Babulal Babulal
ShareChat
click to see wallet page
@babulal8948
babulal8948
Babulal Babulal
@babulal8948
मुझे ShareChat परफॉलो करें!
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन
👉 लोगों के लिए सीख👈 - श्री सदगुरुदेवाय नमः वासना और धन का लोभी मनुष्य न्याय मार्ग से जब अपनी लोलुपता को पूरा नहीं कर पाता है तो अनेक अनैतिक , छल पूर्ण मार्ग अपनाकर अपना स्वार्थ सिद्ध करता है । शास्त्र का आदेश है कि हम सदैव अपने धर्म कर्तव्य और उत्तरदायित्व निबाहें । सज्जाई के मार्ग पर चलने से यदि कुछ असुविधाएं सहनी पडें तो उन्हें प्रसन्नतापूर्वक सहना चाहिए । इस प्रकार सत्य के मार्ग पर चलने में असुविधाओं का स्वागत करने को तैयार रहते हैं , वे ही भगवान के सज्जे प्रेमपात्र बन सकते हैं । बाबूलाल बाबूलाल ... - ShareChat
#🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #👉 लोगों के लिए सीख👈
🌸 सत्य वचन - "श्री सदगुरुदेवाय नमः आजकल मनुष्य बडा कायर हो गया है। उसकी दुष्टता अब मैदानी लडाई में दृष्टीगोचर नहीं होती। प्राचीनकाल में लोग जिससे द्वेष करते थे जिंसका अहित करना चाहते थे,उसे पूर्व चेतावनी देकर मैदान में लडते निपटते थे,पर आज तो वीरता का दर्शन-दुर्लभ हो रहा है। विश्वास दिलाकर मित्र बनकर बहला - फुसलाकर किसी को अपने चंगुल में फसा लेना और अपना स्वार्थ सिद्ध कर लेने के लिए उसके प्राणों तक का ग्राहक बन जाना आज का एक व्यापक रिवाज हो गयाहै। जिधर दृष्टि उठाकर देखिए उधर ही छल कपट धोखा विश्वासघात का पतन का निकृष्टतम चिन्ह हैं। इससे ऊपर बोलबाला दिखता है। यह आत्मिक कायरता  मनुष्य के उठे बिना कोई व्यक्ति ' सच्चा मनुष्य' नहीं कहला सकता। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः आजकल मनुष्य बडा कायर हो गया है। उसकी दुष्टता अब मैदानी लडाई में दृष्टीगोचर नहीं होती। प्राचीनकाल में लोग जिससे द्वेष करते थे जिंसका अहित करना चाहते थे,उसे पूर्व चेतावनी देकर मैदान में लडते निपटते थे,पर आज तो वीरता का दर्शन-दुर्लभ हो रहा है। विश्वास दिलाकर मित्र बनकर बहला - फुसलाकर किसी को अपने चंगुल में फसा लेना और अपना स्वार्थ सिद्ध कर लेने के लिए उसके प्राणों तक का ग्राहक बन जाना आज का एक व्यापक रिवाज हो गयाहै। जिधर दृष्टि उठाकर देखिए उधर ही छल कपट धोखा विश्वासघात का पतन का निकृष्टतम चिन्ह हैं। इससे ऊपर बोलबाला दिखता है। यह आत्मिक कायरता  मनुष्य के उठे बिना कोई व्यक्ति ' सच्चा मनुष्य' नहीं कहला सकता। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन
👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " असहिष्णुता यह दो बहुत बडे पातक हैं। कपट और धोखा विश्वासघात छल ढोंग पाखंड यह मनुष्यता को कलंकित करने वाली सबसे निकृष्ट कोटि की कातरता एवं कमजोरी है। जिसको हम् बुरा समझते हैं उससे लडाई रखें तो इतना हर्ज नहीं, परन्तु मित्र बनकर मिले रहकर मीठी ्मीठी बातों से धोखे में रखकर उसका अनर्थ कर डालने में जो पाप है वह निकृष्ट कोटि का है। अनेक व्यक्ति ऊपर से मिले रहते हैं हितैषी बनते हैं और भीतर से शत्रु का काम करते हैं। और विश्वास देते हैं कि हम तुम्हारे प्रति इस प्रकार का व्यवहार करेंगे परन्तु पीछे अपने वचन को भंग करके विपरीत कार्य करते हैं। इसलिए में कहता हूं कि किसी को लट्ठ मार देना पर किसी के साथ विश्वासघात मत करना। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः " असहिष्णुता यह दो बहुत बडे पातक हैं। कपट और धोखा विश्वासघात छल ढोंग पाखंड यह मनुष्यता को कलंकित करने वाली सबसे निकृष्ट कोटि की कातरता एवं कमजोरी है। जिसको हम् बुरा समझते हैं उससे लडाई रखें तो इतना हर्ज नहीं, परन्तु मित्र बनकर मिले रहकर मीठी ्मीठी बातों से धोखे में रखकर उसका अनर्थ कर डालने में जो पाप है वह निकृष्ट कोटि का है। अनेक व्यक्ति ऊपर से मिले रहते हैं हितैषी बनते हैं और भीतर से शत्रु का काम करते हैं। और विश्वास देते हैं कि हम तुम्हारे प्रति इस प्रकार का व्यवहार करेंगे परन्तु पीछे अपने वचन को भंग करके विपरीत कार्य करते हैं। इसलिए में कहता हूं कि किसी को लट्ठ मार देना पर किसी के साथ विश्वासघात मत करना। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #👉 लोगों के लिए सीख👈
🌸 सत्य वचन - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " प्रत्येक मनुष्य का दृष्टिकोण विचार अनुभव अभ्यास ज्ञान स्वार्थ रुचि एवं संस्कार अलग-्अलग होते हैं। इसलिए सबका सोचना एक प्रकार से नहीं हो सकता। इस तथ्य को समझते हुए हर व्यक्ति को दूसरों के प्रति सहिष्णु एवं उदार होना चाहिए। अपने से किसी भी अंश में मतभेद रखने वाले को मूर्ख अज्ञानी दुराग्रही दुष्ट या अपराधी मान लेना उचित नहीं है। ऐसी असहिष्णुता ही बहुधा झगडों की जड होती है। एक- दूसरे के दृष्टिकोण के अंतर को समझते हुए यथासंभव समझौते का मार्ग निकालना चाहिए। फिर जो मतभेद रह जांय उन्हें पीछे धीरे धीरे सुलझाते रहने के लिए छोड़ देना चाहिए। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः " प्रत्येक मनुष्य का दृष्टिकोण विचार अनुभव अभ्यास ज्ञान स्वार्थ रुचि एवं संस्कार अलग-्अलग होते हैं। इसलिए सबका सोचना एक प्रकार से नहीं हो सकता। इस तथ्य को समझते हुए हर व्यक्ति को दूसरों के प्रति सहिष्णु एवं उदार होना चाहिए। अपने से किसी भी अंश में मतभेद रखने वाले को मूर्ख अज्ञानी दुराग्रही दुष्ट या अपराधी मान लेना उचित नहीं है। ऐसी असहिष्णुता ही बहुधा झगडों की जड होती है। एक- दूसरे के दृष्टिकोण के अंतर को समझते हुए यथासंभव समझौते का मार्ग निकालना चाहिए। फिर जो मतभेद रह जांय उन्हें पीछे धीरे धीरे सुलझाते रहने के लिए छोड़ देना चाहिए। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन
👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः जब मनुष्य एक बार गलत रास्ते पर चला जाता हैतो उसके पास इतना ज्ञान और विवेक नहीं अंधकार में खोये हुए पथिक की भांति वह गलत मार्ग पर होता कि वह सही रास्ते पर चले। सीधे दूर { चलता जाता है। अगर कोई रोककर उसे  चित्रित न करे.तो वह अज्ञानता में वहीं ही भटकता रहेगा। कभी-् कभी लोग बुझते नीतिकार मार्ग का अवलंबन कर लेते हैं। इसका कारण यह है कि एक बार गलत मार्ग चुनने के बाद सही मार्ग पर आने से उनके गौरव और अहंकार को ठेस पहुंचती है। वे गलत मार्ग पर चलकर भी वही मिथ्या गौरव की रक्षा में सुरक्षित रहते हैं। गलत संतुलन कर लेने पर उसे शीघ्र से शीघ्र सुधार लेना ही बुद्धिमत्ता है। अन्यथा वह अधिकाधिक अभिव्यंजना को प्राप्त करना चाहता है। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः जब मनुष्य एक बार गलत रास्ते पर चला जाता हैतो उसके पास इतना ज्ञान और विवेक नहीं अंधकार में खोये हुए पथिक की भांति वह गलत मार्ग पर होता कि वह सही रास्ते पर चले। सीधे दूर { चलता जाता है। अगर कोई रोककर उसे  चित्रित न करे.तो वह अज्ञानता में वहीं ही भटकता रहेगा। कभी-् कभी लोग बुझते नीतिकार मार्ग का अवलंबन कर लेते हैं। इसका कारण यह है कि एक बार गलत मार्ग चुनने के बाद सही मार्ग पर आने से उनके गौरव और अहंकार को ठेस पहुंचती है। वे गलत मार्ग पर चलकर भी वही मिथ्या गौरव की रक्षा में सुरक्षित रहते हैं। गलत संतुलन कर लेने पर उसे शीघ्र से शीघ्र सुधार लेना ही बुद्धिमत्ता है। अन्यथा वह अधिकाधिक अभिव्यंजना को प्राप्त करना चाहता है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान #👌 अच्छी सोच👍 #👉 लोगों के लिए सीख👈
🌸 सत्य वचन - सदगुरुदेवाय नमः " "श्री हमें अपने अंतः प्रदेश में सात्विक प्रेम की भावनाएं जागृत करनी चाहिए और लोगों को अनुभव देना चाहिए, उन्हें आत्मीयता की दृष्टि से देखना चाहिए हमें भी सतीत्व प्रेम के रसास्वादन से आलोचना नहीं करनी चाहिए। अगर दुनियां रूपी खेत में हम अपना प्रेम रूपी बीज बिखेखते फिरें तो कोई-्नन्कोई पौधा उसका जरूर उगेगा और उसकी सुगंध से हमको व आपको आनंद की तृप्ति जरूरउपलब्ध होगी यह मेरा विश्वास है। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः " "श्री हमें अपने अंतः प्रदेश में सात्विक प्रेम की भावनाएं जागृत करनी चाहिए और लोगों को अनुभव देना चाहिए, उन्हें आत्मीयता की दृष्टि से देखना चाहिए हमें भी सतीत्व प्रेम के रसास्वादन से आलोचना नहीं करनी चाहिए। अगर दुनियां रूपी खेत में हम अपना प्रेम रूपी बीज बिखेखते फिरें तो कोई-्नन्कोई पौधा उसका जरूर उगेगा और उसकी सुगंध से हमको व आपको आनंद की तृप्ति जरूरउपलब्ध होगी यह मेरा विश्वास है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #👌 अच्छी सोच👍 #❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन
👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरुदेवाय नमः "gt बहुत गंवाकर भी अंत में यदि कोई मनुष्य सम्भल जाता हैतो वह भी बुद्धिमान ही माना जाएगा। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः "gt बहुत गंवाकर भी अंत में यदि कोई मनुष्य सम्भल जाता हैतो वह भी बुद्धिमान ही माना जाएगा। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान #👌 अच्छी सोच👍 #❤️जीवन की सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈
🌸 सत्य वचन - "श्री सदगुरुदेवाय नमः हर इंसान सोचता है कि हमारे मरने के बाद हमारे कुटुंब का क्या होगा ?इसी चिंता सेभावी दुख की आपदा में अपना आधा सुख नष्ट कर देते हैं। ऐसे लोगों को होता है अभिमान कि इस कुटुंब का भरण- पोषण करने वाले हम ही हैं। वे ईश्वर को भूल जाते हैं। यह ज्ञान नहीं रहता कि हम जिसे अपना कहते हैं वह अपना नहीं भगवान का है। यदि आपका आपसे कोई कहे कि कुटुंब का पालन-्पोषण करने वाला ईश्वर है,तो इस पर आपको विश्वास नहीं होगा। वे भूल जाते हैं कि ईश्वर ने हमको जिस देश जाति या कुटुंब में हमको जन्म दिया है उसकी निष्काम प्रवृत्ति से सेवा करना हमारा कर्तव्य है। उनके इस विचार और विश्वास से पता चलता है कि उनके पीछे जाति या कुटुंब का काम करने वाला कोई नहीं है। ऐसे लोगों की मौत के बारे में ೩t जानें तो उन्हें पता चल जाएगा कि उनकी चिंता करना सर्वथा व्यर्थथा। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः हर इंसान सोचता है कि हमारे मरने के बाद हमारे कुटुंब का क्या होगा ?इसी चिंता सेभावी दुख की आपदा में अपना आधा सुख नष्ट कर देते हैं। ऐसे लोगों को होता है अभिमान कि इस कुटुंब का भरण- पोषण करने वाले हम ही हैं। वे ईश्वर को भूल जाते हैं। यह ज्ञान नहीं रहता कि हम जिसे अपना कहते हैं वह अपना नहीं भगवान का है। यदि आपका आपसे कोई कहे कि कुटुंब का पालन-्पोषण करने वाला ईश्वर है,तो इस पर आपको विश्वास नहीं होगा। वे भूल जाते हैं कि ईश्वर ने हमको जिस देश जाति या कुटुंब में हमको जन्म दिया है उसकी निष्काम प्रवृत्ति से सेवा करना हमारा कर्तव्य है। उनके इस विचार और विश्वास से पता चलता है कि उनके पीछे जाति या कुटुंब का काम करने वाला कोई नहीं है। ऐसे लोगों की मौत के बारे में ೩t जानें तो उन्हें पता चल जाएगा कि उनकी चिंता करना सर्वथा व्यर्थथा। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन
👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरुदेवाय नमः  "श्री जब तक मनुष्य के हृदय में राम का डंका नहीं बजता तब उसकी न पूजा ही रस देती है,और न ज्ञान न वेद की নেক संहिता का अर्थ आएगा न उपनिशद का। নানুললে ননুলল. सदगुरुदेवाय नमः  "श्री जब तक मनुष्य के हृदय में राम का डंका नहीं बजता तब उसकी न पूजा ही रस देती है,और न ज्ञान न वेद की নেক संहिता का अर्थ आएगा न उपनिशद का। নানুললে ননুলল. - ShareChat
#🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍 #❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान #👉 लोगों के लिए सीख👈
🌸 सत्य वचन - सदगुरुदेवाय नमः  "श्री विकृतियां तो अपने ही दृष्टिकोण की होती हैं जो रुग्णता उद्विग्नता दरिद्रिता और गृह-्कलह के रूप में प्रकट होती है। जीवन की जड में यदि सुसंस्कृत चिंतन के जल से प्रवाहित हो रहा है तो सभी उसके पत्र-्पल्लव हरे-भरे बने रहेंगे और उसका सर्वागिन सुखन्शांति सुरम्य सु क्रमिक रूप से देखा जा सकेगा। : इसी ` ক্লা-কুল को मानव जीवन की सार्थकता कहा जाता है।इसकी उपलब्धि आपके हाथ में है। आत्म-चिंतन आत्म - सुधार आत्म -् निर्माण और आत्म-विकास को अपनी नीति- निर्धारण में परिणित कर लिया जाए तो हमारा जीवन प्रवाह उस दिशा में सहज ही प्राप्त हो जाएगा जिसमें अक्षय सुखन्शांति के आनंद उल्लास के अनुदान पगन्पग पर बने रहेंगे। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः  "श्री विकृतियां तो अपने ही दृष्टिकोण की होती हैं जो रुग्णता उद्विग्नता दरिद्रिता और गृह-्कलह के रूप में प्रकट होती है। जीवन की जड में यदि सुसंस्कृत चिंतन के जल से प्रवाहित हो रहा है तो सभी उसके पत्र-्पल्लव हरे-भरे बने रहेंगे और उसका सर्वागिन सुखन्शांति सुरम्य सु क्रमिक रूप से देखा जा सकेगा। : इसी ` ক্লা-কুল को मानव जीवन की सार्थकता कहा जाता है।इसकी उपलब्धि आपके हाथ में है। आत्म-चिंतन आत्म - सुधार आत्म -् निर्माण और आत्म-विकास को अपनी नीति- निर्धारण में परिणित कर लिया जाए तो हमारा जीवन प्रवाह उस दिशा में सहज ही प्राप्त हो जाएगा जिसमें अक्षय सुखन्शांति के आनंद उल्लास के अनुदान पगन्पग पर बने रहेंगे। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat