एस्ट्रो मनोज कौशिक बहल यंत्र मंत्र तंत्र विशेषज्ञ
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#🔯ज्योतिष #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅ #🔯वास्तु दोष उपायभूत प्रेत की पहिचान अक्सर लोगों के अन्दर भूत प्रेत घुस जाते है और वे व्यक्ति के जीवन को तबाह कर देते है,भूत-डामर तंत्र में उनकी पहिचान जिस प्रकार से बताई गयी है वह निम्न लिखित है। भूत लगे व्यक्ति की पहिचान जब किसी व्यक्ति को भूत लग जाता है तो वह बहुत ही ज्ञान वाली बातें करता है,उस व्यक्ति के अन्दर इतनी शक्ति आजाती है कि दस दस आदमी अगर उसे संभालने की कोशिश करते है तो भी नही संभाल पाते हैं। देवता लगे व्यक्ति की पहिचान जब लोगों के अन्दर देवता लग जाते है तो वह व्यक्ति सदा पवित्र रहने की कोशिश करता है,उसे किसी से छू तक जाने में दिक्कत हो जाती है वह बार बार नहाता है,पूजा करता है आरती भजन में मन लगाता रहता है,भोजन भी कम हो जाता है नींद भी नही आती है,खुशी होता है तो लोगों को वरदान देने लगता है गुस्सा होता है तो चुपचाप हो जाता है,धूपबत्ती आदि जलाकर रखना और दीपक आदि जलाकर रखना उसकी आदत होती है,संस्कृत का उच्चारण बहुत अच्छी तरह से करता है चाहे उसने कभी संस्कृत पढी भी नही होती है। देवशत्रु लगना देव शत्रु लगने पर व्यक्ति को पसीना बहुत आता है,वह देवताओं की पूजा पाठ में विरोध करता है,किसी भी धर्म की आलोचना करना और अपने द्वारा किये गये काम का बखान करना उसकी आदत होती है,इस प्रकार के व्यक्ति को भूख बहुत लगती है।उसकी भूख कम नही होती है,चाहे उसे कितना ही खिला दिया जाये,देव गुरु शास्त्र धर्म परमात्मा में वह दोष ही निकाला करता है। कसाई वाले काम करने के बाद ऐसा व्यक्ति बहुत खुश होता है। #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨ #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔
#📕लाल किताब उपाय🔯 #✡️सितारों की चाल🌠 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #🐍कालसर्प दोष परिहार #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 भूत प्रेत की पहिचान अक्सर लोगों के अन्दर भूत प्रेत घुस जाते है और वे व्यक्ति के जीवन को तबाह कर देते है,भूत-डामर तंत्र में उनकी पहिचान जिस प्रकार से बताई गयी है वह निम्न लिखित है। भूत लगे व्यक्ति की पहिचान जब किसी व्यक्ति को भूत लग जाता है तो वह बहुत ही ज्ञान वाली बातें करता है,उस व्यक्ति के अन्दर इतनी शक्ति आजाती है कि दस दस आदमी अगर उसे संभालने की कोशिश करते है तो भी नही संभाल पाते हैं। देवता लगे व्यक्ति की पहिचान जब लोगों के अन्दर देवता लग जाते है तो वह व्यक्ति सदा पवित्र रहने की कोशिश करता है,उसे किसी से छू तक जाने में दिक्कत हो जाती है वह बार बार नहाता है,पूजा करता है आरती भजन में मन लगाता रहता है,भोजन भी कम हो जाता है नींद भी नही आती है,खुशी होता है तो लोगों को वरदान देने लगता है गुस्सा होता है तो चुपचाप हो जाता है,धूपबत्ती आदि जलाकर रखना और दीपक आदि जलाकर रखना उसकी आदत होती है,संस्कृत का उच्चारण बहुत अच्छी तरह से करता है चाहे उसने कभी संस्कृत पढी भी नही होती है। देवशत्रु लगना देव शत्रु लगने पर व्यक्ति को पसीना बहुत आता है,वह देवताओं की पूजा पाठ में विरोध करता है,किसी भी धर्म की आलोचना करना और अपने द्वारा किये गये काम का बखान करना उसकी आदत होती है,इस प्रकार के व्यक्ति को भूख बहुत लगती है।उसकी भूख कम नही होती है,चाहे उसे कितना ही खिला दिया जाये,देव गुरु शास्त्र धर्म परमात्मा में वह दोष ही निकाला करता है। कसाई वाले काम करने के बाद ऐसा व्यक्ति बहुत खुश होता है।
#🔯ज्योतिष #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅ #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨हनुमान् वडवानल स्तोत्र यह स्तोत्र सभी रोगों के निवारण में, शत्रुनाश, दूसरों के द्वारा किये गये पीड़ा कारक कृत्या अभिचार के निवारण, राज-बंधन विमोचन आदि कई प्रयोगों में काम आता है । विधिः- सरसों के तेल का दीपक जलाकर १०८ पाठ नित्य ४१ दिन तक करने पर सभी बाधाओं का शमन होकर अभीष्ट कार्य की सिद्धि होती है । विनियोगः- ॐ अस्य श्री हनुमान् वडवानल-स्तोत्र-मन्त्रस्य श्रीरामचन्द्र ऋषिः, श्रीहनुमान् वडवानल देवता, ह्रां बीजम्, ह्रीं शक्तिं, सौं कीलकं, मम समस्त विघ्न-दोष-निवारणार्थे, सर्व-शत्रुक्षयार्थे सकल-राज-कुल-संमोहनार्थे, मम समस्त-रोग-प्रशमनार्थम् आयुरारोग्यैश्वर्याऽभिवृद्धयर्थं समस्त-पाप-क्षयार्थं श्रीसीतारामचन्द्र-प्रीत्यर्थं च हनुमद् वडवानल-स्तोत्र जपमहं करिष्ये । ध्यानः- मनोजवं मारुत-तुल्य-वेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं । वातात्मजं वानर-यूथ-मुख्यं श्रीरामदूतम् शरणं प्रपद्ये ।। ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते प्रकट-पराक्रम सकल-दिङ्मण्डल-यशोवितान-धवलीकृत-जगत-त्रितय वज्र-देह रुद्रावतार लंकापुरीदहय उमा-अर्गल-मंत्र उदधि-बंधन दशशिरः कृतान्तक सीताश्वसन वायु-पुत्र अञ्जनी-गर्भ-सम्भूत श्रीराम-लक्ष्मणानन्दकर कपि-सैन्य-प्राकार सुग्रीव-साह्यकरण पर्वतोत्पाटन कुमार-ब्रह्मचारिन् गंभीरनाद सर्व-पाप-ग्रह-वारण-सर्व-ज्वरोच्चाटन डाकिनी-शाकिनी-विध्वंसन ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महावीर-वीराय सर्व-दुःख निवारणाय ग्रह-मण्डल सर्व-भूत-मण्डल सर्व-पिशाच-मण्डलोच्चाटन भूत-ज्वर-एकाहिक-ज्वर, द्वयाहिक-ज्वर, त्र्याहिक-ज्वर चातुर्थिक-ज्वर, संताप-ज्वर, विषम-ज्वर, ताप-ज्वर, माहेश्वर-वैष्णव-ज्वरान् छिन्दि-छिन्दि यक्ष ब्रह्म-राक्षस भूत-प्रेत-पिशाचान् उच्चाटय-उच्चाटय स्वाहा । ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः आं हां हां हां हां ॐ सौं एहि एहि ॐ हं ॐ हं ॐ हं ॐ हं ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते श्रवण-चक्षुर्भूतानां शाकिनी डाकिनीनां विषम-दुष्टानां सर्व-विषं हर हर आकाश-भुवनं भेदय भेदय छेदय छेदय मारय मारय शोषय शोषय मोहय मोहय ज्वालय ज्वालय प्रहारय प्रहारय शकल-मायां भेदय भेदय स्वाहा । ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-हनुमते सर्व-ग्रहोच्चाटन परबलं क्षोभय क्षोभय सकल-बंधन मोक्षणं कुर-कुरु शिरः-शूल गुल्म-शूल सर्व-शूलान्निर्मूलय निर्मूलय नागपाशानन्त-वासुकि-तक्षक-कर्कोटकालियान् यक्ष-कुल-जगत-रात्रिञ्चर-दिवाचर-सर्पान्निर्विषं कुरु-कुरु स्वाहा । ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-हनुमते राजभय चोरभय पर-मन्त्र-पर-यन्त्र-पर-तन्त्र पर-विद्याश्छेदय छेदय सर्व-शत्रून्नासय नाशय असाध्यं साधय साधय हुं फट् स्वाहा । ।। इति विभीषणकृतं हनुमद् वडवानल स्तोत्रं ।। #🔯वास्तु दोष उपाय #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔
#📕लाल किताब उपाय🔯 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✡️सितारों की चाल🌠 #🐍कालसर्प दोष परिहार #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 हनुमान् वडवानल स्तोत्र यह स्तोत्र सभी रोगों के निवारण में, शत्रुनाश, दूसरों के द्वारा किये गये पीड़ा कारक कृत्या अभिचार के निवारण, राज-बंधन विमोचन आदि कई प्रयोगों में काम आता है । विधिः- सरसों के तेल का दीपक जलाकर १०८ पाठ नित्य ४१ दिन तक करने पर सभी बाधाओं का शमन होकर अभीष्ट कार्य की सिद्धि होती है । विनियोगः- ॐ अस्य श्री हनुमान् वडवानल-स्तोत्र-मन्त्रस्य श्रीरामचन्द्र ऋषिः, श्रीहनुमान् वडवानल देवता, ह्रां बीजम्, ह्रीं शक्तिं, सौं कीलकं, मम समस्त विघ्न-दोष-निवारणार्थे, सर्व-शत्रुक्षयार्थे सकल-राज-कुल-संमोहनार्थे, मम समस्त-रोग-प्रशमनार्थम् आयुरारोग्यैश्वर्याऽभिवृद्धयर्थं समस्त-पाप-क्षयार्थं श्रीसीतारामचन्द्र-प्रीत्यर्थं च हनुमद् वडवानल-स्तोत्र जपमहं करिष्ये । ध्यानः- मनोजवं मारुत-तुल्य-वेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं । वातात्मजं वानर-यूथ-मुख्यं श्रीरामदूतम् शरणं प्रपद्ये ।। ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते प्रकट-पराक्रम सकल-दिङ्मण्डल-यशोवितान-धवलीकृत-जगत-त्रितय वज्र-देह रुद्रावतार लंकापुरीदहय उमा-अर्गल-मंत्र उदधि-बंधन दशशिरः कृतान्तक सीताश्वसन वायु-पुत्र अञ्जनी-गर्भ-सम्भूत श्रीराम-लक्ष्मणानन्दकर कपि-सैन्य-प्राकार सुग्रीव-साह्यकरण पर्वतोत्पाटन कुमार-ब्रह्मचारिन् गंभीरनाद सर्व-पाप-ग्रह-वारण-सर्व-ज्वरोच्चाटन डाकिनी-शाकिनी-विध्वंसन ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महावीर-वीराय सर्व-दुःख निवारणाय ग्रह-मण्डल सर्व-भूत-मण्डल सर्व-पिशाच-मण्डलोच्चाटन भूत-ज्वर-एकाहिक-ज्वर, द्वयाहिक-ज्वर, त्र्याहिक-ज्वर चातुर्थिक-ज्वर, संताप-ज्वर, विषम-ज्वर, ताप-ज्वर, माहेश्वर-वैष्णव-ज्वरान् छिन्दि-छिन्दि यक्ष ब्रह्म-राक्षस भूत-प्रेत-पिशाचान् उच्चाटय-उच्चाटय स्वाहा । ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः आं हां हां हां हां ॐ सौं एहि एहि ॐ हं ॐ हं ॐ हं ॐ हं ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते श्रवण-चक्षुर्भूतानां शाकिनी डाकिनीनां विषम-दुष्टानां सर्व-विषं हर हर आकाश-भुवनं भेदय भेदय छेदय छेदय मारय मारय शोषय शोषय मोहय मोहय ज्वालय ज्वालय प्रहारय प्रहारय शकल-मायां भेदय भेदय स्वाहा । ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-हनुमते सर्व-ग्रहोच्चाटन परबलं क्षोभय क्षोभय सकल-बंधन मोक्षणं कुर-कुरु शिरः-शूल गुल्म-शूल सर्व-शूलान्निर्मूलय निर्मूलय नागपाशानन्त-वासुकि-तक्षक-कर्कोटकालियान् यक्ष-कुल-जगत-रात्रिञ्चर-दिवाचर-सर्पान्निर्विषं कुरु-कुरु स्वाहा । ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-हनुमते राजभय चोरभय पर-मन्त्र-पर-यन्त्र-पर-तन्त्र पर-विद्याश्छेदय छेदय सर्व-शत्रून्नासय नाशय असाध्यं साधय साधय हुं फट् स्वाहा । ।। इति विभीषणकृतं हनुमद् वडवानल स्तोत्रं ।।
#🔯ज्योतिष #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅ #🔯वास्तु दोष उपाय #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨ #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔
🔯ज्योतिष - जय श्री महाकाल २७ February एकादशी को 11:32 a.m=10:33 p.m तक भद्रा है तो बड़कुला ढाल चांद सूरज 1१:३२ a.m से पहले बनाएं सुबह जय श्री महाकाल २७ February एकादशी को 11:32 a.m=10:33 p.m तक भद्रा है तो बड़कुला ढाल चांद सूरज 1१:३२ a.m से पहले बनाएं सुबह - ShareChat
#📕लाल किताब उपाय🔯 #✡️सितारों की चाल🌠 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #🐍कालसर्प दोष परिहार #✡️ज्योतिष समाधान 🌟
📕लाल किताब उपाय🔯 - जय श्री महाकाल २७ February एकादशी को 11:32 a.m=10:33 p.m तक भद्रा है तो बड़कुला ढाल चांद सूरज 1१:३२ a.m से पहले बनाएं सुबह जय श्री महाकाल २७ February एकादशी को 11:32 a.m=10:33 p.m तक भद्रा है तो बड़कुला ढाल चांद सूरज 1१:३२ a.m से पहले बनाएं सुबह - ShareChat
#🔯ज्योतिष #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅ #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨गुरु शनि का योग है करियर के लिए शुभ - फलित ज्योतिष में जन्मकुंडली में ग्रहगणना और प्रत्येक ग्रह के अपने अलग महत्व के अतिरिक्त किन्ही दो ग्रहों का एक साथ होना अर्थात दो ग्रहों का योग होना भी एक बहुत महत्वपूर्ण गणना होती है जिसके दोनों ग्रहों की प्रकृति के आधार पर भिन्न भिन्न परिणाम निकलते हैं और दो ग्रहों के योग का फल ज्योतिष का एक वृहद् विषय भी है, तो आज हम यहाँ कुंडली में गुरु अर्थात बृहस्पति और शनि के योग पर चर्चा कर रहे हैं, वैसे तो बृहस्पति और शनि दोनों ही ज्योतिष में अपना अलग विशेष महत्व रखते ही हैं पर बृहस्पति और शनि का योग फलित ज्योतिष में बहुत शुभ और अच्छे परिणाम देने वाला माना गया है तो आईये देखते हैं इस योग के परिणाम – ज्योतिष में बृहस्पति को ज्ञान, विद्या, विवेक, सात्विकता, सच्चरित्रता, समर्पण, प्रबंधन आदि का कारक माना गया है और इन सब के अलावा बृहस्पति जीव अर्थात प्रत्येक व्यक्ति के लिए स्वयं का कारक भी होता है तो वहीँ शनि को कर्म, आजीविका, परिश्रम, दूरदर्शिता, गहन अध्यन, नौकरी, सेवा आदि का कारक मन गया है इसलिए कुंडली में जब बृहस्पति और शनि का योग होता है तो ऐसे में कुछ विशेष गुण व्यक्ति में होते हैं और इसके कुछ विशेष शुभ परिणाम भी प्राप्त होते हैं... यदि कुंडली में बृहस्पति और शनि का योग हो अर्थात दोनों एक साथ हों तो ऐसे में व्यक्ति गहन अध्यनशील अर्थात प्रत्येक बात को बहुत गहराई से सोचने वाला और दूर की सोच रखने वाला होता है आध्यात्मिक और समाजसेवा के कार्यों में भी ऐसे व्यक्ति की विशेष रुचि होती है, ऐसा व्यक्ति गूढ़ ज्ञान की और बहुत आकर्षित होता है उसे रहस्मयी चीजों में रूचि और हर बात की जड़ तक जाने की आदत होती है तो ये सब गुण तो ऐसे में होते ही हैं, पर इसके अलावा बृहसपति और शनि के योग की जो खास बात है वो यह है के बृहस्पति जीव कारक है और शनि कर्म और आजीविका का करक है तो यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में बृहस्पति और शनि का योग हो तो ये एक प्रकार से जीव (स्वयं) और कर्म का योग होता है अतः कुंडली में इस योग के बनने पर व्यक्ति को अपने कर्म और आजीविका से बहुत लगाव होता है ऐसा व्यक्ति अपने कार्यों को तो पूरे समर्पण भाव से करने वाला होता ही है पर व्यक्ति की आजीविका या करियर के लिए बृहस्पति शनि का योग बहुत शुभ माना गया है, इस योग के बनने पर करियर में अच्छी स्थिति में मिलती ही है पर इसके अलावा व्यक्ति अपने कर्म क्षेत्र या आजीविका में कुछ विशेष कार्य भी करता है जिससे अपने कार्य के प्रति समर्पण उस व्यक्ति को विशेष सम्मान और प्रतिष्ठा भी दिलाता है, बृहस्पति और शनि का योग होने पर व्यक्ति में अपने कार्यों को लेकर बहुत डेडिकेशन होती है जिससे अपने करियर में भी व्यक्ति अपने कार्य को पूरे समर्पण से करता है और अपने इसी गुण के कारण व्यक्ति अपने करियर में अच्छी सफलता और अन्यों से कुछ विशेष स्थान को प्राप्त करता है, कुंडली में शनि और बृहस्पति के योग की एक खास बात ये और है के ऐसे में व्यक्ति के करियर की उन्नति और सफलता में उसके गुरु की विशेष भूमिका होती है क्योंकि शनि आजीविका है और बृहस्पति गुरु है इसलिए ऐसे में बहुत बार व्यक्ति अपने गुरु के द्वारा आजीविका प्राप्त करता है। यहाँ एक ध्यान देने वाली बात यह है के यदि बृहस्पति शनि का योग कुंडली में दुःख भावों (6,8,12) में बन रहा हो या दोनों ग्रहों की नीच राशि मेष या मकर में बन रहा हो तो इस योग का पूरा शुभ परिणाम नहीं मिल पाता परन्तु यदि बृहस्पाती शनि का योग केंद्र (1,4,7,10 भाव) त्रिकोण (1,5,9 भाव) या अन्य शुभ भावों में बन रहा हो या तुला व कर्क राशि में हो तो ये योग बहुत शुभ परिणाम देता है और व्यक्ति अपनी आजीविका या करियर में अच्छी उन्नति करता है। #🔯वास्तु दोष उपाय #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔
#📕लाल किताब उपाय🔯 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✡️सितारों की चाल🌠 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🐍कालसर्प दोष परिहार गुरु शनि का योग है करियर के लिए शुभ - फलित ज्योतिष में जन्मकुंडली में ग्रहगणना और प्रत्येक ग्रह के अपने अलग महत्व के अतिरिक्त किन्ही दो ग्रहों का एक साथ होना अर्थात दो ग्रहों का योग होना भी एक बहुत महत्वपूर्ण गणना होती है जिसके दोनों ग्रहों की प्रकृति के आधार पर भिन्न भिन्न परिणाम निकलते हैं और दो ग्रहों के योग का फल ज्योतिष का एक वृहद् विषय भी है, तो आज हम यहाँ कुंडली में गुरु अर्थात बृहस्पति और शनि के योग पर चर्चा कर रहे हैं, वैसे तो बृहस्पति और शनि दोनों ही ज्योतिष में अपना अलग विशेष महत्व रखते ही हैं पर बृहस्पति और शनि का योग फलित ज्योतिष में बहुत शुभ और अच्छे परिणाम देने वाला माना गया है तो आईये देखते हैं इस योग के परिणाम – ज्योतिष में बृहस्पति को ज्ञान, विद्या, विवेक, सात्विकता, सच्चरित्रता, समर्पण, प्रबंधन आदि का कारक माना गया है और इन सब के अलावा बृहस्पति जीव अर्थात प्रत्येक व्यक्ति के लिए स्वयं का कारक भी होता है तो वहीँ शनि को कर्म, आजीविका, परिश्रम, दूरदर्शिता, गहन अध्यन, नौकरी, सेवा आदि का कारक मन गया है इसलिए कुंडली में जब बृहस्पति और शनि का योग होता है तो ऐसे में कुछ विशेष गुण व्यक्ति में होते हैं और इसके कुछ विशेष शुभ परिणाम भी प्राप्त होते हैं... यदि कुंडली में बृहस्पति और शनि का योग हो अर्थात दोनों एक साथ हों तो ऐसे में व्यक्ति गहन अध्यनशील अर्थात प्रत्येक बात को बहुत गहराई से सोचने वाला और दूर की सोच रखने वाला होता है आध्यात्मिक और समाजसेवा के कार्यों में भी ऐसे व्यक्ति की विशेष रुचि होती है, ऐसा व्यक्ति गूढ़ ज्ञान की और बहुत आकर्षित होता है उसे रहस्मयी चीजों में रूचि और हर बात की जड़ तक जाने की आदत होती है तो ये सब गुण तो ऐसे में होते ही हैं, पर इसके अलावा बृहसपति और शनि के योग की जो खास बात है वो यह है के बृहस्पति जीव कारक है और शनि कर्म और आजीविका का करक है तो यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में बृहस्पति और शनि का योग हो तो ये एक प्रकार से जीव (स्वयं) और कर्म का योग होता है अतः कुंडली में इस योग के बनने पर व्यक्ति को अपने कर्म और आजीविका से बहुत लगाव होता है ऐसा व्यक्ति अपने कार्यों को तो पूरे समर्पण भाव से करने वाला होता ही है पर व्यक्ति की आजीविका या करियर के लिए बृहस्पति शनि का योग बहुत शुभ माना गया है, इस योग के बनने पर करियर में अच्छी स्थिति में मिलती ही है पर इसके अलावा व्यक्ति अपने कर्म क्षेत्र या आजीविका में कुछ विशेष कार्य भी करता है जिससे अपने कार्य के प्रति समर्पण उस व्यक्ति को विशेष सम्मान और प्रतिष्ठा भी दिलाता है, बृहस्पति और शनि का योग होने पर व्यक्ति में अपने कार्यों को लेकर बहुत डेडिकेशन होती है जिससे अपने करियर में भी व्यक्ति अपने कार्य को पूरे समर्पण से करता है और अपने इसी गुण के कारण व्यक्ति अपने करियर में अच्छी सफलता और अन्यों से कुछ विशेष स्थान को प्राप्त करता है, कुंडली में शनि और बृहस्पति के योग की एक खास बात ये और है के ऐसे में व्यक्ति के करियर की उन्नति और सफलता में उसके गुरु की विशेष भूमिका होती है क्योंकि शनि आजीविका है और बृहस्पति गुरु है इसलिए ऐसे में बहुत बार व्यक्ति अपने गुरु के द्वारा आजीविका प्राप्त करता है। यहाँ एक ध्यान देने वाली बात यह है के यदि बृहस्पति शनि का योग कुंडली में दुःख भावों (6,8,12) में बन रहा हो या दोनों ग्रहों की नीच राशि मेष या मकर में बन रहा हो तो इस योग का पूरा शुभ परिणाम नहीं मिल पाता परन्तु यदि बृहस्पाती शनि का योग केंद्र (1,4,7,10 भाव) त्रिकोण (1,5,9 भाव) या अन्य शुभ भावों में बन रहा हो या तुला व कर्क राशि में हो तो ये योग बहुत शुभ परिणाम देता है और व्यक्ति अपनी आजीविका या करियर में अच्छी उन्नति करता है।