एस्ट्रो मनोज कौशिक बहल यंत्र मंत्र तंत्र विशेषज्ञ
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#🔯ज्योतिष #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅ #🔯वास्तु दोष उपायकाले जादू के लक्षण बिना किसी रोग यदि आपका पूरा शरीर पीड़ा कर रहा हैया शरीर में किसी भी प्रकार की कोई पीड़ा है, तो ये भीकाला जादू का एक लक्षण है । यदि आपको आपके पूरे शरीर में आग का अनुभव होरहा है और उसके कारण आपका पूरा शरीर तप रहा है। यदि आपका ह्रदय अस्वाभाविक गति से धड़क रहा हैऔर आपको लग रहा है कि आपको संास लेने मेंदिक्कत हो रही है लगातार आपकी छाती में दर्द है, तो येभी एक लक्षण हो सकता है । आपके मुह का रंग पीला पड़ना ये भी एक कारण है किजितना शक्तिशाली जादू होगा आपके मुह का रंग भीउतना ही पीला पड़ता जायेगा। सुख का अनुभव नहीं होगा अगर आपके पास भरपूरसुख है और फिर भी आप दुखी हैं और आपको किसीभी प्रकार का कोई भी सुख आनंद नहीं दे रहा। बार बार भूख लगना आप जो भी खाएँ वो जल्दी हीहजम हो जाये जिसके कारण आपको बार–बार भूखलगे। सतत बीमारी का होना और सभी उपचार असफलरहना। लगातार चिंता, आत्महत्या की प्रवृत्ति,घर और परिवार सेस्थानांतरित होने की इच्छा. परिवार के किसी भी सदस्य की सतत बीमारी. किसी भी शारीरिक कमी के बिना या किसी भी चिकित्साकारण के बिना बाँझपन,. गर्भपात या बच्चों की मौत.परिवार में अचानकअस्वाभाविक मौत जीवन साथी या परिवार के बीच कलह दुश्मनों का भय *यह कुछ लक्षण है । अगर आपको भी इन मे से किसी की अनुभूति होती है तो हो सकता है आप पर काला जादू हुआ हो फिर भी यह जरूरी नही ही काला जादू ही हो ।* #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨ #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔
#🔯ज्योतिष #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅ #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #🔯वास्तु दोष उपाय #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨ कोई मकान, दुकान, भूखंड या पलाट भूत-प्रेत, पिशाच, तांत्रिक, ओझा, डाकिनी या शाकिनी के अभिचार कर्म प्रभावित हो, तो उस मकान, दुकान, भूखंड या पलाट में भोजपत्र पर अष्टगंध की स्याही और अनार की कलम से उपरोक्त मन्त्र को लिखकर लगा दें | ( अगर उपलब्ध नहीं हो सके तो किसी भी साधारण से सफ़ेद कागज पर लाल या काली स्याही प्रयोग करें ) मन्त्र को लिखते समय इस मन्त्र का मन ही मन उच्चारण भी करते रहें और फिर उस मकान, दुकान, भूखंड या पलाट में लगा दे | इसके प्रभाव से वह जगह भूत-प्रेत, पिशाच, तांत्रिक, ओझा, डाकिनी या शाकिनी के अभिचार कर्म से मुक्त हो जाएगीं मंत्र नाम पाहरू दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट । लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहिं बाट यह हनुमान जी का बहुत ही शक्तिशाली मंत्र है अत: बिना किसी संदेह के इसे प्रयोग करें Jai shri mahakaal 9416361308
#📕लाल किताब उपाय🔯 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🐍कालसर्प दोष परिहार #✡️सितारों की चाल🌠 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी कोई मकान, दुकान, भूखंड या पलाट भूत-प्रेत, पिशाच, तांत्रिक, ओझा, डाकिनी या शाकिनी के अभिचार कर्म प्रभावित हो, तो उस मकान, दुकान, भूखंड या पलाट में भोजपत्र पर अष्टगंध की स्याही और अनार की कलम से उपरोक्त मन्त्र को लिखकर लगा दें | ( अगर उपलब्ध नहीं हो सके तो किसी भी साधारण से सफ़ेद कागज पर लाल या काली स्याही प्रयोग करें ) मन्त्र को लिखते समय इस मन्त्र का मन ही मन उच्चारण भी करते रहें और फिर उस मकान, दुकान, भूखंड या पलाट में लगा दे | इसके प्रभाव से वह जगह भूत-प्रेत, पिशाच, तांत्रिक, ओझा, डाकिनी या शाकिनी के अभिचार कर्म से मुक्त हो जाएगीं मंत्र नाम पाहरू दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट । लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहिं बाट यह हनुमान जी का बहुत ही शक्तिशाली मंत्र है अत: बिना किसी संदेह के इसे प्रयोग करें Jai shri mahakaal 9416361308
#🔯ज्योतिष #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅ #🔯वास्तु दोष उपायरावण संहिता के अनुसार ज्योतिष मे सफलता प्राप्ति के लिये शक्तिशाली मंत्र इसके जाप से वाणी सिद्ध होने लगती है कुछ ही दिन के बाद आपको ये भी मालूम होने लगता है की सामने वाले के मन मे क्या है पर जाप बस निरंतर होना चाहिये मन्त्र अति शक्तिशाली है जाप करने का समय सुबह 30 मिंट से 1 घंटे तक किया जा सकता है मन्त्र ओउम नमो भगवती श्रुत देवी हंस वाहिनी त्रिकाल निमित्त प्रकाशिनी सर्व कार्य प्रकाशिनी सत भावे सत भाषे असत का प्रहार करे ओउम नमो श्रुत देवी स्वाहा इस मन्त्र के निरंतर जाप से आप पर मां सरस्वती की पूर्ण कृपा होगी और वाणी से निकला हर शब्द सत्‍य सीध होगा आजमा कर देख लो पर साथ ही हर पूर्णिमा को खीर का भोग देवी को लगाना मत भूलना #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨
#📕लाल किताब उपाय🔯 #🐍कालसर्प दोष परिहार #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #✡️सितारों की चाल🌠 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी रावण संहिता के अनुसार ज्योतिष मे सफलता प्राप्ति के लिये शक्तिशाली मंत्र इसके जाप से वाणी सिद्ध होने लगती है कुछ ही दिन के बाद आपको ये भी मालूम होने लगता है की सामने वाले के मन मे क्या है पर जाप बस निरंतर होना चाहिये मन्त्र अति शक्तिशाली है जाप करने का समय सुबह 30 मिंट से 1 घंटे तक किया जा सकता है मन्त्र ओउम नमो भगवती श्रुत देवी हंस वाहिनी त्रिकाल निमित्त प्रकाशिनी सर्व कार्य प्रकाशिनी सत भावे सत भाषे असत का प्रहार करे ओउम नमो श्रुत देवी स्वाहा इस मन्त्र के निरंतर जाप से आप पर मां सरस्वती की पूर्ण कृपा होगी और वाणी से निकला हर शब्द सत्‍य सीध होगा आजमा कर देख लो पर साथ ही हर पूर्णिमा को खीर का भोग देवी को लगाना मत भूलना
#🔯ज्योतिष #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅ #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #🔯वास्तु दोष उपाय #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨ जानिए क्या करता है नकारात्मक राहू --- आइये राहू के बारे मै कुछ नकारात्मक बाते जाने । ये हम सब जानते है की गुरु राहु चांडाल दोष, सूर्य राहु पितृ दोष, ग्रहण दोष, चन्द्र राहु ग्रहण दोष, शनि राहु शापित दोष, मंगल राहु अंगारक दोष बनाते है। मतलब 100 लीटर दूध मै एक बून्द निम्बू की दूध फाड़ देती है । इसी तरह राहु का साथ शुभ ग्रह को खराब कर देता है । इस ग्रह का हर किसी की जिंदगी पर अलग अलग प्रभाव पढ़ता है । जिंदगी मे इसका अधिक प्रभाव पूर्ण नास्तिक से लेकर पागलपन तक बना देता है । ये निर्भर करता है की राहू आपकी जिंदगी मै कितने अंश का है, और प्रभावी ग्रह, स्थान कितना कमजोर है । जब कुंडली मे शनि नीच राशि, कमजोर या दुष्प्रभाव मै हो तब राहू और खराब असर देने लगता है। ज्योतिष के अनुसार राहु शोध, कटु भाषण, विदेश, चीज़ों की कमी और उनकी चाहत, तर्क, झूठ, चालाकी, शक्ति, गरिमा, जुआ, झगड़ा, आत्महत्या, गुलामी, गलत तर्क आदि का प्रतीक है। वहीं केतू अंतिम मुक्ति, कारावास, मोक्ष, आत्महत्या, दोषी व्यक्ति, हत्या, व्यभिचार, जानवर, उपभोग, दर्दनाक बुखार, महान तपस्या, मन की अस्थिरता तथा विदेशी लोगों से संबंध का प्रतीक माना जाता है। राहु और केतू किसी व्यक्ति को किस तरह प्रभावित करेंगे ये उस व्यक्ति की कुंडली पर निर्भर करता है। कुंडली में जिस स्थान पर पर ये ग्रह बैठे होंगे और जिन भी ग्रहों की दृष्टि इन दोनों पर पड़ रही होगी उसी के अनुसार व्यक्ति के भाग्य पर प्रभाव पड़ेगा। अगर राहु और केतू आपकी कुंडली में सही जगह पर बैठे हों तो ये संबंधित स्थान के प्रभावों को बढ़ा देते हैं लेकिन यदि इनकी स्थिति विपरीत हुई तो व्यक्ति को संबंधित क्षेत्र में सचेत रहना आवश्यक है। अगर आपकी कुंडली में राहु दोष है तो आपको मानसिक तनाव, आर्थिक नुकसान, स्वयं को ले कर ग़लतफहमी, आपसी तालमेल में कमी, बात बात पर आपा खोना, वाणी का कठोर होना और अपशब्द बोलना साथ ही अगर आपकी कुंडली में राहु की स्थिति अशुभ हौ तो आपके हाथ के नाखून अपने आप टूटने लगते हैं। इसके साथ ही वाहन दुर्घटना, पेट में कोई समस्या, सिर में दर्द होना, भोजन में बाल दिखना, अपयश की प्राप्ति, संबंध ख़राब होना, दिमागी संतुलन ठीक नहीं रहता है, शत्रुओं की ओर से परेशान आदि आपकी कुंडली में राहु के खराब होने के संकेत है। कई बार राहू आपको भय भी देता है, एक अज्ञात सा भय, अक्सर इसका असर अमावस्या पर दिखाई देता है, राहु ग्रह पेट की समस्या ज्यादा देता है, आप हर इलाज करवा लीजिये,पुरे संसार मै घूम लीजिये, हर रिपोर्ट ठीक आयगी,पर पेट का दर्द ठीक नही होगा जब तक राहू का इलाज नही करवाया जाए । राहु के मुख्य लक्षण (प्रभाव)---पेट के रोग, दिमागी रोग, पागलपन, खाजखुजली ,भूत -चुडैल का शरीर में प्रवेश, बिना बात के ही झूमना, नशे की आदत लगना, गलत स्त्रियों या पुरुषों के साथ सम्बन्ध बनाकर विभिन्न प्रकार के रोग लगा लेना, शराब और शबाब के चक्कर में अपने को बरबाद कर लेना,लगातार टीवी और मनोरंजन के साधनों में अपना मन लगाकर बैठना, होरर शो देखने की आदत होना, भूत प्रेत और रूहानी ताकतों के लिये जादू या शमशानी काम करना, नेट पर बैठ कर बेकार की स्त्रियों और पुरुषों के साथ चैटिंग करना और दिमाग खराब करते रहना, कृत्रिम साधनो से अपने शरीर के सूर्य यानी वीर्य को झाडते रहना, शरीर के अन्दर अति कामुकता के चलते लगातार यौन सम्बन्धों को बनाते रहना और बाद में वीर्य के समाप्त होने पर या स्त्रियों में रज के खत्म होने पर टीबी तपेदिक फ़ेफ़डों की बीमारियां लगाकर जीवन को खत्म करने के उपाय करना, शरीर की नशें काटकर उनसे खून निकाल कर अपने खून रूपी मंगल को समाप्त कर जीवन को समाप्त करना, ड्र्ग लेने की आदत डाल लेना, नींद नही आना, शरीर में चींटियों के रेंगने का अहसास होना,गाली देने की आदत पड जाना,सडक पर गाडी आदि चलाते वक्त अपना पौरुष दिखाना या कलाबाजी दिखाने के चक्कर में शरीर को तोड लेना, बाजी नामक रोग लगा लेना, जैसे गाडीबाजी, आदि, इन रोगों के अन्य रोग भी राहु के है, जैसे कि किसी दूसरे के मामले में अपने को दाखिल करने के बाद दो लोगों को आपस में लडाकर दूर बैठ कर तमाशा देखना, लोगों को क्लिप बनाकर लूटने की क्रिया करना और इन कामों के द्वारा जनता का जीवन बिना किसी हथियार के बरबाद करना भी है। अगर उपरोक्त प्रकार के भाव मिलते है, तो समझना चाहिये कि किसी न किसी प्रकार से राहु का प्रकोप शरीर पर है, या तो गोचर से राहु अपनी शक्ति देकर मनुष्य जीवन को जानवर की गति प्रदान कर रहा है, अथवा राहु की दशा चल रही है, और पुराने पूर्वजों की गल्तियों के कारण जातक को इस प्रकार से उनके पाप भुगतने के लिये राहु प्रयोग कर रहा है। राहु का सकारात्मक प्रभाव - कभी आपने सूना की किसी को अचानक लाटरी निकल गयी, या मकान खोदने पर गढ़ा हुआ धन निकला, या राजनीति मे अचानक ऊँचे पद पर पहुंच गया,या सट्टा बाजार मै करोड़ो कमाए। ये सब राहू जी के ही कार्य है । अब फिर से समझे की ये तय हो गया की राहु राक्षस है, फिर अमृत को चख कर वो बलशाली हो गया। किन्तु उसकी आदत नकारात्मक ही होती है। लेकिन एक नकारात्मक व्यक्ति भी किसी न किसी पर मेहरबान तो होता ही है, एक गुंडा, बदमाश भी किसी को चाहता तो होगा । वैसे ही राहु सबका बुरा करता है , लेकिन जब अपने उच्च घर मिथुन पुरातन काल अनुसार कहना है वृषभ मै भी जब विराजमान होते है, कन्या राशि मे होते है, तब बहुत ही सकारात्मक प्रभाव देते है, फर्श से अर्श तक, याने जमीन से आसमान तक पहुचाने का कार्य भी इनका ही है । जब शनि शुभ हो,और राहु भी शुभ हो तो समय बदलते देर नही लगती । जो इंसान के पास चाय पीने को रूपये नही रहते वो राहु के समय परिवर्तन के साथ करोड़ो की सम्पत्ति का मालिक बन जाता है । मतलब एक ग्रह गोबर को सोना भी बना सकता है, और सोने को गोबर भी बना देता है । सही मायनो मै राहू को समझ पाना बहुत ही कठिन होता है, क्योकि उसमे नकारात्मक और सकारात्मक दोनों के गुण है, एक तरफ राक्षस प्रवर्ति , दूसरी और अमृत का अंश चखकर देव गुण । यदि एक सर्प के काटने से हमारी मौत हो सकती है, तो दूसरी और सर्प का जहर हमारी जिंदगी भी बचा सकता है । हर ज्योतिष राहु के नाम पर अक्सर नकारात्मक भ्रामक विचार रखते है, लेकिन हर भाव मे जब यह ग्रह सकारात्मक प्रभाव देता है, तो इंसान को बलशाली से लेकर प्रभावशाली व्यक्ति तक बना देता है। क्या आप जानते हो की कलाकारों की एक्टिंग मै भी राहु और शुक्र की विशेष कृपा जरूरी होती है। कई लोग शनि या राहु को गाली देकर बात करते हैं, यह अनुचित है। ये कुछ भी नहीं करते, आपके किए हुए कर्मों का तद्नुसार ही फल देते हैं। क्या आश्चर्य की बात है कि स्वतंत्र भारत के अधिकांश प्रधानमंत्री राहु के कारण ही इतना ऊंचा राजयोग पा सके हैं। राहु के कारण ही इंदिरा गांधी सफल रहीं और उन्हीं के कारण राजीव गांधी का राज्यारोहण हुआ। अटल बिहारी वाजपेयी को भी राहु ने बहुत कुछ दिया। उनकी दशांश कुण्डली में तुला में राहु बैठे हैं जिसकी दशा में उन्हें राजयोग मिला। आप सूर्य भगवान की पूजा करें और राहु की उपेक्षा करें तो यह चल नहीं सकता क्योंकि नवग्रह मण्डल में राहु को महत्वपूर्ण स्थान दिया हुआ है। सभी ग्रहों से समान कृपा प्राप्त होने पर ही हम अपने विंशोत्तरी दशा के अनुसार जीवन वर्ष प्राप्त कर सकते हैं और जीवन को सफलता से भोग सकते हैं। राहु बहुत बड़े-बड़े योग बनाते हैं और बड़े-बड़े योग भंग कर देते हैं। पाराशर राहु की प्रशंसा में कहते हैं कि यदि केन्द्राधिपति से युत होकर वे केन्द्र में स्थित हो जाएं तो महान राजयोगकारक होते हैं और अपनी दशा में शुभ फल देते हैं।
#📕लाल किताब उपाय🔯 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🐍कालसर्प दोष परिहार #✡️सितारों की चाल🌠 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी जानिए क्या करता है नकारात्मक राहू --- आइये राहू के बारे मै कुछ नकारात्मक बाते जाने । ये हम सब जानते है की गुरु राहु चांडाल दोष, सूर्य राहु पितृ दोष, ग्रहण दोष, चन्द्र राहु ग्रहण दोष, शनि राहु शापित दोष, मंगल राहु अंगारक दोष बनाते है। मतलब 100 लीटर दूध मै एक बून्द निम्बू की दूध फाड़ देती है । इसी तरह राहु का साथ शुभ ग्रह को खराब कर देता है । इस ग्रह का हर किसी की जिंदगी पर अलग अलग प्रभाव पढ़ता है । जिंदगी मे इसका अधिक प्रभाव पूर्ण नास्तिक से लेकर पागलपन तक बना देता है । ये निर्भर करता है की राहू आपकी जिंदगी मै कितने अंश का है, और प्रभावी ग्रह, स्थान कितना कमजोर है । जब कुंडली मे शनि नीच राशि, कमजोर या दुष्प्रभाव मै हो तब राहू और खराब असर देने लगता है। ज्योतिष के अनुसार राहु शोध, कटु भाषण, विदेश, चीज़ों की कमी और उनकी चाहत, तर्क, झूठ, चालाकी, शक्ति, गरिमा, जुआ, झगड़ा, आत्महत्या, गुलामी, गलत तर्क आदि का प्रतीक है। वहीं केतू अंतिम मुक्ति, कारावास, मोक्ष, आत्महत्या, दोषी व्यक्ति, हत्या, व्यभिचार, जानवर, उपभोग, दर्दनाक बुखार, महान तपस्या, मन की अस्थिरता तथा विदेशी लोगों से संबंध का प्रतीक माना जाता है। राहु और केतू किसी व्यक्ति को किस तरह प्रभावित करेंगे ये उस व्यक्ति की कुंडली पर निर्भर करता है। कुंडली में जिस स्थान पर पर ये ग्रह बैठे होंगे और जिन भी ग्रहों की दृष्टि इन दोनों पर पड़ रही होगी उसी के अनुसार व्यक्ति के भाग्य पर प्रभाव पड़ेगा। अगर राहु और केतू आपकी कुंडली में सही जगह पर बैठे हों तो ये संबंधित स्थान के प्रभावों को बढ़ा देते हैं लेकिन यदि इनकी स्थिति विपरीत हुई तो व्यक्ति को संबंधित क्षेत्र में सचेत रहना आवश्यक है। अगर आपकी कुंडली में राहु दोष है तो आपको मानसिक तनाव, आर्थिक नुकसान, स्वयं को ले कर ग़लतफहमी, आपसी तालमेल में कमी, बात बात पर आपा खोना, वाणी का कठोर होना और अपशब्द बोलना साथ ही अगर आपकी कुंडली में राहु की स्थिति अशुभ हौ तो आपके हाथ के नाखून अपने आप टूटने लगते हैं। इसके साथ ही वाहन दुर्घटना, पेट में कोई समस्या, सिर में दर्द होना, भोजन में बाल दिखना, अपयश की प्राप्ति, संबंध ख़राब होना, दिमागी संतुलन ठीक नहीं रहता है, शत्रुओं की ओर से परेशान आदि आपकी कुंडली में राहु के खराब होने के संकेत है। कई बार राहू आपको भय भी देता है, एक अज्ञात सा भय, अक्सर इसका असर अमावस्या पर दिखाई देता है, राहु ग्रह पेट की समस्या ज्यादा देता है, आप हर इलाज करवा लीजिये,पुरे संसार मै घूम लीजिये, हर रिपोर्ट ठीक आयगी,पर पेट का दर्द ठीक नही होगा जब तक राहू का इलाज नही करवाया जाए । राहु के मुख्य लक्षण (प्रभाव)---पेट के रोग, दिमागी रोग, पागलपन, खाजखुजली ,भूत -चुडैल का शरीर में प्रवेश, बिना बात के ही झूमना, नशे की आदत लगना, गलत स्त्रियों या पुरुषों के साथ सम्बन्ध बनाकर विभिन्न प्रकार के रोग लगा लेना, शराब और शबाब के चक्कर में अपने को बरबाद कर लेना,लगातार टीवी और मनोरंजन के साधनों में अपना मन लगाकर बैठना, होरर शो देखने की आदत होना, भूत प्रेत और रूहानी ताकतों के लिये जादू या शमशानी काम करना, नेट पर बैठ कर बेकार की स्त्रियों और पुरुषों के साथ चैटिंग करना और दिमाग खराब करते रहना, कृत्रिम साधनो से अपने शरीर के सूर्य यानी वीर्य को झाडते रहना, शरीर के अन्दर अति कामुकता के चलते लगातार यौन सम्बन्धों को बनाते रहना और बाद में वीर्य के समाप्त होने पर या स्त्रियों में रज के खत्म होने पर टीबी तपेदिक फ़ेफ़डों की बीमारियां लगाकर जीवन को खत्म करने के उपाय करना, शरीर की नशें काटकर उनसे खून निकाल कर अपने खून रूपी मंगल को समाप्त कर जीवन को समाप्त करना, ड्र्ग लेने की आदत डाल लेना, नींद नही आना, शरीर में चींटियों के रेंगने का अहसास होना,गाली देने की आदत पड जाना,सडक पर गाडी आदि चलाते वक्त अपना पौरुष दिखाना या कलाबाजी दिखाने के चक्कर में शरीर को तोड लेना, बाजी नामक रोग लगा लेना, जैसे गाडीबाजी, आदि, इन रोगों के अन्य रोग भी राहु के है, जैसे कि किसी दूसरे के मामले में अपने को दाखिल करने के बाद दो लोगों को आपस में लडाकर दूर बैठ कर तमाशा देखना, लोगों को क्लिप बनाकर लूटने की क्रिया करना और इन कामों के द्वारा जनता का जीवन बिना किसी हथियार के बरबाद करना भी है। अगर उपरोक्त प्रकार के भाव मिलते है, तो समझना चाहिये कि किसी न किसी प्रकार से राहु का प्रकोप शरीर पर है, या तो गोचर से राहु अपनी शक्ति देकर मनुष्य जीवन को जानवर की गति प्रदान कर रहा है, अथवा राहु की दशा चल रही है, और पुराने पूर्वजों की गल्तियों के कारण जातक को इस प्रकार से उनके पाप भुगतने के लिये राहु प्रयोग कर रहा है। राहु का सकारात्मक प्रभाव - कभी आपने सूना की किसी को अचानक लाटरी निकल गयी, या मकान खोदने पर गढ़ा हुआ धन निकला, या राजनीति मे अचानक ऊँचे पद पर पहुंच गया,या सट्टा बाजार मै करोड़ो कमाए। ये सब राहू जी के ही कार्य है । अब फिर से समझे की ये तय हो गया की राहु राक्षस है, फिर अमृत को चख कर वो बलशाली हो गया। किन्तु उसकी आदत नकारात्मक ही होती है। लेकिन एक नकारात्मक व्यक्ति भी किसी न किसी पर मेहरबान तो होता ही है, एक गुंडा, बदमाश भी किसी को चाहता तो होगा । वैसे ही राहु सबका बुरा करता है , लेकिन जब अपने उच्च घर मिथुन पुरातन काल अनुसार कहना है वृषभ मै भी जब विराजमान होते है, कन्या राशि मे होते है, तब बहुत ही सकारात्मक प्रभाव देते है, फर्श से अर्श तक, याने जमीन से आसमान तक पहुचाने का कार्य भी इनका ही है । जब शनि शुभ हो,और राहु भी शुभ हो तो समय बदलते देर नही लगती । जो इंसान के पास चाय पीने को रूपये नही रहते वो राहु के समय परिवर्तन के साथ करोड़ो की सम्पत्ति का मालिक बन जाता है । मतलब एक ग्रह गोबर को सोना भी बना सकता है, और सोने को गोबर भी बना देता है । सही मायनो मै राहू को समझ पाना बहुत ही कठिन होता है, क्योकि उसमे नकारात्मक और सकारात्मक दोनों के गुण है, एक तरफ राक्षस प्रवर्ति , दूसरी और अमृत का अंश चखकर देव गुण । यदि एक सर्प के काटने से हमारी मौत हो सकती है, तो दूसरी और सर्प का जहर हमारी जिंदगी भी बचा सकता है । हर ज्योतिष राहु के नाम पर अक्सर नकारात्मक भ्रामक विचार रखते है, लेकिन हर भाव मे जब यह ग्रह सकारात्मक प्रभाव देता है, तो इंसान को बलशाली से लेकर प्रभावशाली व्यक्ति तक बना देता है। क्या आप जानते हो की कलाकारों की एक्टिंग मै भी राहु और शुक्र की विशेष कृपा जरूरी होती है। कई लोग शनि या राहु को गाली देकर बात करते हैं, यह अनुचित है। ये कुछ भी नहीं करते, आपके किए हुए कर्मों का तद्नुसार ही फल देते हैं। क्या आश्चर्य की बात है कि स्वतंत्र भारत के अधिकांश प्रधानमंत्री राहु के कारण ही इतना ऊंचा राजयोग पा सके हैं। राहु के कारण ही इंदिरा गांधी सफल रहीं और उन्हीं के कारण राजीव गांधी का राज्यारोहण हुआ। अटल बिहारी वाजपेयी को भी राहु ने बहुत कुछ दिया। उनकी दशांश कुण्डली में तुला में राहु बैठे हैं जिसकी दशा में उन्हें राजयोग मिला। आप सूर्य भगवान की पूजा करें और राहु की उपेक्षा करें तो यह चल नहीं सकता क्योंकि नवग्रह मण्डल में राहु को महत्वपूर्ण स्थान दिया हुआ है। सभी ग्रहों से समान कृपा प्राप्त होने पर ही हम अपने विंशोत्तरी दशा के अनुसार जीवन वर्ष प्राप्त कर सकते हैं और जीवन को सफलता से भोग सकते हैं। राहु बहुत बड़े-बड़े योग बनाते हैं और बड़े-बड़े योग भंग कर देते हैं। पाराशर राहु की प्रशंसा में कहते हैं कि यदि केन्द्राधिपति से युत होकर वे केन्द्र में स्थित हो जाएं तो महान राजयोगकारक होते हैं और अपनी दशा में शुभ फल देते हैं।
#🔯ज्योतिष #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅ #🔯वास्तु दोष उपायबृहस्पति और शुक्र दो ग्रह हैं जो पुरूष और स्त्री का प्रतिनिधित्व करते हैं.मुख्य रूप ये दो ग्रह वैवाहिक जीवन में सुख दु:ख, संयोग और वियोग का फल देते हैं. बृहस्पति और शुक्र दोनों ही शुभ ग्रह हैं .सप्तम भाव जीवन साथी का घर होता है .इस घर में इन दोनों ग्रहों की स्थिति एवं प्रभाव के अनुसार विवाह एवं दाम्पत्य सुख का सुखद अथवा दुखद फल मिलता है.पुरूष की कुण्डली में शुक्र ग्रह पत्नी एवं वैवाहिक सुख का कारक होता है और स्त्री की कुण्डली में बृहस्पति.ये दोनों ग्रह स्त्री एवं पुरूष की कुण्डली में जहां स्थित होते हैं और जिन स्थानों को देखते हैं उनके अनुसार जीवनसाथी मिलता है और वैवाहिक सुख प्राप्त होता है. ज्योतिषशास्त्र का नियम है कि बृहस्पति जिस भाव में होता हैं उस भाव के फल को दूषित करता है (Jupiter has bad effect on the house it is in) और जिस भाव पर इनकी दृष्टि होती है उस भाव से सम्बन्धित शुभ फल प्रदान करते हैं.जिस स्त्री अथवा पुरूष की कुण्डली में गुरू सप्तम भाव में विराजमान होता हैं उनका विवाह या तो विलम्ब से होता है अथवा दाम्पत्य जीवन के सुख में कमी आती है.पति पत्नी में अनबन और क्लेश के कारण गृहस्थी में उथल पुथल मची रहती है. दाम्पत्य जीवन को सुखी बनाने में बृहस्पति और शुक्र का सप्तम भाव और सप्तमेश से सम्बन्ध महत्वपूर्ण होता है.जिस पुरूष की कुण्डली में सप्तम भाव, सप्तमेश और विवाह कारक ग्रह शुक बृहस्पति से युत या दृष्ट होता है उसे सुन्दर गुणों वाली अच्छी जीवनसंगिनी मिलती है.इसी प्रकार जिस स्त्री की कुण्डली में सप्तम भाव, सप्तमेश और विवाह कारक ग्रह बृहस्पति शुक्र से युत या दृष्ट होता है उसे सुन्दर और अच्छे संस्कारों वाला पति मिलता है. शुक्र भी बृहस्पति के समान सप्तम भाव में सफल वैवाहिक जीवन के लिए शुभ नहीं माना जाता है.सप्तम भाव का शुक्र व्यक्ति को अधिक कामुक बनाता है जिससे विवाहेत्तर सम्बन्ध की संभावना प्रबल रहती है.विवाहेत्तर सम्बन्ध के कारण वैवाहिक जीवन में क्लेश के कारण गृहस्थ जीवन का सुख नष्ट होता है.बृहस्पति और शुक्र जब सप्तम भाव को देखते हैं अथवा सप्तमेश पर दृष्टि डालते हैं तो इस स्थिति में वैवाहिक जीवन सफल और सुखद होता है.लग्न में बृहस्पति अगर पापकर्तरी योग से पीड़ित होता है तो सप्तम भाव पर इसकी दृष्टि का शुभ प्रभाव नहीं होता है ऐसे में सप्तमेश कमज़ोर हो या शुक्र के साथ हो तो दाम्पत्य जीवन सुखद और सफल रहने की संभावना कम रहती है. #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨
#📕लाल किताब उपाय🔯 #🐍कालसर्प दोष परिहार #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #✡️सितारों की चाल🌠 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी बृहस्पति और शुक्र दो ग्रह हैं जो पुरूष और स्त्री का प्रतिनिधित्व करते हैं.मुख्य रूप ये दो ग्रह वैवाहिक जीवन में सुख दु:ख, संयोग और वियोग का फल देते हैं. बृहस्पति और शुक्र दोनों ही शुभ ग्रह हैं .सप्तम भाव जीवन साथी का घर होता है .इस घर में इन दोनों ग्रहों की स्थिति एवं प्रभाव के अनुसार विवाह एवं दाम्पत्य सुख का सुखद अथवा दुखद फल मिलता है.पुरूष की कुण्डली में शुक्र ग्रह पत्नी एवं वैवाहिक सुख का कारक होता है और स्त्री की कुण्डली में बृहस्पति.ये दोनों ग्रह स्त्री एवं पुरूष की कुण्डली में जहां स्थित होते हैं और जिन स्थानों को देखते हैं उनके अनुसार जीवनसाथी मिलता है और वैवाहिक सुख प्राप्त होता है. ज्योतिषशास्त्र का नियम है कि बृहस्पति जिस भाव में होता हैं उस भाव के फल को दूषित करता है (Jupiter has bad effect on the house it is in) और जिस भाव पर इनकी दृष्टि होती है उस भाव से सम्बन्धित शुभ फल प्रदान करते हैं.जिस स्त्री अथवा पुरूष की कुण्डली में गुरू सप्तम भाव में विराजमान होता हैं उनका विवाह या तो विलम्ब से होता है अथवा दाम्पत्य जीवन के सुख में कमी आती है.पति पत्नी में अनबन और क्लेश के कारण गृहस्थी में उथल पुथल मची रहती है. दाम्पत्य जीवन को सुखी बनाने में बृहस्पति और शुक्र का सप्तम भाव और सप्तमेश से सम्बन्ध महत्वपूर्ण होता है.जिस पुरूष की कुण्डली में सप्तम भाव, सप्तमेश और विवाह कारक ग्रह शुक बृहस्पति से युत या दृष्ट होता है उसे सुन्दर गुणों वाली अच्छी जीवनसंगिनी मिलती है.इसी प्रकार जिस स्त्री की कुण्डली में सप्तम भाव, सप्तमेश और विवाह कारक ग्रह बृहस्पति शुक्र से युत या दृष्ट होता है उसे सुन्दर और अच्छे संस्कारों वाला पति मिलता है. शुक्र भी बृहस्पति के समान सप्तम भाव में सफल वैवाहिक जीवन के लिए शुभ नहीं माना जाता है.सप्तम भाव का शुक्र व्यक्ति को अधिक कामुक बनाता है जिससे विवाहेत्तर सम्बन्ध की संभावना प्रबल रहती है.विवाहेत्तर सम्बन्ध के कारण वैवाहिक जीवन में क्लेश के कारण गृहस्थ जीवन का सुख नष्ट होता है.बृहस्पति और शुक्र जब सप्तम भाव को देखते हैं अथवा सप्तमेश पर दृष्टि डालते हैं तो इस स्थिति में वैवाहिक जीवन सफल और सुखद होता है.लग्न में बृहस्पति अगर पापकर्तरी योग से पीड़ित होता है तो सप्तम भाव पर इसकी दृष्टि का शुभ प्रभाव नहीं होता है ऐसे में सप्तमेश कमज़ोर हो या शुक्र के साथ हो तो दाम्पत्य जीवन सुखद और सफल रहने की संभावना कम रहती है.
#🔯ज्योतिष #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅ #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #🔯वास्तु दोष उपाय #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨ सभी को सुंदर दिखाने का शौक होता है। हर कोई चाहता है लोग उनकी सुंदरता की तारीफ करें। यदि आप सुंदर है, आपके नाक-नक्ष आकर्षक हैं परंतु चेहरे पर कील-मुंहासे हैं तो हर बात बेकार हो जाती है। कील-मुंहासे चेहरों पर भद्दे दाग के समान होते हैं। सामान्यत: माना जाता है कि कील-मुंहासे खून की खराबी से होते हैं। साथ ही खान-पान की गड़बड़ी भी कील-मुंहासों को पैदा कर देती है। इस बात से परेशान होकर आप डॉक्टर के पास जाते हैं। दवाइयां आदि लेने के बाद भी यदि कील-मुंहासे ठीक नहीं हो रहे हैं तो हो सकता है किसी ग्रह दोष की वजह से आपको इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार त्वचा रोग के लिए बुध ग्रह, शनि, राहु, मंगल के अशुभ होने पर तथा सूर्य, चंद्र के कमजोर होने पर त्वचा रोग होते हैं। कुण्डली में षष्ठम यानि छठां भाव त्वचा से संबंधित होता है। यदि कुंडली में सप्तम स्थान पर केतु भी त्वचा रोग का कारण बन सकता हैै। बुध यदि बलवान है तो यह रोग पूरा असर नहीं दिखाता, वहीं बुध के कमजोर रहने पर निश्चित ही त्वचा रोग परेशान कर सकते हैं। त्वचा रोग और ग्रह - चंद्र के कारण पानी अथवा मवाद से भरी फुंसी व मुंहासे होती है। - मंगल के कारण रक्त विकार वाले कील-मुंहासे होते हैं। - राहु के प्रभाव से दर्द देने वाले कील-मुंहासे होते हैं। कील-मुंहासों को दूर करने के उपाय - यदि षष्ठम स्थान पर कोई अशुभ ग्रह है तो उसका उपचार कराएं। - सूर्य मंत्रों या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें। - शनिवार के दिन कुत्ते को तेल चुपड़ी रोटी खिलाएं। - सरस्वती स्तोत्र का पाठ करें। - पारद शिवलिंग का पूजन करें। - प्रतिदिन सूर्य को जल चढ़ाएं और 7 परिक्रमा करें।