इतिहास हमेशा विजेताओं के पन्नों से भरा होता है, और हारने वाले का लहू अक्सर वक्त की धूल में दब जाता है।स्कोरबोर्ड पर भले ही 'भारत की जीत' सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गई लेकिन पिच पर थका हुआ लेटा हुआ वह शरीर इस बात का गवाह है कि हार-जीत की लकीर कितनी बेरहम होती है।जैकब बेथेल आप की यह हार किसी जीत से कम नहीं है,क्योंकि वानखेड़े की तपिश में 47 गेंदों पर 104 रनों का वह संघर्ष किसी पराक्रमी योद्धा की वीरता की कहानी कहता है।आप ने अकेले दम पर करोड़ों भारतीयों की धड़कनें रोक दी थीं।
जैकब बेथेल ने आज वही खौफ पैदा किया था जो कभी ट्रेविस हेड ने अहमदाबाद में किया था,लेकिन अंत में किस्मत ने उनका साथ छोड़ दिया। एक युवा खिलाड़ी का वर्ल्ड कप सेमीफाइनल जैसे बड़े मंच पर ऐसा शतक जड़ना,यह बताता है कि आने वाले समय में वह क्रिकेट की दुनिया पर राज करेंगे।भले ही इंग्लैंड यह मैच 7 रनों के मामूली अंतर से हार गया, लेकिन बेथेल ने अपनी जांबाजी से हारने वाली टीम को भी सम्मान की ऊँचाइयों पर बिठा दिया है।क्रिकेट का खेल आज इस युवा योद्धा की हिम्मत को सलाम कर रहा है।
यह मैच साक्ष्य है कि जब प्रतिभा और जुनून आपस में मिलते हैं,तो स्कोरबोर्ड के नतीजे गौण हो जाते हैं।बेथेल की यह पारी सदियों तक उन लोगों को प्रेरित करेगी जो अंत तक लड़ने का जज्बा रखते हैं।भारत भले ही फाइनल में पहुँच गया हो,लेकिन बेथेल ने अपनी शतकीय पारी से यह साबित कर दिया कि क्रिकेट का असली रोमांच अंत तक हार न मानने में है। आज विजेता भारत है,मगर दिल जीतने वाला वह गुमनाम सितारा है जिसने धूल में सने होने के बावजूद हार नहीं मानी।
मैदान में लड़ते-लड़ते हारना जीतने के बराबर ही होता है।
"सफलता सार्वजनिक उत्सव है जबकि असफलता व्यक्तिगत शोक"।
Better luck next time England ✊
💔🏏🔥
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