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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - अपने संबंधों में स्थायित्व से ज्यादा आत्मीयता बनाए रखें सार्वजनिक जीवन में ऐसा होता ही रहता है कि मित्र कब शत्रु बन जाए और शत्रु कब मित्र बन जाए। जिन्हें जीवन में बड़े लक्ष्य पूरे  करने हों, उन्हें यह बात ध्यान रखनी होगी कि अब स्थायी संबंधों का समय समाप्त हो रहा है। जो आज आंपका है, कल होे सकता है विरोध मेँ दिखे, वहीं विरोधी कभी भी समर्थन दे सकता है। संत कह गए हैं- समय फिरे रिपु होई पीरिते। समय बदलता है तो ؟ ফঁট शत्रु भी पीरिते यानी प्रिय हो जाता है। देवकी के विवाह बहुत प्रसन्न था। दहेज का सामान अपने रथ में रखकर बहन बहनोई को विदा कर रहा था। तभी आकाशवाणी हुई कि मूर्ख  कंसी जिस बहन के विवाह में तू इतना प्रसन्न है, इसका आठवां पुत्र मृत्यु का कारण बनेगा। कंस रथ से कूदता है, बहन को नीचे गिराता है और मारने का प्रयास करता है। यह प्रसंग बताता है कि कितनी जल्दी इंसान बदल जाता है ? रिश्तों में स्थायित्व भले ही न रखें पर आत्मीयता रखें, अन्यथा ही पाए जाएंगे। அ अपने संबंधों में स्थायित्व से ज्यादा आत्मीयता बनाए रखें सार्वजनिक जीवन में ऐसा होता ही रहता है कि मित्र कब शत्रु बन जाए और शत्रु कब मित्र बन जाए। जिन्हें जीवन में बड़े लक्ष्य पूरे  करने हों, उन्हें यह बात ध्यान रखनी होगी कि अब स्थायी संबंधों का समय समाप्त हो रहा है। जो आज आंपका है, कल होे सकता है विरोध मेँ दिखे, वहीं विरोधी कभी भी समर्थन दे सकता है। संत कह गए हैं- समय फिरे रिपु होई पीरिते। समय बदलता है तो ؟ ফঁট शत्रु भी पीरिते यानी प्रिय हो जाता है। देवकी के विवाह बहुत प्रसन्न था। दहेज का सामान अपने रथ में रखकर बहन बहनोई को विदा कर रहा था। तभी आकाशवाणी हुई कि मूर्ख  कंसी जिस बहन के विवाह में तू इतना प्रसन्न है, इसका आठवां पुत्र मृत्यु का कारण बनेगा। कंस रथ से कूदता है, बहन को नीचे गिराता है और मारने का प्रयास करता है। यह प्रसंग बताता है कि कितनी जल्दी इंसान बदल जाता है ? रिश्तों में स्थायित्व भले ही न रखें पर आत्मीयता रखें, अन्यथा ही पाए जाएंगे। அ - ShareChat