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#🪔सावन का पवित्र महीना 🙏 #शुभ रविवार #ॐ सुर्याय नमः #🙏🏻☀️!!ॐ सुर्याय नमः!!☀️🙏🏻
`सप्ताश्वरथमारूढं प्रचण्डं कश्यपात्मजम् ॥` *#सूर्यदेव*
`ॐ घृणि सूर्याय नमः🙏🏻☀️`
*॥ श्रीसूर्याष्टकम् ॥ – शिवप्रोक्तम्*
`रविवार` *के दिन इस स्तोत्र का* `प्रातःकाल` *पाठ करने से* `☆ग्रहपीडा , ☆रोग , ☆दरिद्रता` *नष्ट होती है ।*
`श्रीसूर्याष्टकम् 🌞✨`
`#आदिदेव –`
*आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर ! ।*
*दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते ॥१॥*
`श्लोकार्थ 👉🏻 हे आदिदेव , हे भास्कर , हे दिवाकर , हे प्रभाकर ! आपको नमस्कार है । आप मुझ पर प्रसन्न होइए ।`
`भावार्थ 👉🏻 स्तोत्र का आरंभ ही सूर्य के ४ नामों से हुआ है । सूर्य ही सृष्टि के आदि देव हैं । वही प्रकाश देने वाले हैं ,दिन लाने वाले हैं , जगत को प्रभुता देने वाले हैं । बिना सूर्य के न दिन ही होता तथा न जन–जीवन ही होता ।`
`#सप्ताश्वरथ –`
*सप्ताश्वरथमारूढं प्रचण्डं कश्यपात्मजम् ।*
*श्वेतपद्मधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥२॥*
`श्लोकार्थ 👉🏻 जो सात घोड़ों वाले रथ पर आरूढ़ हैं , प्रचण्ड तेजस्वी`, `कश्यप के पुत्र हैं औऱ स्वेत/सफेद कमल धारण करते हैं , उन सूर्यदेव को मैं प्रणाम करता हूँ ।`
`भावार्थ 👉🏻 ७ घोड़े अर्थात – सप्ताह के ७ दिन । स्वेत/सफेद कमल अर्थात – पवित्रता । सूर्य प्रचण्ड हैं किन्तु शीतलता भी देते हैं । वे कश्यप ऋषि के पुत्र हैं – इसलिए कश्यपात्मज कहलाते हैं ।`
`#लोकपितामह –`
*लोहितं रथमारूढं सर्वलोकपितामहम् ।*
*महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥३॥*
`श्लोकार्थ 👉🏻 जो लाल रंग के रथ पर विराजमान हैं , समस्त लोकों के पितामह हैं एवं महापों को हरने वाले हैं , उन सूर्य को प्रणाम ।`
`भावार्थ 👉🏻 लोहित अर्थात – लालिमा । सूर्योदय-सूर्यास्त का रंग । सूर्य पिता के भी पिता हैं । उनकी एक किरण से जन्म-जन्मांतर के पाप जल/नष्ट जाते हैं ।`
`#त्रिदेस्ववरूप –`
*त्रैगुण्यं च महाशूरं ब्रह्मविष्णुमहेश्वरम् ।*
*महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥४ ॥*
`श्लोकार्थ 👉🏻 जो सत्व-रज-तम तीनों गुणों से युक्त हैं , महाशूर एवं स्वयं ब्रह्मा-विष्णु-महेश स्वरूप हैं , उन सूर्य को प्रणाम ।`
`भावार्थ 👉🏻 यही सर्वाधिक गूढ़ श्लोक है । सूर्य ही त्रिदेव हैं । प्रातःकाल में ब्रह्मा अर्थात – सृष्टिकर्ता , मध्यान्ह/दोपहर में विष्णु अर्थात – पालनकर्ता , संध्या/सांयकाल के समय शिव अर्थात – संहारकर्ता ।`
`#पंचतत्व –`
*बृंहितं तेजपु़ञ्जं च वायुमाकाशमेव च ।*
*प्रभुं च सर्वलोकानां तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥५॥*
`श्लोकार्थ 👉🏻 जो वर्धित तेज के पुंज हैं , वायु तथा आकाश स्वरूप हैं औऱ सम्पूर्ण लोकों के प्रभु हैं , उन सूर्य को प्रणाम ।`
`भावार्थ 👉🏻 सूर्य से ही वायु चलायमान है , आकाश प्रकाशित होता है । पंचतत्व में तेज तत्व के अधिष्ठाता सूर्य ही हैं । वही सर्वलोक प्रभु हैं ।`
`#बन्धूकपुष्प –`
*बन्धूकपुष्पसङ्काशं हारकुण्डलभूषितम् ।*
*एकचक्रधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥६॥*
`श्लोकार्थ 👉🏻 जो गुड़हल के पुष्प/फूल के समान लाल हैं , हार एवं कुण्डल से भूषित हैं तथा एक चक्र वाले रथ पर विराजमान हैं , उन देव सूर्य को प्रणाम ।`
`भावार्थ 👉🏻 एक चक्र अर्थात – १ वर्ष अर्थात –१२ महीने । समय का चक्र सूर्य से ही चलता है । गुड़हल पुष्प का लाल रंग ऊर्जा औऱ शक्ति का प्रतीक है । आभूषण से भाव ऐश्वर्य को बताना है ।`
`#जगत्कर्ता –`
*तं सूर्यं जगत्कर्तारं महातेजःप्रदीपनम् ।*
*महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥७॥*
`श्लोकार्थ 👉🏻 जो जगत के रचयिता हैं , महान तेज को प्रकाशित करते हैं एवं महापापों को हरते हैं , उन सूर्य को प्रणाम ।`
`भावार्थ 👉🏻 सूर्य के बिना अन्न उत्पन्न नहीं हो सकता तथा अन्न के बिना जीवन नहीं होता । अतः वही जगत के कर्ता हैं । उनका तेज ही ज्ञान का प्रकाश है । जिनका नाम लेने मात्र से पाप नष्ट हो जाते हैं ।`
`#ज्ञानविज्ञानमोक्ष –`
*तं सूर्यं जगतां नाथं ज्ञानविज्ञानमोक्षदम् ।*
*महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥८ ॥*
`श्लोकार्थ 👉🏻 जो जगत के नाथ हैं , ज्ञान , विज्ञान औऱ मोक्ष देने वाले हैं , उन सूर्य को प्रणाम ।`
`भावार्थ 👉🏻 ज्ञान अर्थात – शास्त्र का बोध । विज्ञान अर्थात – अनुभव । मोक्ष अर्थात – मुक्ति । सूर्य उपासना से बुद्धि प्रखर/तेज होती है एवं अंत में सूर्यलोक की प्राप्ति होती है ।`
`💦#फलश्रुति_नियम –`
*सूर्याष्टकं पठेन्नित्यं ग्रहपीडाप्रणाशनम् ।*
*अपुत्रो लभते पुत्रं दारिद्रो धनवान् भवेत् ॥९॥*
`अर्थात 👉🏻 जो नित्य सूर्याष्टक पढ़ता है , उसकी ग्रहपीड़ा नष्ट होती है । निसंतान को संतान तथा निर्धन/दरिद्र को धन प्राप्त होता है ।`
`#रविवार_नियम –`
*आमिषं मधुपानं च यः करोति रवेर्दिने ।*
*सप्तजन्मभवेद्रोगी जन्मजन्म दरिद्रता॥१०॥*
`अर्थात 👉🏻 जो रविवार को मांस औऱ मदिरा का सेवन करता है , वो ७ जन्म तक रोगी एवं प्रत्येक/हर जन्म में दरिद्र रहता है ।`
`#रविवार_में_त्याग –`
*स्त्री-तैल-मधु-मांसानि यस्त्यजेत्तु रवेर्दिने ।*
*न व्याधिः शोक-दारिद्र्यं सूर्यलोकं च गच्छति ॥११॥*
`अर्थात 👉🏻 जो रविवार को स्त्री-संग , तेल , मधु , एवं मांस का त्याग करेगा , उसे रोग , शोक , तथा दरिद्रता नहीं होती औऱ वो सूर्यलोक को जाता है ।`
*😊🪷 #निष्कर्ष –*
`सूर्य अर्थात – आत्मा अर्थात – शिव अर्थात – ब्रह्म`
`सूर्य की पूजा अर्थात – प्रकृति की पूजा अर्थात – राष्ट्र की सेवा`
`आइए रविवार को सूर्य को जल अर्पित करें , सूर्याष्टक पढ़ें एवं प्रकृति का सम्मान करें💐💐💐`
`शुभ रविवार ☀️ सूर्यदेव की कृपा आप समस्त पर बनी रहे💐💐💐`
`ॐ सूर्याय नमः🌹`
`ॐ भास्कराय नमः🌞`
`हर हर महादेव🔱`
`हर हर शङ्कर🚩`
`जय जय शङ्कर🚩`
`🌄🌄 प्रभात वन्दन 🌄🌄`
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