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#👉 लोगों के लिए सीख👈 #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान
👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरुदेवाय नमः  "91 बाप की महनत और घर की मुसीबतों को देखने वाला कभी गलत रास्ते पर नहीं जा पाता है। নানুললে নানুলল. सदगुरुदेवाय नमः  "91 बाप की महनत और घर की मुसीबतों को देखने वाला कभी गलत रास्ते पर नहीं जा पाता है। নানুললে নানুলল. - ShareChat
#☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #👉 लोगों के लिए सीख👈
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#👉 लोगों के लिए सीख👈 #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान
👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' विवाह के पूर्व भी हर युवक - सामने एक परिवार विद्यमान रहता है। लडकी के लिए -युवती के उसमें माता -पिता भाई, बहिन भी सेवा-्श्रम करते रहने के लिए उपलब्ध रहते हैं। लडकों के भी अभिभावक भाई-भतीजे चाचा -्ताऊ एवं उनकी पत्नियां वृद्धाएं आदि कितने ही सदस्य रहते हैं-्उस कुटुंब का अनेक स्तर का अनेक प्रकार का सहयोग- अनुदान ऋण के रूप में अपने ऊपर चढा होता है, उससे उऋण होने को भी प्राथमिकता दी जाए तो उसे कृतज्ञता की कर्तव्य पालन की अभिव्यक्तिही कहा जाएगा। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' विवाह के पूर्व भी हर युवक - सामने एक परिवार विद्यमान रहता है। लडकी के लिए -युवती के उसमें माता -पिता भाई, बहिन भी सेवा-्श्रम करते रहने के लिए उपलब्ध रहते हैं। लडकों के भी अभिभावक भाई-भतीजे चाचा -्ताऊ एवं उनकी पत्नियां वृद्धाएं आदि कितने ही सदस्य रहते हैं-्उस कुटुंब का अनेक स्तर का अनेक प्रकार का सहयोग- अनुदान ऋण के रूप में अपने ऊपर चढा होता है, उससे उऋण होने को भी प्राथमिकता दी जाए तो उसे कृतज्ञता की कर्तव्य पालन की अभिव्यक्तिही कहा जाएगा। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #👉 लोगों के लिए सीख👈
☝अनमोल ज्ञान - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " अपने मतलब से मतलब रखने वाले समझते भर इतना है कि हम चतुरता कर रहे हैं। स्वयं किसी के काम नहीं आते पर अपना उल्लू सीधा करते हैं। वे यह भूल जाते हैं कि यहां सब-्कुछ आदान- प्रदान के आधार पर ही चल रहा और बढ रहा है। नियति का अतिक्रमण करके किसी का भी सुख चैन से रह सकना संभव नहीं। अकेलेपन की प्रवृत्ति सरसता और प्रसन्नता के समस्त स्त्रोत सुखा देती है। हर दृष्टि से हर क्षेत्र में संकीर्णता हानिकारक ही सिद्ध होती है। इसलिए मिल -्जुलकर रहना सिखाने वाली पारिवारिकता को ही श्रेय सौभाग्य और समझदारी के साथ जोड़ा गया है। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः " अपने मतलब से मतलब रखने वाले समझते भर इतना है कि हम चतुरता कर रहे हैं। स्वयं किसी के काम नहीं आते पर अपना उल्लू सीधा करते हैं। वे यह भूल जाते हैं कि यहां सब-्कुछ आदान- प्रदान के आधार पर ही चल रहा और बढ रहा है। नियति का अतिक्रमण करके किसी का भी सुख चैन से रह सकना संभव नहीं। अकेलेपन की प्रवृत्ति सरसता और प्रसन्नता के समस्त स्त्रोत सुखा देती है। हर दृष्टि से हर क्षेत्र में संकीर्णता हानिकारक ही सिद्ध होती है। इसलिए मिल -्जुलकर रहना सिखाने वाली पारिवारिकता को ही श्रेय सौभाग्य और समझदारी के साथ जोड़ा गया है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान
👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' घर में रहने से किसी को घुटन नहीं होती  बल्कि उस छोटे से परिवार में अधिक ्से ्अधिक समय बने रहने की सबकी इच्छा होती है।घर का वातावरण नीरस एवं घिसा - पिटा बना रहने से ही उसमें लम्बे समय तक रहना भारी पड़ता है। बाहर भागने की इच्छा इसी कारण होती है। झीलों पार्कों  सिनेमाघरों की तरफ एवं दोस्तों और सहेलियों के साथ मिल-्बैठने के लिए दिल इसी कारण करता है। यदि प्रयत्न किया जाएतो घर का वातावरण ही इतना मनोरंजक उत्साहवर्धक आकर्षक एवं प्रेरणाप्रद बन सकता है कि उसे छोड़कर कहीं मन हल्का करने के लिए जाने की किसी को भी इच्छा न होगी। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' घर में रहने से किसी को घुटन नहीं होती  बल्कि उस छोटे से परिवार में अधिक ्से ्अधिक समय बने रहने की सबकी इच्छा होती है।घर का वातावरण नीरस एवं घिसा - पिटा बना रहने से ही उसमें लम्बे समय तक रहना भारी पड़ता है। बाहर भागने की इच्छा इसी कारण होती है। झीलों पार्कों  सिनेमाघरों की तरफ एवं दोस्तों और सहेलियों के साथ मिल-्बैठने के लिए दिल इसी कारण करता है। यदि प्रयत्न किया जाएतो घर का वातावरण ही इतना मनोरंजक उत्साहवर्धक आकर्षक एवं प्रेरणाप्रद बन सकता है कि उसे छोड़कर कहीं मन हल्का करने के लिए जाने की किसी को भी इच्छा न होगी। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍 #👉 लोगों के लिए सीख👈
📖जीवन का लक्ष्य🤔 - सदगुरुदेवाय नमः  "9& मनुष्य शरीर तो सबको मिल जाता लेकिन मनुष्य बनकर जीने का अवसर सबको नहीं मिलता है। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः  "9& मनुष्य शरीर तो सबको मिल जाता लेकिन मनुष्य बनकर जीने का अवसर सबको नहीं मिलता है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#☝अनमोल ज्ञान #👌 अच्छी सोच👍 #❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन #📖जीवन का लक्ष्य🤔
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#👉 लोगों के लिए सीख👈 #❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान
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#☝अनमोल ज्ञान #👌 अच्छी सोच👍 #❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन #👉 लोगों के लिए सीख👈
☝अनमोल ज्ञान - सदगुरुदेवाय नमः " "9f हमें अपने प्रवेश में सात्विक प्रेम की भावनाएं जागृत करनी चाहिए अपना अनुभव देना चाहिए, उन्हें आत्मीयता की दृष्टि से दूसरों को ' देखना चाहिए, हमको भी सतीत्व प्रेम के रसास्वा से आलोचना नहीं करनी चाहिए। दुनियां के खेत में अपना प्रेम बीज बिखेरते फिरें तो कोई-्न-्कोई उसका पौधा जरूर उगेगा। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः " "9f हमें अपने प्रवेश में सात्विक प्रेम की भावनाएं जागृत करनी चाहिए अपना अनुभव देना चाहिए, उन्हें आत्मीयता की दृष्टि से दूसरों को ' देखना चाहिए, हमको भी सतीत्व प्रेम के रसास्वा से आलोचना नहीं करनी चाहिए। दुनियां के खेत में अपना प्रेम बीज बिखेरते फिरें तो कोई-्न-्कोई उसका पौधा जरूर उगेगा। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍 #❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान
👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः  समाज कल्याण की बड़ी-बड़ी बातें होती हैं किंतु अपने जीवन के बारे में कभी कुछ सोचा है हमने ग़्जिन बातों को भाषण उपदेश  लेखों में हम व्यक्तकरते हैं क्या उन्हें कभी अपने अंतर में देखा है? क्या उन आदर्शों को हम अपने परिवार पडौसी   राष्ट्रीय जीवन में व्यवहृत करते हैंश्यदि ऐसा होने लग जाय तो हमारे व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में महान सुधार और व्यापक क्रांति सहज ही हो जाय। हमारे जीवन के आदर्श ही बदल जाय। घर  समाज पडौस राष्ट्र का जीवन स्वर्गीय बन जाय। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः  समाज कल्याण की बड़ी-बड़ी बातें होती हैं किंतु अपने जीवन के बारे में कभी कुछ सोचा है हमने ग़्जिन बातों को भाषण उपदेश  लेखों में हम व्यक्तकरते हैं क्या उन्हें कभी अपने अंतर में देखा है? क्या उन आदर्शों को हम अपने परिवार पडौसी   राष्ट्रीय जीवन में व्यवहृत करते हैंश्यदि ऐसा होने लग जाय तो हमारे व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में महान सुधार और व्यापक क्रांति सहज ही हो जाय। हमारे जीवन के आदर्श ही बदल जाय। घर  समाज पडौस राष्ट्र का जीवन स्वर्गीय बन जाय। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat