुविधा का ध्यान रखना भी हमारा कर्तव्य है। हम कर्तव्य को जब भूल जाते हैं तब विद्रोह की भावना पैदा होती है। इसी प्रकार हमारी पत्नी ऐसा करे आदर्श व्यवहार करे उसका ऐसा आचरण उद्देश्य हमारा अधिकार है तो हमें भी याद रखना चाहिए कि उसे संतुष्ट करना संरक्षण देना उसकी देखभाल करना हमारा परम कर्तव्य है लेकिन हम भूल जाते हैं। तो क्या इससे हमारा दांपत्य-् जीवन सुखी बन सकता है? इंसान कर्तव्य को भूलकर कलह की रचना करता है और अपने तथा लिए अशांति के बीज बोता है। इसलिए इंसान को जीवन में हर क्षेत्र में aete कर्तव्यनिष्ठ बनना चाहिए। নানুললে ননুললে . - ShareChat
#👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #👉 लोगों के लिए सीख👈 #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख
👌 अच्छी सोच👍 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " व्यवहार प्रधान प्राणी है।उसे ' अहम्' सबसे अधिक प्रिय है। जिस वस्तु के साथ मानव वह ' अहम् को जोड़ता है वही उसे प्रिय होती है। स्त्री पुत्र धन वैभव यश अपने हों तो प्रिय हैं पर वे ही दूसरे को हों तो उल्टे प्यास जलन डाह तक होता है। अपनी अप्रशंसा का साहस बड़े-बड़े धैर्यवानों को नहीं होता और अपनी प्रशंसा की प्रशंसा के लिए बड़े-बड़े धैर्यवान भी अधीर हो जाते हैं। यही ' अहम्' भाव अपने विश्वास चिन्हों के साथ संयुक्त हो जाता है तो वह अपने धन या स्त्री पुत्रों के समान प्रिय लगते हैं। जैसे अपने विश्वास के आदर्शों के विपरीत विचार या कार्य को देखने से सामने आता है इंसान अपनी सहनशीलता खो देता है और विरोधी के प्रति आगबबूला हो जाता है। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः " व्यवहार प्रधान प्राणी है।उसे ' अहम्' सबसे अधिक प्रिय है। जिस वस्तु के साथ मानव वह ' अहम् को जोड़ता है वही उसे प्रिय होती है। स्त्री पुत्र धन वैभव यश अपने हों तो प्रिय हैं पर वे ही दूसरे को हों तो उल्टे प्यास जलन डाह तक होता है। अपनी अप्रशंसा का साहस बड़े-बड़े धैर्यवानों को नहीं होता और अपनी प्रशंसा की प्रशंसा के लिए बड़े-बड़े धैर्यवान भी अधीर हो जाते हैं। यही ' अहम्' भाव अपने विश्वास चिन्हों के साथ संयुक्त हो जाता है तो वह अपने धन या स्त्री पुत्रों के समान प्रिय लगते हैं। जैसे अपने विश्वास के आदर्शों के विपरीत विचार या कार्य को देखने से सामने आता है इंसान अपनी सहनशीलता खो देता है और विरोधी के प्रति आगबबूला हो जाता है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान #👉 लोगों के लिए सीख👈 #👌 अच्छी सोच👍
❤️जीवन की सीख - सदगुरुदेवाय नमः "श्री दुनियां में ऐसा व्यक्ति कोई नहीं जो किसी तरह की मदद न चाहता हो और दुनियां ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं जो किसी की किसी भी तरह की मदद न कर सके। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः "श्री दुनियां में ऐसा व्यक्ति कोई नहीं जो किसी तरह की मदद न चाहता हो और दुनियां ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं जो किसी की किसी भी तरह की मदद न कर सके। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👌 अच्छी सोच👍 #👉 लोगों के लिए सीख👈 #🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख
👌 अच्छी सोच👍 - सदगुरुदेवाय नमः " "9f आइये यहां पर विराजिए।यह आसन आपके लिए है कई दिनों से आपकी तस्वीर हमारी आंखों के सामने दिखाई देती है। क्या कोई नई बात है? बाल-बज्चे कुशल सहित से तो हैं? मुझे आपके दर्शन से बहुत खुशी हुई। इस प्रकार जो घर पर आए हुए का आदर से स्वागत करता है उसके घर पर निश्चिंत मन से सदा जाना चाहिए। নানুলল নানুলল . सदगुरुदेवाय नमः " "9f आइये यहां पर विराजिए।यह आसन आपके लिए है कई दिनों से आपकी तस्वीर हमारी आंखों के सामने दिखाई देती है। क्या कोई नई बात है? बाल-बज्चे कुशल सहित से तो हैं? मुझे आपके दर्शन से बहुत खुशी हुई। इस प्रकार जो घर पर आए हुए का आदर से स्वागत करता है उसके घर पर निश्चिंत मन से सदा जाना चाहिए। নানুলল নানুলল . - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान #👉 लोगों के लिए सीख👈 #🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍
❤️जीवन की सीख - सदगुरुदेवाय नमः " "श्री सरल हृदय मित्र सेगुणवान नौकर से आज्ञाकारिणी स्त्री से और मित्र अपने दुख क भाव रखने वाले स्वामी से की बात कहने से अपना चित्त सुखी हो जाता है अर्थात मन का क्लेश कम हो जाता है। নানুলল ননুলল. सदगुरुदेवाय नमः " "श्री सरल हृदय मित्र सेगुणवान नौकर से आज्ञाकारिणी स्त्री से और मित्र अपने दुख क भाव रखने वाले स्वामी से की बात कहने से अपना चित्त सुखी हो जाता है अर्थात मन का क्लेश कम हो जाता है। নানুলল ননুলল. - ShareChat
#👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान #👉 लोगों के लिए सीख👈 #❤️जीवन की सीख
👌 अच्छी सोच👍 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः बुद्धिमान पुरुष एक पैर आगे रखता है लेकिन @ ঈ কী 8&& पीछे जमाये रखता है। जब तक स्थान की स्थिति अच्छी दूसरे : नहीं होती तब तक पहले स्थान को त्यागता नहीं है। बाबूलाल बाबूलाल .. "श्री सदगुरुदेवाय नमः बुद्धिमान पुरुष एक पैर आगे रखता है लेकिन @ ঈ কী 8&& पीछे जमाये रखता है। जब तक स्थान की स्थिति अच्छी दूसरे : नहीं होती तब तक पहले स्थान को त्यागता नहीं है। बाबूलाल बाबूलाल .. - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈 #🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान #👌 अच्छी सोच👍
❤️जीवन की सीख - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " मनुष्य के उच्च आदर्श आदर्शों एवं सिद्धांतों पर निष्ठा की परख ऐसे अवसर पर होती है जब स्वार्थ लोभ.मोह की प्रस्तुति होती है। सिद्धांतों एवं आदर्शों की कोरी बातें करना एक बात है उनका पालन करना कठिन और सर्वथा अलग बात है। समाज में आदर्शों एवं सिद्धांतों की चर्चा करने वालों की कमी नहीं भी वाक् ಕತt विकास का साधन और प्रतिष्ठा पुनर्स्थापन करने का एक सरल माध्यम मात्र माने जाते हैं। ऐसे व्यक्त्व पर मोह और लोभ का आकर्षण उभरते ही-गिरते अपनी गरिमा गंवाते देखे जाते हैं। इनमें आदर्शों के प्रति आस्था का समावेश होता है वे इन पारलौकिक आकर्षणों से प्रभावित नहीं होते और अपनी न्याय प्रियता कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हैं। ऐसे ही लोगों से समाज और देश गौरवान्वित होता है। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः " मनुष्य के उच्च आदर्श आदर्शों एवं सिद्धांतों पर निष्ठा की परख ऐसे अवसर पर होती है जब स्वार्थ लोभ.मोह की प्रस्तुति होती है। सिद्धांतों एवं आदर्शों की कोरी बातें करना एक बात है उनका पालन करना कठिन और सर्वथा अलग बात है। समाज में आदर्शों एवं सिद्धांतों की चर्चा करने वालों की कमी नहीं भी वाक् ಕತt विकास का साधन और प्रतिष्ठा पुनर्स्थापन करने का एक सरल माध्यम मात्र माने जाते हैं। ऐसे व्यक्त्व पर मोह और लोभ का आकर्षण उभरते ही-गिरते अपनी गरिमा गंवाते देखे जाते हैं। इनमें आदर्शों के प्रति आस्था का समावेश होता है वे इन पारलौकिक आकर्षणों से प्रभावित नहीं होते और अपनी न्याय प्रियता कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हैं। ऐसे ही लोगों से समाज और देश गौरवान्वित होता है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #👉 लोगों के लिए सीख👈 #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख
👌 अच्छी सोच👍 - सदगुरुदेवाय नमः " "श्री व्यवहार के यथार्थ कारण मनुष्य के व उसकी आंतरिक गहराईयों में छिपे होते हैं। मनुष्य के व्यवहार की जड़ें अगर ढूंढनी हों तो निश्चित ही व्यक्तिके चरित्र एवं चिंतन की मिट्टी की परतों को खोदना होगा। चरित्र एवं चिंतन को सही ढंग से जाने वगैर व्यवहार की समग्र व्याख्या असंभव है। accacc. सदगुरुदेवाय नमः " "श्री व्यवहार के यथार्थ कारण मनुष्य के व उसकी आंतरिक गहराईयों में छिपे होते हैं। मनुष्य के व्यवहार की जड़ें अगर ढूंढनी हों तो निश्चित ही व्यक्तिके चरित्र एवं चिंतन की मिट्टी की परतों को खोदना होगा। चरित्र एवं चिंतन को सही ढंग से जाने वगैर व्यवहार की समग्र व्याख्या असंभव है। accacc. - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #👉 लोगों के लिए सीख👈
❤️जीवन की सीख - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " आप सभ्य हो तो कठिन से कठिन अवसरों पर भी दूसरों से अनेक सुविधाएं ಶ पा सकते हैं और अपना लाभ उठा सकते हैं। अगर आप संस्कारी न हों तो दानी ज्ञानी उदार से भी उदार व्यक्तिके पास से भी कुछ न पाओगे। इसलिए सभ्य बनो सभ्य। व्यवहार का यह सबसे पहला जरूरी गुण है। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः " आप सभ्य हो तो कठिन से कठिन अवसरों पर भी दूसरों से अनेक सुविधाएं ಶ पा सकते हैं और अपना लाभ उठा सकते हैं। अगर आप संस्कारी न हों तो दानी ज्ञानी उदार से भी उदार व्यक्तिके पास से भी कुछ न पाओगे। इसलिए सभ्य बनो सभ्य। व्यवहार का यह सबसे पहला जरूरी गुण है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat