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#👉 लोगों के लिए सीख👈 #🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख
👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरुदेवाय नमः ' "9f यदि संयुक्त परिवार में द्वेष -दुर्भाव की अवज्ञा और उपेक्षा की आपाधापी की दुष्प्रवृत्तियां पनप रही हों तो घर को नरक बनाने की अपेक्षा यही अच्छा है कि लोग अपना - अपना परिवार लेकर स्थिति में संयुक्त परिवार का लाभ है और अलग हो जाएं।   सद्भाव कीं दुर्भाव पनपने की स्थिति में उसका बिखर जाना ही श्रेयस्कर है। নানুলল নানুলল . सदगुरुदेवाय नमः ' "9f यदि संयुक्त परिवार में द्वेष -दुर्भाव की अवज्ञा और उपेक्षा की आपाधापी की दुष्प्रवृत्तियां पनप रही हों तो घर को नरक बनाने की अपेक्षा यही अच्छा है कि लोग अपना - अपना परिवार लेकर स्थिति में संयुक्त परिवार का लाभ है और अलग हो जाएं।   सद्भाव कीं दुर्भाव पनपने की स्थिति में उसका बिखर जाना ही श्रेयस्कर है। নানুলল নানুলল . - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान #👉 लोगों के लिए सीख👈
❤️जीवन की सीख - "श्री सदगुरुदेवाय नमः  र्यदै जीवन यापन के लिए आवश्यक सामान्य ज्ञान और लोक व्यवहार का अनुभव होतो मनुष्य को जितनी बुद्धि मिली है और कलाईयों में जो क्षमता है वह उसके लिए पर्याप्त है कि किसी सामान्य परिवार का गुजारा किसी प्रकार हँसी -खुशी के साथ होता चला जाएगा।  कठिनाई तब आती है जब परिवार के सदस्यों में स्नेह -सौजन्य का सद्भाव सहयोग का अभाव रहता है। एक -दूसरे में रूचि नहीं लेते , अपने अपने मतलब में चौकस रहते हैं अनुशासन नहीं मानते और परस्पर मनोमालिन्य रखकर समय-्कुसमय लड़ते ् झगड़ते रहते हैं। जहां यह स्थिति होगी वहां अर्थ साधन रहते हुए भी परिवार एक ऐसे कैदखाने की स्थिति में होगा जहां विवशता पूर्वक समय काटना पड़ता है। ऐसी स्थिति में परिवारों में घनिष्ठता रहती है,न आत्मीयता। ऐसी निरानंद स्थिति में दिन तो कटते रहते हैं पर वह उपलब्धियां जो इस पवित्र संस्था के सदस्यों को मिल सकती थीं प्रायः नहीं मिल पाती हैं। आज के अधिकांश परिवारों की स्थिति ऐसी ही दुर्भाग्यपूर्ण बनी हुई है। নানুললে নানুলল . "श्री सदगुरुदेवाय नमः  र्यदै जीवन यापन के लिए आवश्यक सामान्य ज्ञान और लोक व्यवहार का अनुभव होतो मनुष्य को जितनी बुद्धि मिली है और कलाईयों में जो क्षमता है वह उसके लिए पर्याप्त है कि किसी सामान्य परिवार का गुजारा किसी प्रकार हँसी -खुशी के साथ होता चला जाएगा।  कठिनाई तब आती है जब परिवार के सदस्यों में स्नेह -सौजन्य का सद्भाव सहयोग का अभाव रहता है। एक -दूसरे में रूचि नहीं लेते , अपने अपने मतलब में चौकस रहते हैं अनुशासन नहीं मानते और परस्पर मनोमालिन्य रखकर समय-्कुसमय लड़ते ् झगड़ते रहते हैं। जहां यह स्थिति होगी वहां अर्थ साधन रहते हुए भी परिवार एक ऐसे कैदखाने की स्थिति में होगा जहां विवशता पूर्वक समय काटना पड़ता है। ऐसी स्थिति में परिवारों में घनिष्ठता रहती है,न आत्मीयता। ऐसी निरानंद स्थिति में दिन तो कटते रहते हैं पर वह उपलब्धियां जो इस पवित्र संस्था के सदस्यों को मिल सकती थीं प्रायः नहीं मिल पाती हैं। आज के अधिकांश परिवारों की स्थिति ऐसी ही दुर्भाग्यपूर्ण बनी हुई है। নানুললে নানুলল . - ShareChat
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👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः तपोवनों में घर बनाने की अपेक्षा घरों को ही तपोवन बनाया जाए। सत्वृत्तियों के अभिवर्द्धन की साधना जितनी सफलता पूर्वक घर-्परिवार में हो सकती है उतनी अन्यत्र ட নানুলাল নানুলল . "श्री सदगुरुदेवाय नमः तपोवनों में घर बनाने की अपेक्षा घरों को ही तपोवन बनाया जाए। सत्वृत्तियों के अभिवर्द्धन की साधना जितनी सफलता पूर्वक घर-्परिवार में हो सकती है उतनी अन्यत्र ட নানুলাল নানুলল . - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान #👌 अच्छी सोच👍 #👉 लोगों के लिए सीख👈
❤️जीवन की सीख - सदगुरूदेवाय नमः " "পী पारिवारिक झगडों को युद्ध की-सी चुनौती के रूप में मत मानिए। विपक्षी की तरह दमन करने की बात मत सोचिए। बल्कि झगडे के कारण पर विचार कीजिए और प्रयत्न कीजिए कि वह कारण दूर हो जाए। यदि ऐसा हो सका तो झगडा दूर करने में आपको शीघ्र ही सफलता मिल जाएगी। गृह-्कलह को समाप्त करने का यह प्रमुख सिद्धांत है। इस पर चलकर देखिए और सफलता मिले तो दूसरों को भी इसका उपदेश दीजिए। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरूदेवाय नमः " "পী पारिवारिक झगडों को युद्ध की-सी चुनौती के रूप में मत मानिए। विपक्षी की तरह दमन करने की बात मत सोचिए। बल्कि झगडे के कारण पर विचार कीजिए और प्रयत्न कीजिए कि वह कारण दूर हो जाए। यदि ऐसा हो सका तो झगडा दूर करने में आपको शीघ्र ही सफलता मिल जाएगी। गृह-्कलह को समाप्त करने का यह प्रमुख सिद्धांत है। इस पर चलकर देखिए और सफलता मिले तो दूसरों को भी इसका उपदेश दीजिए। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
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👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " मननुष्य का सम्मान इसी में है कि मनुष्य मनुष्य का विश्वास-्भाजन बने। यदि आप सबको एक समान समझेंगे तो परिवार सभी सदस्य आपकी बात मानने में संतोष प्राप्त करेंगे। अनजान में यदि आपसे कोई भूल हो भी जाएगी तो उसका कोई ख्याल नहीं करेगा और उसकी प्रतिष्ठा ज्यों-्की-्त्यों बनी रहेगी। एक कहावत है-कि चार बर्तन होते हैंतो खटकते हैं। अतः घर में कभी कुछ कलह उपस्थित हो जाएतो उसे मनुष्य स्वभाव की कमजोरी मानकर अधिक तूल मत दीजिए। झगड़ों को शांत करने का एक बहुत बडा नुस्खा है -त्याग। यदि आपने किंचित भी त्याग प्रदर्शित किया तो झगडा समाप्त होने में देरन लगेगी। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः " मननुष्य का सम्मान इसी में है कि मनुष्य मनुष्य का विश्वास-्भाजन बने। यदि आप सबको एक समान समझेंगे तो परिवार सभी सदस्य आपकी बात मानने में संतोष प्राप्त करेंगे। अनजान में यदि आपसे कोई भूल हो भी जाएगी तो उसका कोई ख्याल नहीं करेगा और उसकी प्रतिष्ठा ज्यों-्की-्त्यों बनी रहेगी। एक कहावत है-कि चार बर्तन होते हैंतो खटकते हैं। अतः घर में कभी कुछ कलह उपस्थित हो जाएतो उसे मनुष्य स्वभाव की कमजोरी मानकर अधिक तूल मत दीजिए। झगड़ों को शांत करने का एक बहुत बडा नुस्खा है -त्याग। यदि आपने किंचित भी त्याग प्रदर्शित किया तो झगडा समाप्त होने में देरन लगेगी। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #👉 लोगों के लिए सीख👈
❤️जीवन की सीख - "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' हर इंसान को यह चेष्टा करनी चाहिए कि आपस में मतभेद की नौबत ही न आने पाए। अपनी ओर से ऐसी कोई बात ही मत आने दो जिससे कोई विवाद हो ओर से होने वाले विवाद को भी शान्ति पूर्वक निबटा देना ही दूसरी : जाएबल्कि बुद्धिमानी है। अपने द्वारा हुई भूल को तुरंत स्वीकार कर लीजिए। आपकी इस स्पष्टवादिता और आदर्श मनोवृत्ति का दूसरों पर अवश्य ही प्रभाव पड़ेगा। यदि भूल भी उसे स्वीकार नहीं करते तो दूसरों फर उसकी गलत प्रतिक्रिया होगी और करके क्षमाभाव के बजाय मन में भ्रांत धारणा बनी रहेगी। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' हर इंसान को यह चेष्टा करनी चाहिए कि आपस में मतभेद की नौबत ही न आने पाए। अपनी ओर से ऐसी कोई बात ही मत आने दो जिससे कोई विवाद हो ओर से होने वाले विवाद को भी शान्ति पूर्वक निबटा देना ही दूसरी : जाएबल्कि बुद्धिमानी है। अपने द्वारा हुई भूल को तुरंत स्वीकार कर लीजिए। आपकी इस स्पष्टवादिता और आदर्श मनोवृत्ति का दूसरों पर अवश्य ही प्रभाव पड़ेगा। यदि भूल भी उसे स्वीकार नहीं करते तो दूसरों फर उसकी गलत प्रतिक्रिया होगी और करके क्षमाभाव के बजाय मन में भ्रांत धारणा बनी रहेगी। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान #👌 अच्छी सोच👍 #❤️जीवन की सीख
👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " कडवी बात जहर से भी बुरी होती है। यदि आपकी वाणी मधुर नहीं है तो जीवन में कटुता बढती ही चली जाएगी। घर के किसी सदस्य की तीखी आलोचना करना अवश्य ही बर्दाश्त से बाहर हो सकती है। आपकी भ्रांत धारणा चाहे वह भ्रांत न होकर सत्य ही हो तो भी,दूसरे पर तीखी चोट कर सकती है और तब वह वाणी का घाव बडी कठिनाई से भर सकता है। मनुष्य तलवार के घाव से नहीं घबडाता वह उसे हंसते -्हंसते सह लेता है, परन्तु वाणी का घाव कलेजे में गहरा होता जाता है और वह जीवन भर भर नहीं पाता। acucacc "श्री सदगुरुदेवाय नमः " कडवी बात जहर से भी बुरी होती है। यदि आपकी वाणी मधुर नहीं है तो जीवन में कटुता बढती ही चली जाएगी। घर के किसी सदस्य की तीखी आलोचना करना अवश्य ही बर्दाश्त से बाहर हो सकती है। आपकी भ्रांत धारणा चाहे वह भ्रांत न होकर सत्य ही हो तो भी,दूसरे पर तीखी चोट कर सकती है और तब वह वाणी का घाव बडी कठिनाई से भर सकता है। मनुष्य तलवार के घाव से नहीं घबडाता वह उसे हंसते -्हंसते सह लेता है, परन्तु वाणी का घाव कलेजे में गहरा होता जाता है और वह जीवन भर भर नहीं पाता। acucacc - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍 #👉 लोगों के लिए सीख👈
❤️जीवन की सीख - सदगुरुदेवाय नमः  "91 परिवार में परस्पर के दोषों को देखकर आलोचना करना अनुचित है। सभी मनुष्यों में कमजोरियां हैं। भूल करना भी मनुष्य का स्वभाव है। प्रत्येक व्यक्ति आपके घर का सदस्य होने के कारण उसका भी उस घर पर पूरा अधिकार है। यदि रुचि में साम्य न हो अथवा मत विभिन्नता हो तो भी वह निरादर का पात्र नहीं है। यह संभव नहीं कि आपकी रुचि सबसे मिल सके। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः  "91 परिवार में परस्पर के दोषों को देखकर आलोचना करना अनुचित है। सभी मनुष्यों में कमजोरियां हैं। भूल करना भी मनुष्य का स्वभाव है। प्रत्येक व्यक्ति आपके घर का सदस्य होने के कारण उसका भी उस घर पर पूरा अधिकार है। यदि रुचि में साम्य न हो अथवा मत विभिन्नता हो तो भी वह निरादर का पात्र नहीं है। यह संभव नहीं कि आपकी रुचि सबसे मिल सके। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख
👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः जहां भी चार-्पांच व्यक्तियों का संगठन हों  उनके स्वभाव आदतों विचारों में कुछ ्न-्कुछ भेद अवश्य पाया जाएगा। एक ही मां -बाप की सगी संतानें एक जैसी नहीं होती हाथ की पांचों उंगलियां बराबर नहीं होती हैं पर सबके सामंजस्य - सहकार से ही कोई काम हो पाता है। हम यह चाहें कि सभी व्यक्तिहमारे अनुरूप हो जाएं,तो यह कदापि संभव नहीं। इसके लिए तो दोनों ही पक्षों को कुछन्न ्कुछ उदारता बरतनी होगी। ठीक यही बात पारिवारिक सदस्यों के लिए लागू होती है। प्रत्येक सदस्य के आपसी सामंजस्य पर परिवार की एकता व संगठन निर्भर करते हैं। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः जहां भी चार-्पांच व्यक्तियों का संगठन हों  उनके स्वभाव आदतों विचारों में कुछ ्न-्कुछ भेद अवश्य पाया जाएगा। एक ही मां -बाप की सगी संतानें एक जैसी नहीं होती हाथ की पांचों उंगलियां बराबर नहीं होती हैं पर सबके सामंजस्य - सहकार से ही कोई काम हो पाता है। हम यह चाहें कि सभी व्यक्तिहमारे अनुरूप हो जाएं,तो यह कदापि संभव नहीं। इसके लिए तो दोनों ही पक्षों को कुछन्न ्कुछ उदारता बरतनी होगी। ठीक यही बात पारिवारिक सदस्यों के लिए लागू होती है। प्रत्येक सदस्य के आपसी सामंजस्य पर परिवार की एकता व संगठन निर्भर करते हैं। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #👉 लोगों के लिए सीख👈
❤️जीवन की सीख - सदगुरुदेवाय नमः "श्री उदारता सहिष्णुता का समावेश दैनिक जीवन के प्रत्येक क्रिया-्कलाप में रहना चाहिए। प्रत्येक सदस्य यह ध्यान रखे कि हमारे व्यवहार से किसी का अहित न हो। जाने -अनजाने  में ऐसे कटु शब्दों का प्रयोग न हो,जो आपसी मन-मुटाव को जन्म दे। व्यवहार एवं वाणी में नम्रता मधुरता सौम्यता व शालीनता बनी रहे। परिवार में वाणी की मधुरता का तह प्रारंभिक अभ्यास आगे चलकर व्यक्ति के सामाजिक जीवन में भी बहुत उपयोगी सिद्ध होता है। নানুললে নানুলল . सदगुरुदेवाय नमः "श्री उदारता सहिष्णुता का समावेश दैनिक जीवन के प्रत्येक क्रिया-्कलाप में रहना चाहिए। प्रत्येक सदस्य यह ध्यान रखे कि हमारे व्यवहार से किसी का अहित न हो। जाने -अनजाने  में ऐसे कटु शब्दों का प्रयोग न हो,जो आपसी मन-मुटाव को जन्म दे। व्यवहार एवं वाणी में नम्रता मधुरता सौम्यता व शालीनता बनी रहे। परिवार में वाणी की मधुरता का तह प्रारंभिक अभ्यास आगे चलकर व्यक्ति के सामाजिक जीवन में भी बहुत उपयोगी सिद्ध होता है। নানুললে নানুলল . - ShareChat