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#☝अनमोल ज्ञान #👌 अच्छी सोच👍 #❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन #📖जीवन का लक्ष्य🤔
☝अनमोल ज्ञान - ShareChat
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☝अनमोल ज्ञान - सदगुरुदेवाय नमः " "9f हमें अपने प्रवेश में सात्विक प्रेम की भावनाएं जागृत करनी चाहिए अपना अनुभव देना चाहिए, उन्हें आत्मीयता की दृष्टि से दूसरों को ' देखना चाहिए, हमको भी सतीत्व प्रेम के रसास्वा से आलोचना नहीं करनी चाहिए। दुनियां के खेत में अपना प्रेम बीज बिखेरते फिरें तो कोई-्न-्कोई उसका पौधा जरूर उगेगा। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः " "9f हमें अपने प्रवेश में सात्विक प्रेम की भावनाएं जागृत करनी चाहिए अपना अनुभव देना चाहिए, उन्हें आत्मीयता की दृष्टि से दूसरों को ' देखना चाहिए, हमको भी सतीत्व प्रेम के रसास्वा से आलोचना नहीं करनी चाहिए। दुनियां के खेत में अपना प्रेम बीज बिखेरते फिरें तो कोई-्न-्कोई उसका पौधा जरूर उगेगा। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
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👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः  समाज कल्याण की बड़ी-बड़ी बातें होती हैं किंतु अपने जीवन के बारे में कभी कुछ सोचा है हमने ग़्जिन बातों को भाषण उपदेश  लेखों में हम व्यक्तकरते हैं क्या उन्हें कभी अपने अंतर में देखा है? क्या उन आदर्शों को हम अपने परिवार पडौसी   राष्ट्रीय जीवन में व्यवहृत करते हैंश्यदि ऐसा होने लग जाय तो हमारे व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में महान सुधार और व्यापक क्रांति सहज ही हो जाय। हमारे जीवन के आदर्श ही बदल जाय। घर  समाज पडौस राष्ट्र का जीवन स्वर्गीय बन जाय। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः  समाज कल्याण की बड़ी-बड़ी बातें होती हैं किंतु अपने जीवन के बारे में कभी कुछ सोचा है हमने ग़्जिन बातों को भाषण उपदेश  लेखों में हम व्यक्तकरते हैं क्या उन्हें कभी अपने अंतर में देखा है? क्या उन आदर्शों को हम अपने परिवार पडौसी   राष्ट्रीय जीवन में व्यवहृत करते हैंश्यदि ऐसा होने लग जाय तो हमारे व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में महान सुधार और व्यापक क्रांति सहज ही हो जाय। हमारे जीवन के आदर्श ही बदल जाय। घर  समाज पडौस राष्ट्र का जीवन स्वर्गीय बन जाय। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
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☝अनमोल ज्ञान - "श्री सदगुरूदेवाय नमः अनादि काल से मनुष्य सुख़-्शांति की कामना करता है प्राप्त करने प्रयास एवं उपाय करता रहता है। वह धन-्दौलत कमाता है सुखन्शांति के लिए। मकान महल सुख़न्शांतिके लिए। स्त्री प्रेमिका सुख़-्शांतिके लिए। दान-्पुण्य तपऱ्योग जो कुछ करता है सुख़न्शांति के लिए। जंगली युग से लेकर आज के उन्नत एवं वैज्ञानिक युग तक मनुष्य लगातार सुखन्शांति के साधनों को उन्नत करता आया है। सुखन्शांति की खोज में आकाश- पाताल भी आज तक उसे सुखन्शांति प्राप्त हो पाई है? पूर्व काल की विशेषता आज का मृनुष्य कहीं अघिक एककरदिए,पर क्या उन्नत और समृद्धॅहै पर सुख-्शांति को तब भी न पा सका। बल्कि सत्य तो यहॅहै कि वह पूर्व काल की रिक्त्ता आज कहीं अधिक व्यस्त एवं सीमांत दुःख एवं अशांति के अंधकार में भटक गई है। सुख़-्शांति की खोज करता-् करता मनुष्य दुख एवं अशांति का ग्रास क्यों बन रहा है,यह सोचने की बातॅहै। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरूदेवाय नमः अनादि काल से मनुष्य सुख़-्शांति की कामना करता है प्राप्त करने प्रयास एवं उपाय करता रहता है। वह धन-्दौलत कमाता है सुखन्शांति के लिए। मकान महल सुख़न्शांतिके लिए। स्त्री प्रेमिका सुख़-्शांतिके लिए। दान-्पुण्य तपऱ्योग जो कुछ करता है सुख़न्शांति के लिए। जंगली युग से लेकर आज के उन्नत एवं वैज्ञानिक युग तक मनुष्य लगातार सुखन्शांति के साधनों को उन्नत करता आया है। सुखन्शांति की खोज में आकाश- पाताल भी आज तक उसे सुखन्शांति प्राप्त हो पाई है? पूर्व काल की विशेषता आज का मृनुष्य कहीं अघिक एककरदिए,पर क्या उन्नत और समृद्धॅहै पर सुख-्शांति को तब भी न पा सका। बल्कि सत्य तो यहॅहै कि वह पूर्व काल की रिक्त्ता आज कहीं अधिक व्यस्त एवं सीमांत दुःख एवं अशांति के अंधकार में भटक गई है। सुख़-्शांति की खोज करता-् करता मनुष्य दुख एवं अशांति का ग्रास क्यों बन रहा है,यह सोचने की बातॅहै। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
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👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरुदेवाय नमः" "श्री परिवार किस उद्देश्य के लिए बसाया जाता है? परिवार बसाने का मूल उद्देश्य होता है एक दूसरे की दुख ्तकलीफ में हाथ बटाना एवं साथ ही उल्लासपूर्ण जीवन यापन करना। इस साधारण मंतव्य के साथ- साथ एक ऊंचा स्थान और होता है वह यह है कि-परिवार के माध्यम से मृनुष्य आत्म- कल्याण की ओर उद्योग करना । मृनुष्य दूसरे के समझकर उसके साथ सहानुभूति रख सके, उसकी सेवा -सुश्रूषा और सहायता करने को तैयार ತ-ತ್ रहे यही आत्म -्उन्नति के लक्षण हैं। पारिवारिक जीवन में आध्यात्मिक  विकास का पूरा-् पूरा गुणों के अवसर रहता है। परिवार बसाने में आध्यात्मिक दृष्टिकोण  लौकिक समृद्धि और आत्मोद्धार मित्रता का एक साथ संवाहक है। इसी दृष्टिकोण को विकसित करना पारिवारिक जीवन के हित में है। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः" "श्री परिवार किस उद्देश्य के लिए बसाया जाता है? परिवार बसाने का मूल उद्देश्य होता है एक दूसरे की दुख ्तकलीफ में हाथ बटाना एवं साथ ही उल्लासपूर्ण जीवन यापन करना। इस साधारण मंतव्य के साथ- साथ एक ऊंचा स्थान और होता है वह यह है कि-परिवार के माध्यम से मृनुष्य आत्म- कल्याण की ओर उद्योग करना । मृनुष्य दूसरे के समझकर उसके साथ सहानुभूति रख सके, उसकी सेवा -सुश्रूषा और सहायता करने को तैयार ತ-ತ್ रहे यही आत्म -्उन्नति के लक्षण हैं। पारिवारिक जीवन में आध्यात्मिक  विकास का पूरा-् पूरा गुणों के अवसर रहता है। परिवार बसाने में आध्यात्मिक दृष्टिकोण  लौकिक समृद्धि और आत्मोद्धार मित्रता का एक साथ संवाहक है। इसी दृष्टिकोण को विकसित करना पारिवारिक जीवन के हित में है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #👉 लोगों के लिए सीख👈
☝अनमोल ज्ञान - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " अगर हम एक दूसरे से आदर्श का अनुभव करने लगें तो कोई किसी को कर्मणा दुख दे ही नहीं सकता। उनका दुख हमारा दुख और हमारा सुख मनसा वाचा हरेक व्यक्ति यदि आत्मीयता और अपनेपन का भाव खखे तो विश्व की सुख है। Jஎe सारी अशांति विलोप हो जाए और सुख-्शांति का सागर उमड पडे। निश्चित है प्रत्येक मनुष्य का जन्म होता है तो मरता भी अवश्य है। तो अस्थायी से क्षणिक जीवन के लिए अपने ही आत्मस्वरुप को कष्ट क्यों पहुंचाया जाए?खुद शांति से जियो और दूसरों को भी शांति से जीने दो यही हमारा सनातन धर्म है। নানুলল নানুলল. "श्री सदगुरुदेवाय नमः " अगर हम एक दूसरे से आदर्श का अनुभव करने लगें तो कोई किसी को कर्मणा दुख दे ही नहीं सकता। उनका दुख हमारा दुख और हमारा सुख मनसा वाचा हरेक व्यक्ति यदि आत्मीयता और अपनेपन का भाव खखे तो विश्व की सुख है। Jஎe सारी अशांति विलोप हो जाए और सुख-्शांति का सागर उमड पडे। निश्चित है प्रत्येक मनुष्य का जन्म होता है तो मरता भी अवश्य है। तो अस्थायी से क्षणिक जीवन के लिए अपने ही आत्मस्वरुप को कष्ट क्यों पहुंचाया जाए?खुद शांति से जियो और दूसरों को भी शांति से जीने दो यही हमारा सनातन धर्म है। নানুলল নানুলল. - ShareChat
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👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरुदेवाय नमः ' 9 स्वयं अपने विषय में आपके अपने विचार क्या हैं? क्या आप अपने आप में किसी भी तरह के तत्व रखते हैं? क्या आप अपने को नीच , धोखेबाज . दुष्ट या राक्षसी स्वभाव के प्रतीक मानते हैं?्या फिर अपने आप में सभ्य , सौम्य , विद्वान और आस्थावान व्यक्तित्व के समान हैं। शांत हृदय से कभी -कभी आत्म -्निरीक्षण करें और अपने अच्छे विचारों तथा ईश्वर प्रदत्त श्रेष्ठजनों को स्थापित करें। संसार और समाज आपके किस कार्य की विशेष प्रशंसा करता है? आत्म -्निरीक्षण द्वारा यह अमर तत्व आप अंतिम रूप से ले सकते हैं या किसी भी प्रकार की सलाह ले सकते हैं | प्रकार आत्म -्निरीक्षण करके 5&& आप अपने जीवन को ऊंचा उठा सकते हैं। নানুলাল নানুলাল . सदगुरुदेवाय नमः ' 9 स्वयं अपने विषय में आपके अपने विचार क्या हैं? क्या आप अपने आप में किसी भी तरह के तत्व रखते हैं? क्या आप अपने को नीच , धोखेबाज . दुष्ट या राक्षसी स्वभाव के प्रतीक मानते हैं?्या फिर अपने आप में सभ्य , सौम्य , विद्वान और आस्थावान व्यक्तित्व के समान हैं। शांत हृदय से कभी -कभी आत्म -्निरीक्षण करें और अपने अच्छे विचारों तथा ईश्वर प्रदत्त श्रेष्ठजनों को स्थापित करें। संसार और समाज आपके किस कार्य की विशेष प्रशंसा करता है? आत्म -्निरीक्षण द्वारा यह अमर तत्व आप अंतिम रूप से ले सकते हैं या किसी भी प्रकार की सलाह ले सकते हैं | प्रकार आत्म -्निरीक्षण करके 5&& आप अपने जीवन को ऊंचा उठा सकते हैं। নানুলাল নানুলাল . - ShareChat
#☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #👉 लोगों के लिए सीख👈
☝अनमोल ज्ञान - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " m संदेह नहीं कि संसार में सबसे बडी शक्ति धर्म की ही है।जो लोग धन या बल को सबसे बडा मानते हैंवे नीच श्रेणी के हैं और मनुष्यत्व की परिभाषा के अनुसार उनमें पाश्विकता का अंश ही अधिक है। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः " m संदेह नहीं कि संसार में सबसे बडी शक्ति धर्म की ही है।जो लोग धन या बल को सबसे बडा मानते हैंवे नीच श्रेणी के हैं और मनुष्यत्व की परिभाषा के अनुसार उनमें पाश्विकता का अंश ही अधिक है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान
👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' आज घर-्घर में तृष्णा द्वेष काक्रोध कलह का संदेह अविश्वास का माहौल दिखाई पड़ता है । कोई अपना मित्र नहीं दिखता चारों तरफ शत्रु ही शत्रु  दुष्ट ही दुष्टों का घेरा नजर आता है। ऐसे वातावरण को ही नरक कहते हैं। आज सर्वत्र नरक के दर्शन देखे जा सकते हैं। जिस घर में देखो जिस गांव या समाज में देखो दुर्भाव का ही बोलबाला है। राजनीति और अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में भी यही विभीषिका का नंगा नृत्य हो रहा है। मनुष्य जीवन में यदि मधुर कोई वस्तु है तो वह है - स्नेह, सद्भाव आत्मीयता। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' आज घर-्घर में तृष्णा द्वेष काक्रोध कलह का संदेह अविश्वास का माहौल दिखाई पड़ता है । कोई अपना मित्र नहीं दिखता चारों तरफ शत्रु ही शत्रु  दुष्ट ही दुष्टों का घेरा नजर आता है। ऐसे वातावरण को ही नरक कहते हैं। आज सर्वत्र नरक के दर्शन देखे जा सकते हैं। जिस घर में देखो जिस गांव या समाज में देखो दुर्भाव का ही बोलबाला है। राजनीति और अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में भी यही विभीषिका का नंगा नृत्य हो रहा है। मनुष्य जीवन में यदि मधुर कोई वस्तु है तो वह है - स्नेह, सद्भाव आत्मीयता। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat