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गज़ल #✒ शायरी
✒ शायरी - गजल अगर यक़ीं नहीं आता आज़माए मुझे तो फिर आइना दिखाए मुझे आइना हूँ दिन रात जलता रहता हूँ अजब चराग़ हूँ हवा से कहो बुझाए मुझे मैं थक गया मैं जिस की आँख का आँसू था उस ने क़द्र न की बिखर गया हूँ तो अब रेत से उठाए मुझे बहुत दिनों से मैं इन पत्थरों में पत्थर हूँ कोई तो आए ज़रा देर को रुलाये मुझे मैं चाहता हूँ कि तुम ही मुझे इजाज़त दो तरह से कोई गले लगाए मुझे तुम्हारी बशीर बद्र App] Want Motivational Videos गजल अगर यक़ीं नहीं आता आज़माए मुझे तो फिर आइना दिखाए मुझे आइना हूँ दिन रात जलता रहता हूँ अजब चराग़ हूँ हवा से कहो बुझाए मुझे मैं थक गया मैं जिस की आँख का आँसू था उस ने क़द्र न की बिखर गया हूँ तो अब रेत से उठाए मुझे बहुत दिनों से मैं इन पत्थरों में पत्थर हूँ कोई तो आए ज़रा देर को रुलाये मुझे मैं चाहता हूँ कि तुम ही मुझे इजाज़त दो तरह से कोई गले लगाए मुझे तुम्हारी बशीर बद्र App] Want Motivational Videos - ShareChat