#📕लाल किताब उपाय🔯 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #✡️सितारों की चाल🌠 #🐍कालसर्प दोष परिहार #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी राहु केतु उदय अस्त से परे हैं। छाया ग्रह हैं न होते हुए
भी इनकी वास्तविकता है
इनका अपना कोई घर नहीं है यह किराए के घर में अथवा
जबरदस्ती दुसरे के घर में रहते है और सदा उलटे चलते हैं
इनका अपना कोई सवभाव नहीं है जिस राशि में रहते हैं
उसी के स्वभाव को अपना लेते हैं राहु को शनि जैसा और केतु
को मंगल जैसा फल देने वाला माना गया है इसलिये ज्योतिशिगण इन्हें"शनिवत्
राहु कुज्वत् केतु"से शोभायमान करते हैं।
राहु अन्धकार है तो केतु प्रकाश है निम्नतर विद्धा राहु है तो उच्चतर
ज्ञान केतु है
सिर के केश केतु है तो गुप्त स्थान के बाल राहु हैं
भूमि पर पड़ती छाया राहु है तथा पानी अथवा
दर्पण में दिखाई में दिखाई देने वाली छाया केतु है
राहु संध्या है तो केतु भोर है राहु आत्माभिमान है तो केतु आत्मगौरव
है
राहु चौढाई है तो केतु लंबाई है
सभी ग्रह जब इनके घेरे में आते हैं तो काल सर्प दोष/योग
का निर्माण करते है
राहु नीला आकाश है तो केतु पृथ्वी है
कुंडली में यह दोनों आपस में कभी
नहीं मिलते जिस तरह जमीं आसमाँ
नहीं मिलते
राहु जहाँ मानसिक रोग देता है वहीँ केतु विकलांगता देता
है शनि देव न्यायाधीश हैं जबकि राहु केतु वकील
है राहु शनि की अदालत में आप के बुरे कर्मों की
फ़ाइल खोलता है जबकि केतु आप के अच्छे कर्मों की list शनि
देव के आगे रखता है
राहु व्यक्ति को एक दम बर्बाद/आबाद करता जबकि केतु
यही काम धीरे धीरे करता है।

