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#👉 लोगों के लिए सीख👈 #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख
👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " मननुष्य का सम्मान इसी में है कि मनुष्य मनुष्य का विश्वास-्भाजन बने। यदि आप सबको एक समान समझेंगे तो परिवार सभी सदस्य आपकी बात मानने में संतोष प्राप्त करेंगे। अनजान में यदि आपसे कोई भूल हो भी जाएगी तो उसका कोई ख्याल नहीं करेगा और उसकी प्रतिष्ठा ज्यों-्की-्त्यों बनी रहेगी। एक कहावत है-कि चार बर्तन होते हैंतो खटकते हैं। अतः घर में कभी कुछ कलह उपस्थित हो जाएतो उसे मनुष्य स्वभाव की कमजोरी मानकर अधिक तूल मत दीजिए। झगड़ों को शांत करने का एक बहुत बडा नुस्खा है -त्याग। यदि आपने किंचित भी त्याग प्रदर्शित किया तो झगडा समाप्त होने में देरन लगेगी। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः " मननुष्य का सम्मान इसी में है कि मनुष्य मनुष्य का विश्वास-्भाजन बने। यदि आप सबको एक समान समझेंगे तो परिवार सभी सदस्य आपकी बात मानने में संतोष प्राप्त करेंगे। अनजान में यदि आपसे कोई भूल हो भी जाएगी तो उसका कोई ख्याल नहीं करेगा और उसकी प्रतिष्ठा ज्यों-्की-्त्यों बनी रहेगी। एक कहावत है-कि चार बर्तन होते हैंतो खटकते हैं। अतः घर में कभी कुछ कलह उपस्थित हो जाएतो उसे मनुष्य स्वभाव की कमजोरी मानकर अधिक तूल मत दीजिए। झगड़ों को शांत करने का एक बहुत बडा नुस्खा है -त्याग। यदि आपने किंचित भी त्याग प्रदर्शित किया तो झगडा समाप्त होने में देरन लगेगी। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #👉 लोगों के लिए सीख👈
❤️जीवन की सीख - "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' हर इंसान को यह चेष्टा करनी चाहिए कि आपस में मतभेद की नौबत ही न आने पाए। अपनी ओर से ऐसी कोई बात ही मत आने दो जिससे कोई विवाद हो ओर से होने वाले विवाद को भी शान्ति पूर्वक निबटा देना ही दूसरी : जाएबल्कि बुद्धिमानी है। अपने द्वारा हुई भूल को तुरंत स्वीकार कर लीजिए। आपकी इस स्पष्टवादिता और आदर्श मनोवृत्ति का दूसरों पर अवश्य ही प्रभाव पड़ेगा। यदि भूल भी उसे स्वीकार नहीं करते तो दूसरों फर उसकी गलत प्रतिक्रिया होगी और करके क्षमाभाव के बजाय मन में भ्रांत धारणा बनी रहेगी। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' हर इंसान को यह चेष्टा करनी चाहिए कि आपस में मतभेद की नौबत ही न आने पाए। अपनी ओर से ऐसी कोई बात ही मत आने दो जिससे कोई विवाद हो ओर से होने वाले विवाद को भी शान्ति पूर्वक निबटा देना ही दूसरी : जाएबल्कि बुद्धिमानी है। अपने द्वारा हुई भूल को तुरंत स्वीकार कर लीजिए। आपकी इस स्पष्टवादिता और आदर्श मनोवृत्ति का दूसरों पर अवश्य ही प्रभाव पड़ेगा। यदि भूल भी उसे स्वीकार नहीं करते तो दूसरों फर उसकी गलत प्रतिक्रिया होगी और करके क्षमाभाव के बजाय मन में भ्रांत धारणा बनी रहेगी। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
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👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " कडवी बात जहर से भी बुरी होती है। यदि आपकी वाणी मधुर नहीं है तो जीवन में कटुता बढती ही चली जाएगी। घर के किसी सदस्य की तीखी आलोचना करना अवश्य ही बर्दाश्त से बाहर हो सकती है। आपकी भ्रांत धारणा चाहे वह भ्रांत न होकर सत्य ही हो तो भी,दूसरे पर तीखी चोट कर सकती है और तब वह वाणी का घाव बडी कठिनाई से भर सकता है। मनुष्य तलवार के घाव से नहीं घबडाता वह उसे हंसते -्हंसते सह लेता है, परन्तु वाणी का घाव कलेजे में गहरा होता जाता है और वह जीवन भर भर नहीं पाता। acucacc "श्री सदगुरुदेवाय नमः " कडवी बात जहर से भी बुरी होती है। यदि आपकी वाणी मधुर नहीं है तो जीवन में कटुता बढती ही चली जाएगी। घर के किसी सदस्य की तीखी आलोचना करना अवश्य ही बर्दाश्त से बाहर हो सकती है। आपकी भ्रांत धारणा चाहे वह भ्रांत न होकर सत्य ही हो तो भी,दूसरे पर तीखी चोट कर सकती है और तब वह वाणी का घाव बडी कठिनाई से भर सकता है। मनुष्य तलवार के घाव से नहीं घबडाता वह उसे हंसते -्हंसते सह लेता है, परन्तु वाणी का घाव कलेजे में गहरा होता जाता है और वह जीवन भर भर नहीं पाता। acucacc - ShareChat
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❤️जीवन की सीख - सदगुरुदेवाय नमः  "91 परिवार में परस्पर के दोषों को देखकर आलोचना करना अनुचित है। सभी मनुष्यों में कमजोरियां हैं। भूल करना भी मनुष्य का स्वभाव है। प्रत्येक व्यक्ति आपके घर का सदस्य होने के कारण उसका भी उस घर पर पूरा अधिकार है। यदि रुचि में साम्य न हो अथवा मत विभिन्नता हो तो भी वह निरादर का पात्र नहीं है। यह संभव नहीं कि आपकी रुचि सबसे मिल सके। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः  "91 परिवार में परस्पर के दोषों को देखकर आलोचना करना अनुचित है। सभी मनुष्यों में कमजोरियां हैं। भूल करना भी मनुष्य का स्वभाव है। प्रत्येक व्यक्ति आपके घर का सदस्य होने के कारण उसका भी उस घर पर पूरा अधिकार है। यदि रुचि में साम्य न हो अथवा मत विभिन्नता हो तो भी वह निरादर का पात्र नहीं है। यह संभव नहीं कि आपकी रुचि सबसे मिल सके। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
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👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः जहां भी चार-्पांच व्यक्तियों का संगठन हों  उनके स्वभाव आदतों विचारों में कुछ ्न-्कुछ भेद अवश्य पाया जाएगा। एक ही मां -बाप की सगी संतानें एक जैसी नहीं होती हाथ की पांचों उंगलियां बराबर नहीं होती हैं पर सबके सामंजस्य - सहकार से ही कोई काम हो पाता है। हम यह चाहें कि सभी व्यक्तिहमारे अनुरूप हो जाएं,तो यह कदापि संभव नहीं। इसके लिए तो दोनों ही पक्षों को कुछन्न ्कुछ उदारता बरतनी होगी। ठीक यही बात पारिवारिक सदस्यों के लिए लागू होती है। प्रत्येक सदस्य के आपसी सामंजस्य पर परिवार की एकता व संगठन निर्भर करते हैं। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः जहां भी चार-्पांच व्यक्तियों का संगठन हों  उनके स्वभाव आदतों विचारों में कुछ ्न-्कुछ भेद अवश्य पाया जाएगा। एक ही मां -बाप की सगी संतानें एक जैसी नहीं होती हाथ की पांचों उंगलियां बराबर नहीं होती हैं पर सबके सामंजस्य - सहकार से ही कोई काम हो पाता है। हम यह चाहें कि सभी व्यक्तिहमारे अनुरूप हो जाएं,तो यह कदापि संभव नहीं। इसके लिए तो दोनों ही पक्षों को कुछन्न ्कुछ उदारता बरतनी होगी। ठीक यही बात पारिवारिक सदस्यों के लिए लागू होती है। प्रत्येक सदस्य के आपसी सामंजस्य पर परिवार की एकता व संगठन निर्भर करते हैं। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
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❤️जीवन की सीख - सदगुरुदेवाय नमः "श्री उदारता सहिष्णुता का समावेश दैनिक जीवन के प्रत्येक क्रिया-्कलाप में रहना चाहिए। प्रत्येक सदस्य यह ध्यान रखे कि हमारे व्यवहार से किसी का अहित न हो। जाने -अनजाने  में ऐसे कटु शब्दों का प्रयोग न हो,जो आपसी मन-मुटाव को जन्म दे। व्यवहार एवं वाणी में नम्रता मधुरता सौम्यता व शालीनता बनी रहे। परिवार में वाणी की मधुरता का तह प्रारंभिक अभ्यास आगे चलकर व्यक्ति के सामाजिक जीवन में भी बहुत उपयोगी सिद्ध होता है। নানুললে নানুলল . सदगुरुदेवाय नमः "श्री उदारता सहिष्णुता का समावेश दैनिक जीवन के प्रत्येक क्रिया-्कलाप में रहना चाहिए। प्रत्येक सदस्य यह ध्यान रखे कि हमारे व्यवहार से किसी का अहित न हो। जाने -अनजाने  में ऐसे कटु शब्दों का प्रयोग न हो,जो आपसी मन-मुटाव को जन्म दे। व्यवहार एवं वाणी में नम्रता मधुरता सौम्यता व शालीनता बनी रहे। परिवार में वाणी की मधुरता का तह प्रारंभिक अभ्यास आगे चलकर व्यक्ति के सामाजिक जीवन में भी बहुत उपयोगी सिद्ध होता है। নানুললে নানুলল . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख
👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरुदेवाय नमः  "9[ पारिवारिक सदस्यों में जब तक समर्पण त्याग उत्सर्ग का भाव बना रहता हैतब तक उसकी सुदृढ़ एकता पर आंच नहीं आ पाती।  परिवार में रहने वाला प्रत्येक सदस्य कर्तव्यों को प्रधान और अधिकारों को गौण माने, अपनी नहीं दूसरों की सुख-सुविधा को प्राथमिकता देतो आपस में मन-्मुटाव तथा विक्षोभ की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी। माता को त्याग की जीवंत प्रतिमा कहा भाव यदि कुछ अंश में भी परिवार के हर सदस्य में आ जाए तो कलह जा सकता है। ऐसा त्याग विग्रह की स्थिति उत्पन्न न हो। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः  "9[ पारिवारिक सदस्यों में जब तक समर्पण त्याग उत्सर्ग का भाव बना रहता हैतब तक उसकी सुदृढ़ एकता पर आंच नहीं आ पाती।  परिवार में रहने वाला प्रत्येक सदस्य कर्तव्यों को प्रधान और अधिकारों को गौण माने, अपनी नहीं दूसरों की सुख-सुविधा को प्राथमिकता देतो आपस में मन-्मुटाव तथा विक्षोभ की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी। माता को त्याग की जीवंत प्रतिमा कहा भाव यदि कुछ अंश में भी परिवार के हर सदस्य में आ जाए तो कलह जा सकता है। ऐसा त्याग विग्रह की स्थिति उत्पन्न न हो। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #👉 लोगों के लिए सीख👈
❤️जीवन की सीख - "श्री सदगुरुदेवाय नमः" परिवारके सदस्यों के बीच घनिष्ठ आत्मीयता एवं स्नेह सद्भाव के आधार पर परिार को एक सूत्रमें बांधा जा सकता है। जिस परिवार में संकीर्णता पनपती है, परिवारको विश्रृंखलित कर डालती है। अपने परिवार के सदस्यों में भेद ्भाव का होना एक ऐसी चिनगारी है, जो भीतर ही-्भीतर जलाती रहती है। इन दिनों यह चिनगारी अधिकांश परिवारों में सुलगती देखी जा सकती है। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः" परिवारके सदस्यों के बीच घनिष्ठ आत्मीयता एवं स्नेह सद्भाव के आधार पर परिार को एक सूत्रमें बांधा जा सकता है। जिस परिवार में संकीर्णता पनपती है, परिवारको विश्रृंखलित कर डालती है। अपने परिवार के सदस्यों में भेद ्भाव का होना एक ऐसी चिनगारी है, जो भीतर ही-्भीतर जलाती रहती है। इन दिनों यह चिनगारी अधिकांश परिवारों में सुलगती देखी जा सकती है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
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👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरुदेवाय नमः "श्री प्रगतिशील और प्रगतिशील से अनुपयोगी जीवन मानव ्जीवन नहीं है। केवल मानवाकार में जीवन का प्रवाहित होना मानवता नहीं है। मानवता का लक्षण है प्रतिदिन मानवता की ओर बढ़ना। संसार में विकास और प्रगति करके लोग जीव से मानव महामानव महापुरुष देवपुरुष और अति मानव तक बने हैं। लोग उन्हें भगवान मानते हैं। समाज उन्हें प्रतिष्ठा प्रमाण पत्र देता है। ऐसे ही मानव वास्तव में मानव कहलाने योग्य होते हैं। मित्रता से ही संसार की शोभा और समाज की समानता और बाहुबलता है। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः "श्री प्रगतिशील और प्रगतिशील से अनुपयोगी जीवन मानव ्जीवन नहीं है। केवल मानवाकार में जीवन का प्रवाहित होना मानवता नहीं है। मानवता का लक्षण है प्रतिदिन मानवता की ओर बढ़ना। संसार में विकास और प्रगति करके लोग जीव से मानव महामानव महापुरुष देवपुरुष और अति मानव तक बने हैं। लोग उन्हें भगवान मानते हैं। समाज उन्हें प्रतिष्ठा प्रमाण पत्र देता है। ऐसे ही मानव वास्तव में मानव कहलाने योग्य होते हैं। मित्रता से ही संसार की शोभा और समाज की समानता और बाहुबलता है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान #👌 अच्छी सोच👍 #👉 लोगों के लिए सीख👈
❤️जीवन की सीख - सदगुरुदेवाय नमः' "9[ हर इंसान में एक अलौकिक महापुरुष छिपा होता है लेकिन वह आसुरी तत्वों के कारागार में बंद होता है। मनुष्य का कर्तव्य यह है कि उसे देव तत्वों की सहायता से मुक्ति कर उठाये और महान कृतियों द्वारा महानता की ओर बढाये। यह उसका कर्तव्य है और यही उसका अधिकार भी है। নানুলাল নানুলল . सदगुरुदेवाय नमः' "9[ हर इंसान में एक अलौकिक महापुरुष छिपा होता है लेकिन वह आसुरी तत्वों के कारागार में बंद होता है। मनुष्य का कर्तव्य यह है कि उसे देव तत्वों की सहायता से मुक्ति कर उठाये और महान कृतियों द्वारा महानता की ओर बढाये। यह उसका कर्तव्य है और यही उसका अधिकार भी है। নানুলাল নানুলল . - ShareChat