एस्ट्रो मनोज कौशिक बहल यंत्र मंत्र तंत्र विशेषज्ञ
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अस्त ग्रहो का अपना एक विशेष महत्व होता है।अस्त ग्रहो का विचार किए बिना जातक के विषय में की गई भविष्यवाणिया गलत हो सकती है इसलिए अस्त ग्रहो की ओर ध्यान देना आवश्यक है।। अब बात करते ग्रह अस्त कैसे होता है? कोई भी ग्रह जब सूर्य से एक निश्चित दुरी के अंदर आ जाता है तो सूर्य के तेज से वह ग्रह अपना तेज और शक्ति खोने लगता है जिसके कारण वह सौर मंडल में दिखाई देना बंद हो जाता है ऐसे ग्रह को अस्त ग्रह कहते है।प्रत्येक ग्रह की सूर्य से यह समीपता अंशो में मापी जाती है इस मापदंड के अनुसार हर एक ग्रह सूर्य से निम्नलिखित दुरी के अंदर आ जाने से अस्त हो जाता है: चंद्रमा सूर्य के दोनों और 12 अंश या इससे अधिक समीप आने पर अस्त हो जाता है।बुध सूर्य के दोनों ओर 14 अंश या इससे अधिक समीप आने पर अस्त हो जाता है।लेकिन बुध अपनी सामान्य गति की बनिस्पत वक्र गति से चल रहे हो तो वह सूर्य के दोनों और 12 अंश या इससे अधिक समीप आने पर अस्त होता है।गुरु सूर्य के दोनों ओर 11 अंश या इससे अधिक समीप आने पर अस्त हो जाता है।शुक्र सूर्य के दोनों और 10 अंश या इससे अधिक समीप आने पर अस्त हो जाता है।बुध की तरह शुक्र भी यदि अपनी सामान्य गति की बनिस्पत वक्र गति से चल रहे हो तो वह सूर्य के दोनों ओर 8 अंश या इससे अधिक समीप आने पर अस्त हो जाते है।शनि सूर्य के दोनों ओर 15 अंश या इससे अधिक समीप आने पर अस्त हो जाता है।राहु-केतु छाया ग्रह होने के कारण कभी अस्त नही होते।हमेशा वक्री रहते है। किसी भी ग्रह के अस्त हो जाने से उसके प्रभाव में कमी आ जाती है तथा वह ग्रह कुंडली में ठीक तरह से कार्य करने में सक्षम नही रह जाता।किसी भी अस्त ग्रह की प्रभावहीनता का सही अनुमान लगाने के लिए उस ग्रह का कुंडली में स्थिति के कारण बल, सूर्य का उसी कुंडली में विशेष बल व अस्त ग्रह की सूर्य से दुरी देखना आवश्यक होता है।उसके बाद ही उस ग्रह की कार्य क्षमता के बारे में सही जानकारी प्राप्त होती है।उदाहरण के लिए, किसी कुंडली में गुरु सूर्य से 11 अंश दूर होने पर अस्त ही कहलाएंगे तथा 1 अंश दूर पर भी अस्त कहलाएंगे लेकिन पहली स्थिति में कुंडली में गुरु का बल दूसरी स्थिति के मुकाबले अधिक होगा क्योंकि जितना ही कोई ग्रह सूर्य के पास आ जाता है उतना ही उसका बल कम होता जाता है। अस्त ग्रहो के पूर्ण शुभ प्रभाव को प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त बल की आवश्यकता होती है और अस्त ग्रह का अध्ययन के बाद ही यह निर्णय किया जाता है कि उस अस्त ग्रह को अतिरिक्त बल कैसे प्रदान किया जा सकता है ये ज्योतिष ही आपको बताता है।यदि किसी कुंडली में कोई ग्रह अस्त होने के साथ साथ स्वभाव से शुभ फलदायी है तो उसे अतिरिक्त बल प्रदान करने का सबसे उचित उपाय है, उस ग्रह का रत्न धारण करना।रत्न का वजन अस्त ग्रह की प्रभावहीनता का सही आंकलन करने के बाद ही तय किया जाता है।इस तरह उस अस्त ग्रह को अतिरिक्त बल मिल जाता हाउ जिससे वह अपना कार्य सुचारू रूप से करने में सक्षम हो जाता है। लेकिन यदि किसी कुंडली में कोई ग्रह अस्त होने के साथ साथ अशुभ फलदायी है तो ऐसे ग्रह को उसके रत्न के द्वारा अतिरिक्त बल नही दिया जाता क्योंकि किसी ग्रह के अशुभ होने पर उसका रत्न धारण नही किया जाता, भले ही वह कितना भी बलहीन हो।बिना किसी ज्योतिष को दिखाए उपाय न करे।ऐसे स्थिति में किसी भी अस्त ग्रह को बल देने का सबसे प्रभावशाली उपाय उस ग्रह का मन्त्र जप होता है।परन्तु अपने आप अगर आप रतन धारण करते है तोह विपरीत परिणाम मिलते है।ऐसे स्थिति में उस ग्रह का निरन्तर जप करते रहने से या उस ग्रह के मन्त्र से जप पूजा करवाने से ग्रह को अतिरिक्त बल तो मिलता ही है, साथ ही साथ उसका अशुभ प्रभाव से शुभप्रभाव भी शुरू हो जाता है। नोट - अपना भुत-भविष्य जानने के लिए और सटीक उपायो के लिए सम्पर्क करे मगर ध्यान रहे ये सेवाएं सशुल्क और पेड़ कंसल्टिंग के तहत है , फ्री की उम्मीद ना करे #🔯ज्योतिष #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅ #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨ #🔯वास्तु दोष उपाय #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔
#📕लाल किताब उपाय🔯 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #✡️सितारों की चाल🌠 #🐍कालसर्प दोष परिहार #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी अस्त ग्रहो का अपना एक विशेष महत्व होता है।अस्त ग्रहो का विचार किए बिना जातक के विषय में की गई भविष्यवाणिया गलत हो सकती है इसलिए अस्त ग्रहो की ओर ध्यान देना आवश्यक है।। अब बात करते ग्रह अस्त कैसे होता है? कोई भी ग्रह जब सूर्य से एक निश्चित दुरी के अंदर आ जाता है तो सूर्य के तेज से वह ग्रह अपना तेज और शक्ति खोने लगता है जिसके कारण वह सौर मंडल में दिखाई देना बंद हो जाता है ऐसे ग्रह को अस्त ग्रह कहते है।प्रत्येक ग्रह की सूर्य से यह समीपता अंशो में मापी जाती है इस मापदंड के अनुसार हर एक ग्रह सूर्य से निम्नलिखित दुरी के अंदर आ जाने से अस्त हो जाता है: चंद्रमा सूर्य के दोनों और 12 अंश या इससे अधिक समीप आने पर अस्त हो जाता है।बुध सूर्य के दोनों ओर 14 अंश या इससे अधिक समीप आने पर अस्त हो जाता है।लेकिन बुध अपनी सामान्य गति की बनिस्पत वक्र गति से चल रहे हो तो वह सूर्य के दोनों और 12 अंश या इससे अधिक समीप आने पर अस्त होता है।गुरु सूर्य के दोनों ओर 11 अंश या इससे अधिक समीप आने पर अस्त हो जाता है।शुक्र सूर्य के दोनों और 10 अंश या इससे अधिक समीप आने पर अस्त हो जाता है।बुध की तरह शुक्र भी यदि अपनी सामान्य गति की बनिस्पत वक्र गति से चल रहे हो तो वह सूर्य के दोनों ओर 8 अंश या इससे अधिक समीप आने पर अस्त हो जाते है।शनि सूर्य के दोनों ओर 15 अंश या इससे अधिक समीप आने पर अस्त हो जाता है।राहु-केतु छाया ग्रह होने के कारण कभी अस्त नही होते।हमेशा वक्री रहते है। किसी भी ग्रह के अस्त हो जाने से उसके प्रभाव में कमी आ जाती है तथा वह ग्रह कुंडली में ठीक तरह से कार्य करने में सक्षम नही रह जाता।किसी भी अस्त ग्रह की प्रभावहीनता का सही अनुमान लगाने के लिए उस ग्रह का कुंडली में स्थिति के कारण बल, सूर्य का उसी कुंडली में विशेष बल व अस्त ग्रह की सूर्य से दुरी देखना आवश्यक होता है।उसके बाद ही उस ग्रह की कार्य क्षमता के बारे में सही जानकारी प्राप्त होती है।उदाहरण के लिए, किसी कुंडली में गुरु सूर्य से 11 अंश दूर होने पर अस्त ही कहलाएंगे तथा 1 अंश दूर पर भी अस्त कहलाएंगे लेकिन पहली स्थिति में कुंडली में गुरु का बल दूसरी स्थिति के मुकाबले अधिक होगा क्योंकि जितना ही कोई ग्रह सूर्य के पास आ जाता है उतना ही उसका बल कम होता जाता है। अस्त ग्रहो के पूर्ण शुभ प्रभाव को प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त बल की आवश्यकता होती है और अस्त ग्रह का अध्ययन के बाद ही यह निर्णय किया जाता है कि उस अस्त ग्रह को अतिरिक्त बल कैसे प्रदान किया जा सकता है ये ज्योतिष ही आपको बताता है।यदि किसी कुंडली में कोई ग्रह अस्त होने के साथ साथ स्वभाव से शुभ फलदायी है तो उसे अतिरिक्त बल प्रदान करने का सबसे उचित उपाय है, उस ग्रह का रत्न धारण करना।रत्न का वजन अस्त ग्रह की प्रभावहीनता का सही आंकलन करने के बाद ही तय किया जाता है।इस तरह उस अस्त ग्रह को अतिरिक्त बल मिल जाता हाउ जिससे वह अपना कार्य सुचारू रूप से करने में सक्षम हो जाता है। लेकिन यदि किसी कुंडली में कोई ग्रह अस्त होने के साथ साथ अशुभ फलदायी है तो ऐसे ग्रह को उसके रत्न के द्वारा अतिरिक्त बल नही दिया जाता क्योंकि किसी ग्रह के अशुभ होने पर उसका रत्न धारण नही किया जाता, भले ही वह कितना भी बलहीन हो।बिना किसी ज्योतिष को दिखाए उपाय न करे।ऐसे स्थिति में किसी भी अस्त ग्रह को बल देने का सबसे प्रभावशाली उपाय उस ग्रह का मन्त्र जप होता है।परन्तु अपने आप अगर आप रतन धारण करते है तोह विपरीत परिणाम मिलते है।ऐसे स्थिति में उस ग्रह का निरन्तर जप करते रहने से या उस ग्रह के मन्त्र से जप पूजा करवाने से ग्रह को अतिरिक्त बल तो मिलता ही है, साथ ही साथ उसका अशुभ प्रभाव से शुभप्रभाव भी शुरू हो जाता है। नोट - अपना भुत-भविष्य जानने के लिए और सटीक उपायो के लिए सम्पर्क करे मगर ध्यान रहे ये सेवाएं सशुल्क और पेड़ कंसल्टिंग के तहत है , फ्री की उम्मीद ना करे
दुनिया का प्रथम चमत्कारिक मंत्र... शास्त्रकारों ने गायत्री की सर्वोपरि शक्ति, स्थिति और उपयोगिता को एक स्वर से स्वीकार किया है। इस संदर्भ में पाए जाने वाले अगणित प्रमाणों में से कुछ नीचे प्रस्तुत हैं:- सर्वेषां जपसूक्तानां ऋचांश्च यजुषां तथा। साम्नां चौकक्षरादीनां गायत्री परमो जप:।। -वृहत् पाराशर स्मृति। अर्थ : समस्त जप सूत्रों में समस्त वेद मंत्रों में, एकाक्षर बीज मंत्रों में गायत्री ही सर्वश्रेष्ठ है। इति वेद पवित्राण्य भिहितानि एभ्य सावित्री विशिष्यते। -शंख स्मृति अर्थ : यों सभी वेद के मंत्र पवित्र हैं, पर इन सब में गायत्री मंत्र सर्वश्रेष्ठ है। सप्त कोटि महामंत्रा, गायत्री नायिका स्मृता। आदि देवा ह्मुपासन्ते गायत्री वेद मातरम्।। -कूर्म पुराण अर्थ : गायत्री सर्वोपरि सेनानायक के समान है। देवता इसी की उपासना करते हैं। यही चारों वेदों की माता है। तदित्पृचा समो नास्ति मंत्रों वेदचतुष्टये। सर्ववेदाश्च यज्ञाश्च दानानि च तपांसि च।। समानि कलपा प्राहुर्मुनयो न तदित्यृक्।। -याज्ञवल्क्य अर्थ : गायत्री के समान चारों वेदों में कोई मंत्र नहीं है। समस्त वेद, यज्ञ, दान, तप मिलकर भी एक कला के बराबर भी नहीं हो सकते, ऐसा ऋषियों ने कहा है- दुर्लभा सर्वमंत्रेषु गायत्री प्रणवान्विता। न गायत्र्यधिंक किचित् त्रयीषुपरिगीयते।। -हारीत अर्थ : इस संसार में गायत्री के समान परम समर्थ और दुर्लभ मंत्र कोई नहीं है। वेदों में गायत्री से श्रेष्ठ कुछ और नहीं है। नास्ति गंगा, समं तीर्थ, न देव: केशवात्पर:। गायत्र्यास्तु परं जाप्यं न भूतं न भविष्यति। -अत्रि ऋषि अर्थ : गंगा के समान कोई तीर्थ नहीं, केशव के समान कोई देवता नहीं और गायत्री से श्रेष्ठ कोई जप न कभी हुआ है और न कभी होगा। गायत्री सर्वमंत्रणां शिरोमणिस्तथा स्थिता। विद्यानामपि तेनैतां साधने सर्वसिद्धये।। त्रिव्याहृतियुतां देवीमोंकारयुगसम्पुटाम्।। उपास्यचतुरो वर्गान्साधयेद्यो न सोsन्धधी:।। देव्या द्विजत्वमासाद्य श्रेयसेsन्यरतास्तु ये। ते रत्नानिवां‍छन्ति हित्वा चिंतामणि करात्। -महा वार्तिक अर्थ : गायत्री सब मंत्रों तथा सब विद्याओं में शिरोमणि है। उससे इंद्रियों की साधना होती है। जो व्यक्ति इस उपासना के द्वारा धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष इन चारों पदार्थों को प्राप्त करने से चूकते हैं, वे मंदबुद्धि हैं। जो द्विज गायत्री मंत्र के होते हुए भी अन्य मंत्रों की साधना करते हैं वे ऐसे ही हतभागी हैं, जैसे कि चिंतामणि को फेंककर छोटे-छोटे चमकीले पत्थर ढूंढने वाले हैं। यथा कथं च जप्तैषा त्रिपदा परम पावनी। सर्वकामप्रदा प्रोक्ता विधिना किं पुनर्नृय।। अर्थ : हे राजन! जैसे-तैसे उपासना करने वाले की भी गायत्री माता कामना पूर्ण करती है, फिर विधिवत साधना करने के सत्परिणामों का तो कहना ही क्या? कामान्दुग्धे विप्रकर्षत्वलक्ष्मी, पुण्यं सुते दुष्कृतं च हिनस्ति। शुद्धां शान्तां मातरं मंगलाना, धेनुं धीरां गायत्रीमंत्रमाहु:।। -वशिष्ठ अर्थ : गायत्री कामधेनु के समान मनोकामनाओं को पूर्ण करती है, दुर्भाग्य, दरिद्रता आदि कष्टों को दूर करती है, पुण्य को बढ़ाती है, पाप का नाश करती है। ऐसी परम शुद्ध शांतिदायिनी, कल्याणकारिणी महाशक्ति को ऋषि लोग गायत्री कहते हैं। प्राचीनकाल में महर्षियों ने बड़ी-बड़ी तपस्याएं और योग-साधनाएं करके अणिमा-महिमा आदि ऋद्धि-सिद्धियां प्राप्त की थीं। इनकी चमत्कारी शक्तियों के वर्णन से इतिहास-पुराण भरे पड़े हैं। वह तपस्या थी ‍इसलिए महर्षियों ने प्रत्येक भारतीय के लिए गायत्री की नित्य उपासना करने का निर्देश दिया था। चत्वारिश्रंगा त्रयो अस्य पादा, द्वे शीर्षे सप्त हस्तासोsअस्य। त्रिधा बद्धो वृषभो रोरवीति, महादेवो मर्त्यां अविवेश।। -यजुर्वेद 17/19 अर्थात : चार सींग वाला, तीन पैर वाला, दो सिर वाला, सात हाथों वाला, तीन जगह बंधा हुआ, यह गायत्री महामंत्ररूपी वृषभ जब दहाड़ता है, तब महान देव बन जाता है और अपने सेवक का कल्याण करता है। चार सींग : चार वेद। तीन पैर : आठ-आठ अक्षरों के तीन चरण। दो सिर : ज्ञान और विज्ञान। सात हाथ : सात व्याहृतियां जिनके द्वारा सात विभूतियां मिलती हैं। तीन जगह बंधा हुआ : ज्ञान, कर्म, उपासना से। अंत में : जब यह वृषभ दहाड़ता है, तब देवत्व की दिव्य परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं जिसके सान्निध्य में रहकर सब कुछ पाया जा सकता है। देवी भागवत पुराण के अश्वपति उपाख्यान में अनुदान का वर्णन इस प्रकार आता है- तत: सावित्र्युपाख्यानं तन्मे व्याख्यातुमर्हसि। पुरा केन समुद्‍भूता सा श्रुता च श्रुते: प्रसू:।। केन वा पूजिता लोके प्रथमे कैश्च वा परे।। ब्राह्मणा वेदजननी प्रथमे पूजिवा मुने। द्वितीये च वेदगणैस्तत्पश्चाद्विदुषां गणै:।। तदा चाश्वपतिर्भूप: पूजयामास भारत। तत्पश्चात्पूजयामासुवर्णाश्‍चत्वार एव च।। -देवी भागवत (साव #🔯ज्योतिष #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅ #🔯वास्तु दोष उपाय #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨ #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔
#📕लाल किताब उपाय🔯 #✡️सितारों की चाल🌠 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🐍कालसर्प दोष परिहार #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी दुनिया का प्रथम चमत्कारिक मंत्र... शास्त्रकारों ने गायत्री की सर्वोपरि शक्ति, स्थिति और उपयोगिता को एक स्वर से स्वीकार किया है। इस संदर्भ में पाए जाने वाले अगणित प्रमाणों में से कुछ नीचे प्रस्तुत हैं:- सर्वेषां जपसूक्तानां ऋचांश्च यजुषां तथा। साम्नां चौकक्षरादीनां गायत्री परमो जप:।। -वृहत् पाराशर स्मृति। अर्थ : समस्त जप सूत्रों में समस्त वेद मंत्रों में, एकाक्षर बीज मंत्रों में गायत्री ही सर्वश्रेष्ठ है। इति वेद पवित्राण्य भिहितानि एभ्य सावित्री विशिष्यते। -शंख स्मृति अर्थ : यों सभी वेद के मंत्र पवित्र हैं, पर इन सब में गायत्री मंत्र सर्वश्रेष्ठ है। सप्त कोटि महामंत्रा, गायत्री नायिका स्मृता। आदि देवा ह्मुपासन्ते गायत्री वेद मातरम्।। -कूर्म पुराण अर्थ : गायत्री सर्वोपरि सेनानायक के समान है। देवता इसी की उपासना करते हैं। यही चारों वेदों की माता है। तदित्पृचा समो नास्ति मंत्रों वेदचतुष्टये। सर्ववेदाश्च यज्ञाश्च दानानि च तपांसि च।। समानि कलपा प्राहुर्मुनयो न तदित्यृक्।। -याज्ञवल्क्य अर्थ : गायत्री के समान चारों वेदों में कोई मंत्र नहीं है। समस्त वेद, यज्ञ, दान, तप मिलकर भी एक कला के बराबर भी नहीं हो सकते, ऐसा ऋषियों ने कहा है- दुर्लभा सर्वमंत्रेषु गायत्री प्रणवान्विता। न गायत्र्यधिंक किचित् त्रयीषुपरिगीयते।। -हारीत अर्थ : इस संसार में गायत्री के समान परम समर्थ और दुर्लभ मंत्र कोई नहीं है। वेदों में गायत्री से श्रेष्ठ कुछ और नहीं है। नास्ति गंगा, समं तीर्थ, न देव: केशवात्पर:। गायत्र्यास्तु परं जाप्यं न भूतं न भविष्यति। -अत्रि ऋषि अर्थ : गंगा के समान कोई तीर्थ नहीं, केशव के समान कोई देवता नहीं और गायत्री से श्रेष्ठ कोई जप न कभी हुआ है और न कभी होगा। गायत्री सर्वमंत्रणां शिरोमणिस्तथा स्थिता। विद्यानामपि तेनैतां साधने सर्वसिद्धये।। त्रिव्याहृतियुतां देवीमोंकारयुगसम्पुटाम्।। उपास्यचतुरो वर्गान्साधयेद्यो न सोsन्धधी:।। देव्या द्विजत्वमासाद्य श्रेयसेsन्यरतास्तु ये। ते रत्नानिवां‍छन्ति हित्वा चिंतामणि करात्। -महा वार्तिक अर्थ : गायत्री सब मंत्रों तथा सब विद्याओं में शिरोमणि है। उससे इंद्रियों की साधना होती है। जो व्यक्ति इस उपासना के द्वारा धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष इन चारों पदार्थों को प्राप्त करने से चूकते हैं, वे मंदबुद्धि हैं। जो द्विज गायत्री मंत्र के होते हुए भी अन्य मंत्रों की साधना करते हैं वे ऐसे ही हतभागी हैं, जैसे कि चिंतामणि को फेंककर छोटे-छोटे चमकीले पत्थर ढूंढने वाले हैं। यथा कथं च जप्तैषा त्रिपदा परम पावनी। सर्वकामप्रदा प्रोक्ता विधिना किं पुनर्नृय।। अर्थ : हे राजन! जैसे-तैसे उपासना करने वाले की भी गायत्री माता कामना पूर्ण करती है, फिर विधिवत साधना करने के सत्परिणामों का तो कहना ही क्या? कामान्दुग्धे विप्रकर्षत्वलक्ष्मी, पुण्यं सुते दुष्कृतं च हिनस्ति। शुद्धां शान्तां मातरं मंगलाना, धेनुं धीरां गायत्रीमंत्रमाहु:।। -वशिष्ठ अर्थ : गायत्री कामधेनु के समान मनोकामनाओं को पूर्ण करती है, दुर्भाग्य, दरिद्रता आदि कष्टों को दूर करती है, पुण्य को बढ़ाती है, पाप का नाश करती है। ऐसी परम शुद्ध शांतिदायिनी, कल्याणकारिणी महाशक्ति को ऋषि लोग गायत्री कहते हैं। प्राचीनकाल में महर्षियों ने बड़ी-बड़ी तपस्याएं और योग-साधनाएं करके अणिमा-महिमा आदि ऋद्धि-सिद्धियां प्राप्त की थीं। इनकी चमत्कारी शक्तियों के वर्णन से इतिहास-पुराण भरे पड़े हैं। वह तपस्या थी ‍इसलिए महर्षियों ने प्रत्येक भारतीय के लिए गायत्री की नित्य उपासना करने का निर्देश दिया था। चत्वारिश्रंगा त्रयो अस्य पादा, द्वे शीर्षे सप्त हस्तासोsअस्य। त्रिधा बद्धो वृषभो रोरवीति, महादेवो मर्त्यां अविवेश।। -यजुर्वेद 17/19 अर्थात : चार सींग वाला, तीन पैर वाला, दो सिर वाला, सात हाथों वाला, तीन जगह बंधा हुआ, यह गायत्री महामंत्ररूपी वृषभ जब दहाड़ता है, तब महान देव बन जाता है और अपने सेवक का कल्याण करता है। चार सींग : चार वेद। तीन पैर : आठ-आठ अक्षरों के तीन चरण। दो सिर : ज्ञान और विज्ञान। सात हाथ : सात व्याहृतियां जिनके द्वारा सात विभूतियां मिलती हैं। तीन जगह बंधा हुआ : ज्ञान, कर्म, उपासना से। अंत में : जब यह वृषभ दहाड़ता है, तब देवत्व की दिव्य परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं जिसके सान्निध्य में रहकर सब कुछ पाया जा सकता है। देवी भागवत पुराण के अश्वपति उपाख्यान में अनुदान का वर्णन इस प्रकार आता है- तत: सावित्र्युपाख्यानं तन्मे व्याख्यातुमर्हसि। पुरा केन समुद्‍भूता सा श्रुता च श्रुते: प्रसू:।। केन वा पूजिता लोके प्रथमे कैश्च वा परे।। ब्राह्मणा वेदजननी प्रथमे पूजिवा मुने। द्वितीये च वेदगणैस्तत्पश्चाद्विदुषां गणै:।। तदा चाश्वपतिर्भूप: पूजयामास भारत। तत्पश्चात्पूजयामासुवर्णाश्‍चत्वार एव च।। -देवी भागवत (साव
#🔯ज्योतिष #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅ #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨यदि कोई ग्रह आपकी जन्म कुंडली में अशुभ स्थान पर बैठकर प्रमोशन में बाधा बन रहा है तो आगे बताए गए उपाय करने से आपकी समस्या का समाधान हो सकता है। ये उपाय इस प्रकार हैं- 1- यदि शनि आपके प्रमोशन में बाधा उत्पन्न कर रहा है, तो एक बर्तन में तिल्ली का तेल लेकर उसमें अपनी परछाई देखकर दान कर दें। 2- यदि सूर्य के कारण बाधा हो तो प्रतिदिन पहली रोटी गाय को दें यदि गाय काली या पीली हो तो और भी शुभ रहता है। 3- चन्द्र के कारण बाधा हो शिवलिंग पर कच्चे दूध में गंगाजल मिलाकर अभिषेक करें। 4- मंगल के अशुभ प्रभाव के कारण बाधा हो तो घर की बुजुर्ग महिलाओं का सम्मान करें और चांदी की अंगूठी या कड़ा पहनें। 5- बुध ग्रह के कारण आपके प्रमोशन में बाधा उत्पन्न हो रही हो तो किसी को चांदी का आभूषण दान करें। 6- गुरु के प्रभाव के कारण तरक्की में बाधा उत्पन्न हो रही हो तो रोज गाय को गुड़-चने खिलाएं। 7- यदि शुक्र ग्रह के कारण प्रमोशन रुका हो तो माता-पिता व घर के अन्य बुजुर्ग लोगों की सेवा करें। माता के पैर छूकर ही घर से बाहर निकलें। 8- राहु के प्रभाव के कारण बाधा आ रही हो तो चींटियों को आटा डालें व आटे की गोलियां बनाकर मछलियों को खिलाएं। 9- केतु का अशुभ प्रभाव हो तो रोज काले कुत्ते को रोटी पर तेल लगाकर खिलाएं।........ #🔯वास्तु दोष उपाय #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔
#📕लाल किताब उपाय🔯 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #✡️सितारों की चाल🌠 #🐍कालसर्प दोष परिहार #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी यदि कोई ग्रह आपकी जन्म कुंडली में अशुभ स्थान पर बैठकर प्रमोशन में बाधा बन रहा है तो आगे बताए गए उपाय करने से आपकी समस्या का समाधान हो सकता है। ये उपाय इस प्रकार हैं- 1- यदि शनि आपके प्रमोशन में बाधा उत्पन्न कर रहा है, तो एक बर्तन में तिल्ली का तेल लेकर उसमें अपनी परछाई देखकर दान कर दें। 2- यदि सूर्य के कारण बाधा हो तो प्रतिदिन पहली रोटी गाय को दें यदि गाय काली या पीली हो तो और भी शुभ रहता है। 3- चन्द्र के कारण बाधा हो शिवलिंग पर कच्चे दूध में गंगाजल मिलाकर अभिषेक करें। 4- मंगल के अशुभ प्रभाव के कारण बाधा हो तो घर की बुजुर्ग महिलाओं का सम्मान करें और चांदी की अंगूठी या कड़ा पहनें। 5- बुध ग्रह के कारण आपके प्रमोशन में बाधा उत्पन्न हो रही हो तो किसी को चांदी का आभूषण दान करें। 6- गुरु के प्रभाव के कारण तरक्की में बाधा उत्पन्न हो रही हो तो रोज गाय को गुड़-चने खिलाएं। 7- यदि शुक्र ग्रह के कारण प्रमोशन रुका हो तो माता-पिता व घर के अन्य बुजुर्ग लोगों की सेवा करें। माता के पैर छूकर ही घर से बाहर निकलें। 8- राहु के प्रभाव के कारण बाधा आ रही हो तो चींटियों को आटा डालें व आटे की गोलियां बनाकर मछलियों को खिलाएं। 9- केतु का अशुभ प्रभाव हो तो रोज काले कुत्ते को रोटी पर तेल लगाकर खिलाएं।........
#🔯ज्योतिष #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅ #🔯वास्तु दोष उपाय #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨ #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 यहाँ से जानिये अपनी कुंडली में राहु की महादशा - अगर आप भी अपनी नौकरी व व्यवसाय में बाधा ,अचानक धन का अधिक खर्च होना या धन रूक-रूक कर प्राप्त होना,आदि समस्याओ के बारे में और अपनी महादशा के बारे में जानना चाहते है तो आज ही आप महाविद्या आश्रम राज योग पीठ ट्रस्ट से सम्पर्क कर सकते हैं . महादशा शब्द का अर्थ है वह विशेष समय जिसमें कोई ग्रह अपनी प्रबलतम अवस्था में होता है और कुंडली में अपनी स्थिति के अनुसार शुभ-अशुभ फल देता है। इन वर्षों में मुख्य ग्रहों की महादशा में अन्य ग्रहों को भी भ्रमण का समय दिया जाता है जिसे अन्तर्दशा कहा जाता है। आज हम बात करेंगे राहु की महादशा की अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में राहू की दशा या अंतरदशा चल रही हो तो उसे क्‍या समस्‍या आएगी। राहू की महादशा 18 साल की आती है। विश्‍लेषण के स्‍तर पर देखा जाए तो राहू की दशा के मुख्‍य रूप से तीन भाग होते हैं। ये लगभग छह छह साल के तीन भाग हैं। नवग्रहों में यह अकेला ही ऐसा ग्रह है जो सबसे कम समय में किसी व्यक्ति को करोड़पति, अरबपति या फिर कंगाल भी बना सकता है। इसकी शुभता जहां व्यक्ति को आध्यात्मिकता की ओर झुकाव पैदा करती है, वहीं अशुभ राहु व्यक्ति को आपराधिक कृत्यों के लिए प्रेरित करता है. परन्तु राहु कितना भी शुभ क्यों न हो ये तो पक्का है की कुछ तो अशुभ करेगा ही। राहु की महादशा में व्यक्ति की नौकरी व व्यवसाय में बाधा, मानसिक तनाव व अशांति, रात को नींद न आना, परीक्षाओं में असफलता प्राप्त होना, कार्य में मन न लगना, बेबुनियाद ख्यालों में उलझे रहना, अचानक धन का अधिक खर्च होना या धन रूक-रूक कर प्राप्त होना, बिना सोचे समझे कार्य करना, बनते कार्यो में रूकावट होनाा ये सब समस्यायें आती है और अगर राहु की महादशा राहु की अंतर्दशा चल रही हो तो इसका समय 2 वर्ष 8 माह और 12 दिन का होता है। इस अवधि में राहु से प्रभावित जातक को अपमान और बदनामी का सामना करना पड़ सकता है। विष और जल के कारण पीड़ा हो सकती है। विषाक्त भोजन, से स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। इसके अतिरिक्त अपच, सर्पदंश, परस्त्री या पर पुरुष गमन की आशंका भी इस अवधि में बनी रहती है। अशुभ राहु की इस अवधि में जातक के किसी प्रिय से वियोग, समाज में अपयश, निंदा आदि की संभावना भी रहती है। किसी दुष्ट व्यक्ति के कारण उस परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है। और अगर राहु की महादशा में शुक्र की प्रत्यंतर दशा चल रही हो तो यह पूरे तीन वर्ष चलती है। इस अवधि में शुभ स्थिति में दाम्पत्य जीवन में सुख मिलता है। वाहन और भूमि की प्राप्ति तथा भोग-विलास के योग बनते हैं। यदि शुक्र और राहु शुभ नहीं हों तो शीत संबंधित रोग, बदनामी और विरोध का सामना करना पड़ सकता है। हमारे यहा राहु की महादशा की एक स्पेशल रिपोर्ट बनायी जाती है जिसमे की आपको ये बताया जायेगा की आपकी कौन कौन सी महादशा चल रही है या आगे चलेगी और उन ग्रहों की दशाओं के परिणामस्वरुप आपके स्वास्थ्य, संबंध और आर्थिक स्थिति आदि पर पड़ने वाले प्रभाव।
#📕लाल किताब उपाय🔯 #✡️सितारों की चाल🌠 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🐍कालसर्प दोष परिहार #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी यहाँ से जानिये अपनी कुंडली में राहु की महादशा - अगर आप भी अपनी नौकरी व व्यवसाय में बाधा ,अचानक धन का अधिक खर्च होना या धन रूक-रूक कर प्राप्त होना,आदि समस्याओ के बारे में और अपनी महादशा के बारे में जानना चाहते है तो आज ही आप महाविद्या आश्रम राज योग पीठ ट्रस्ट से सम्पर्क कर सकते हैं . महादशा शब्द का अर्थ है वह विशेष समय जिसमें कोई ग्रह अपनी प्रबलतम अवस्था में होता है और कुंडली में अपनी स्थिति के अनुसार शुभ-अशुभ फल देता है। इन वर्षों में मुख्य ग्रहों की महादशा में अन्य ग्रहों को भी भ्रमण का समय दिया जाता है जिसे अन्तर्दशा कहा जाता है। आज हम बात करेंगे राहु की महादशा की अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में राहू की दशा या अंतरदशा चल रही हो तो उसे क्‍या समस्‍या आएगी। राहू की महादशा 18 साल की आती है। विश्‍लेषण के स्‍तर पर देखा जाए तो राहू की दशा के मुख्‍य रूप से तीन भाग होते हैं। ये लगभग छह छह साल के तीन भाग हैं। नवग्रहों में यह अकेला ही ऐसा ग्रह है जो सबसे कम समय में किसी व्यक्ति को करोड़पति, अरबपति या फिर कंगाल भी बना सकता है। इसकी शुभता जहां व्यक्ति को आध्यात्मिकता की ओर झुकाव पैदा करती है, वहीं अशुभ राहु व्यक्ति को आपराधिक कृत्यों के लिए प्रेरित करता है. परन्तु राहु कितना भी शुभ क्यों न हो ये तो पक्का है की कुछ तो अशुभ करेगा ही। राहु की महादशा में व्यक्ति की नौकरी व व्यवसाय में बाधा, मानसिक तनाव व अशांति, रात को नींद न आना, परीक्षाओं में असफलता प्राप्त होना, कार्य में मन न लगना, बेबुनियाद ख्यालों में उलझे रहना, अचानक धन का अधिक खर्च होना या धन रूक-रूक कर प्राप्त होना, बिना सोचे समझे कार्य करना, बनते कार्यो में रूकावट होनाा ये सब समस्यायें आती है और अगर राहु की महादशा राहु की अंतर्दशा चल रही हो तो इसका समय 2 वर्ष 8 माह और 12 दिन का होता है। इस अवधि में राहु से प्रभावित जातक को अपमान और बदनामी का सामना करना पड़ सकता है। विष और जल के कारण पीड़ा हो सकती है। विषाक्त भोजन, से स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। इसके अतिरिक्त अपच, सर्पदंश, परस्त्री या पर पुरुष गमन की आशंका भी इस अवधि में बनी रहती है। अशुभ राहु की इस अवधि में जातक के किसी प्रिय से वियोग, समाज में अपयश, निंदा आदि की संभावना भी रहती है। किसी दुष्ट व्यक्ति के कारण उस परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है। और अगर राहु की महादशा में शुक्र की प्रत्यंतर दशा चल रही हो तो यह पूरे तीन वर्ष चलती है। इस अवधि में शुभ स्थिति में दाम्पत्य जीवन में सुख मिलता है। वाहन और भूमि की प्राप्ति तथा भोग-विलास के योग बनते हैं। यदि शुक्र और राहु शुभ नहीं हों तो शीत संबंधित रोग, बदनामी और विरोध का सामना करना पड़ सकता है। हमारे यहा राहु की महादशा की एक स्पेशल रिपोर्ट बनायी जाती है जिसमे की आपको ये बताया जायेगा की आपकी कौन कौन सी महादशा चल रही है या आगे चलेगी और उन ग्रहों की दशाओं के परिणामस्वरुप आपके स्वास्थ्य, संबंध और आर्थिक स्थिति आदि पर पड़ने वाले प्रभाव।
#🔯ज्योतिष #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅ #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨. !! प्रॉपर्टी डीलिंग में मुनाफ़ा !! अगर आप एक प्रॉपर्टी डीलर है लेकिन आपको प्रॉपर्टी डीलिंग में वो फायदा नहीं हो रहा जो आप चाहते है। या आपको प्रॉपर्टी खरीदने या बेचने वाले ग्राहक ही नहीं मिल रहे है तो इसके कई कारण हो सकते है। जैसेकि हो सकता है कि आपके प्रतियोगी ने आपके ऑफिस पर हाय लगा दी हो, जिससे आपके ग्राहक आपके पास ना आकर उसके पास जा रहे हो, इसके अलावा हो सकता है कि जो प्रॉपर्टी आप बेचना चाहते हो उसमें कोई दोष है और इसीलिए कोई उसे नहीं खरीद रहा. ऐसे में जरूरी है कि आप कुछ उपाय अपनाकर इस हाय को दूर करें और फिर से प्रॉपर्टी डीलिंग में मुनाफ़ा कमायें और ऐसे कुछ उपाय जो आपकी इस काम में मदद कर सकते है वे खास उपाय है। प्रॉपर्टी में सोच समझ कर करें निवेश,, •• प्रॉपर्टी डीलिंग में फायदा कमाने के उपाय- •• पहला उपाय- अगर आपको लगता है कि किसी ने आपके ऑफिस पर हाय लगाई है जिसके कारण आपके ऑफिस में ग्राहक नहीं आ रहे तो आपको थोड़ी सी राई, थोडा सा नमक, आटा और 7 लाल सुखी मिर्च लेनी है. अब आप इन्हें एक लाल कपडे में बांधें और अपनी ऑफिस के मुख्य दरवाजें के ऊपर से 7 बार घुमाएं। अब आप इस सारी सामग्री में आग लगा दें। ये उपाय ना सिर्फ ऑफिस से हाय दूर करता है। बल्कि ग्राहकों को भी आपकी तरफ आकर्षित करता है. •• दूसरा- अगर आप किसी मकान को काफी समय से बेचने की कोशिश कर रहे है लेकिन उस मकान में किसी दोष होने के कारण वो बिक नहीं रही है। तो आप उस मकान की एक किल को निकाल लायें। और उसे लाल रंग के लिफ़ाफ़े में डालकर बहते पानी में प्रवाहित कर आयें. वहीं अगर आप जमीन को बेचने की कोशिश कर रहे है तो उसकी मिटटी को लाल लिफाफें में डालकर जल में प्रवाहित करें। इससे उस मकान या जमीन के सही वास्तु दोष दूर होते है और वो अच्छे दामों में जल्दी ही बिक जाती है। •• तीसरा उपाय- प्रॉपर्टी डीलिंग में अच्छे मुनाफे के लिए और किसी जमीन को अच्छे दाम में बेचने के लिए आपको रविवार के दिन 86 बादाम खरीदकर घर लाने है। अगले दिन से आप रोजाना 2 बादाम अपने साथ लेकर भगवान शिव के मंदिर जाएँ और शिवलिंग पर दोनों बादामों को अर्पित करके पूजा करें। घर वापस आते वक़्त आप 1 बादाम अपने साथ वापस ले आयें और उसे किसी डिब्बे में रखें। इस तरह आपको लगातार 43 दिनों तक करना है और 44वें दिन आप डिब्बे में इक्कठे किये हुए 43 बादाम लें और उन्हें बहते पानी में प्रवाहित कर आयें। आप इस बात को ध्यान रखें कि अगर आपका काम 43 दिनों से पहले ही पूरा हो जाता है तब भी आपको ये उपाय पुरे 43 दिनों तक ही अपनाना है और 44वें दिन इसे पूरा करना है। •• चौथा उपाय- जिस जमीन, ऑफिस, मकान या फ्लैट को आप बेचना चाहते है उसके कागजों को आप घर के पश्चिम उत्तर कोने में यानि के वायव्य कोण में रखें। और उनपर हल्दी का छींटा लगाएं। इससे आपका जल्द ही एक ऐसा ग्राहक मिलता है। जो उस सोदे को अच्छे दामों पर खरीदने के लिए तैयार हो जाता है। • अन्य खास उपाय- • अगर किसी प्रॉपर्टी डीलर की कोई जमीन, मकान,दूकान या फ्लैट नहीं बिक रहा है। या फंस गया है तो ऐसे में उन्हें रोजाना नियमित रूप से चांदी के गिलास में पानी पीना चाहियें. साथ ही आप अपने पर्स में चांदी के एक चकौर टुकड़े को भी रखें. • लेकिन अगर आपको किसी जमीन जायदाद के सोदे में घाटा हो रहा है या आपके मनचाहे दाम पर वो सोदा नहीं हो रहा है तो आप किसी जमादार को चायपत्ती भेंट करें. ऐसा करने से आपको प्रॉपर्टी के मनचाहे दाम मिलते है। • एक मान्यता के अनुसार हर प्रॉपर्टी डीलर को सफ़ेद टोपी पहननी चाहियें, इससे उन्हें संपत्ति के हर कार्य में सफलता और अच्छे दाम मिलते है। • इन सब उपायों को अपनाने के साथ साथ आप ये बात भी जरुर ध्यान रखें कि आप ये बात किसी को ना बताएं कि आप अपने प्रॉपर्टी डीलिंग के कारोबार को कैसे चला रहे हो और किसी जमीन या भवन को खरीदने या बेचें के लिए क्या क्या उपाय अपना रहे हो. इस बात को आप पाने कारोबार का एक अटूट नियम बना लें। ऐसा करने से आपको कभी भी प्रॉपर्टी डीलिंग के काम में नुक्सान नहीं होगा और आप लगातार मुनाफ़ा ही कमाते जायेंगे। प्रॉपर्टी डीलिंग में लाभ पाने के अन्य उपाय व तरीकों के बारे में अधिक जानने के लिए आप तुरंत फोन करके जानकारी हासिल कर सकते हो। समाधान शुल्क 351 मात्र । #🔯वास्तु दोष उपाय #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔
#📕लाल किताब उपाय🔯 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #✡️सितारों की चाल🌠 #🐍कालसर्प दोष परिहार #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी . !! प्रॉपर्टी डीलिंग में मुनाफ़ा !! अगर आप एक प्रॉपर्टी डीलर है लेकिन आपको प्रॉपर्टी डीलिंग में वो फायदा नहीं हो रहा जो आप चाहते है। या आपको प्रॉपर्टी खरीदने या बेचने वाले ग्राहक ही नहीं मिल रहे है तो इसके कई कारण हो सकते है। जैसेकि हो सकता है कि आपके प्रतियोगी ने आपके ऑफिस पर हाय लगा दी हो, जिससे आपके ग्राहक आपके पास ना आकर उसके पास जा रहे हो, इसके अलावा हो सकता है कि जो प्रॉपर्टी आप बेचना चाहते हो उसमें कोई दोष है और इसीलिए कोई उसे नहीं खरीद रहा. ऐसे में जरूरी है कि आप कुछ उपाय अपनाकर इस हाय को दूर करें और फिर से प्रॉपर्टी डीलिंग में मुनाफ़ा कमायें और ऐसे कुछ उपाय जो आपकी इस काम में मदद कर सकते है वे खास उपाय है। प्रॉपर्टी में सोच समझ कर करें निवेश,, •• प्रॉपर्टी डीलिंग में फायदा कमाने के उपाय- •• पहला उपाय- अगर आपको लगता है कि किसी ने आपके ऑफिस पर हाय लगाई है जिसके कारण आपके ऑफिस में ग्राहक नहीं आ रहे तो आपको थोड़ी सी राई, थोडा सा नमक, आटा और 7 लाल सुखी मिर्च लेनी है. अब आप इन्हें एक लाल कपडे में बांधें और अपनी ऑफिस के मुख्य दरवाजें के ऊपर से 7 बार घुमाएं। अब आप इस सारी सामग्री में आग लगा दें। ये उपाय ना सिर्फ ऑफिस से हाय दूर करता है। बल्कि ग्राहकों को भी आपकी तरफ आकर्षित करता है. •• दूसरा- अगर आप किसी मकान को काफी समय से बेचने की कोशिश कर रहे है लेकिन उस मकान में किसी दोष होने के कारण वो बिक नहीं रही है। तो आप उस मकान की एक किल को निकाल लायें। और उसे लाल रंग के लिफ़ाफ़े में डालकर बहते पानी में प्रवाहित कर आयें. वहीं अगर आप जमीन को बेचने की कोशिश कर रहे है तो उसकी मिटटी को लाल लिफाफें में डालकर जल में प्रवाहित करें। इससे उस मकान या जमीन के सही वास्तु दोष दूर होते है और वो अच्छे दामों में जल्दी ही बिक जाती है। •• तीसरा उपाय- प्रॉपर्टी डीलिंग में अच्छे मुनाफे के लिए और किसी जमीन को अच्छे दाम में बेचने के लिए आपको रविवार के दिन 86 बादाम खरीदकर घर लाने है। अगले दिन से आप रोजाना 2 बादाम अपने साथ लेकर भगवान शिव के मंदिर जाएँ और शिवलिंग पर दोनों बादामों को अर्पित करके पूजा करें। घर वापस आते वक़्त आप 1 बादाम अपने साथ वापस ले आयें और उसे किसी डिब्बे में रखें। इस तरह आपको लगातार 43 दिनों तक करना है और 44वें दिन आप डिब्बे में इक्कठे किये हुए 43 बादाम लें और उन्हें बहते पानी में प्रवाहित कर आयें। आप इस बात को ध्यान रखें कि अगर आपका काम 43 दिनों से पहले ही पूरा हो जाता है तब भी आपको ये उपाय पुरे 43 दिनों तक ही अपनाना है और 44वें दिन इसे पूरा करना है। •• चौथा उपाय- जिस जमीन, ऑफिस, मकान या फ्लैट को आप बेचना चाहते है उसके कागजों को आप घर के पश्चिम उत्तर कोने में यानि के वायव्य कोण में रखें। और उनपर हल्दी का छींटा लगाएं। इससे आपका जल्द ही एक ऐसा ग्राहक मिलता है। जो उस सोदे को अच्छे दामों पर खरीदने के लिए तैयार हो जाता है। • अन्य खास उपाय- • अगर किसी प्रॉपर्टी डीलर की कोई जमीन, मकान,दूकान या फ्लैट नहीं बिक रहा है। या फंस गया है तो ऐसे में उन्हें रोजाना नियमित रूप से चांदी के गिलास में पानी पीना चाहियें. साथ ही आप अपने पर्स में चांदी के एक चकौर टुकड़े को भी रखें. • लेकिन अगर आपको किसी जमीन जायदाद के सोदे में घाटा हो रहा है या आपके मनचाहे दाम पर वो सोदा नहीं हो रहा है तो आप किसी जमादार को चायपत्ती भेंट करें. ऐसा करने से आपको प्रॉपर्टी के मनचाहे दाम मिलते है। • एक मान्यता के अनुसार हर प्रॉपर्टी डीलर को सफ़ेद टोपी पहननी चाहियें, इससे उन्हें संपत्ति के हर कार्य में सफलता और अच्छे दाम मिलते है। • इन सब उपायों को अपनाने के साथ साथ आप ये बात भी जरुर ध्यान रखें कि आप ये बात किसी को ना बताएं कि आप अपने प्रॉपर्टी डीलिंग के कारोबार को कैसे चला रहे हो और किसी जमीन या भवन को खरीदने या बेचें के लिए क्या क्या उपाय अपना रहे हो. इस बात को आप पाने कारोबार का एक अटूट नियम बना लें। ऐसा करने से आपको कभी भी प्रॉपर्टी डीलिंग के काम में नुक्सान नहीं होगा और आप लगातार मुनाफ़ा ही कमाते जायेंगे। प्रॉपर्टी डीलिंग में लाभ पाने के अन्य उपाय व तरीकों के बारे में अधिक जानने के लिए आप तुरंत फोन करके जानकारी हासिल कर सकते हो। समाधान शुल्क 351 मात्र ।