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गज़ल #✒ शायरी
✒ शायरी - गज़ल कातिब है इंसां ्में फ़रावानी नहीं भरता अजव दगाबाज़ी तो भरता है वफ़ादारी नर्ही भरता  भरोसा था तभी तो साथ तेरा दे रहा था रमै ज़रा भी शक अगर होता तो र्मैं हामी नहीं भरता बहुत खुद्दार होना भी अना का एक पहलू है घड़े का मुह अगर उल्टा हो तो पानी नहीं भरता  कोई तो है यकीनन जिसने ये मेला लगाया है खिलौना कैसा भी हो ख़ुद ब-ख़ुद चाबी नर्हीं भरता सौरभ सदफ़ Motivational Vdeos App Want गज़ल कातिब है इंसां ्में फ़रावानी नहीं भरता अजव दगाबाज़ी तो भरता है वफ़ादारी नर्ही भरता  भरोसा था तभी तो साथ तेरा दे रहा था रमै ज़रा भी शक अगर होता तो र्मैं हामी नहीं भरता बहुत खुद्दार होना भी अना का एक पहलू है घड़े का मुह अगर उल्टा हो तो पानी नहीं भरता  कोई तो है यकीनन जिसने ये मेला लगाया है खिलौना कैसा भी हो ख़ुद ब-ख़ुद चाबी नर्हीं भरता सौरभ सदफ़ Motivational Vdeos App Want - ShareChat