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#👉 लोगों के लिए सीख👈 #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान
👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरुदेवाय नमः" "श्री परिवार किस उद्देश्य के लिए बसाया जाता है? परिवार बसाने का मूल उद्देश्य होता है एक दूसरे की दुख ्तकलीफ में हाथ बटाना एवं साथ ही उल्लासपूर्ण जीवन यापन करना। इस साधारण मंतव्य के साथ- साथ एक ऊंचा स्थान और होता है वह यह है कि-परिवार के माध्यम से मृनुष्य आत्म- कल्याण की ओर उद्योग करना । मृनुष्य दूसरे के समझकर उसके साथ सहानुभूति रख सके, उसकी सेवा -सुश्रूषा और सहायता करने को तैयार ತ-ತ್ रहे यही आत्म -्उन्नति के लक्षण हैं। पारिवारिक जीवन में आध्यात्मिक  विकास का पूरा-् पूरा गुणों के अवसर रहता है। परिवार बसाने में आध्यात्मिक दृष्टिकोण  लौकिक समृद्धि और आत्मोद्धार मित्रता का एक साथ संवाहक है। इसी दृष्टिकोण को विकसित करना पारिवारिक जीवन के हित में है। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः" "श्री परिवार किस उद्देश्य के लिए बसाया जाता है? परिवार बसाने का मूल उद्देश्य होता है एक दूसरे की दुख ्तकलीफ में हाथ बटाना एवं साथ ही उल्लासपूर्ण जीवन यापन करना। इस साधारण मंतव्य के साथ- साथ एक ऊंचा स्थान और होता है वह यह है कि-परिवार के माध्यम से मृनुष्य आत्म- कल्याण की ओर उद्योग करना । मृनुष्य दूसरे के समझकर उसके साथ सहानुभूति रख सके, उसकी सेवा -सुश्रूषा और सहायता करने को तैयार ತ-ತ್ रहे यही आत्म -्उन्नति के लक्षण हैं। पारिवारिक जीवन में आध्यात्मिक  विकास का पूरा-् पूरा गुणों के अवसर रहता है। परिवार बसाने में आध्यात्मिक दृष्टिकोण  लौकिक समृद्धि और आत्मोद्धार मित्रता का एक साथ संवाहक है। इसी दृष्टिकोण को विकसित करना पारिवारिक जीवन के हित में है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #👉 लोगों के लिए सीख👈
☝अनमोल ज्ञान - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " अगर हम एक दूसरे से आदर्श का अनुभव करने लगें तो कोई किसी को कर्मणा दुख दे ही नहीं सकता। उनका दुख हमारा दुख और हमारा सुख मनसा वाचा हरेक व्यक्ति यदि आत्मीयता और अपनेपन का भाव खखे तो विश्व की सुख है। Jஎe सारी अशांति विलोप हो जाए और सुख-्शांति का सागर उमड पडे। निश्चित है प्रत्येक मनुष्य का जन्म होता है तो मरता भी अवश्य है। तो अस्थायी से क्षणिक जीवन के लिए अपने ही आत्मस्वरुप को कष्ट क्यों पहुंचाया जाए?खुद शांति से जियो और दूसरों को भी शांति से जीने दो यही हमारा सनातन धर्म है। নানুলল নানুলল. "श्री सदगुरुदेवाय नमः " अगर हम एक दूसरे से आदर्श का अनुभव करने लगें तो कोई किसी को कर्मणा दुख दे ही नहीं सकता। उनका दुख हमारा दुख और हमारा सुख मनसा वाचा हरेक व्यक्ति यदि आत्मीयता और अपनेपन का भाव खखे तो विश्व की सुख है। Jஎe सारी अशांति विलोप हो जाए और सुख-्शांति का सागर उमड पडे। निश्चित है प्रत्येक मनुष्य का जन्म होता है तो मरता भी अवश्य है। तो अस्थायी से क्षणिक जीवन के लिए अपने ही आत्मस्वरुप को कष्ट क्यों पहुंचाया जाए?खुद शांति से जियो और दूसरों को भी शांति से जीने दो यही हमारा सनातन धर्म है। নানুলল নানুলল. - ShareChat
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👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरुदेवाय नमः ' 9 स्वयं अपने विषय में आपके अपने विचार क्या हैं? क्या आप अपने आप में किसी भी तरह के तत्व रखते हैं? क्या आप अपने को नीच , धोखेबाज . दुष्ट या राक्षसी स्वभाव के प्रतीक मानते हैं?्या फिर अपने आप में सभ्य , सौम्य , विद्वान और आस्थावान व्यक्तित्व के समान हैं। शांत हृदय से कभी -कभी आत्म -्निरीक्षण करें और अपने अच्छे विचारों तथा ईश्वर प्रदत्त श्रेष्ठजनों को स्थापित करें। संसार और समाज आपके किस कार्य की विशेष प्रशंसा करता है? आत्म -्निरीक्षण द्वारा यह अमर तत्व आप अंतिम रूप से ले सकते हैं या किसी भी प्रकार की सलाह ले सकते हैं | प्रकार आत्म -्निरीक्षण करके 5&& आप अपने जीवन को ऊंचा उठा सकते हैं। নানুলাল নানুলাল . सदगुरुदेवाय नमः ' 9 स्वयं अपने विषय में आपके अपने विचार क्या हैं? क्या आप अपने आप में किसी भी तरह के तत्व रखते हैं? क्या आप अपने को नीच , धोखेबाज . दुष्ट या राक्षसी स्वभाव के प्रतीक मानते हैं?्या फिर अपने आप में सभ्य , सौम्य , विद्वान और आस्थावान व्यक्तित्व के समान हैं। शांत हृदय से कभी -कभी आत्म -्निरीक्षण करें और अपने अच्छे विचारों तथा ईश्वर प्रदत्त श्रेष्ठजनों को स्थापित करें। संसार और समाज आपके किस कार्य की विशेष प्रशंसा करता है? आत्म -्निरीक्षण द्वारा यह अमर तत्व आप अंतिम रूप से ले सकते हैं या किसी भी प्रकार की सलाह ले सकते हैं | प्रकार आत्म -्निरीक्षण करके 5&& आप अपने जीवन को ऊंचा उठा सकते हैं। নানুলাল নানুলাল . - ShareChat
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☝अनमोल ज्ञान - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " m संदेह नहीं कि संसार में सबसे बडी शक्ति धर्म की ही है।जो लोग धन या बल को सबसे बडा मानते हैंवे नीच श्रेणी के हैं और मनुष्यत्व की परिभाषा के अनुसार उनमें पाश्विकता का अंश ही अधिक है। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः " m संदेह नहीं कि संसार में सबसे बडी शक्ति धर्म की ही है।जो लोग धन या बल को सबसे बडा मानते हैंवे नीच श्रेणी के हैं और मनुष्यत्व की परिभाषा के अनुसार उनमें पाश्विकता का अंश ही अधिक है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान
👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' आज घर-्घर में तृष्णा द्वेष काक्रोध कलह का संदेह अविश्वास का माहौल दिखाई पड़ता है । कोई अपना मित्र नहीं दिखता चारों तरफ शत्रु ही शत्रु  दुष्ट ही दुष्टों का घेरा नजर आता है। ऐसे वातावरण को ही नरक कहते हैं। आज सर्वत्र नरक के दर्शन देखे जा सकते हैं। जिस घर में देखो जिस गांव या समाज में देखो दुर्भाव का ही बोलबाला है। राजनीति और अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में भी यही विभीषिका का नंगा नृत्य हो रहा है। मनुष्य जीवन में यदि मधुर कोई वस्तु है तो वह है - स्नेह, सद्भाव आत्मीयता। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' आज घर-्घर में तृष्णा द्वेष काक्रोध कलह का संदेह अविश्वास का माहौल दिखाई पड़ता है । कोई अपना मित्र नहीं दिखता चारों तरफ शत्रु ही शत्रु  दुष्ट ही दुष्टों का घेरा नजर आता है। ऐसे वातावरण को ही नरक कहते हैं। आज सर्वत्र नरक के दर्शन देखे जा सकते हैं। जिस घर में देखो जिस गांव या समाज में देखो दुर्भाव का ही बोलबाला है। राजनीति और अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में भी यही विभीषिका का नंगा नृत्य हो रहा है। मनुष्य जीवन में यदि मधुर कोई वस्तु है तो वह है - स्नेह, सद्भाव आत्मीयता। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
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#👉 लोगों के लिए सीख👈 #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन
👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' धन के अभाव में मनुष्य को गरीबी का जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है,पर देखा गया है कि यदि अन्य सद्गुण उसके पास हैं तो वह गरीबी का जीवन अभिशाप नहीं है, बल्कि संतोष और शांति प्रदान करताहै। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' धन के अभाव में मनुष्य को गरीबी का जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है,पर देखा गया है कि यदि अन्य सद्गुण उसके पास हैं तो वह गरीबी का जीवन अभिशाप नहीं है, बल्कि संतोष और शांति प्रदान करताहै। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
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🌸 सत्य वचन - "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' प्रेम की एक-एक बूंद के लिए यह दुनियां तरस रही है। अनावृष्टि काल में पानी का जैसा अकाल रेगिस्तानों में दिखता है वैसा ही प्रेम दुर्भीख आज सर्वत्र छाया हुआ है। प्रेम के नाम पर साझीदार चापलूसी वासना और शोषण की प्रवंचना तो बहुत बढ़िया है पर सच्चा प्रेम - उद्देश्य आत्मन्दान और निःस्वार्थ सेवा में ही समावेश होता है पर वो आज कहीं देखने को नहीं मिलता है। इस आध्यात्मिक विभूति के अभाव में जीवन नीरस ही बने रहते हैं। सब ओर कुछ खोया- खोया सा सब ओर अभाव ही अभाव सा दिखाई देता है। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' प्रेम की एक-एक बूंद के लिए यह दुनियां तरस रही है। अनावृष्टि काल में पानी का जैसा अकाल रेगिस्तानों में दिखता है वैसा ही प्रेम दुर्भीख आज सर्वत्र छाया हुआ है। प्रेम के नाम पर साझीदार चापलूसी वासना और शोषण की प्रवंचना तो बहुत बढ़िया है पर सच्चा प्रेम - उद्देश्य आत्मन्दान और निःस्वार्थ सेवा में ही समावेश होता है पर वो आज कहीं देखने को नहीं मिलता है। इस आध्यात्मिक विभूति के अभाव में जीवन नीरस ही बने रहते हैं। सब ओर कुछ खोया- खोया सा सब ओर अभाव ही अभाव सा दिखाई देता है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन
👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' मनुष्यता सीखने की सबसे बडी पाठशाला अपना घर है। स्नेह और त्याग क्षमा और तत्परता की भावनाओं के विकास के जितने भी सुन्दर अवसर घर में मिलते हैंउतने और कहीं भी नहीं मिल सकते। हमारी सबसे पहली धर्म शिक्षा यह होनी चाहिए कि अपने आचरण से अपने घर को स्वर्ग बनावें। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' मनुष्यता सीखने की सबसे बडी पाठशाला अपना घर है। स्नेह और त्याग क्षमा और तत्परता की भावनाओं के विकास के जितने भी सुन्दर अवसर घर में मिलते हैंउतने और कहीं भी नहीं मिल सकते। हमारी सबसे पहली धर्म शिक्षा यह होनी चाहिए कि अपने आचरण से अपने घर को स्वर्ग बनावें। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #👉 लोगों के लिए सीख👈
🌸 सत्य वचन - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " हमारा छोटा सा जीवन है लगभग ७० या ८० वर्ष। उसमें से आधा= ४० वर्ष तो सोने में बीत जाता है। और उसका आधा=२० वर्ष बचपन और बुढ़ापे में खत्म हो जाता है। बचा बाकी का २० वर्ष-उसमें कभी योग कभी वियोग कभी पढाई ,कभी परीक्षा  नौकरी व्यापार तथा जीवन की अनेकों समस्याएं घेरे रहती हैं। अब बचा ही कितना ? यदि हम थोडे से जीवन के लिए बुरे कर्म करके संपत्ति जमा करें और यहीं छोड़ जाएं तो बताओ इतना मूल्यवान जन्म लेकर क्या लाभ हुआ। स्वयं विचार कीजिए? धन्यवादा बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः " हमारा छोटा सा जीवन है लगभग ७० या ८० वर्ष। उसमें से आधा= ४० वर्ष तो सोने में बीत जाता है। और उसका आधा=२० वर्ष बचपन और बुढ़ापे में खत्म हो जाता है। बचा बाकी का २० वर्ष-उसमें कभी योग कभी वियोग कभी पढाई ,कभी परीक्षा  नौकरी व्यापार तथा जीवन की अनेकों समस्याएं घेरे रहती हैं। अब बचा ही कितना ? यदि हम थोडे से जीवन के लिए बुरे कर्म करके संपत्ति जमा करें और यहीं छोड़ जाएं तो बताओ इतना मूल्यवान जन्म लेकर क्या लाभ हुआ। स्वयं विचार कीजिए? धन्यवादा बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat