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#👉 लोगों के लिए सीख👈 #☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍 #❤️जीवन की सीख
👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरुदेवाय नमः "g हमारे समाज में देवता या ईश्वर बननातो सहजहै लेकिन मनूष्य बनना कठिनहै। ননুললে নানুলল. @ सदगुरुदेवाय नमः "g हमारे समाज में देवता या ईश्वर बननातो सहजहै लेकिन मनूष्य बनना कठिनहै। ননুললে নানুলল. @ - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन #👉 लोगों के लिए सीख👈
❤️जीवन की सीख - सदगुरुदेवाय नमः "श्री सहानुभूति मनुष्य की सबसे बडी आवश्यकता है। हर मनुष्य दूसरे मनुष्य से मनुष्य के एक सूत्र में बंधा हुआ है। इस नियम में सांकेतिकता पड गई तो सारा जीवन अस्त ्व्यस्त हो सकता है। स्वार्थ और आत्मतुष्टि की भावना से लोग दूसरों के अधिकार छीन लेते हैं स्वार्थ धारण कर लेते हैंशक्तिका शोषण करने से बाज नहीं आते। इन विश्रृंखलता के आज सभी ओर दर्शन किए जा सकते हैं। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः "श्री सहानुभूति मनुष्य की सबसे बडी आवश्यकता है। हर मनुष्य दूसरे मनुष्य से मनुष्य के एक सूत्र में बंधा हुआ है। इस नियम में सांकेतिकता पड गई तो सारा जीवन अस्त ्व्यस्त हो सकता है। स्वार्थ और आत्मतुष्टि की भावना से लोग दूसरों के अधिकार छीन लेते हैं स्वार्थ धारण कर लेते हैंशक्तिका शोषण करने से बाज नहीं आते। इन विश्रृंखलता के आज सभी ओर दर्शन किए जा सकते हैं। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
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👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " हमारी एक सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि हम बड़़े -बड़े सिद्धांत बघारते हैं नीति और न्याय की ऊंची -ऊंची बातें करते हैं लेकिन यह सब दूसरों के लिए है। अपने क्रिया -कलापों को न्याय नीति की प्रस्तुति पर हम कभी ध्यान ही नहीं देते। आततायी और गुंडों को हम लोग कोसते हैं उन्हें बुरा- भला कहते हैं हमारी समीक्षक बुद्धि उस समय न जाने कहां चली जाती है जब हम पराई महिलाओं को बुरी नजर से देखते हैं। बिना प्रति- मूल्य दिए समाज के लोगों का उपभोग करते हैं अनीति के साथ धन एकत्रित करते हैं और समाज का शोषण करते हैं। जिस तरह की आलोचना करते हम दूसरों व Ca न्याय नीति की मांग करते हैं उसी तरह यह भी जरूरी है कि हम अपने 3 व्यवहार को नीति धर्म की व्याख्या पर कैसे पेश करें। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः " हमारी एक सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि हम बड़़े -बड़े सिद्धांत बघारते हैं नीति और न्याय की ऊंची -ऊंची बातें करते हैं लेकिन यह सब दूसरों के लिए है। अपने क्रिया -कलापों को न्याय नीति की प्रस्तुति पर हम कभी ध्यान ही नहीं देते। आततायी और गुंडों को हम लोग कोसते हैं उन्हें बुरा- भला कहते हैं हमारी समीक्षक बुद्धि उस समय न जाने कहां चली जाती है जब हम पराई महिलाओं को बुरी नजर से देखते हैं। बिना प्रति- मूल्य दिए समाज के लोगों का उपभोग करते हैं अनीति के साथ धन एकत्रित करते हैं और समाज का शोषण करते हैं। जिस तरह की आलोचना करते हम दूसरों व Ca न्याय नीति की मांग करते हैं उसी तरह यह भी जरूरी है कि हम अपने 3 व्यवहार को नीति धर्म की व्याख्या पर कैसे पेश करें। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
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❤️जीवन की सीख - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " हम नहीं चाहते कि कोई हमारा अपमान करेतो हमारा भी कर्तव्य है कि हम भी किसी का अपमान न करें। इसी तरह विश्वास धोखा कपट उत्तेजना शोषण आदि बुरे लोगों का शिकार हम स्वयं नहीं होना चाहते तो हमारा भी धर्म है कि हम भी दूसरों के साथ ऐसा न करें। लेकिन खेद का विषय है किं जब भी हमारा कोई ऊपरी विद्रोह करता है तो हम बुराई करते हैं सिद्धांतों की दुहाई देते हैं और आरक्षण के लिए नारा लगाते हैं। लेकिन जब हम दूसरों के साथ ऐसा करते हैंतब किसी के कुछ सुनने के बाद भी हमारे कानों पर जूं तक नहीं रेंगती। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः " हम नहीं चाहते कि कोई हमारा अपमान करेतो हमारा भी कर्तव्य है कि हम भी किसी का अपमान न करें। इसी तरह विश्वास धोखा कपट उत्तेजना शोषण आदि बुरे लोगों का शिकार हम स्वयं नहीं होना चाहते तो हमारा भी धर्म है कि हम भी दूसरों के साथ ऐसा न करें। लेकिन खेद का विषय है किं जब भी हमारा कोई ऊपरी विद्रोह करता है तो हम बुराई करते हैं सिद्धांतों की दुहाई देते हैं और आरक्षण के लिए नारा लगाते हैं। लेकिन जब हम दूसरों के साथ ऐसा करते हैंतब किसी के कुछ सुनने के बाद भी हमारे कानों पर जूं तक नहीं रेंगती। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
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👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' जब हम पवित्र हृदय से प्राणीमात्र से सार-पूर्ण या कुत्सित लाभ उठाने का विचार त्याग देंगे तो हम भगवान के इतने करीब हो जाएंगे कि दुनियां के सारे पदार्थ सुंदर रूप में प्रकट हो जाएंगे। पर हमने स्वयंही अपने कुविचारों तथा कुकृत्यों द्वारा उस दैवी प्रवाह का मार्ग अवरुद्ध कर रखा है जिसे प्राप्त करके हमारा आत्म विकास हो सकता है। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' जब हम पवित्र हृदय से प्राणीमात्र से सार-पूर्ण या कुत्सित लाभ उठाने का विचार त्याग देंगे तो हम भगवान के इतने करीब हो जाएंगे कि दुनियां के सारे पदार्थ सुंदर रूप में प्रकट हो जाएंगे। पर हमने स्वयंही अपने कुविचारों तथा कुकृत्यों द्वारा उस दैवी प्रवाह का मार्ग अवरुद्ध कर रखा है जिसे प्राप्त करके हमारा आत्म विकास हो सकता है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
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❤️जीवन की सीख - सदगुरुदेवाय नमः  "श्री अगर पति-्पत्नी एक दिल हों तो यह दुनियां भी स्वर्ग बन सकती है। यहां इसी धरती पर स्वर्ग के दर्शन हों तो हर सद्ृहस्थ को अपने दाम्पत्य जीवन में प्रेम स्नेह आत्मीयता और अकल्पनीयता की भावना पैदा करनी होगी। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः  "श्री अगर पति-्पत्नी एक दिल हों तो यह दुनियां भी स्वर्ग बन सकती है। यहां इसी धरती पर स्वर्ग के दर्शन हों तो हर सद्ृहस्थ को अपने दाम्पत्य जीवन में प्रेम स्नेह आत्मीयता और अकल्पनीयता की भावना पैदा करनी होगी। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान #👌 अच्छी सोच👍 #❤️जीवन की सीख
👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरुदेवाय नमः ' '9 गृहस्थाश्रम में सुख तभी मिल सकता है, जब स्त्री - पुरुषों में मित्रो विस्वास बना रहे। रिश्तों में जब आत्मीयता बनी रहती है,तब स्नेह स्थिर रहता है। छोटी-्मोटी गलतियां भी हो जाती हैंतो उन्हें उदारता पूर्वक क्षमा कर देने से संबंधों में कड़वाहट जन्म नहीं लेती। जो इतना भी नहीं कर सकता उसे इंसान कहना सबसे बडी भूल ही होगी। मनुष्य का सच्चा विवरण यह है कि वह अपने संरक्षण में रहने वाले लोगों के शारीरिक और मानसिक पोषण को बनाए रखे , के हित में ही अपना 3 सुख माने। अपनी पत्नी , अपने बच्चों को सुखी , हंसी-् मजाक देखकर कौन ऐसा सद्गृहस्थ होगा जिसे खुशी न होती हो। जिस प्रकार " ৯ তীনন ঈ ওানকী पुरुषों  उलझनें आती हैं वही घर में भी संभव होती है। इन प्रश्नों को लेकर अपने मधुर संबंध क्यों खराब करें ? उदारता पूर्वक क्षमा कर देने से दूसरा भी आपका ध्यान आकर्षित करता है। बाबूलाल बाबूलाल .. सदगुरुदेवाय नमः ' '9 गृहस्थाश्रम में सुख तभी मिल सकता है, जब स्त्री - पुरुषों में मित्रो विस्वास बना रहे। रिश्तों में जब आत्मीयता बनी रहती है,तब स्नेह स्थिर रहता है। छोटी-्मोटी गलतियां भी हो जाती हैंतो उन्हें उदारता पूर्वक क्षमा कर देने से संबंधों में कड़वाहट जन्म नहीं लेती। जो इतना भी नहीं कर सकता उसे इंसान कहना सबसे बडी भूल ही होगी। मनुष्य का सच्चा विवरण यह है कि वह अपने संरक्षण में रहने वाले लोगों के शारीरिक और मानसिक पोषण को बनाए रखे , के हित में ही अपना 3 सुख माने। अपनी पत्नी , अपने बच्चों को सुखी , हंसी-् मजाक देखकर कौन ऐसा सद्गृहस्थ होगा जिसे खुशी न होती हो। जिस प्रकार " ৯ তীনন ঈ ওানকী पुरुषों  उलझनें आती हैं वही घर में भी संभव होती है। इन प्रश्नों को लेकर अपने मधुर संबंध क्यों खराब करें ? उदारता पूर्वक क्षमा कर देने से दूसरा भी आपका ध्यान आकर्षित करता है। बाबूलाल बाबूलाल .. - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍 #👉 लोगों के लिए सीख👈
❤️जीवन की सीख - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " आज हमारी बुद्धि भ्रमित है। हममें से अधिकांश लोग जीवन के किसी भी क्षेत्र में कोई उचित निर्णय नहीं ले पाते हैं। जिधर की हवा आती है, उधर ही बह जाते हैं। यह स्थिति छोडनी होगी और बुद्धि के प्रकाश स्तंभ की ज्योति दीप्त करनी होगी। याद रहे यह महान कार्य जादू की तरह अचानक नहीं होता। इसके लिए जीवनभर दृढ़ता मजबूतता के साथ निरालास्य फिर से प्रयास करने की आवश्यकता होती है। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः " आज हमारी बुद्धि भ्रमित है। हममें से अधिकांश लोग जीवन के किसी भी क्षेत्र में कोई उचित निर्णय नहीं ले पाते हैं। जिधर की हवा आती है, उधर ही बह जाते हैं। यह स्थिति छोडनी होगी और बुद्धि के प्रकाश स्तंभ की ज्योति दीप्त करनी होगी। याद रहे यह महान कार्य जादू की तरह अचानक नहीं होता। इसके लिए जीवनभर दृढ़ता मजबूतता के साथ निरालास्य फिर से प्रयास करने की आवश्यकता होती है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख
👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरुदेवाय नमः" "श्री মহিহ্ব স বূনাও अपने कार्य के प्रति बहुत उत्तम गुण है ज़िद्दीपन से अपना ही मत  विचार या जिस गुण की सबसे अधिक आवश्यकता है वह है अपने आदर्शों पर टेक रखना एक भारी Iael किरदार में उपयुक्त लचक को रूपांतर करना। दूसरा न जाने किस प्रवृत्ति का व्यक्तिहै उसकी धारणाएं भी भिन्न हो सकती हैं। यदि आप लचक कर अपने को उसके अनुसार ढालकर बदलकर पूरा करते हैं तो आप एक व्यवहार कुशल व्यक्ति हैं। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः" "श्री মহিহ্ব স বূনাও अपने कार्य के प्रति बहुत उत्तम गुण है ज़िद्दीपन से अपना ही मत  विचार या जिस गुण की सबसे अधिक आवश्यकता है वह है अपने आदर्शों पर टेक रखना एक भारी Iael किरदार में उपयुक्त लचक को रूपांतर करना। दूसरा न जाने किस प्रवृत्ति का व्यक्तिहै उसकी धारणाएं भी भिन्न हो सकती हैं। यदि आप लचक कर अपने को उसके अनुसार ढालकर बदलकर पूरा करते हैं तो आप एक व्यवहार कुशल व्यक्ति हैं। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #👉 लोगों के लिए सीख👈
❤️जीवन की सीख - सदगुरुदेवाय नमः ' "श्री क्या वह तंदुरुस्त आदमी सुखी हो सकता है जिसकी बगल में बीमार आदमी पडा हो। आस-्पास के लोग जब मुसीबतों से घिरे होते हैं तो सुखी का सुख उसके लिए जहर बन जाता है। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः ' "श्री क्या वह तंदुरुस्त आदमी सुखी हो सकता है जिसकी बगल में बीमार आदमी पडा हो। आस-्पास के लोग जब मुसीबतों से घिरे होते हैं तो सुखी का सुख उसके लिए जहर बन जाता है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat