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#👉 लोगों के लिए सीख👈 #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान
👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " घर में गरीबी हो या अमीरी इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि इससे किसी को कोई लेना-्देना नहीं होता। पर यदि सभ्यता की पूंजी अगर पास में है तो उस सुसंस्कृत परिवार के सदस्य प्रत्येक आगंतुक पर संपर्क में आने वाले पर गहरी छाप छोड़ेंगे और उसकी भी यही आकांक्षा बढ जाएगी कि हे भगवानाऔर कुछ दे या न दे पर हमारे परिवार को भी इतना सभ्य बना दे जैसा कि अमुक व्यक्तिको देखकर आये हैं। शालीन परिवारों के साथ लेनन्देन,चाल-्चलन ब्याह-्शादी करने में हर किसी को प्रसन्नता होती है और हर कोई उन्हें सम्मान देता है और सहयोग भी। अस्तु वहां बिना बुलाए भी समृद्धि प्रगति अनायास ही बढती चली जाती है। अध्यात्म का पहला पाठ है सभ्यता का अपने आप से अपने घर से शुभारंभ। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः " घर में गरीबी हो या अमीरी इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि इससे किसी को कोई लेना-्देना नहीं होता। पर यदि सभ्यता की पूंजी अगर पास में है तो उस सुसंस्कृत परिवार के सदस्य प्रत्येक आगंतुक पर संपर्क में आने वाले पर गहरी छाप छोड़ेंगे और उसकी भी यही आकांक्षा बढ जाएगी कि हे भगवानाऔर कुछ दे या न दे पर हमारे परिवार को भी इतना सभ्य बना दे जैसा कि अमुक व्यक्तिको देखकर आये हैं। शालीन परिवारों के साथ लेनन्देन,चाल-्चलन ब्याह-्शादी करने में हर किसी को प्रसन्नता होती है और हर कोई उन्हें सम्मान देता है और सहयोग भी। अस्तु वहां बिना बुलाए भी समृद्धि प्रगति अनायास ही बढती चली जाती है। अध्यात्म का पहला पाठ है सभ्यता का अपने आप से अपने घर से शुभारंभ। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#☝अनमोल ज्ञान #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈
☝अनमोल ज्ञान - "श्री सदगुरुतदेवाय नमः " कृतज्ञता भावना क्षेत्र की एक उच्च स्तरीय विभूति हैउसका अस्तित्व जहां भी होगा वहां यही चल रहाहोगा कि जिन्होंने अपने साथ जो उपकार किए हैं उन्हें ब्याज समेत वापिस करके प्रयास उऋण हुआ जाए। अभिभावकों के साथ वयस्क संतान को इसी श्रद्धा-्भावना का परिचय देना पड़ता है। समाज के अनेकानेक पक्ष एवं घटक अपनी प्रगति में निरंतर सहायक रहे हैं ऐसी दशा में यदि समाज ऋण से उऋण होने के लिए सार्वजनिक सेवा को भी निजी स्वार्थ साधना से कम नहीं वरन् उससे अधिक ही महत्व देना चाहिए। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुतदेवाय नमः " कृतज्ञता भावना क्षेत्र की एक उच्च स्तरीय विभूति हैउसका अस्तित्व जहां भी होगा वहां यही चल रहाहोगा कि जिन्होंने अपने साथ जो उपकार किए हैं उन्हें ब्याज समेत वापिस करके प्रयास उऋण हुआ जाए। अभिभावकों के साथ वयस्क संतान को इसी श्रद्धा-्भावना का परिचय देना पड़ता है। समाज के अनेकानेक पक्ष एवं घटक अपनी प्रगति में निरंतर सहायक रहे हैं ऐसी दशा में यदि समाज ऋण से उऋण होने के लिए सार्वजनिक सेवा को भी निजी स्वार्थ साधना से कम नहीं वरन् उससे अधिक ही महत्व देना चाहिए। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान
👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरुदेवाय नमः  "91 बाप की महनत और घर की मुसीबतों को देखने वाला कभी गलत रास्ते पर नहीं जा पाता है। নানুললে নানুলল. सदगुरुदेवाय नमः  "91 बाप की महनत और घर की मुसीबतों को देखने वाला कभी गलत रास्ते पर नहीं जा पाता है। নানুললে নানুলল. - ShareChat
#☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #👉 लोगों के लिए सीख👈
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#👉 लोगों के लिए सीख👈 #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान
👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' विवाह के पूर्व भी हर युवक - सामने एक परिवार विद्यमान रहता है। लडकी के लिए -युवती के उसमें माता -पिता भाई, बहिन भी सेवा-्श्रम करते रहने के लिए उपलब्ध रहते हैं। लडकों के भी अभिभावक भाई-भतीजे चाचा -्ताऊ एवं उनकी पत्नियां वृद्धाएं आदि कितने ही सदस्य रहते हैं-्उस कुटुंब का अनेक स्तर का अनेक प्रकार का सहयोग- अनुदान ऋण के रूप में अपने ऊपर चढा होता है, उससे उऋण होने को भी प्राथमिकता दी जाए तो उसे कृतज्ञता की कर्तव्य पालन की अभिव्यक्तिही कहा जाएगा। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' विवाह के पूर्व भी हर युवक - सामने एक परिवार विद्यमान रहता है। लडकी के लिए -युवती के उसमें माता -पिता भाई, बहिन भी सेवा-्श्रम करते रहने के लिए उपलब्ध रहते हैं। लडकों के भी अभिभावक भाई-भतीजे चाचा -्ताऊ एवं उनकी पत्नियां वृद्धाएं आदि कितने ही सदस्य रहते हैं-्उस कुटुंब का अनेक स्तर का अनेक प्रकार का सहयोग- अनुदान ऋण के रूप में अपने ऊपर चढा होता है, उससे उऋण होने को भी प्राथमिकता दी जाए तो उसे कृतज्ञता की कर्तव्य पालन की अभिव्यक्तिही कहा जाएगा। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #👉 लोगों के लिए सीख👈
☝अनमोल ज्ञान - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " अपने मतलब से मतलब रखने वाले समझते भर इतना है कि हम चतुरता कर रहे हैं। स्वयं किसी के काम नहीं आते पर अपना उल्लू सीधा करते हैं। वे यह भूल जाते हैं कि यहां सब-्कुछ आदान- प्रदान के आधार पर ही चल रहा और बढ रहा है। नियति का अतिक्रमण करके किसी का भी सुख चैन से रह सकना संभव नहीं। अकेलेपन की प्रवृत्ति सरसता और प्रसन्नता के समस्त स्त्रोत सुखा देती है। हर दृष्टि से हर क्षेत्र में संकीर्णता हानिकारक ही सिद्ध होती है। इसलिए मिल -्जुलकर रहना सिखाने वाली पारिवारिकता को ही श्रेय सौभाग्य और समझदारी के साथ जोड़ा गया है। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः " अपने मतलब से मतलब रखने वाले समझते भर इतना है कि हम चतुरता कर रहे हैं। स्वयं किसी के काम नहीं आते पर अपना उल्लू सीधा करते हैं। वे यह भूल जाते हैं कि यहां सब-्कुछ आदान- प्रदान के आधार पर ही चल रहा और बढ रहा है। नियति का अतिक्रमण करके किसी का भी सुख चैन से रह सकना संभव नहीं। अकेलेपन की प्रवृत्ति सरसता और प्रसन्नता के समस्त स्त्रोत सुखा देती है। हर दृष्टि से हर क्षेत्र में संकीर्णता हानिकारक ही सिद्ध होती है। इसलिए मिल -्जुलकर रहना सिखाने वाली पारिवारिकता को ही श्रेय सौभाग्य और समझदारी के साथ जोड़ा गया है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान
👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' घर में रहने से किसी को घुटन नहीं होती  बल्कि उस छोटे से परिवार में अधिक ्से ्अधिक समय बने रहने की सबकी इच्छा होती है।घर का वातावरण नीरस एवं घिसा - पिटा बना रहने से ही उसमें लम्बे समय तक रहना भारी पड़ता है। बाहर भागने की इच्छा इसी कारण होती है। झीलों पार्कों  सिनेमाघरों की तरफ एवं दोस्तों और सहेलियों के साथ मिल-्बैठने के लिए दिल इसी कारण करता है। यदि प्रयत्न किया जाएतो घर का वातावरण ही इतना मनोरंजक उत्साहवर्धक आकर्षक एवं प्रेरणाप्रद बन सकता है कि उसे छोड़कर कहीं मन हल्का करने के लिए जाने की किसी को भी इच्छा न होगी। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' घर में रहने से किसी को घुटन नहीं होती  बल्कि उस छोटे से परिवार में अधिक ्से ्अधिक समय बने रहने की सबकी इच्छा होती है।घर का वातावरण नीरस एवं घिसा - पिटा बना रहने से ही उसमें लम्बे समय तक रहना भारी पड़ता है। बाहर भागने की इच्छा इसी कारण होती है। झीलों पार्कों  सिनेमाघरों की तरफ एवं दोस्तों और सहेलियों के साथ मिल-्बैठने के लिए दिल इसी कारण करता है। यदि प्रयत्न किया जाएतो घर का वातावरण ही इतना मनोरंजक उत्साहवर्धक आकर्षक एवं प्रेरणाप्रद बन सकता है कि उसे छोड़कर कहीं मन हल्का करने के लिए जाने की किसी को भी इच्छा न होगी। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍 #👉 लोगों के लिए सीख👈
📖जीवन का लक्ष्य🤔 - सदगुरुदेवाय नमः  "9& मनुष्य शरीर तो सबको मिल जाता लेकिन मनुष्य बनकर जीने का अवसर सबको नहीं मिलता है। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः  "9& मनुष्य शरीर तो सबको मिल जाता लेकिन मनुष्य बनकर जीने का अवसर सबको नहीं मिलता है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#☝अनमोल ज्ञान #👌 अच्छी सोच👍 #❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन #📖जीवन का लक्ष्य🤔
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