Babulal Babulal
ShareChat
click to see wallet page
@babulal8948
babulal8948
Babulal Babulal
@babulal8948
मुझे ShareChat परफॉलो करें!
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍
👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' जब से मुझे पता लगा कि भगवान मेरे साथ है तब से मैंने सोचना बंद करदिया कि कौन मेरे खिलाफ है। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' जब से मुझे पता लगा कि भगवान मेरे साथ है तब से मैंने सोचना बंद करदिया कि कौन मेरे खिलाफ है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान #👉 लोगों के लिए सीख👈
👌 अच्छी सोच👍 - सदगुरुदेवाय नमः " "श्री यदि मानव ् मानव के बीच प्रेम का जुड़ाव - प्रस्ताव नहीं होता और मानव जाति को प्रवृत्ति के मूल में प्रेम का प्रेरक भाव नहीं होता तो नैतिक क्षेत्र में कोई भी प्रगतिशील नहीं होता। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः " "श्री यदि मानव ् मानव के बीच प्रेम का जुड़ाव - प्रस्ताव नहीं होता और मानव जाति को प्रवृत्ति के मूल में प्रेम का प्रेरक भाव नहीं होता तो नैतिक क्षेत्र में कोई भी प्रगतिशील नहीं होता। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍
👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " निःसंदेह हर व्यक्ति अपने जीवन का धर्म -्ग्रंथ स्वयं लिखता है अपने जीवन का समाधान स्वयं ढूंढता हैतभी वह स्वतंत्र मुक्त ्जीवन का दुनियां में किसी ने भी मुक्ति प्राप्त की है कुछ अधिकारी बन सकता है। किया है उन्होंने अपने जीवन की पोथी स्वयं लिखी है। अपना उपदेश स्वयं ग्रहण किया है। आप इसे बार-बार हृदयंगम कर लें -आपकी समस्याओं को अपने जीवन को आसानी से समझ सकते हैं दूसरा कोई नहीं समझ सकता। जो समाधान आप स्वयं निकाल सकते हैं वह दूसरा कोई भी नहीं निकाल सकता। और इसके लिए आपको स्वतंत्र चिंतन का स्वतंत्र विचार क्षमता का अवलंबन लेना होगा। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः " निःसंदेह हर व्यक्ति अपने जीवन का धर्म -्ग्रंथ स्वयं लिखता है अपने जीवन का समाधान स्वयं ढूंढता हैतभी वह स्वतंत्र मुक्त ्जीवन का दुनियां में किसी ने भी मुक्ति प्राप्त की है कुछ अधिकारी बन सकता है। किया है उन्होंने अपने जीवन की पोथी स्वयं लिखी है। अपना उपदेश स्वयं ग्रहण किया है। आप इसे बार-बार हृदयंगम कर लें -आपकी समस्याओं को अपने जीवन को आसानी से समझ सकते हैं दूसरा कोई नहीं समझ सकता। जो समाधान आप स्वयं निकाल सकते हैं वह दूसरा कोई भी नहीं निकाल सकता। और इसके लिए आपको स्वतंत्र चिंतन का स्वतंत्र विचार क्षमता का अवलंबन लेना होगा। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन #👉 लोगों के लिए सीख👈
❤️जीवन की सीख - सदगुरुदेवाय नमः " "श्री अपना स्वभाव दृष्टिकोण विचार और व्यवहार आदि की परीक्षा करने से मनुष्य को अपनी -अपनी कमज़ोरियों का पता चल जाता है। दुनियां के दोष देखने से पूर्व अपने दोषों को भी देखें कि कहीं आपके ही हृदय ्सदन में अंधेरा तो नहीं है॰्अपनी उस गलती को उजागर करें- जिसके कारण आपको हर्ष में भी विषाद की ही छाया दिखाई देती है। अगर दुनियां धुंधली दिखाई देती है तो उसे ही दोष मत दो। संभव है आपकी दृष्टि में ही धुंधलापन हो। अपनी बुद्धि -दोष और कर्म-दोष पर भी विचार करें। यह भी तो देखिए कि कहीं आपकी मति तो कुंठित नहीं हैश्जो विकार आपको बाहर दिखता है, उसका मूल स्वंय आपके अंदरहो सकता है। নানুলাল নানুলল. सदगुरुदेवाय नमः " "श्री अपना स्वभाव दृष्टिकोण विचार और व्यवहार आदि की परीक्षा करने से मनुष्य को अपनी -अपनी कमज़ोरियों का पता चल जाता है। दुनियां के दोष देखने से पूर्व अपने दोषों को भी देखें कि कहीं आपके ही हृदय ्सदन में अंधेरा तो नहीं है॰्अपनी उस गलती को उजागर करें- जिसके कारण आपको हर्ष में भी विषाद की ही छाया दिखाई देती है। अगर दुनियां धुंधली दिखाई देती है तो उसे ही दोष मत दो। संभव है आपकी दृष्टि में ही धुंधलापन हो। अपनी बुद्धि -दोष और कर्म-दोष पर भी विचार करें। यह भी तो देखिए कि कहीं आपकी मति तो कुंठित नहीं हैश्जो विकार आपको बाहर दिखता है, उसका मूल स्वंय आपके अंदरहो सकता है। নানুলাল নানুলল. - ShareChat
#👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈
👌 अच्छी सोच👍 - सदगुरुदेवाय नमः ' "श्री 11 विजय से बैर का जन्म होता है और पराजय से दुःख उत्पन्न होता है।जो जय और पराजय से ऊपर है वही सुखी है। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः ' "श्री 11 विजय से बैर का जन्म होता है और पराजय से दुःख उत्पन्न होता है।जो जय और पराजय से ऊपर है वही सुखी है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍
👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरुदेवाय नमः" "श्री आज हम लोग नशे में चूर हैं। अज्ञान की वारुणि पीकर उन्मत्त हो रहे हैं। धन के पर्वत जमा करने और इंद्रिय भोगों को जी भरकर भोगने की आकांक्षा से सराबोर हो रहे हैं। आज यही बातें सबसे महत्वपूर्ण हैं जिनके लिए एक॰एक मिनट का खर्च होता हैं। आत्मचिंतन के लिए सत्कर्म के लिए एक मिनट की फुर्सत नहींपर वह दिन दूर नहीं जब बातें सबसे बडी महानता वाली आश्चर्यजनक लगेंगी और इस नासमझी के लिए बंजारे की तरह सिर धुन-्धुनकर और हाथ मल-् मलकर पछताना पड़ेगा। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः" "श्री आज हम लोग नशे में चूर हैं। अज्ञान की वारुणि पीकर उन्मत्त हो रहे हैं। धन के पर्वत जमा करने और इंद्रिय भोगों को जी भरकर भोगने की आकांक्षा से सराबोर हो रहे हैं। आज यही बातें सबसे महत्वपूर्ण हैं जिनके लिए एक॰एक मिनट का खर्च होता हैं। आत्मचिंतन के लिए सत्कर्म के लिए एक मिनट की फुर्सत नहींपर वह दिन दूर नहीं जब बातें सबसे बडी महानता वाली आश्चर्यजनक लगेंगी और इस नासमझी के लिए बंजारे की तरह सिर धुन-्धुनकर और हाथ मल-् मलकर पछताना पड़ेगा। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान #👉 लोगों के लिए सीख👈
👌 अच्छी सोच👍 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' एक अध्यापक ने ब्लैक बोर्ड पर दो अंक लिख दिये 5 और ३८ छात्रों से उसका हल पूछा। छात्रों में से किसी ने 8, किसी ने 2 और किसी ने १५ बताया। कोई जोड,कोई गुणा कोई बाकी करते और उतावली में उत्तर देते। अध्यापक ने सभी उत्तरों को गलत ठहराया और कहा- उतावले बच्चो,हल करने से पूर्व तुम्हें यह पूछना था कि आखिर पूछा क्या जा रहा है? जीवन की समस्याओं का स्वरूप और कारण न जानने पर भी उनके समाधान के लिए चलने वाली दौड़ -्धूप प्रायः इसी प्रकार निररर्थक चली जाती है। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' एक अध्यापक ने ब्लैक बोर्ड पर दो अंक लिख दिये 5 और ३८ छात्रों से उसका हल पूछा। छात्रों में से किसी ने 8, किसी ने 2 और किसी ने १५ बताया। कोई जोड,कोई गुणा कोई बाकी करते और उतावली में उत्तर देते। अध्यापक ने सभी उत्तरों को गलत ठहराया और कहा- उतावले बच्चो,हल करने से पूर्व तुम्हें यह पूछना था कि आखिर पूछा क्या जा रहा है? जीवन की समस्याओं का स्वरूप और कारण न जानने पर भी उनके समाधान के लिए चलने वाली दौड़ -्धूप प्रायः इसी प्रकार निररर्थक चली जाती है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍
👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरुदेवाय नमः " "পী मनुष्य भावना-्मय प्राणी है। जैसी कामना करता है। वैसे ही विचार आने लगते हैं। जैसे विचार उठते हैं वैसा ही निश्चय करता है। जैसा निश्चय करता है वैसे ही काम होने लगते हैं। जैसे काम करता है वैसा ही फल भोगता है। ননললে নানলল . सदगुरुदेवाय नमः " "পী मनुष्य भावना-्मय प्राणी है। जैसी कामना करता है। वैसे ही विचार आने लगते हैं। जैसे विचार उठते हैं वैसा ही निश्चय करता है। जैसा निश्चय करता है वैसे ही काम होने लगते हैं। जैसे काम करता है वैसा ही फल भोगता है। ননললে নানলল . - ShareChat
#👌 अच्छी सोच👍 #❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान #👉 लोगों के लिए सीख👈
👌 अच्छी सोच👍 - सदगुरुदेवाय नमः "श्री न किसी से बैरहै न किसी से याचना है न किसी की निंदा करना बिना बुलाए आना-्जाना नहींइसी कारण तो पत्थर का देवता भी देवता है। इसी प्रकार मनुष्य भी इस जन्म में किसी से बैर याचना और निंदा न करेतोउसे भी देवता वाली प्रतिष्ठा प्राप्त हो सकती है। নানুললে নানুলল. सदगुरुदेवाय नमः "श्री न किसी से बैरहै न किसी से याचना है न किसी की निंदा करना बिना बुलाए आना-्जाना नहींइसी कारण तो पत्थर का देवता भी देवता है। इसी प्रकार मनुष्य भी इस जन्म में किसी से बैर याचना और निंदा न करेतोउसे भी देवता वाली प्रतिष्ठा प्राप्त हो सकती है। নানুললে নানুলল. - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍
👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरुदेवाय नमः " "श्री कोई जमाना था जब अपनी खोटें - सर्वसाधारण के सम्मुख प्रकट करदेने से उस व्यक्ति को सच्चाई , निष्कपटता भोलेपन और सुधार पश्चाताप की छाया में श्रेष्ठ ही दिया जाता था और घृणा का भाव त्यागकर उसे क्षमा कर दिया जाता थापर अब वैसी स्थिति बिल्कुल भी नहीं रही। भेद की बातें पूछकर लोग मसखरी उडाते और उस गंदगी को चारों ओर बखेर कर सच बताने वाले की इज्चत की धच्चियां उड़ाकर उसे मर-् मरकर जीने के लिए विवश करदेते हैं। इस परतुलसीदास जी का एक दोहा रह - रहकर याद आता है- sQr| तुलसी पर घर जायके दुख न कहिए रोय। भरम गॅँवा वै आपनों बाँट सके न कोय। । बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः " "श्री कोई जमाना था जब अपनी खोटें - सर्वसाधारण के सम्मुख प्रकट करदेने से उस व्यक्ति को सच्चाई , निष्कपटता भोलेपन और सुधार पश्चाताप की छाया में श्रेष्ठ ही दिया जाता था और घृणा का भाव त्यागकर उसे क्षमा कर दिया जाता थापर अब वैसी स्थिति बिल्कुल भी नहीं रही। भेद की बातें पूछकर लोग मसखरी उडाते और उस गंदगी को चारों ओर बखेर कर सच बताने वाले की इज्चत की धच्चियां उड़ाकर उसे मर-् मरकर जीने के लिए विवश करदेते हैं। इस परतुलसीदास जी का एक दोहा रह - रहकर याद आता है- sQr| तुलसी पर घर जायके दुख न कहिए रोय। भरम गॅँवा वै आपनों बाँट सके न कोय। । बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat