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#👉 लोगों के लिए सीख👈 #👌 अच्छी सोच👍 #❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन
👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरुदेवाय नमः "gt बहुत गंवाकर भी अंत में यदि कोई मनुष्य सम्भल जाता हैतो वह भी बुद्धिमान ही माना जाएगा। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः "gt बहुत गंवाकर भी अंत में यदि कोई मनुष्य सम्भल जाता हैतो वह भी बुद्धिमान ही माना जाएगा। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान #👌 अच्छी सोच👍 #❤️जीवन की सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈
🌸 सत्य वचन - "श्री सदगुरुदेवाय नमः हर इंसान सोचता है कि हमारे मरने के बाद हमारे कुटुंब का क्या होगा ?इसी चिंता सेभावी दुख की आपदा में अपना आधा सुख नष्ट कर देते हैं। ऐसे लोगों को होता है अभिमान कि इस कुटुंब का भरण- पोषण करने वाले हम ही हैं। वे ईश्वर को भूल जाते हैं। यह ज्ञान नहीं रहता कि हम जिसे अपना कहते हैं वह अपना नहीं भगवान का है। यदि आपका आपसे कोई कहे कि कुटुंब का पालन-्पोषण करने वाला ईश्वर है,तो इस पर आपको विश्वास नहीं होगा। वे भूल जाते हैं कि ईश्वर ने हमको जिस देश जाति या कुटुंब में हमको जन्म दिया है उसकी निष्काम प्रवृत्ति से सेवा करना हमारा कर्तव्य है। उनके इस विचार और विश्वास से पता चलता है कि उनके पीछे जाति या कुटुंब का काम करने वाला कोई नहीं है। ऐसे लोगों की मौत के बारे में ೩t जानें तो उन्हें पता चल जाएगा कि उनकी चिंता करना सर्वथा व्यर्थथा। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः हर इंसान सोचता है कि हमारे मरने के बाद हमारे कुटुंब का क्या होगा ?इसी चिंता सेभावी दुख की आपदा में अपना आधा सुख नष्ट कर देते हैं। ऐसे लोगों को होता है अभिमान कि इस कुटुंब का भरण- पोषण करने वाले हम ही हैं। वे ईश्वर को भूल जाते हैं। यह ज्ञान नहीं रहता कि हम जिसे अपना कहते हैं वह अपना नहीं भगवान का है। यदि आपका आपसे कोई कहे कि कुटुंब का पालन-्पोषण करने वाला ईश्वर है,तो इस पर आपको विश्वास नहीं होगा। वे भूल जाते हैं कि ईश्वर ने हमको जिस देश जाति या कुटुंब में हमको जन्म दिया है उसकी निष्काम प्रवृत्ति से सेवा करना हमारा कर्तव्य है। उनके इस विचार और विश्वास से पता चलता है कि उनके पीछे जाति या कुटुंब का काम करने वाला कोई नहीं है। ऐसे लोगों की मौत के बारे में ೩t जानें तो उन्हें पता चल जाएगा कि उनकी चिंता करना सर्वथा व्यर्थथा। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
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👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरुदेवाय नमः  "श्री जब तक मनुष्य के हृदय में राम का डंका नहीं बजता तब उसकी न पूजा ही रस देती है,और न ज्ञान न वेद की নেক संहिता का अर्थ आएगा न उपनिशद का। নানুললে ননুলল. सदगुरुदेवाय नमः  "श्री जब तक मनुष्य के हृदय में राम का डंका नहीं बजता तब उसकी न पूजा ही रस देती है,और न ज्ञान न वेद की নেক संहिता का अर्थ आएगा न उपनिशद का। নানুললে ননুলল. - ShareChat
#🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍 #❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान #👉 लोगों के लिए सीख👈
🌸 सत्य वचन - सदगुरुदेवाय नमः  "श्री विकृतियां तो अपने ही दृष्टिकोण की होती हैं जो रुग्णता उद्विग्नता दरिद्रिता और गृह-्कलह के रूप में प्रकट होती है। जीवन की जड में यदि सुसंस्कृत चिंतन के जल से प्रवाहित हो रहा है तो सभी उसके पत्र-्पल्लव हरे-भरे बने रहेंगे और उसका सर्वागिन सुखन्शांति सुरम्य सु क्रमिक रूप से देखा जा सकेगा। : इसी ` ক্লা-কুল को मानव जीवन की सार्थकता कहा जाता है।इसकी उपलब्धि आपके हाथ में है। आत्म-चिंतन आत्म - सुधार आत्म -् निर्माण और आत्म-विकास को अपनी नीति- निर्धारण में परिणित कर लिया जाए तो हमारा जीवन प्रवाह उस दिशा में सहज ही प्राप्त हो जाएगा जिसमें अक्षय सुखन्शांति के आनंद उल्लास के अनुदान पगन्पग पर बने रहेंगे। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः  "श्री विकृतियां तो अपने ही दृष्टिकोण की होती हैं जो रुग्णता उद्विग्नता दरिद्रिता और गृह-्कलह के रूप में प्रकट होती है। जीवन की जड में यदि सुसंस्कृत चिंतन के जल से प्रवाहित हो रहा है तो सभी उसके पत्र-्पल्लव हरे-भरे बने रहेंगे और उसका सर्वागिन सुखन्शांति सुरम्य सु क्रमिक रूप से देखा जा सकेगा। : इसी ` ক্লা-কুল को मानव जीवन की सार्थकता कहा जाता है।इसकी उपलब्धि आपके हाथ में है। आत्म-चिंतन आत्म - सुधार आत्म -् निर्माण और आत्म-विकास को अपनी नीति- निर्धारण में परिणित कर लिया जाए तो हमारा जीवन प्रवाह उस दिशा में सहज ही प्राप्त हो जाएगा जिसमें अक्षय सुखन्शांति के आनंद उल्लास के अनुदान पगन्पग पर बने रहेंगे। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
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👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरुदेवाय नमः  "श्री  ईश्वर की आकांक्षा है कि उसकी संतानें व सभी मित्र मिल -्जुलकर स्नेह से बने रहें मधुर वाणी और सरस व्यवहार वाले बने रहें। हे इंसानातू उपदेशक के लिए भेजा गया है। तू मननशील बनकर भद्र पुरुषों के लिए उत्तम उपदेश कर। নানুললে নানুলল. सदगुरुदेवाय नमः  "श्री  ईश्वर की आकांक्षा है कि उसकी संतानें व सभी मित्र मिल -्जुलकर स्नेह से बने रहें मधुर वाणी और सरस व्यवहार वाले बने रहें। हे इंसानातू उपदेशक के लिए भेजा गया है। तू मननशील बनकर भद्र पुरुषों के लिए उत्तम उपदेश कर। নানুললে নানুলল. - ShareChat
#🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈
🌸 सत्य वचन - सदगुरूदेवाय नमः ' "श्री हमारे जीवन में आधी गलतियां तो केवल इसलिए होती हैं किं जहां हमको विचार से काम लेना चाहिए वहां हम भावनाओं से काम लेते हैं और आधी गलतियों का कारण है जहां हमको भावनाओं से काम लेना चाहिए वहां हम विचारों से काम लेते हैं। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरूदेवाय नमः ' "श्री हमारे जीवन में आधी गलतियां तो केवल इसलिए होती हैं किं जहां हमको विचार से काम लेना चाहिए वहां हम भावनाओं से काम लेते हैं और आधी गलतियों का कारण है जहां हमको भावनाओं से काम लेना चाहिए वहां हम विचारों से काम लेते हैं। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन
👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरुदेवाय नमः " "g1 श्रद्धा हीतो है जो पारिवारिक जीवन को स्नेह  सूत्र में बांधे रखती है। सहयोग करने के यह @ अन्य सदस्यों के लिए अपने स्वार्थों का उत्सर्ग करने की प्रेरणा मिलती है। पारिवारिक विघटनों में अभाव ही कारण बनता है। पति - पत्नी के बीच मन- मुटाव भाई-भाई के बीच मतभेद का कारण अश्रद्धा ही तो है। तर्क एवं व्युत्पत्ति की ध्वनि पर वृद्ध माता-पिता का महत्व भी समझ में नहीं आता है।वे भार रूप में ही क्यों दिखते हैं। यह नजर क्यों नहीं आता कि उनका हमारे ऊपर कितना कर्ज है। उनका आशीर्वाद स्नेह को प्राप्त करने की इच्छा रखने वालों की भाव दृष्टि ही तो श्रद्धा की ही उपलब्धि है।जो सदा एक युवा को माता- पिता के सामने यह नत ्मस्तक बना के रखती है। ননুেললে ননুেললে. सदगुरुदेवाय नमः " "g1 श्रद्धा हीतो है जो पारिवारिक जीवन को स्नेह  सूत्र में बांधे रखती है। सहयोग करने के यह @ अन्य सदस्यों के लिए अपने स्वार्थों का उत्सर्ग करने की प्रेरणा मिलती है। पारिवारिक विघटनों में अभाव ही कारण बनता है। पति - पत्नी के बीच मन- मुटाव भाई-भाई के बीच मतभेद का कारण अश्रद्धा ही तो है। तर्क एवं व्युत्पत्ति की ध्वनि पर वृद्ध माता-पिता का महत्व भी समझ में नहीं आता है।वे भार रूप में ही क्यों दिखते हैं। यह नजर क्यों नहीं आता कि उनका हमारे ऊपर कितना कर्ज है। उनका आशीर्वाद स्नेह को प्राप्त करने की इच्छा रखने वालों की भाव दृष्टि ही तो श्रद्धा की ही उपलब्धि है।जो सदा एक युवा को माता- पिता के सामने यह नत ्मस्तक बना के रखती है। ননুেললে ননুেললে. - ShareChat
#🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #👉 लोगों के लिए सीख👈
🌸 सत्य वचन - "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' रोटी, पानी , चाकरी , और घोडे का तंग। अपने हाथ संवारिए, चाहे लाख लोग हों संग। । নানুলাল নানুলাল . "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' रोटी, पानी , चाकरी , और घोडे का तंग। अपने हाथ संवारिए, चाहे लाख लोग हों संग। । নানুলাল নানুলাল . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन
👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरुदेवाय नमः "श्री काला कुरूप लोहा है। सद्विचारों के पारस मूलतः मनुष्य एक प्रकार का को छूकर ही वह सोना बनता है। एक नगण्य तुच्छ प्राणी को मानवता का महान गौरव दिला सकने की क्षमता केवल और केवल मात्र सद्विचारों में है। जिसे यह सौभाग्य नहीं मिल सका वह मानव भला क्यों कर अपने पुरुषार्थ क्यों करेगा ? लिए कुछ लक्ष्य को समझेगा ?और उसके प्रयास নানুললে নানুলল . सदगुरुदेवाय नमः "श्री काला कुरूप लोहा है। सद्विचारों के पारस मूलतः मनुष्य एक प्रकार का को छूकर ही वह सोना बनता है। एक नगण्य तुच्छ प्राणी को मानवता का महान गौरव दिला सकने की क्षमता केवल और केवल मात्र सद्विचारों में है। जिसे यह सौभाग्य नहीं मिल सका वह मानव भला क्यों कर अपने पुरुषार्थ क्यों करेगा ? लिए कुछ लक्ष्य को समझेगा ?और उसके प्रयास নানুললে নানুলল . - ShareChat
#🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान #👌 अच्छी सोच👍 #❤️जीवन की सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈
🌸 सत्य वचन - सदगुरुदेवाय नमः ' "श्री जिन लोगों ने कष्टों को सहते हुए भी अपने जीवन ঈঁক্তুল্ত  आदर्श स्थापित किए हैंउनका सार्वजनिक सम्मान होना चाहिए उनकी प्रशंसा मुक्त कंठ से होनी चाहिए और जो लोग निंदनीय कृत्य द्वारा जीवन को विकसित कर रहे हैं उनकी प्रशंसा एवं सहायता किसी भी रूप में नहीं होनी चाहिए। अवांछनीय कार्य में शामिल होना भी एक प्रकार से उन्हें प्रोत्साहन देना ही है क्योंकि श्रेष्ठ पुरूषों की उपस्थिति से लोग उनके कार्य में उनका समर्थन मान लेते हैं और स्वयं भी उनका सहयोग करने लगते हैं।इस प्रकार अनुचित कार्य में हमारा प्रत्यक्ष और परोक्ष समर्थन अंतः उन्हें बढाने वाला ही सिद्ध होता है। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः ' "श्री जिन लोगों ने कष्टों को सहते हुए भी अपने जीवन ঈঁক্তুল্ত  आदर्श स्थापित किए हैंउनका सार्वजनिक सम्मान होना चाहिए उनकी प्रशंसा मुक्त कंठ से होनी चाहिए और जो लोग निंदनीय कृत्य द्वारा जीवन को विकसित कर रहे हैं उनकी प्रशंसा एवं सहायता किसी भी रूप में नहीं होनी चाहिए। अवांछनीय कार्य में शामिल होना भी एक प्रकार से उन्हें प्रोत्साहन देना ही है क्योंकि श्रेष्ठ पुरूषों की उपस्थिति से लोग उनके कार्य में उनका समर्थन मान लेते हैं और स्वयं भी उनका सहयोग करने लगते हैं।इस प्रकार अनुचित कार्य में हमारा प्रत्यक्ष और परोक्ष समर्थन अंतः उन्हें बढाने वाला ही सिद्ध होता है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat