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#👌 अच्छी सोच👍 #❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान #👉 लोगों के लिए सीख👈
👌 अच्छी सोच👍 - सदगुरुदेवाय नमः " "श्री जवानी और बुढापा क्या है? और बुढापा फल। दोनों की अपनी अपनी खूबी है और অননী फूल है अपना-्अपना आनंद। एक को रंग की पिचकारी कहा जाय तो दूसरे को फूल की चाहत वैकल्पिक है कि में कभी रस का कलश कहना चाहिए। फल न बनूं , और जिस स्थिति में आज हूं सदा वहीं बना रहूं। इसी प्रकार फल की यह आकांक्षा होती है कि उसे सदा फूल ही बनाना चाहिए। कुदरत की हर क्रिया में उसकी अपनी खूबी छिपी हुई है। নানুললে নানুলল . सदगुरुदेवाय नमः " "श्री जवानी और बुढापा क्या है? और बुढापा फल। दोनों की अपनी अपनी खूबी है और অননী फूल है अपना-्अपना आनंद। एक को रंग की पिचकारी कहा जाय तो दूसरे को फूल की चाहत वैकल्पिक है कि में कभी रस का कलश कहना चाहिए। फल न बनूं , और जिस स्थिति में आज हूं सदा वहीं बना रहूं। इसी प्रकार फल की यह आकांक्षा होती है कि उसे सदा फूल ही बनाना चाहिए। कुदरत की हर क्रिया में उसकी अपनी खूबी छिपी हुई है। নানুললে নানুলল . - ShareChat
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👉 लोगों के लिए सीख👈 - 0)0) O @ "श्री सदगुरुदेवाय नमः' पैसे का आदान प्रदान ही स्नेह और सहयोग का निमित्त कारण बना रहा तो पतिव्रता के स्थान पर वैश्या को ही मान मिलता रहेगा। ೦ बाबलाल बाबलाल . 0)0) O @ "श्री सदगुरुदेवाय नमः' पैसे का आदान प्रदान ही स्नेह और सहयोग का निमित्त कारण बना रहा तो पतिव्रता के स्थान पर वैश्या को ही मान मिलता रहेगा। ೦ बाबलाल बाबलाल . - ShareChat
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👌 अच्छी सोच👍 - सदगुरुदेवाय नमः ' "श्री तत्व ज्ञान सीखकर उसे आचार में लाना उन ज्ञानियों और ऋषियों की परम्पराओं को कायम रखना ही तो सच्चा तर्पण है। ज्ञान को कर्म से मुक्तकर देने वाले ऋषि तर्पण से ही मानव कल्याण मार्ग की सीढी पारहोती है। নানুললে নানুলল . ೧ ೧ ? ? सदगुरुदेवाय नमः ' "श्री तत्व ज्ञान सीखकर उसे आचार में लाना उन ज्ञानियों और ऋषियों की परम्पराओं को कायम रखना ही तो सच्चा तर्पण है। ज्ञान को कर्म से मुक्तकर देने वाले ऋषि तर्पण से ही मानव कल्याण मार्ग की सीढी पारहोती है। নানুললে নানুলল . ೧ ೧ ? ? - ShareChat
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👌 अच्छी सोच👍 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' जिंदगी एक छोटा सा टुकड़ा है पर लोग उसे वासना और तृष्णा के बदले कौडी मोल में गँवाते रहते हैं। जो आपके पास है उसी का सदुपयोग कर लो तो वह क्या कम है। बहुत कुछ गँवाकर भी जो इंसान अंत में सँभल जाता है वह उसकी बुद्धिमानी ही मानी जाएगी। নানুলল নানুলল . "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' जिंदगी एक छोटा सा टुकड़ा है पर लोग उसे वासना और तृष्णा के बदले कौडी मोल में गँवाते रहते हैं। जो आपके पास है उसी का सदुपयोग कर लो तो वह क्या कम है। बहुत कुछ गँवाकर भी जो इंसान अंत में सँभल जाता है वह उसकी बुद्धिमानी ही मानी जाएगी। নানুলল নানুলল . - ShareChat
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👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरुदेवाय नमः " "श्री ज्ञान को बढ़ाकर मनुष्य अपने मस्तिष्क का विस्तार तो कर सकता है बशर्ते मानवता का कद बढाना है तोज्ञान को अमल में लाना ही पड़ेगा अन्यथा सब शून्य है । बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः " "श्री ज्ञान को बढ़ाकर मनुष्य अपने मस्तिष्क का विस्तार तो कर सकता है बशर्ते मानवता का कद बढाना है तोज्ञान को अमल में लाना ही पड़ेगा अन्यथा सब शून्य है । बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
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☝अनमोल ज्ञान - सदगुरुदेवाय नमः "श्री जिंदगी तो उसी की है जिसकी मौत पर जमाना अफसोस करे वरना जन्म तो हर किसी का मरने के लिए ही होता है। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः "श्री जिंदगी तो उसी की है जिसकी मौत पर जमाना अफसोस करे वरना जन्म तो हर किसी का मरने के लिए ही होता है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
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👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " मनुष्य का नैतिक स्वास्थ्य ठीक होने से समाज को बडा मधुर सहयोग प्राप्त होने लगता है। घर में घर से समाज में देश में विदेश में ऐसे स्वस्थ्य मनुष्य को सभी अपनाते हैं। सहायता करते हैं प्रेम करते बाहर हैं प्रशंसा करते हैं तथा छाती से लगाते हैं। नैतिक स्वास्थ्य एक खिला हुआ पुष्प हैजिसे देखने को सूंघने को पाने को सभी लोग ललचाते हैं। जो ईमानदार है सच्चा है विश्वासी है निष्कपट है, मधुर भाषी है वफादार है उदार है सेवा भावी है ऐसे व्यक्ति को हर कोई धन्यवाद देता है। पिता-पुत्र को पत्नी-्पति भाई-भाई को. मित्र मित्र को मालिक ्नौकर को इन गुणों से युक्त देखकर फूला नहीं को सास - बहू को समाता है। नैतिक स्वास्थ्य के आधार पर ही मनुष्य सज्ने अर्थों में मनुष्य बनता है। ননুললে ননুললে . "श्री सदगुरुदेवाय नमः " मनुष्य का नैतिक स्वास्थ्य ठीक होने से समाज को बडा मधुर सहयोग प्राप्त होने लगता है। घर में घर से समाज में देश में विदेश में ऐसे स्वस्थ्य मनुष्य को सभी अपनाते हैं। सहायता करते हैं प्रेम करते बाहर हैं प्रशंसा करते हैं तथा छाती से लगाते हैं। नैतिक स्वास्थ्य एक खिला हुआ पुष्प हैजिसे देखने को सूंघने को पाने को सभी लोग ललचाते हैं। जो ईमानदार है सच्चा है विश्वासी है निष्कपट है, मधुर भाषी है वफादार है उदार है सेवा भावी है ऐसे व्यक्ति को हर कोई धन्यवाद देता है। पिता-पुत्र को पत्नी-्पति भाई-भाई को. मित्र मित्र को मालिक ्नौकर को इन गुणों से युक्त देखकर फूला नहीं को सास - बहू को समाता है। नैतिक स्वास्थ्य के आधार पर ही मनुष्य सज्ने अर्थों में मनुष्य बनता है। ননুললে ননুললে . - ShareChat
#☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #👉 लोगों के लिए सीख👈
☝अनमोल ज्ञान - "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' लोग आपस में प्यार करना सीख लेें तो बाकी लोगों का वजन १०० प्रतिशत हल्का हो सकता है। दुष्टता दरिद्रिता  मूर्खता आदि के कारण मनुष्य स्वयं खिन्न रहता है और विपन्न बनता है। चिकित्सक अर्थशास्त्री   पुलिस कर्मचारी  राजनेता आदि कैसे - कैसे लोक सेवी इन खंडित व्यक्त्त्विों के कारण उत्पन्न होने वाली विडंबनाओं के समाधान में ही उलझे रहते हैं। उनके के कारण समाज को अनेक दृष्टियों से अनेक प्रकार की हानियाँ सहनी पडती हैं। व्यक्तियदि आत्म तिरस्कार करना छोड़दे तो उसका प्रतिरूप प्रेम विकसित हो सकता है। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' लोग आपस में प्यार करना सीख लेें तो बाकी लोगों का वजन १०० प्रतिशत हल्का हो सकता है। दुष्टता दरिद्रिता  मूर्खता आदि के कारण मनुष्य स्वयं खिन्न रहता है और विपन्न बनता है। चिकित्सक अर्थशास्त्री   पुलिस कर्मचारी  राजनेता आदि कैसे - कैसे लोक सेवी इन खंडित व्यक्त्त्विों के कारण उत्पन्न होने वाली विडंबनाओं के समाधान में ही उलझे रहते हैं। उनके के कारण समाज को अनेक दृष्टियों से अनेक प्रकार की हानियाँ सहनी पडती हैं। व्यक्तियदि आत्म तिरस्कार करना छोड़दे तो उसका प्रतिरूप प्रेम विकसित हो सकता है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
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👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " घर में गरीबी हो या अमीरी इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि इससे किसी को कोई लेना-्देना नहीं होता। पर यदि सभ्यता की पूंजी अगर पास में है तो उस सुसंस्कृत परिवार के सदस्य प्रत्येक आगंतुक पर संपर्क में आने वाले पर गहरी छाप छोड़ेंगे और उसकी भी यही आकांक्षा बढ जाएगी कि हे भगवानाऔर कुछ दे या न दे पर हमारे परिवार को भी इतना सभ्य बना दे जैसा कि अमुक व्यक्तिको देखकर आये हैं। शालीन परिवारों के साथ लेनन्देन,चाल-्चलन ब्याह-्शादी करने में हर किसी को प्रसन्नता होती है और हर कोई उन्हें सम्मान देता है और सहयोग भी। अस्तु वहां बिना बुलाए भी समृद्धि प्रगति अनायास ही बढती चली जाती है। अध्यात्म का पहला पाठ है सभ्यता का अपने आप से अपने घर से शुभारंभ। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः " घर में गरीबी हो या अमीरी इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि इससे किसी को कोई लेना-्देना नहीं होता। पर यदि सभ्यता की पूंजी अगर पास में है तो उस सुसंस्कृत परिवार के सदस्य प्रत्येक आगंतुक पर संपर्क में आने वाले पर गहरी छाप छोड़ेंगे और उसकी भी यही आकांक्षा बढ जाएगी कि हे भगवानाऔर कुछ दे या न दे पर हमारे परिवार को भी इतना सभ्य बना दे जैसा कि अमुक व्यक्तिको देखकर आये हैं। शालीन परिवारों के साथ लेनन्देन,चाल-्चलन ब्याह-्शादी करने में हर किसी को प्रसन्नता होती है और हर कोई उन्हें सम्मान देता है और सहयोग भी। अस्तु वहां बिना बुलाए भी समृद्धि प्रगति अनायास ही बढती चली जाती है। अध्यात्म का पहला पाठ है सभ्यता का अपने आप से अपने घर से शुभारंभ। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat