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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - सबदो त गावहु हरी केरा मनि जिनी अनंदु  होआ सतिगुरू वसाइआ ।।कहै नानकु मै पाइआ।। गुरु साहिब स्पष्ट करते हैं कि यह अर्थः गुरु साहिब उस परम सुख और मै तेरा अवस्था तभी प्राप्त हुई जब सच्चे अनंद' की व्याख्या कर रहे हैं, जो मार्गदर्शक की प्राप्ति हुई। गुरु के बिना किसी बाहरी वस्तु से नहीं, बल्कि गुरु भिखारी मन भटकता रहता है॰ लेकिन गुरु का और 'शब्द' से प्राप्त होता বী कृपा शब्द मिलते ही भीतर का अंधकार मिट अर्थ केवल अक्षरों से forat यहा शब्द का जाता है और आनंद का झरना फूट नहीं, बल्कि उस ईश्वरीय कंपन से है जो पड़ता है। १t८एकओंकार वह शब्द पहाडा सृष्टि के मूल में है। है जब यह शब्द मन में टिक जाता परमात्मा को केवल जुबान से गाना वाले तो इंसान का स्वभाव ही बदल जाता काफी नहीं है। जब परमात्मा को हृदय है। वह हर हाल में शांत और प्रसन्न से ईश्वरीय धुन से उसको जुड़ जाता रहने लगता है। गुरु वह माध्यम है जो बाबा तभी असली गावन' होता है। यह वह हमें उस शब्द से जोड़ता है। गुरु की जी आनंद' है जो दुनिया के सुख दुख शिक्षाएं हमें सिखाती हैं कि कैसे दुनिया परे है। यह मानसिक शांति और के शोर के बीच भी अपने भीतर के जहाँ आत्मिक तृप्ति की वह अवस्था अनंद' को खोजा जाए। कोई विचलित नहीं होता। सबदो त गावहु हरी केरा मनि जिनी अनंदु  होआ सतिगुरू वसाइआ ।।कहै नानकु मै पाइआ।। गुरु साहिब स्पष्ट करते हैं कि यह अर्थः गुरु साहिब उस परम सुख और मै तेरा अवस्था तभी प्राप्त हुई जब सच्चे अनंद' की व्याख्या कर रहे हैं, जो मार्गदर्शक की प्राप्ति हुई। गुरु के बिना किसी बाहरी वस्तु से नहीं, बल्कि गुरु भिखारी मन भटकता रहता है॰ लेकिन गुरु का और 'शब्द' से प्राप्त होता বী कृपा शब्द मिलते ही भीतर का अंधकार मिट अर्थ केवल अक्षरों से forat यहा शब्द का जाता है और आनंद का झरना फूट नहीं, बल्कि उस ईश्वरीय कंपन से है जो पड़ता है। १t८एकओंकार वह शब्द पहाडा सृष्टि के मूल में है। है जब यह शब्द मन में टिक जाता परमात्मा को केवल जुबान से गाना वाले तो इंसान का स्वभाव ही बदल जाता काफी नहीं है। जब परमात्मा को हृदय है। वह हर हाल में शांत और प्रसन्न से ईश्वरीय धुन से उसको जुड़ जाता रहने लगता है। गुरु वह माध्यम है जो बाबा तभी असली गावन' होता है। यह वह हमें उस शब्द से जोड़ता है। गुरु की जी आनंद' है जो दुनिया के सुख दुख शिक्षाएं हमें सिखाती हैं कि कैसे दुनिया परे है। यह मानसिक शांति और के शोर के बीच भी अपने भीतर के जहाँ आत्मिक तृप्ति की वह अवस्था अनंद' को खोजा जाए। कोई विचलित नहीं होता। - ShareChat