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#📝कविता / शायरी/ चारोळी #✍गुलजारांचे साहित्य
📝कविता / शायरी/ चारोळी - पतझड़ में सिर्फ पत्ते गिरते हैं नज़रों से गिरने का कोई मौसम नहीं होता " साहेब" ...!! पतझड़ में सिर्फ पत्ते गिरते हैं नज़रों से गिरने का कोई मौसम नहीं होता " साहेब" ...!! - ShareChat