ShareChat
click to see wallet page
search
समुद्र मंथन के लिए मन्दराचल पर्वत को देव और दानवों ने मिलकर उखाड़ लिया और गरजते हुए समुद्र की और चलने लगे। मन्दराचल बहुत भारी था और उसे लेकर भी बहुत दूर जाना था। देव और दानव बीच में थक कर इस पर्वत को छोड़ दिया। इन लोगों का उत्साह भी मंद पड़ गया था। यह देख कर गरुड़ पर चढ़े हुए भगवान सहसा वहां प्रकट हुए और उन्होंने खेल ही खेल में एक हाथ से उस पर्वत को उठा कर गरुड़ पर रख लिया और स्वयं भी सवार हो गए। पक्षिराज गरुड़ ने समुद्र के तट पर पर्वत को उतार दिया। फिर भगवान् के विदा करने पर गरुड़ जी वहां से चले गये। श्रीमद्भागवत-महापुराण/८/६/३२-३९ श्रीमद्भागवत-महापुराण/8/6)32-39 #bhavishypuran #vedpuran #puranam #puranikyatra #mbapanditji #upanishads #shrimadbhagwat #shrimadbhagwatkatha #bhagwatkatha #bhagwat #bhagwatkathalive #भागवत #भागवतकथा #श्रीमद्भगवद्गीता #MBAPanditJi #PuranikYatra
MBAPanditJi - ShareChat
00:09