Babulal Babulal
ShareChat
click to see wallet page
@babulal8948
babulal8948
Babulal Babulal
@babulal8948
मुझे ShareChat परफॉलो करें!
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #☝अनमोल ज्ञान #👌 अच्छी सोच👍 #❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन
👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " पहले का दाम्पत्य प्रेम पितृ-्भक्ति मातृ-पूजा मातृ - स्नेह भ्रातृत्व-्भावना सभी एक से बढ़कर एक थीं। लोगों का आहार बहुत ही सरल और सात्विक था। संयम और ब्रह्मचर्य की गरिमा से कांतियुक्त तथा ओजस्वी होते थे। सदाचार प्रेम न्याय और आत्मीयता की भावनाओं प्राणवान के कारण सभी ओर सुख और संतोष की छाया रहती थी। इस पुण्य भूमि पर देवता भी जीवन प्राप्त करने की कामना करते थे। भौतिक और आध्यात्मिक सम्मिश्रण के कारण लौकिक जीवन तो सुख और शांति से परिपूर्ण ही होता था[ साथ ही पारलौकिक सम्मिश्रण भी यहां उपलब्ध होते थे। आज सब कुछ उल्टा हो गया है। हमें भौतिक शास्त्र की रूढ़िवादिता से बाहर निकल कर विवेकशील मानवीय सिद्धांत अपनाना होगा  अपने दृष्टिकोण को परिष्कृत करना होगा। तभी मानवीय प्रगति संभव है। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः " पहले का दाम्पत्य प्रेम पितृ-्भक्ति मातृ-पूजा मातृ - स्नेह भ्रातृत्व-्भावना सभी एक से बढ़कर एक थीं। लोगों का आहार बहुत ही सरल और सात्विक था। संयम और ब्रह्मचर्य की गरिमा से कांतियुक्त तथा ओजस्वी होते थे। सदाचार प्रेम न्याय और आत्मीयता की भावनाओं प्राणवान के कारण सभी ओर सुख और संतोष की छाया रहती थी। इस पुण्य भूमि पर देवता भी जीवन प्राप्त करने की कामना करते थे। भौतिक और आध्यात्मिक सम्मिश्रण के कारण लौकिक जीवन तो सुख और शांति से परिपूर्ण ही होता था[ साथ ही पारलौकिक सम्मिश्रण भी यहां उपलब्ध होते थे। आज सब कुछ उल्टा हो गया है। हमें भौतिक शास्त्र की रूढ़िवादिता से बाहर निकल कर विवेकशील मानवीय सिद्धांत अपनाना होगा  अपने दृष्टिकोण को परिष्कृत करना होगा। तभी मानवीय प्रगति संभव है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈
🌸 सत्य वचन - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन
👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' करुणा को सहानुभूति और सहृदयता का रूप मिलना ही चाहिए। भावना कितनी सार्थक हैजो कार्यान्वित हो सके। दुनियां में पीडा बहुत है अगर हम पीडा का एक हिस्सा बांट सकें और अपनी सहानुभूति से टूटे हुए दिलों को जोड सकें तो यह मानवोचित महानता ही होगी। ईश्वर प्रार्थना केवल पूजा के समय प्रकट होने वाले गुनगुनाए व दोहराये जाने वाले शब्दों को ही नहीं कहते। सच्ची प्रार्थना वह है जो भाईचारा का रूप धारण कर कर्ता-्धर्ता की कामना करता है। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' करुणा को सहानुभूति और सहृदयता का रूप मिलना ही चाहिए। भावना कितनी सार्थक हैजो कार्यान्वित हो सके। दुनियां में पीडा बहुत है अगर हम पीडा का एक हिस्सा बांट सकें और अपनी सहानुभूति से टूटे हुए दिलों को जोड सकें तो यह मानवोचित महानता ही होगी। ईश्वर प्रार्थना केवल पूजा के समय प्रकट होने वाले गुनगुनाए व दोहराये जाने वाले शब्दों को ही नहीं कहते। सच्ची प्रार्थना वह है जो भाईचारा का रूप धारण कर कर्ता-्धर्ता की कामना करता है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #👉 लोगों के लिए सीख👈
🌸 सत्य वचन - सदगुरुदेवाय नमः " "श्री हमें ईश्वर का सच्चा साक्षात्कार तब होना मानना चाहिए जब हम उनके सामने अपनी याचना लेकर नहीं उद्यम लेकर जाते हैं। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः " "श्री हमें ईश्वर का सच्चा साक्षात्कार तब होना मानना चाहिए जब हम उनके सामने अपनी याचना लेकर नहीं उद्यम लेकर जाते हैं। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन
👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरुदेवाय नमः ' "श्री अपने बच्चों को पहला पाठ आज्ञापालन का सिखाना चाहिए और दूसरा इच्छाओं का दमन करना। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः ' "श्री अपने बच्चों को पहला पाठ आज्ञापालन का सिखाना चाहिए और दूसरा इच्छाओं का दमन करना। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान #👌 अच्छी सोच👍 #❤️जीवन की सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈
🌸 सत्य वचन - सदगुरुदेवाय नमः " "श्री ಕಗ್ಮ್! जब मेरी जिंदगी के कगारों की हरियाली सूख जाय-्प्रकाश के बुझने पर गहरी अँधियारी छा जाय -्घनिष्ठ मित्र और स्वजन मुँह मोड़कर चले जाँय - आसमान की सारी नाराजगी r मेरी तकदीर पर ऊपर बरसने लगे तो हे तुम इतना तो अनुग्रह करना ही कि मेरे होंठों पर मुस्कुराहट की उजली रेखाऐं धूमिल न होने पायें:मुख पर खिन्नुता की कलुषता चढती न आये। নানুলাল নানুলল. सदगुरुदेवाय नमः " "श्री ಕಗ್ಮ್! जब मेरी जिंदगी के कगारों की हरियाली सूख जाय-्प्रकाश के बुझने पर गहरी अँधियारी छा जाय -्घनिष्ठ मित्र और स्वजन मुँह मोड़कर चले जाँय - आसमान की सारी नाराजगी r मेरी तकदीर पर ऊपर बरसने लगे तो हे तुम इतना तो अनुग्रह करना ही कि मेरे होंठों पर मुस्कुराहट की उजली रेखाऐं धूमिल न होने पायें:मुख पर खिन्नुता की कलुषता चढती न आये। নানুলাল নানুলল. - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन
👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः गृहस्थ का आधार है जीवित जीवन। स्त्री और पुरुष विवाह - संस्कार के द्वारा गृहस्थ जीवन में प्रवेश करते हैं। तब वे गृहस्थाश्रमी कहलाते हैं। स्मरण रहे विवाह संस्कार का अर्थ दो शरीरों का मिलन नहीं होता बल्कि हमारे यहां विवाह सिद्धांत नहीं वर्ण हृदय की आत्मा की मनकी एकता का संस्कार है।जो विवाह को फिजिकल कामोपभोग का सामाजिक मुद्रा-पत्र मानदंड हैवे भूल जाते हैं। वे अज्ञान में हैं। विवाह का यह प्रस्ताव कदापि नहीं है। भारतीय जीवन पद्धति में इसका उद्देश्य बहुत बड़ा है दिव्य है पवित्र है। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः गृहस्थ का आधार है जीवित जीवन। स्त्री और पुरुष विवाह - संस्कार के द्वारा गृहस्थ जीवन में प्रवेश करते हैं। तब वे गृहस्थाश्रमी कहलाते हैं। स्मरण रहे विवाह संस्कार का अर्थ दो शरीरों का मिलन नहीं होता बल्कि हमारे यहां विवाह सिद्धांत नहीं वर्ण हृदय की आत्मा की मनकी एकता का संस्कार है।जो विवाह को फिजिकल कामोपभोग का सामाजिक मुद्रा-पत्र मानदंड हैवे भूल जाते हैं। वे अज्ञान में हैं। विवाह का यह प्रस्ताव कदापि नहीं है। भारतीय जीवन पद्धति में इसका उद्देश्य बहुत बड़ा है दिव्य है पवित्र है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #👉 लोगों के लिए सीख👈
🌸 सत्य वचन - सदगुरुदेवाय नमः' "श्री जहां चाहत है वहां शांति नहीं। जहां शांति है वहां इरादा नहीं। ননুললে নলুেলল. सदगुरुदेवाय नमः' "श्री जहां चाहत है वहां शांति नहीं। जहां शांति है वहां इरादा नहीं। ননুললে নলুেলল. - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन
👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः  निरीक्षण द्वारा हमें देखना है कि हमारे मनवचन काया की प्रवृत्ति में कहाँ-्कहाँ अन्तः क्या उद्देश्य है१ हममें कौन-कौन से बुरे विचार पैदा हुए? वचन का आदर्श कहाँ-्कहाँ गया। शारीरिक क्रिया से हिंसा कौन से असद कार्य से हुई ? सूक्ष्म प्रज्ञा से हमें अपने दुर्गुणों को व दोषों को उजागर करना है और यथाशक्ति उनका त्याग करते जाना है। बड़बोलेपन का त्याग करके और स्वार्थ को छोड़कर जीवन का सदुपयोग करना है। स्वार्थ को परमार्थ व सेवा में छोड देना चाहिए। নানুলল নানুলল. "श्री सदगुरुदेवाय नमः  निरीक्षण द्वारा हमें देखना है कि हमारे मनवचन काया की प्रवृत्ति में कहाँ-्कहाँ अन्तः क्या उद्देश्य है१ हममें कौन-कौन से बुरे विचार पैदा हुए? वचन का आदर्श कहाँ-्कहाँ गया। शारीरिक क्रिया से हिंसा कौन से असद कार्य से हुई ? सूक्ष्म प्रज्ञा से हमें अपने दुर्गुणों को व दोषों को उजागर करना है और यथाशक्ति उनका त्याग करते जाना है। बड़बोलेपन का त्याग करके और स्वार्थ को छोड़कर जीवन का सदुपयोग करना है। स्वार्थ को परमार्थ व सेवा में छोड देना चाहिए। নানুলল নানুলল. - ShareChat
#🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #👉 लोगों के लिए सीख👈
🌸 सत्य वचन - ShareChat