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#👉 लोगों के लिए सीख👈 #🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍
👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरुदेवाय नमः " "श्री ज्ञान को बढ़ाकर मनुष्य अपने मस्तिष्क का विस्तार तो कर सकता है बशर्ते मानवता का कद बढाना है तोज्ञान को अमल में लाना ही पड़ेगा अन्यथा सब शून्य है । बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः " "श्री ज्ञान को बढ़ाकर मनुष्य अपने मस्तिष्क का विस्तार तो कर सकता है बशर्ते मानवता का कद बढाना है तोज्ञान को अमल में लाना ही पड़ेगा अन्यथा सब शून्य है । बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈
☝अनमोल ज्ञान - सदगुरुदेवाय नमः "श्री जिंदगी तो उसी की है जिसकी मौत पर जमाना अफसोस करे वरना जन्म तो हर किसी का मरने के लिए ही होता है। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः "श्री जिंदगी तो उसी की है जिसकी मौत पर जमाना अफसोस करे वरना जन्म तो हर किसी का मरने के लिए ही होता है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान
👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " मनुष्य का नैतिक स्वास्थ्य ठीक होने से समाज को बडा मधुर सहयोग प्राप्त होने लगता है। घर में घर से समाज में देश में विदेश में ऐसे स्वस्थ्य मनुष्य को सभी अपनाते हैं। सहायता करते हैं प्रेम करते बाहर हैं प्रशंसा करते हैं तथा छाती से लगाते हैं। नैतिक स्वास्थ्य एक खिला हुआ पुष्प हैजिसे देखने को सूंघने को पाने को सभी लोग ललचाते हैं। जो ईमानदार है सच्चा है विश्वासी है निष्कपट है, मधुर भाषी है वफादार है उदार है सेवा भावी है ऐसे व्यक्ति को हर कोई धन्यवाद देता है। पिता-पुत्र को पत्नी-्पति भाई-भाई को. मित्र मित्र को मालिक ्नौकर को इन गुणों से युक्त देखकर फूला नहीं को सास - बहू को समाता है। नैतिक स्वास्थ्य के आधार पर ही मनुष्य सज्ने अर्थों में मनुष्य बनता है। ননুললে ননুললে . "श्री सदगुरुदेवाय नमः " मनुष्य का नैतिक स्वास्थ्य ठीक होने से समाज को बडा मधुर सहयोग प्राप्त होने लगता है। घर में घर से समाज में देश में विदेश में ऐसे स्वस्थ्य मनुष्य को सभी अपनाते हैं। सहायता करते हैं प्रेम करते बाहर हैं प्रशंसा करते हैं तथा छाती से लगाते हैं। नैतिक स्वास्थ्य एक खिला हुआ पुष्प हैजिसे देखने को सूंघने को पाने को सभी लोग ललचाते हैं। जो ईमानदार है सच्चा है विश्वासी है निष्कपट है, मधुर भाषी है वफादार है उदार है सेवा भावी है ऐसे व्यक्ति को हर कोई धन्यवाद देता है। पिता-पुत्र को पत्नी-्पति भाई-भाई को. मित्र मित्र को मालिक ्नौकर को इन गुणों से युक्त देखकर फूला नहीं को सास - बहू को समाता है। नैतिक स्वास्थ्य के आधार पर ही मनुष्य सज्ने अर्थों में मनुष्य बनता है। ননুললে ননুললে . - ShareChat
#☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #👉 लोगों के लिए सीख👈
☝अनमोल ज्ञान - "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' लोग आपस में प्यार करना सीख लेें तो बाकी लोगों का वजन १०० प्रतिशत हल्का हो सकता है। दुष्टता दरिद्रिता  मूर्खता आदि के कारण मनुष्य स्वयं खिन्न रहता है और विपन्न बनता है। चिकित्सक अर्थशास्त्री   पुलिस कर्मचारी  राजनेता आदि कैसे - कैसे लोक सेवी इन खंडित व्यक्त्त्विों के कारण उत्पन्न होने वाली विडंबनाओं के समाधान में ही उलझे रहते हैं। उनके के कारण समाज को अनेक दृष्टियों से अनेक प्रकार की हानियाँ सहनी पडती हैं। व्यक्तियदि आत्म तिरस्कार करना छोड़दे तो उसका प्रतिरूप प्रेम विकसित हो सकता है। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' लोग आपस में प्यार करना सीख लेें तो बाकी लोगों का वजन १०० प्रतिशत हल्का हो सकता है। दुष्टता दरिद्रिता  मूर्खता आदि के कारण मनुष्य स्वयं खिन्न रहता है और विपन्न बनता है। चिकित्सक अर्थशास्त्री   पुलिस कर्मचारी  राजनेता आदि कैसे - कैसे लोक सेवी इन खंडित व्यक्त्त्विों के कारण उत्पन्न होने वाली विडंबनाओं के समाधान में ही उलझे रहते हैं। उनके के कारण समाज को अनेक दृष्टियों से अनेक प्रकार की हानियाँ सहनी पडती हैं। व्यक्तियदि आत्म तिरस्कार करना छोड़दे तो उसका प्रतिरूप प्रेम विकसित हो सकता है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
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👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " घर में गरीबी हो या अमीरी इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि इससे किसी को कोई लेना-्देना नहीं होता। पर यदि सभ्यता की पूंजी अगर पास में है तो उस सुसंस्कृत परिवार के सदस्य प्रत्येक आगंतुक पर संपर्क में आने वाले पर गहरी छाप छोड़ेंगे और उसकी भी यही आकांक्षा बढ जाएगी कि हे भगवानाऔर कुछ दे या न दे पर हमारे परिवार को भी इतना सभ्य बना दे जैसा कि अमुक व्यक्तिको देखकर आये हैं। शालीन परिवारों के साथ लेनन्देन,चाल-्चलन ब्याह-्शादी करने में हर किसी को प्रसन्नता होती है और हर कोई उन्हें सम्मान देता है और सहयोग भी। अस्तु वहां बिना बुलाए भी समृद्धि प्रगति अनायास ही बढती चली जाती है। अध्यात्म का पहला पाठ है सभ्यता का अपने आप से अपने घर से शुभारंभ। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः " घर में गरीबी हो या अमीरी इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि इससे किसी को कोई लेना-्देना नहीं होता। पर यदि सभ्यता की पूंजी अगर पास में है तो उस सुसंस्कृत परिवार के सदस्य प्रत्येक आगंतुक पर संपर्क में आने वाले पर गहरी छाप छोड़ेंगे और उसकी भी यही आकांक्षा बढ जाएगी कि हे भगवानाऔर कुछ दे या न दे पर हमारे परिवार को भी इतना सभ्य बना दे जैसा कि अमुक व्यक्तिको देखकर आये हैं। शालीन परिवारों के साथ लेनन्देन,चाल-्चलन ब्याह-्शादी करने में हर किसी को प्रसन्नता होती है और हर कोई उन्हें सम्मान देता है और सहयोग भी। अस्तु वहां बिना बुलाए भी समृद्धि प्रगति अनायास ही बढती चली जाती है। अध्यात्म का पहला पाठ है सभ्यता का अपने आप से अपने घर से शुभारंभ। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#☝अनमोल ज्ञान #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈
☝अनमोल ज्ञान - "श्री सदगुरुतदेवाय नमः " कृतज्ञता भावना क्षेत्र की एक उच्च स्तरीय विभूति हैउसका अस्तित्व जहां भी होगा वहां यही चल रहाहोगा कि जिन्होंने अपने साथ जो उपकार किए हैं उन्हें ब्याज समेत वापिस करके प्रयास उऋण हुआ जाए। अभिभावकों के साथ वयस्क संतान को इसी श्रद्धा-्भावना का परिचय देना पड़ता है। समाज के अनेकानेक पक्ष एवं घटक अपनी प्रगति में निरंतर सहायक रहे हैं ऐसी दशा में यदि समाज ऋण से उऋण होने के लिए सार्वजनिक सेवा को भी निजी स्वार्थ साधना से कम नहीं वरन् उससे अधिक ही महत्व देना चाहिए। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुतदेवाय नमः " कृतज्ञता भावना क्षेत्र की एक उच्च स्तरीय विभूति हैउसका अस्तित्व जहां भी होगा वहां यही चल रहाहोगा कि जिन्होंने अपने साथ जो उपकार किए हैं उन्हें ब्याज समेत वापिस करके प्रयास उऋण हुआ जाए। अभिभावकों के साथ वयस्क संतान को इसी श्रद्धा-्भावना का परिचय देना पड़ता है। समाज के अनेकानेक पक्ष एवं घटक अपनी प्रगति में निरंतर सहायक रहे हैं ऐसी दशा में यदि समाज ऋण से उऋण होने के लिए सार्वजनिक सेवा को भी निजी स्वार्थ साधना से कम नहीं वरन् उससे अधिक ही महत्व देना चाहिए। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान
👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरुदेवाय नमः  "91 बाप की महनत और घर की मुसीबतों को देखने वाला कभी गलत रास्ते पर नहीं जा पाता है। নানুললে নানুলল. सदगुरुदेवाय नमः  "91 बाप की महनत और घर की मुसीबतों को देखने वाला कभी गलत रास्ते पर नहीं जा पाता है। নানুললে নানুলল. - ShareChat
#☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #👉 लोगों के लिए सीख👈
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#👉 लोगों के लिए सीख👈 #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान
👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' विवाह के पूर्व भी हर युवक - सामने एक परिवार विद्यमान रहता है। लडकी के लिए -युवती के उसमें माता -पिता भाई, बहिन भी सेवा-्श्रम करते रहने के लिए उपलब्ध रहते हैं। लडकों के भी अभिभावक भाई-भतीजे चाचा -्ताऊ एवं उनकी पत्नियां वृद्धाएं आदि कितने ही सदस्य रहते हैं-्उस कुटुंब का अनेक स्तर का अनेक प्रकार का सहयोग- अनुदान ऋण के रूप में अपने ऊपर चढा होता है, उससे उऋण होने को भी प्राथमिकता दी जाए तो उसे कृतज्ञता की कर्तव्य पालन की अभिव्यक्तिही कहा जाएगा। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' विवाह के पूर्व भी हर युवक - सामने एक परिवार विद्यमान रहता है। लडकी के लिए -युवती के उसमें माता -पिता भाई, बहिन भी सेवा-्श्रम करते रहने के लिए उपलब्ध रहते हैं। लडकों के भी अभिभावक भाई-भतीजे चाचा -्ताऊ एवं उनकी पत्नियां वृद्धाएं आदि कितने ही सदस्य रहते हैं-्उस कुटुंब का अनेक स्तर का अनेक प्रकार का सहयोग- अनुदान ऋण के रूप में अपने ऊपर चढा होता है, उससे उऋण होने को भी प्राथमिकता दी जाए तो उसे कृतज्ञता की कर्तव्य पालन की अभिव्यक्तिही कहा जाएगा। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #👉 लोगों के लिए सीख👈
☝अनमोल ज्ञान - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " अपने मतलब से मतलब रखने वाले समझते भर इतना है कि हम चतुरता कर रहे हैं। स्वयं किसी के काम नहीं आते पर अपना उल्लू सीधा करते हैं। वे यह भूल जाते हैं कि यहां सब-्कुछ आदान- प्रदान के आधार पर ही चल रहा और बढ रहा है। नियति का अतिक्रमण करके किसी का भी सुख चैन से रह सकना संभव नहीं। अकेलेपन की प्रवृत्ति सरसता और प्रसन्नता के समस्त स्त्रोत सुखा देती है। हर दृष्टि से हर क्षेत्र में संकीर्णता हानिकारक ही सिद्ध होती है। इसलिए मिल -्जुलकर रहना सिखाने वाली पारिवारिकता को ही श्रेय सौभाग्य और समझदारी के साथ जोड़ा गया है। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः " अपने मतलब से मतलब रखने वाले समझते भर इतना है कि हम चतुरता कर रहे हैं। स्वयं किसी के काम नहीं आते पर अपना उल्लू सीधा करते हैं। वे यह भूल जाते हैं कि यहां सब-्कुछ आदान- प्रदान के आधार पर ही चल रहा और बढ रहा है। नियति का अतिक्रमण करके किसी का भी सुख चैन से रह सकना संभव नहीं। अकेलेपन की प्रवृत्ति सरसता और प्रसन्नता के समस्त स्त्रोत सुखा देती है। हर दृष्टि से हर क्षेत्र में संकीर्णता हानिकारक ही सिद्ध होती है। इसलिए मिल -्जुलकर रहना सिखाने वाली पारिवारिकता को ही श्रेय सौभाग्य और समझदारी के साथ जोड़ा गया है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat