एस्ट्रो मनोज कौशिक बहल यंत्र मंत्र तंत्र विशेषज्ञ
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#🔯ज्योतिष #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨[]◆वास्तु विचार◆[] ●जिस भी घर में प्रचूर मात्रा में काली चींटियां झुंड में आती हैं, वहां धन वर्षा होने लगती है। लेकिन अगर यह चींटियां काली ना होकर लाल हैं तो यह बड़े नुकसान के होने का संकेत है। ●अगर आपके घर में दीमक आ गई है या मधुमक्खी ने अपना छत्ता बना लिया है तो यह दर्शाता है कि गृहस्वामी को कोई असहनीय शारीरिक पीड़ा का सामना करना पड़ सकता है। ●अगर आपका घर बहुत पथरीली या टेढ़ी-मेढ़ी जमीन पर बना हुआ है तो यह इस बात का संकेत है कि घर में रहने वाले लोगों को हर समय किसी ना किसी परेशानी का सामना पड़ सकता है। ●अगर घर में अचानक से ही काले चूहों का आना-जाना शुरू हो जाए या उनकी संख्या में अचानक से वृद्धि हो तो यह आने वाली विपत्तियों की ओर इशारा करता है। ●भवन-निर्माण के लिए अगर आप किसी भूमि की खुदाई कर रहे हैं और वहां कोई मृत जीव, खासकर सर्प दिख जाए यह अशुभ है, तो मान लो बुरा समय आपके बहुत नजदीक है। ●अगर भूमि की खुदाई करते हुए राख या हड्डी जैसी वस्तुएं मिलती हैं तो यह पहचान है कि आपके ऊपर कोई अनजाना खतरा मंडरा रहा है। जिसके लिए आपको जल्द ही शांति पूजा करवा लेनी चाहिए। ●मित्रो,यदि घर की दक्षिण-पश्चिम नैऋत्य दिशा खुली हुई है तो यह समस्याओं को निमंत्रण देती है, इसलिए यह खास ध्यान रखें कि आपके घर की यह दिशा बंद हो या कम से कम इस ओर कोई द्वार ना खुलता हो, लाभ के लिये शुद्ध चांदी का तार/पत्ती दबाये, लाभ पाये, ●वहीं आपके घर का मुख्य द्वार भी बहुत ज्यादा बड़ा या खुला हुआ नहीं होना चाहिए। ऐसा होने पर घर के लोगों को कई दुखद हालातों का सामना करना पड़ सकता है। ●अगर घर के सामने कोई विशाल वृक्ष हो तो ऐसा होने से घर के लोग बहुत ईर्ष्यालु होते हैं। इतना ही नहीं वे अपने परिवार के लिए भी ईर्ष्या रखते हैं। ●अगर सामने कोई कुआं मौजूद है तो यह परिवार में किसी तरह का मानसिक विकार पैदा कर सकता है। फैक्ट्री फ्लेट या निजी घर के बीचों बीच अर्थात ब्रहम स्थल पर कोई भी वजनी चीज नहीं रखनी चाहिए, इससे घर के मुखिया को परेशानी होती ही है। वास्तु अपनाये, सदा लाभ ही लाभ पायें। #🔯वास्तु दोष उपाय #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅
#📕लाल किताब उपाय🔯 #✡️सितारों की चाल🌠 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🐍कालसर्प दोष परिहार #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी []◆वास्तु विचार◆[] ●जिस भी घर में प्रचूर मात्रा में काली चींटियां झुंड में आती हैं, वहां धन वर्षा होने लगती है। लेकिन अगर यह चींटियां काली ना होकर लाल हैं तो यह बड़े नुकसान के होने का संकेत है। ●अगर आपके घर में दीमक आ गई है या मधुमक्खी ने अपना छत्ता बना लिया है तो यह दर्शाता है कि गृहस्वामी को कोई असहनीय शारीरिक पीड़ा का सामना करना पड़ सकता है। ●अगर आपका घर बहुत पथरीली या टेढ़ी-मेढ़ी जमीन पर बना हुआ है तो यह इस बात का संकेत है कि घर में रहने वाले लोगों को हर समय किसी ना किसी परेशानी का सामना पड़ सकता है। ●अगर घर में अचानक से ही काले चूहों का आना-जाना शुरू हो जाए या उनकी संख्या में अचानक से वृद्धि हो तो यह आने वाली विपत्तियों की ओर इशारा करता है। ●भवन-निर्माण के लिए अगर आप किसी भूमि की खुदाई कर रहे हैं और वहां कोई मृत जीव, खासकर सर्प दिख जाए यह अशुभ है, तो मान लो बुरा समय आपके बहुत नजदीक है। ●अगर भूमि की खुदाई करते हुए राख या हड्डी जैसी वस्तुएं मिलती हैं तो यह पहचान है कि आपके ऊपर कोई अनजाना खतरा मंडरा रहा है। जिसके लिए आपको जल्द ही शांति पूजा करवा लेनी चाहिए। ●मित्रो,यदि घर की दक्षिण-पश्चिम नैऋत्य दिशा खुली हुई है तो यह समस्याओं को निमंत्रण देती है, इसलिए यह खास ध्यान रखें कि आपके घर की यह दिशा बंद हो या कम से कम इस ओर कोई द्वार ना खुलता हो, लाभ के लिये शुद्ध चांदी का तार/पत्ती दबाये, लाभ पाये, ●वहीं आपके घर का मुख्य द्वार भी बहुत ज्यादा बड़ा या खुला हुआ नहीं होना चाहिए। ऐसा होने पर घर के लोगों को कई दुखद हालातों का सामना करना पड़ सकता है। ●अगर घर के सामने कोई विशाल वृक्ष हो तो ऐसा होने से घर के लोग बहुत ईर्ष्यालु होते हैं। इतना ही नहीं वे अपने परिवार के लिए भी ईर्ष्या रखते हैं। ●अगर सामने कोई कुआं मौजूद है तो यह परिवार में किसी तरह का मानसिक विकार पैदा कर सकता है। फैक्ट्री फ्लेट या निजी घर के बीचों बीच अर्थात ब्रहम स्थल पर कोई भी वजनी चीज नहीं रखनी चाहिए, इससे घर के मुखिया को परेशानी होती ही है। वास्तु अपनाये, सदा लाभ ही लाभ पायें।
#🔯ज्योतिष #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #🔯वास्तु दोष उपायराहु केतु उदय अस्त से परे हैं। छाया ग्रह हैं न होते हुए भी इनकी वास्तविकता है इनका अपना कोई घर नहीं है यह किराए के घर में अथवा जबरदस्ती दुसरे के घर में रहते है और सदा उलटे चलते हैं इनका अपना कोई सवभाव नहीं है जिस राशि में रहते हैं उसी के स्वभाव को अपना लेते हैं राहु को शनि जैसा और केतु को मंगल जैसा फल देने वाला माना गया है इसलिये ज्योतिशिगण इन्हें"शनिवत् राहु कुज्वत् केतु"से शोभायमान करते हैं। राहु अन्धकार है तो केतु प्रकाश है निम्नतर विद्धा राहु है तो उच्चतर ज्ञान केतु है सिर के केश केतु है तो गुप्त स्थान के बाल राहु हैं भूमि पर पड़ती छाया राहु है तथा पानी अथवा दर्पण में दिखाई में दिखाई देने वाली छाया केतु है राहु संध्या है तो केतु भोर है राहु आत्माभिमान है तो केतु आत्मगौरव है राहु चौढाई है तो केतु लंबाई है सभी ग्रह जब इनके घेरे में आते हैं तो काल सर्प दोष/योग का निर्माण करते है राहु नीला आकाश है तो केतु पृथ्वी है कुंडली में यह दोनों आपस में कभी नहीं मिलते जिस तरह जमीं आसमाँ नहीं मिलते राहु जहाँ मानसिक रोग देता है वहीँ केतु विकलांगता देता है शनि देव न्यायाधीश हैं जबकि राहु केतु वकील है राहु शनि की अदालत में आप के बुरे कर्मों की फ़ाइल खोलता है जबकि केतु आप के अच्छे कर्मों की list शनि देव के आगे रखता है राहु व्यक्ति को एक दम बर्बाद/आबाद करता जबकि केतु यही काम धीरे धीरे करता है। #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨ #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅
#📕लाल किताब उपाय🔯 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #✡️सितारों की चाल🌠 #🐍कालसर्प दोष परिहार #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी राहु केतु उदय अस्त से परे हैं। छाया ग्रह हैं न होते हुए भी इनकी वास्तविकता है इनका अपना कोई घर नहीं है यह किराए के घर में अथवा जबरदस्ती दुसरे के घर में रहते है और सदा उलटे चलते हैं इनका अपना कोई सवभाव नहीं है जिस राशि में रहते हैं उसी के स्वभाव को अपना लेते हैं राहु को शनि जैसा और केतु को मंगल जैसा फल देने वाला माना गया है इसलिये ज्योतिशिगण इन्हें"शनिवत् राहु कुज्वत् केतु"से शोभायमान करते हैं। राहु अन्धकार है तो केतु प्रकाश है निम्नतर विद्धा राहु है तो उच्चतर ज्ञान केतु है सिर के केश केतु है तो गुप्त स्थान के बाल राहु हैं भूमि पर पड़ती छाया राहु है तथा पानी अथवा दर्पण में दिखाई में दिखाई देने वाली छाया केतु है राहु संध्या है तो केतु भोर है राहु आत्माभिमान है तो केतु आत्मगौरव है राहु चौढाई है तो केतु लंबाई है सभी ग्रह जब इनके घेरे में आते हैं तो काल सर्प दोष/योग का निर्माण करते है राहु नीला आकाश है तो केतु पृथ्वी है कुंडली में यह दोनों आपस में कभी नहीं मिलते जिस तरह जमीं आसमाँ नहीं मिलते राहु जहाँ मानसिक रोग देता है वहीँ केतु विकलांगता देता है शनि देव न्यायाधीश हैं जबकि राहु केतु वकील है राहु शनि की अदालत में आप के बुरे कर्मों की फ़ाइल खोलता है जबकि केतु आप के अच्छे कर्मों की list शनि देव के आगे रखता है राहु व्यक्ति को एक दम बर्बाद/आबाद करता जबकि केतु यही काम धीरे धीरे करता है।
#🔯ज्योतिष #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨राहु कूटनीति का राहु कूटनीति का सबसे बडा ग्रह है,राहु जहां बैठता है शरीर के ऊपरी भाग को अपनी गंदगी से भर देता है,यानी दिमाग को खराब करने में अपनी पूरी पूरी ताकत लगा देता है। दांतों के रोग देता है,शादी अगर किसी प्रकार से राहु की दशा अन्तर्दशा में कर दी जाती है,तो वह शादी किसी प्रकार से चल नही पाती है,अचानक कोई बीच वाला आकर उस शादी के प्रति दिमाग में फ़ितूर भर देता है,और शादी टूट जाती है,कोर्ट केश चलते है,जातिका या जातक को गृहस्थ सुख नही मिल पाते है।इस प्रकार से जातक के पूर्व कर्मो को उसी रूप से प्रायश्चित कराकर उसको शुद्ध कर देता है। #🔯वास्तु दोष उपाय #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅
#📕लाल किताब उपाय🔯 #✡️सितारों की चाल🌠 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🐍कालसर्प दोष परिहार #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी राहु कूटनीति का राहु कूटनीति का सबसे बडा ग्रह है,राहु जहां बैठता है शरीर के ऊपरी भाग को अपनी गंदगी से भर देता है,यानी दिमाग को खराब करने में अपनी पूरी पूरी ताकत लगा देता है। दांतों के रोग देता है,शादी अगर किसी प्रकार से राहु की दशा अन्तर्दशा में कर दी जाती है,तो वह शादी किसी प्रकार से चल नही पाती है,अचानक कोई बीच वाला आकर उस शादी के प्रति दिमाग में फ़ितूर भर देता है,और शादी टूट जाती है,कोर्ट केश चलते है,जातिका या जातक को गृहस्थ सुख नही मिल पाते है।इस प्रकार से जातक के पूर्व कर्मो को उसी रूप से प्रायश्चित कराकर उसको शुद्ध कर देता है।
#🔯ज्योतिष #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #🔯वास्तु दोष उपायगुरु-राहु की युति या इनका दृष्टि संबंध इंसान के विवेक को नष्ट कर देता है। यही कारण रावण के सर्वनाश का रहा। —-यदि राहु बहुत शक्तिशाली नहीं हुए परन्तु गुरू से युति है तो इससे कुछ हीन स्थिति नजर में आती है। इसमें अधीनस्थ अपने अधिकारी का मान नहीं करते। गुरू-शिष्य में विवाद मिलते हैं।शोध सामग्री की चोरी या उसके प्रयोग के उदाहरण मिलते हैं, धोखा-फरेब यहां खूब देखने को मिलेगा परन्तु राहु और गुरू युति में यदि गुरू बलवान हुए तो गुरू अत्यधिक समर्थ सिद्ध होते हैं और शिष्यों को मार्गदर्शन देकर उनसे बहुत बडे़ कार्य या शोध करवाने में समर्थ हो जाते हैं। शिष्य भी यदि कोई ऎसा अनुसंधान करते हैं जिनके अन्तर्गत गुरू के द्वारा दिये गये सिद्धान्तों में ही शोधन सम्भव हो जाए तो वे गुरू की आज्ञा लेते हैं या गुरू के आशीर्वाद से ऎसा करते हैं। यह सर्वश्रेष्ठ स्थिति हैऔर मेरा मानना है कि ऎसी स्थिति में उसे गुरू चाण्डाल योग नहीं कहा जाना चाहिए बल्कि किसी अन्य योग का नाम दिया जा सकता है परन्तु उस सीमा रेखा को पहचानना बहुत कठिन कार्य है जब गुरू चाण्डाल योग में राहु का प्रभाव कम हो जाता है और गुरू का प्रभाव बढ़ने लगता है। राहु अत्यन्त शक्तिशाली हैं और इनका नैसर्गिक बल सर्वाधिक है तथा बहुत कम प्रतिशत में गुरू का प्रभाव राहु के प्रभाव को कम कर पाता है। इस योग का सर्वाधिक असर उन मामलों में देखा जा सकता है जब दो अन्य भावों में बैठे हुए राहु और गुरू एक दूसरे पर प्रभाव डालते हैं। अशुभता का नियंत्रण-गुरु चांडाल योग के जातक के जीवन पर जो भी दुष्प्रभाव पड़ रहा हो उसे नियंत्रित करने के लिए जातक को भगवान शिव की आराधना और गुरु-राहु से संबंधित वस्तुओं का दान करना चाहिए। #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨ #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅
#📕लाल किताब उपाय🔯 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #✡️सितारों की चाल🌠 #🐍कालसर्प दोष परिहार #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी गुरु-राहु की युति या इनका दृष्टि संबंध इंसान के विवेक को नष्ट कर देता है। यही कारण रावण के सर्वनाश का रहा। —-यदि राहु बहुत शक्तिशाली नहीं हुए परन्तु गुरू से युति है तो इससे कुछ हीन स्थिति नजर में आती है। इसमें अधीनस्थ अपने अधिकारी का मान नहीं करते। गुरू-शिष्य में विवाद मिलते हैं।शोध सामग्री की चोरी या उसके प्रयोग के उदाहरण मिलते हैं, धोखा-फरेब यहां खूब देखने को मिलेगा परन्तु राहु और गुरू युति में यदि गुरू बलवान हुए तो गुरू अत्यधिक समर्थ सिद्ध होते हैं और शिष्यों को मार्गदर्शन देकर उनसे बहुत बडे़ कार्य या शोध करवाने में समर्थ हो जाते हैं। शिष्य भी यदि कोई ऎसा अनुसंधान करते हैं जिनके अन्तर्गत गुरू के द्वारा दिये गये सिद्धान्तों में ही शोधन सम्भव हो जाए तो वे गुरू की आज्ञा लेते हैं या गुरू के आशीर्वाद से ऎसा करते हैं। यह सर्वश्रेष्ठ स्थिति हैऔर मेरा मानना है कि ऎसी स्थिति में उसे गुरू चाण्डाल योग नहीं कहा जाना चाहिए बल्कि किसी अन्य योग का नाम दिया जा सकता है परन्तु उस सीमा रेखा को पहचानना बहुत कठिन कार्य है जब गुरू चाण्डाल योग में राहु का प्रभाव कम हो जाता है और गुरू का प्रभाव बढ़ने लगता है। राहु अत्यन्त शक्तिशाली हैं और इनका नैसर्गिक बल सर्वाधिक है तथा बहुत कम प्रतिशत में गुरू का प्रभाव राहु के प्रभाव को कम कर पाता है। इस योग का सर्वाधिक असर उन मामलों में देखा जा सकता है जब दो अन्य भावों में बैठे हुए राहु और गुरू एक दूसरे पर प्रभाव डालते हैं। अशुभता का नियंत्रण-गुरु चांडाल योग के जातक के जीवन पर जो भी दुष्प्रभाव पड़ रहा हो उसे नियंत्रित करने के लिए जातक को भगवान शिव की आराधना और गुरु-राहु से संबंधित वस्तुओं का दान करना चाहिए।
#🔯ज्योतिष #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨जन्म कुंडली में यदि उच्च के सूर्य की दशा चल रही हो तब व्यक्ति के विदेश जाने के योग बनते हैं. यदि उच्च के चंद्रमा या उच्च के ही मंगल की भी दशा चल रही हो तब भी व्यक्ति विदेश यात्रा करता है. उच्च के बृहस्पति की दशा में भी व्यक्ति की विदेश यात्रा होती है. यदि मंगल बली होकर लग्न में स्थित है या सूर्य से संबंधित है तब मंगल की दशा में भी विदेश यात्रा होने की संभावना बनती है. कुंडली में यदि नीच के बुध की दशा चल रही है तब भी विदेश यात्रा हो सकती है. बृहस्पति की दशा चल रही हो और वह सातवें या बारहवें भाव में चर राशि में स्थित हो. शुक्र की दशा चल रही हो और वह एक पाप ग्रह के साथ सप्तम भाव में स्थित हो. शनि की दशा चल रही हो और शनि बारहवें भाव में या उच्च नवांश में स्थित हो. राहु की दशा कुंडली में चल रही हो और राहु कुंडली में तीसरे, सातवें, नवम या दशम भाव में स्थित हो. जन्म कुंडली में सूर्य की महादशा में केतु की अन्तर्दशा चल रही हो तब भी विदेश जाने की संभावना बनती है. यदि केतु की महादशा में सूर्य की अन्तर्दशा चल रही हो और कुंडली में सूर्य, केतु से छठे, आठवें या बारहवें भाव में स्थित हो. केतु की महादशा में चंद्रमा की अन्तर्दशा चल रही हो और केतु से चंद्रमा केन्द्र/त्रिकोण या ग्यारहवें भाव में स्थित हो. कुंडली में शुक्र की महादशा में बृहस्पति की अन्तर्दशा चल रही हो तब भी विदेश यात्रा की संभावना बनती है. कुंडली में राहु की महादशा में सूर्य की अन्तर्दशा चल रही हो और राहु से सूर्य केन्द्र/त्रिकोण या ग्यारहवें भाव का स्वामी हो. शनि की महादशा में बृहस्पति की अन्तर्दशा चल रही हो और शनि से बृहस्पति केन्द्र/त्रिकोण या दूसरे या ग्यारहवें भाव का स्वामी हो. बुध की महादशा में शनि की अन्तर्दशा चल रही हो और बुध से शनि छठे, आठवें, या बारहवें भाव में स्थित हो. तो विदेश जाने के योग बनते हैं। #🔯वास्तु दोष उपाय #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅
#📕लाल किताब उपाय🔯 #✡️सितारों की चाल🌠 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🐍कालसर्प दोष परिहार #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी जन्म कुंडली में यदि उच्च के सूर्य की दशा चल रही हो तब व्यक्ति के विदेश जाने के योग बनते हैं. यदि उच्च के चंद्रमा या उच्च के ही मंगल की भी दशा चल रही हो तब भी व्यक्ति विदेश यात्रा करता है. उच्च के बृहस्पति की दशा में भी व्यक्ति की विदेश यात्रा होती है. यदि मंगल बली होकर लग्न में स्थित है या सूर्य से संबंधित है तब मंगल की दशा में भी विदेश यात्रा होने की संभावना बनती है. कुंडली में यदि नीच के बुध की दशा चल रही है तब भी विदेश यात्रा हो सकती है. बृहस्पति की दशा चल रही हो और वह सातवें या बारहवें भाव में चर राशि में स्थित हो. शुक्र की दशा चल रही हो और वह एक पाप ग्रह के साथ सप्तम भाव में स्थित हो. शनि की दशा चल रही हो और शनि बारहवें भाव में या उच्च नवांश में स्थित हो. राहु की दशा कुंडली में चल रही हो और राहु कुंडली में तीसरे, सातवें, नवम या दशम भाव में स्थित हो. जन्म कुंडली में सूर्य की महादशा में केतु की अन्तर्दशा चल रही हो तब भी विदेश जाने की संभावना बनती है. यदि केतु की महादशा में सूर्य की अन्तर्दशा चल रही हो और कुंडली में सूर्य, केतु से छठे, आठवें या बारहवें भाव में स्थित हो. केतु की महादशा में चंद्रमा की अन्तर्दशा चल रही हो और केतु से चंद्रमा केन्द्र/त्रिकोण या ग्यारहवें भाव में स्थित हो. कुंडली में शुक्र की महादशा में बृहस्पति की अन्तर्दशा चल रही हो तब भी विदेश यात्रा की संभावना बनती है. कुंडली में राहु की महादशा में सूर्य की अन्तर्दशा चल रही हो और राहु से सूर्य केन्द्र/त्रिकोण या ग्यारहवें भाव का स्वामी हो. शनि की महादशा में बृहस्पति की अन्तर्दशा चल रही हो और शनि से बृहस्पति केन्द्र/त्रिकोण या दूसरे या ग्यारहवें भाव का स्वामी हो. बुध की महादशा में शनि की अन्तर्दशा चल रही हो और बुध से शनि छठे, आठवें, या बारहवें भाव में स्थित हो. तो विदेश जाने के योग बनते हैं।