नरसिंह द्वादशी
फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी के दिन भगवान नरसिंह खंभे को चीरते हुए प्रकट हुए थे. तभी से हर साल इस दिन नरसिंह भगवान की पूजा की जाती है और इस दिन को नरसिम्हा द्वादशी, नरसिंह द्वादशी के रूप में जाना जाता है।
भगवान विष्णु का नरसिंह अवतार उनके 12 स्वरूपों में से एक है. ये ऐसा अवतार था जिसमें श्रीहरि के शरीर आधा हिस्सा मानव का और आधा हिस्सा शेर का था. इसीलिए इस अवतार को नरसिंह अवतार कहा गया. भगवान ने ये अवतार अपने प्रिय भक्त प्रहलाद के प्राण बचाने के लिए लिया था. नरसिंह भगवान एक खंभे को चीरते हुए बाहर आए थे। जिस दिन ये घटना हुई, उस दिन फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी थी. तभी से हर साल होली से तीन दिन पहले द्वादशी के दिन नरसिंह भगवान की पूजा की जाती है और इस दिन को नरसिम्हा द्वादशी (Narasimha Dwadashi), नरसिंह द्वादशी के रूप में जाना जाता है। भगवान नरसिंह का ये व्रत करने से परिवार के संकट दूर होते हैं, खुशियां और बरकत आती है. माना जाता है कि हिरण्यकश्यप के वध के बाद नरसिंह भगवान ने प्रहलाद को भी वरदान दिया था कि जो भी भक्त इस दिन उनका श्रद्धा और भक्ति के साथ स्मरण करेगा, उनका पूजन या व्रत करेगा, उसके जीवन के शोक, दुख, भय और रोग दूर होंगे. उसकी हर मनोकामना पूरी होगी। #शुभ कामनाएँ 🙏


