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☝ मेरे विचार - _51109 ~114911_ बायोटैककॉन्क्लेत जयपुर में आयौजित कार्यक्रम मैं एक्सपर्ट बोले॰ 000 बायो एंजाइम्स से साफ होगा पानी , इकोनामी 7 बढ़ेगी; कचरा बन सकेगा कमाई का जरिया रोह R ौर सिटी रिपोर्टर - जयपुर T1 घर या किसी अन्य जगह का कचरा परेशानी के साथ-साथ अवसर भी बन सकता है। ஈ कचरे से बायो एंजाइम्स तैयार किए जा सकते हैं जो पानी को सा़फ करने में मददगार साबित होंगे। बायो एंजाइम्स से पानी सा़फ किया जा सकता है। इन एंजाइम्स का उपयोग ] घर की सफाई में भी किया जा सकता है। बायोटेक्नोलॉजी में इनोवेशन के जरिए इन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल किया जा जा सकते हैं जिससे सर्कुलर इकोनॉमी को ने किया।  21 उनके साथ डीएसटी साइंटिस्ट 'ई कृष्ण कांत पुलिचेरला सहित कई वैज्ञानिक  सकता है। बढावा   मिलेगा। जानकारी a यह TMPN एक्सपर्ट्स ने मौजूद थे। पहली पैनल चर्चा ' पॉलिसी से एक्सपर्ट्स ने बताया कि रोजमर्रा को बायोटेक कॉन्क्लेव २०२६ में म जिंदगी में कैमिकल्स का इस्तेमाल बढ रहा दी। कॉन्क्लेव का आयोजन डॉ॰ बी॰लाल भारत के बायो-्इनोवेशन 7 खुशहाली तकः इंस्टीट्यूट  1 है। नहाने और बर्तन धोने में इस्तेमाल होने दशक में राजस्थान का रोडमैप' विषय पर बायोटेक्नोलॉजी ऑफ और वाले कैमिकल्स पानी में घुलकर प्रदूषण वनस्थली   विद्यापीठ ने हुई, जिसका संचालन डॉ. ,4[/ एआईसी  सुदीप्ति अरोड़ा 1 बाईरैक, राजस्थान सरकार के विज्ञान एवं ঐনল বনা সপাত ক লিব बढ़ा रहे हैं। कैमिकल्स का ने किया। कम उपयोग दूसरी  7 प्रौद्योगिकी विभाग और स्टार्टअप इनोवेशन जैव प्रौद्योगिकी को सुलभ समावेशी  करना और बीमारियों से बचाव करना हमारी विज्ञानः  जिम्मेदारी है। राजस्थान में गा़य के गोबर और काउंसिल डीएसटी राजस्थान सह-भागीदार और  प्रभावशाली पर केंद्रित रही, बनाना रहे। उद्घाटन डीएसटी के सचिव वी॰ सरवाना बायोगैस सहित अन्य प्रोडक्ट्स बनाए संचालन डॉ. अभिषेक पारीक ने किया। मूत्र से  _51109 ~114911_ बायोटैककॉन्क्लेत जयपुर में आयौजित कार्यक्रम मैं एक्सपर्ट बोले॰ 000 बायो एंजाइम्स से साफ होगा पानी , इकोनामी 7 बढ़ेगी; कचरा बन सकेगा कमाई का जरिया रोह R ौर सिटी रिपोर्टर - जयपुर T1 घर या किसी अन्य जगह का कचरा परेशानी के साथ-साथ अवसर भी बन सकता है। ஈ कचरे से बायो एंजाइम्स तैयार किए जा सकते हैं जो पानी को सा़फ करने में मददगार साबित होंगे। बायो एंजाइम्स से पानी सा़फ किया जा सकता है। इन एंजाइम्स का उपयोग ] घर की सफाई में भी किया जा सकता है। बायोटेक्नोलॉजी में इनोवेशन के जरिए इन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल किया जा जा सकते हैं जिससे सर्कुलर इकोनॉमी को ने किया।  21 उनके साथ डीएसटी साइंटिस्ट 'ई कृष्ण कांत पुलिचेरला सहित कई वैज्ञानिक  सकता है। बढावा   मिलेगा। जानकारी a यह TMPN एक्सपर्ट्स ने मौजूद थे। पहली पैनल चर्चा ' पॉलिसी से एक्सपर्ट्स ने बताया कि रोजमर्रा को बायोटेक कॉन्क्लेव २०२६ में म जिंदगी में कैमिकल्स का इस्तेमाल बढ रहा दी। कॉन्क्लेव का आयोजन डॉ॰ बी॰लाल भारत के बायो-्इनोवेशन 7 खुशहाली तकः इंस्टीट्यूट  1 है। नहाने और बर्तन धोने में इस्तेमाल होने दशक में राजस्थान का रोडमैप' विषय पर बायोटेक्नोलॉजी ऑफ और वाले कैमिकल्स पानी में घुलकर प्रदूषण वनस्थली   विद्यापीठ ने हुई, जिसका संचालन डॉ. ,4[/ एआईसी  सुदीप्ति अरोड़ा 1 बाईरैक, राजस्थान सरकार के विज्ञान एवं ঐনল বনা সপাত ক লিব बढ़ा रहे हैं। कैमिकल्स का ने किया। कम उपयोग दूसरी  7 प्रौद्योगिकी विभाग और स्टार्टअप इनोवेशन जैव प्रौद्योगिकी को सुलभ समावेशी  करना और बीमारियों से बचाव करना हमारी विज्ञानः  जिम्मेदारी है। राजस्थान में गा़य के गोबर और काउंसिल डीएसटी राजस्थान सह-भागीदार और  प्रभावशाली पर केंद्रित रही, बनाना रहे। उद्घाटन डीएसटी के सचिव वी॰ सरवाना बायोगैस सहित अन्य प्रोडक्ट्स बनाए संचालन डॉ. अभिषेक पारीक ने किया। मूत्र से - ShareChat